NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
NFHS-5 : तक़रीबन 50 फ़ीसदी औरतें और बच्चे ख़ून की कमी की बीमारी से जूझ रहे हैं!
सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार 78% महिलाओं का बैंक खाता है तो 50% महिलाएं ख़ून की कमी से जूझ रही हैं। साल भर काम और काम का नगद मेहनताना महज़ 23 प्रतिशत महिलाओं को मिल रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
26 Nov 2021
women and children are suffering from anemia
'प्रतीकात्मक फ़ोटो'

बढ़ती जनसंख्या भारत के दस बड़ी परेशानियों में से भी एक नहीं है। लेकिन फिर भी पिछले दिनों इस पर देशभर के कुछ लोगों की तरफ से ऐसी चर्चा हुई जैसी अगर जनसंख्या नियंत्रण का कानून लाकर जनसंख्या को नियंत्रित कर दिया जाए तो देश की पूरी परेशानियां खत्म हो जाएंगी। उनके समझ के अंधकार को दूर करने के लिए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे की पांचवी किस्त से यह खबर आ रही है कि भारत की आबादी का प्रजनन दर रिप्लेसमेंट लेवल 2.1 से कम होकर 2 पर पहुंच गया है।

सरल शब्दों में समझे तो इस आंकड़े का अर्थ यह है कि अगर इसके बाद भी भारत की आबादी के साथ छेड़छाड़ करने की वकालत की जाएगी तो भारत की आबादी असंतुलित हो सकती है। बूढ़े लोगों की संख्या ज्यादा हो सकती है और नौजवानों की संख्या कम हो सकती है।

साल 1992-93 से नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के आंकड़े प्रकाशित होते आ रहे हैं। अब तक इसकी चार किस्त प्रकाशित हो चुकी हैं। यह सर्वे बहुत बड़े पैमाने पर होता है। इस बार के सर्वे में एनएफएचएस की टीम ने देशभर के 707 जिलों से  6.1 लाख परिवारों से बातचीत की। सवाल-जवाब का सिलसिला तकरीबन 7 लाख औरतों और 1 लाख मर्दों के साथ चला। इनसे मिले जवाबों के आधार पर एनएसएचएस की पांचवी किस्त के निष्कर्ष सामने आए हैं। एनएफएचएस के सर्वे में सबसे अधिक जोर आबादी, पोषण, स्वास्थ्य ,औरतों और बच्चों के हालात से जुड़ी जानकारियों को इकट्ठा करने पर दिया जाता है।

जैसा कि साफ है कि सवाल-जवाब का सिलसिला भारत की पूरी आबादी के साथ नहीं किया गया है, इसलिए नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे एक तरह का सैंपल सर्वे है। भारत की जमीनी तस्वीर साफ सुथरी करके दिखाता है लेकिन इतनी साफ-सुथरी नहीं जितनी साफ-सुथरी तस्वीर सेंसस के जरिए नजर आती है। लेकिन फिर भी नीति निर्माण और लोक विमर्श की दुनिया में नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे से मिले आंकड़ों का बहुत अधिक महत्व है। NFHS - 5 के मुताबिक:

भारत में 6 साल से अधिक उम्र की तकरीबन 71 फ़ीसदी लड़कियां स्कूल पहुंच पा रही है। ग्रामीण इलाकों में यह संख्या 66 फीसदी है तो शहरी इलाकों में यह संख्या 82 फ़ीसदी है।

पहले के मुकाबले लिंगानुपात बढ़ा है। 1000 मर्दों की आबादी पर 1020 औरतें हैं। ग्रामीण इलाके में 1000 मर्दों की आबादी पर 1037 औरतें हैं लेकिन शहरी इलाके की स्थिति ग्रामीण इलाके से कमजोर है। शहरी इलाके में 1000 मर्दों पर 985 औरतें हैं।

