NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत : जनउभार और राजनैतिक हस्तक्षेप की दिशा में किसान आंदोलन की लम्बी छलांग
किसान आंदोलन देश में नीतिगत बदलाव की लड़ाई के लिए एक बड़ी राष्ट्रीय संस्था बनने की ओर बढ़ रहा है।
लाल बहादुर सिंह
04 Sep 2021
किसान महापंचायत के लिए एकजुटता। 5 सितंबर की महापंचायत के लिए किसान-मज़दूर पिछले काफी दिनों से लगातार छोटी-छोटी पंचायतें कर रहे हैं। मुज़फ़्फ़रनगर के सरनावली गांव में 23 अगस्त को हुई पंचायत का दृश्य। 
किसान महापंचायत के लिए एकजुटता। 5 सितंबर की महापंचायत के लिए किसान-मज़दूर पिछले काफी दिनों से लगातार छोटी-छोटी पंचायतें कर रहे हैं। मुज़फ़्फ़रनगर के सरनावली गांव में 23 अगस्त को हुई पंचायत का दृश्य। 

रविवार, 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले ऐतिहासिक महापंचायत होने जा रही है। संयुक्त किसान मोर्चा ने इसके बारे में दावा किया है कि,  "मुजफ्फरनगर में, दुनिया के अब तक के सबसे बड़े किसानों के जमावड़े के आयोजन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। 5 सितंबर को शहर के जीआईसी ग्राउंड में आयोजित की जा रही किसान महापंचायत में लाखों किसानों के शामिल होने की उम्मीद है, जहां से संयुक्त किसान मोर्चा के मिशन उत्तर प्रदेश की शुरुआत होगी।"

मुज़फ़्फ़रनगर का जीआईसी मैदान किसान महापंचायत के लिए तैयार है।

वैसे तो किसानों की सारी ही पंचायतें और रैलियों में भारी भीड़ हो रही है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह रैली पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी। इस रैली की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह कोई स्थानीय या एक प्रदेश की रैली नहीं रह गयी है, बल्कि पूरे देश के किसानों का महाकुंभ बन गयी है। यहां से देश के अलग अलग राज्यों और उत्तर प्रदेश के विभिन्न अंचलों की ओर लौटने वाले किसान जो सन्देश और ऊर्जा लेकर वापस लौटेंगे, वह आंदोलन की लहर को पूरे देश, विशेषकर यूपी के गांव-गांव तक फैला देगी।

किसान नेताओं ने इस महारैली के सामाजिक-राजनैतिक महत्व की शिनाख्त बिल्कुल सही की है। इसी मुजफ्फरनगर में 2013 में प्रायोजित दंगों ने समाज को बांटने का काम किया था, और उसी साम्प्रदयिक विभाजन की लहर पर सवार होकर मोदी का अश्वमेध का घोड़ा पूरे उत्तर भारत में सरपट दौड़ा था और मोदी 2014 में दिल्ली की कुर्सी तक पहुंचने में कामयाब हुए थे तथा उसी आवेग में 2017, यूपी में प्रचण्ड बहुमत (325/406) से भाजपा सत्ता में आई और ध्रुवीकरण की उस राजनीति के पोस्टर-ब्वाय योगी का राज्यारोहण हुआ था।

आज इतिहास का चक्र 180 डिग्री घूम गया है, उसी मुजफ्फरनगर से हिन्दू-मुस्लिम-सिख भाईचारे की मिसाल कायम करता किसान एकता का कारवां एक सैलाब की तरह आगे बढ़ रहा है।

किसानों के आक्रोश का यह सैलाब न सिर्फ 22 में योगी और 24 में मोदी को बहा कर ले जाएगा, बल्कि नफरत और विभाजन की सियासत को ज़मींदोज़ करने का काम करेगा।

यह रैली साफ इशारा कर रही है कि देश किसानों के एक अभूतपूर्व उभार के मुहाने पर खड़ा है, यह न सिर्फ इस सरकार वरन भविष्य में आने वाली किसी भी सरकार के लिए कृषि क्षेत्र में नवउदारवादी नीतियों के क्रियान्वयन और बड़ी पूँजी के प्रवेश को असम्भव बना देगा और वैकल्पिक नीतियों के लिए राष्ट्रीय जनान्दोलन का प्रस्थान बिंदु बनेगा।

