NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
कृषि
भारत
राजनीति
मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत सिर्फ़ खेती-किसानी की पंचायत नहीं, रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा की भी पंचायत है!
आज 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में हो रही किसान महापंचायत को किसानों के अलावा आम जनता का भी जोरदार समर्थन मिल रहा है। अलग-अलग राज्यों से हज़ारों किसान मुजफ्फरनगर पहुंच रहे हैं।
मुकुंद झा
05 Sep 2021
मुज़फ़्फ़रनगर महापंचायत सिर्फ़ खेती-किसानी की पंचायत नहीं, रोज़गार, स्वास्थ्य, शिक्षा की भी पंचायत है!

संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले आज 5 सितंबर को मुजफ्फरनगर में होने वाली किसान महापंचायत को जोरदार समर्थन मिल रहा है। हजारों की तादाद में किसान कल से ही अलग-अलग राज्यों से मुजफ्फरनगर पहुँच गये हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि यह रैली बीजेपी के खिलाफ़ जारी देशव्यापी अभियान को नयी दिशा देगी। तीनों किसान विरोधी कानून रद्द कराने, बिजली संशोधन बिल 2020 वापस कराने और सभी कृषि उत्पादों की लागत से डेढ़ गुना दाम पर एमएसपी पर खरीद की कानूनी गारंटी की मांग न मानने वाली बीजेपी के ख़िलाफ़ इस रैली के ज़रिये मिशन उत्तर प्रदेश–उत्तराखंड की ऐतिहासिक शुरुआत की जाएगी।

इस महापंचायत में यूपी के फ़र्रुख़ाबाद जिले से भी बसों में भरकर किसान आए हैं। हमने इन किसानों से बात की, ये सभी किसान अपनी जेब से 600 रूपए देकर बस से यहां पहुंचे हैं। जबकि हमने देखा की कई बड़े रैली और जनसभाओं में लोगो को पैसा देकर बुलाया जाता है। लेकिन किसान यहां अपने साधनों से पहुंचा है। इस समूह के साथ आए राकेश, राम सिंह शाक्य और मनोज कश्यप से हमने साझा तौर पर बात की। इन्होंने बताया कि ये तीनों कृषि कानूनों के विरोध में तो यहाँ आए ही है लेकिन वो इसके साथ ही रोज़मर्रा की परेशानी को भी बताने आएं है।

राकेश ने कहा हमारे प्रदेश में जब से बीजेपी आई तब से आवारा पशुओं का तांडव हो रहा है, हमने इसी कारण कई फसलों को लगाना भी बंद कर दिया है क्योंकि आवारा पशु उन्हें नुक़सान पहुंचाते हैं। 

इसी तरह राम सिंह ने बताया कि एक तरफ उनसे उनकी फसल कौड़ियों के दाम पर ली जा रही है वहीं उन्हें वही चीज बहुत महंगी दी जा रही है। उन्होंने बताया ये सरकार लगातर डीजल पैट्रोल और बीज-खाद के दाम बढ़ा रही है जिससे हमारी लागत बढ़ रही है। लेकिन वो इसके मुताबिक़ हमारा समर्थन मूल्य नहीं बढ़ा रही है और जो समर्थन मूल्य घोषित भी करती है वो भी हमें नहीं मिलती है। 

रोहतक से किसानो का एक जत्था भी यहाँ किसान महापंचायत में भाग लेने के लिए पहुंचा है और वो सभी एक बात को लेकर दृढ हैं कि तीनों कृषि कानूनों को वापस कराएंगे या बीजेपी को सत्ता से बाहर भेजेंगे। 

चौधरी फूल सिंह ने न्यूज़क्लिक से बात करते हुए कहा कि बीजेपी को सत्ता का घमंड हो गया है और वो इसलिए किसानो से बात नहीं कर रही है लेकिन हम भी उन्हें घुटनो पर लाकर छोड़ेंगे। 