उत्तर प्रदेश तेजी से किसान आंदोलन के नक्शे पर केन्द्रीय मुकाम हासिल करता जा रहा है। नेतृत्व का मुख्य फोकस अब मिशन UP की कामयाबी है। ऐसा लगता है चुनाव तक अब UP ही आंदोलन की मुख्य रणभूमि बनेगा। मुजफ्फरनगर में तो ऐतिहासिक रैली होने ही जा रही है, लखनऊ में भी हलचल बढ़ती जा रही है। शुक्रवार, 3 सितंबर को किला चौराहा, बंगला बाजार में हजारों आंदोलनकारी किसानों ने डेरा डाल दिया है और उन्होंने योगी को चुनौती दिया है कि "आओ हमारा बक्कल उतारो"।

उधर, मुजफ्फरनगर महारैली से मिशन UP का सन्देश लेकर आंदोलन के शीर्ष नेता डॉ0 दर्शन पाल 9 सितंबर को लखनऊ आ रहे हैं जहाँ वे किसान संगठनों व नेताओं से गहन विचार विमर्श कर आंदोलन को प्रदेश के  मध्य व पूर्वी अंचल में फैलाने की रणनीति बनाएंगे तथा मोर्चे की प्रदेश इकाई के सांगठनिक ढांचे के निर्माण में मदद करेंगे। इसके पूर्व 23 अगस्त को आंदोलन के समर्थक सुप्रसिद्ध पत्रकार पी साईनाथ तथा मोर्चे के केंद्रीय नेता अक्षय भाई ने लखनऊ में नागरिक समाज को सम्बोधित किया।

साझा लड़ाई लड़ रहे किसान और नौजवान आंदोलन की एकता की नई सम्भावनायें आकार ले रही हैं। उत्तर प्रदेश में छात्रों युवाओं के बीच रोजगार, शिक्षा, लोकतंत्र के लिए हलचल लगातार तेज हो रही है। इसी सप्ताह लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र नेताओं की गिरफ्तारी हुई, इलाहाबाद और फैजाबाद में प्रतियोगी छात्रों के जुझारू प्रदर्शन हुए, पुलिस से नोंकझोंक हुई। रोजगार अधिकार सम्मेलनों, संवाद, आंदोलनों का कारवां बढ़ता जा रहा है। लगातार दमन और उपेक्षा झेलते हुए शिक्षक भर्ती आरक्षण घोटाले को लेकर प्रतियोगी युवक-युवतियों का आंदोलन 3 महीने से जारी है, लखनऊ के इको गॉर्डन में जमे इन आंदोलनकारियों ने 5 सितंबर तक अपनी मांग मानने के लिए सरकार को अल्टिमेटम दिया है, वरना 6 सितंबर को बड़े जमावड़े के साथ वे विधानसभा घेराव के लिए कूच कर सकते हैं।

उत्तर प्रदेश छात्र-युवा आंदोलन के नए चरण की ओर बढ़ रहा है। किसानों के बेटे छात्र-युवा किसान आंदोलन के समर्थन में पहले से ही हैं, पिछले दिनों योगी सरकार के दमनात्मक रुख का मुकाबला करते हुए लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों ने राकेश टिकैत को अपना समर्थन पत्र सौंपा था। किसान नेता भी छात्र-युवा आंदोलन के साथ एकता की सम्भावनाओं को लेकर गम्भीर हैं।

इसी बीच युवाओं ने प्रधानमंत्री के जन्मदिन 17 सितंबर को ' जुमला दिवस " के रूप में मनाने का एलान किया है। पिछले साल इसी अवसर पर उनका  #NationalUnemploymentDay और #राष्ट्रीयबेरोजगारीदिवस पूरे दिन सोशल मीडिया पर टॉप ट्रेंड करता रहा था और 46 लाख बार शेयर किया गया था। मोदी के जन्मदिन के शुभकामना सन्देशों को बहुत पीछे छोड़ते हुए ट्विटर स्टॉर्म #17Sept17hrs17minutes पूरे दिन छाया रहा था। इस बार तो बेरोजगारी की तबाही कई गुना बढ़ चुकी है और  युवाओं से मोदी-योगी की वायदा-खिलाफी नए मुकाम पर पहुंच गई है। ऊपर से अपार राष्ट्रीय सम्पदा की नीलामी का मुद्दा भी जुड़ गया है, जिसका सीधा परिणाम छंटनी और रोजगार के अवसरों का खात्मा होगा।

रोजगार के लिए तेज होता छात्र-युवा आंदोलन, किसान-आंदोलन के साथ मिलकर मोदी-योगी सरकार की ‘मौत की घण्टी’ बजा देगा!