रोहतक से चौधरी देवेंद्र सिंह अलाहवत भी इस आंदोलन में शामिल होने आए हैं। उनकी उम्र 85 वर्ष है। उन्होंने बताया कि वो अंग्रेजों से हुई आज़ादी की लड़ाई में भी लड़े थे और आज एक बार फिर किसानों को जब ग़ुलाम किया जा रहा है उसके खिलाफ भी लड़ रहे है। 

उन्होंने कहा कि ये उस आज़ादी की लड़ाई से बड़ी लड़ाई है। उसमें हमारा दुश्मन खुलकर मैदान में था लेकिन अभी ये मायावी तरीके से हमसे लड़ रहा है। ये सरकार भाषणों में किसानों का गुणगान करती है जबकि सारे क़ायदे-क़ानून उनका सत्यानाश करने के लिए बना रही है। 

किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने कहा कि 22 राज्यों के प्रतिनिधि और 300 से ज्यादा किसान व अन्य संगठन के लोग इसमें शामिल हो रहे है। पंजाब से 100 संगठन रहेंगे, जिनमें 40 किसान व अन्य मजदूर, कर्मचारी, छात्र आदि संगठन भी शामिल हैं। 

संयुक्त किसान मोर्चा के बयान में कहा गया है कि महापंचायत में शामिल होने के लिए अब तक 15 राज्यों के हज़ारों किसान मुजफ्फरनगर पहुँच चुके हैं। 5 सितंबर की महापंचायत संयुक्त किसान मोर्चा के साथ खड़े किसानों, खेत मजदूरों तथा समर्थकों की ताकत का एहसास योगी-मोदी की सरकारों को करा देगी।

किसान नेताओं ने कहा आज की महापंचायत से यह भी साबित हो जाएगा कि संयुक्त किसान मोर्चा के नेतृत्व में 9 महीने से चल रहे किसान आंदोलन को समाज की सभी जातियों, धर्मों, राज्यों, वर्गों,छोटे व्यापारियों एवं समाज के सभी तबकों का समर्थन प्राप्त है। संयुक्त किसान मोर्चा ने कहा है कि पिछले 9 महीने में देश भर में हुई महापंचायतों में मुजफ्फरनगर की महापंचायत अब तक की सबसे बड़ी महापंचायत है।

किसानों के भोजन आदि की व्यवस्था हेतु 500 लंगर सेवा शुरू की गई हैं जिनमें सैकड़ों ट्रैक्टर-ट्रॉली से चलाई जाने वाली मोबाइल लंगर व्यवस्था भी शामिल हैं। महापंचायत में शामिल होने वाले किसानों की चिकित्सा जरूरतों का ख्याल रखते हुए 100 मेडिकल शिविर लगाए गए हैं।

संयुक्त किसान मोर्चा ने विशेष तौर पर मुजफ्फरनगर और आसपास के जिलों के नागरिकों से अपील की थी कि आज की महापंचायत में शामिल होने के लिए समय अवश्य निकालें एवं बाहर से आने वाले किसानों को सहयोग करें। इसका असर भी दिखा स्थानीय युवा बड़ी संख्या में महापंचायत में शामिल होने वाले किसानो की सेवा में लगे हुए हैं। मुजफ्फरनगर के बाग़वालों के युवाओं की टीम ने न केवल किसानों के लिए लंगर लगाया है बल्कि वे आंदोलन स्थल पर बुजर्गो को गाइड भी कर रहे हैं, इसमें शामिल युवा आलीशान जो खुद बीटेक कर चुके हैं और अभी परिवार के साथ किसानी में हाथ बांटते है। उन्होंने न्यूज़क्लिक से बात की और कहा कि इस सरकार ने किसान और नौजवानों को दिया कुछ नहीं बल्कि पूरे देश को सांप्रदायिक आधार पर बांटकर राज किया है। लेकिन अब गाँव में भी इनका भेद खुल गया और हम लोगों ने वापस से अपने हको के लिए लड़ना शुरू कर दिया है।