संयुक्त किसान मोर्चा ने 25 सितंबर को एक साल में तीसरे भारत बंद का आह्वान किया है। पहला भारत बंद उन्होंने पिछले साल 25 सितंबर को 3 कृषि कानूनों के संसद से पारित होने के बाद किया था और फिर अगला 8 दिसम्बर को दिल्ली मोर्चे पर जमने के बाद। इस बार महंगाई, बेरोजगारी, कोविड, अर्थव्यवस्था की तबाही भी आग में घी का काम कर रहे हैं। इसलिए भारत बंद के लिए तमाम श्रमिक संगठनों, छात्र-युवा आंदोलनों, जनता के अन्य तबकों की ओर से स्वतःस्फूर्त समर्थन आने शुरू हो गए हैं। जाहिर है अबकी भारत बंद अभूतपूर्व होगा। इस बंद से ही हमारे लोकतंत्र के बंद रास्ते खुलेंगे।

मोदी और योगी की लुढ़कती लोकप्रियता के बीच एक साल के भीतर यह तीसरा भारत बंद और मुजफ्फरनगर का किसान महाकुंभ यह साफ संकेत है कि देश एक युगान्तकारी बदलाव के मुहाने पर खड़ा है, किसानों का यह विराट उभार न सिर्फ इस सरकार वरन भविष्य में आने वाली किसी भी सरकार के लिए कृषि क्षेत्र में नवउदारवादी नीतियों के क्रियान्वयन और बड़ी पूँजी के प्रवेश को असम्भव बना देगा और वैकल्पिक नीतियों के आधार पर राष्ट्रीय पुनर्निर्माण तथा पुनर्जीवन के जनान्दोलन का प्रस्थान बिंदु बनेगा।

(लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

farmers protest
New Farm Laws
kisan andolan
muzaffarnagar
Muzaffarnagar Mahapanchayat
5th September
rakesh tikait
Samyukt Kisan Morcha
All India Kisan Union

Related Stories

राम सेना और बजरंग दल को आतंकी संगठन घोषित करने की किसान संगठनों की मांग

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

यूपी चुनाव: किसान-आंदोलन के गढ़ से चली परिवर्तन की पछुआ बयार

1982 की गौरवशाली संयुक्त हड़ताल के 40 वर्ष: वर्तमान में मेहनतकश वर्ग की एकता का महत्व

किसानों को आंदोलन और राजनीति दोनों को साधना होगा

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल


बाकी खबरें

  • Antony Blinken
    एम. के. भद्रकुमार
    रूस को अमेरिकी जवाब देने में ब्लिंकन देरी कर रहे हैं
    21 Jan 2022
    रूस की सुरक्षा गारंटी देने की मांगों पर औपचारिक प्रतिक्रिया देने की समय सीमा नजदीक आने के साथ ही अमेरिकी कूटनीति तेज हो गई है।
  • covid
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के क़रीब साढ़े तीन लाख नए मामले सामने आए
    21 Jan 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के साढ़े तीन लाख के क़रीब यानी 3,47,254 नए मामले सामने आए हैं। देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 5.23 फ़ीसदी यानी 20 लाख 18 हज़ार 825 हो गयी है।
  • jute mill
    रबीन्द्र नाथ सिन्हा
    बंगाल : जूट मिल बंद होने से क़रीब एक लाख मज़दूर होंगे प्रभावित
    21 Jan 2022
    नौ प्रमुख ट्रेड यूनियनों ने केंद्रीय कपड़ा मंत्री पीयूष गोयल और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से हस्तक्षेप की मांग की है।
  • online education
    सतीश भारतीय
    ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान
    21 Jan 2022
    मध्यप्रदेश के विद्यार्थियों और शिक्षकों की प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट ज्ञात हो रहा है कि इस वक्त ऑनलाइन शिक्षा एक औपचारिकता के रूप में विद्यमान है। सरकार ने धरातलीय हकीकत जाने बगैर ऑनलाइन शिक्षा कोरोना…
  • Ukraine
    न्यूज़क्लिक टीम
    पड़ताल दुनिया भर कीः यमन का ड्रोन हमला हो या यूक्रेन पर तनाव, कब्ज़ा और लालच है असल मकसद
    20 Jan 2022
    'पड़ताल दुनिया भर की' में वरिष्ठ पत्रकार भाषा सिंह ने यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा संयुक्त अरब अमीरात की राजधानी अबु धाबी पर किये ड्रोन हमले की असल कहानी पर प्रकाश डाला न्यूज़क्लिक के प्रधान संपादक…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License