इस तरह एक अन्य नौजवान मुबशीर जो किसान आंदोलन में वॉलेंटियर हैं, उन्होंने कहा “यहाँ शिक्षा, स्वास्थ्य और रोज़गार का गंभीर संकट है और हम किसानी के साथ ही बाक़ी मुद्दों को लेकर इस आंदोलन में आए हैं ,क्योंकि अगर कहीं ये आंदोलन की जीत नहीं हुई तो भविष्य में होने वाले आंदोलन गर्भ में ही मार दिए जाएंगे” 

एक बात जो सभी पंचायत में शमिल किसान अपनी बातों में दोहरा रहे हैं कि अगर ये हमारी मांगे नहीं मानते तो हम इन्हे इसका जबाव आने वाले चुनावो में देंगे। अभी बंगाल में में जिस तरह से इनका हाल हुआ है वही 2022 में और फिर देश के बाक़ी राज्यों में भी किया जाएगा। 

महापंचायत को संयुक्त किसान मोर्चा के सभी प्रमुख नेताओं द्वारा संबोधित किया जाएगा। आम किसानो की भावना को देखते हुए महापंचायत में उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के चुनाव को लेकर कार्यक्रमों की घोषणा की जाएगी तथा भारत बंद संबंधी महत्वपूर्ण ऐलान भी किया जाएगा।

Farmer protests
Farm Laws
Muzaffarnagar Mahapanchayat
Media
MSP
Hoarding
Essential supplies
Nutrition
Land rights

Related Stories

क्यों है 28-29 मार्च को पूरे देश में हड़ताल?

28-29 मार्च को आम हड़ताल क्यों करने जा रहा है पूरा भारत ?

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

किसानों ने 2021 में जो उम्मीद जगाई है, आशा है 2022 में वे इसे नयी ऊंचाई पर ले जाएंगे

ऐतिहासिक किसान विरोध में महिला किसानों की भागीदारी और भारत में महिलाओं का सवाल


बाकी खबरें

  • indian freedom struggle
    आईसीएफ़
    'व्यापक आज़ादी का यह संघर्ष आज से ज़्यादा ज़रूरी कभी नहीं रहा'
    28 Jan 2022
    जानी-मानी इतिहासकार तनिका सरकार अपनी इस साक्षात्कार में उन राष्ट्रवादी नायकों की नियमित रूप से जय-जयकार किये जाने की जश्न को विडंबना बताती हैं, जो "औपनिवेशिक नीतियों की लगातार सार्वजनिक आलोचना" करते…
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2.5 लाख नए मामले, 627 मरीज़ों की मौत
    28 Jan 2022
    देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 6 लाख 22 हज़ार 709 हो गयी है।
  • Tata
    अमिताभ रॉय चौधरी
    एक कंगाल कंपनी की मालिक बनी है टाटा
    28 Jan 2022
    एयर इंडिया की पूर्ण बिक्री, सरकार की उदारीकरण की अपनी विफल नीतियों के कारण ही हुई है।
  • yogi adityanath
    अजय कुमार
    योगी सरकार का रिपोर्ट कार्ड: अर्थव्यवस्था की लुटिया डुबोने के पाँच साल और हिंदुत्व की ब्रांडिंग पर खर्चा करती सरकार
    28 Jan 2022
    आर्थिक मामलों के जानकार संतोष मेहरोत्रा कहते हैं कि साल 2012 से लेकर 2017 के बीच उत्तर प्रदेश की आर्थिक वृद्धि दर हर साल तकरीबन 6 फ़ीसदी के आसपास थी। लेकिन साल 2017 से लेकर 2021 तक की कंपाउंड आर्थिक…
  • abhisar
    न्यूज़क्लिक टीम
    रेलवे भर्ती: अध्यापकों पर FIR, समर्थन में उतरे छात्र!
    28 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License