भारत की तकरीबन 58 फ़ीसदी आबादी खाना बनाने के लिए गैस चूल्हे का इस्तेमाल कर रही है। शहरों में यह संख्या तकरीबन 89% है तो गांव में यह संख्या महज 43 प्रतिशत है। यानी रसोई गैस की कीमतों में होने वाली बढ़ोतरी का साफ - साफ असर गांव में पड़ा है।

पिछले कुछ सालों से भारत सरकार स्वास्थ्य क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर खर्च करने की बजाय बीमा क्षेत्र को स्वास्थ्य में एंट्री दिला कर स्वास्थ्य की परेशानियों से लड़ने की नीति बना रही है। इस मामले में भारत के 41% लोगों के पास किसी ना किसी तरह का स्वास्थ्य बीमा है। शहरी इलाकों में यह संख्या 38% की है तो ग्रामीण इलाकों में यह संख्या 42% की है।( ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री स्वास्थ्य बीमा योजना की वजह से थोड़ी सी बढ़ी हुई संख्या आई है). यह आंकड़े बता रहे हैं कि बहुतेरे लोगों के पास किसी तरह की स्वास्थ्य बीमा नहीं है।

* देशभर में केवल 33% महिलाएं और 57% पुरुष हैं, जिन्होंने अपनी जिंदगी में कभी ना कभी इंटरनेट का इस्तेमाल किया है। ग्रामीण क्षेत्र के यह आंकड़ा महिलाओं में केवल 24% और मर्दों में 48% का हो जाता है। यानी सूचना क्रांति के दौर में अभी डिजिटल डिवाइड खतरनाक तौर पर मौजूद है।

* 20 से 24 साल की औरतों में तकरीबन 23 प्रतिशत औरतों की शादी 18 साल से पहले हो गई। ग्रामीण इलाकों में यह आंकड़ा 27% और शहरी इलाकों में 14% है।

* 5 साल से कम उम्र के अब भी 41% बच्चों की मौत हो जाती है। ग्रामीण इलाके में यह आंकड़ा 45% का है तो शहरी इलाके में आंकड़ा 31% का है। यानी यह अब भी इस मामले में भारत को बहुत लंबी दूरी तय करने हैं।

* 15 से 49 साल की औरतों के बीच तकरीबन 66% औरतें परिवार नियोजन से जुड़ी किसी ना किसी तरीके को जरूर अपनाती है। ग्रामीण और शहर इलाके दोनों जगह यह संख्या देश के औसत के आस पास ही है। यह आंकड़ा भी बताता है कि भारत में आबादी के नियंत्रण से जुड़े कानून की जरूरत नहीं है। ऐसा कोई भी बहस महज फिजूल का बहस है।

* 15 से 49 साल की 57.2% गैर-गर्भवती महिलाएं खून की कमी वाली बीमारी से जूझ रहे हैं. शहरी इलाकों में इनका प्रतिशत 54.1 तो गांव-देहात में यह 58.7 प्रतिशत है. इस तरह इस वर्ग में एनीमिया की शिकायत 4 प्रतिशत बढ़ी है. सर्वे के मुताबिक, अगर 15-49 वर्ष की गर्भवती महिलाएं में रक्ताल्पता की बात करें तो इनकी संख्‍या 52.2% है. शहरों में यह आबादी 45.7% है तो गांवों में यह आबादी 54.3 प्रतिशत है।

* केवल 25% ऐसी महिलाएं हैं जिन्होंने पिछले साल भर काम किया और उन्हें नगदी भुगतान मिला। शहर और गांव में यह आंकड़ा भी देशभर के आंकड़े के बराबर ही है।

* देशभर में महज 43% ऐसी औरतें हैं जिनके पास जमीन या घर का एकल या संयुक्त तौर पर मालिकाना हक है।

* देश भर में तकरीबन 78% महिलाओं के पास बैंक खाता है। लेकिन अब भी 18 से 49 साल के बीच की 29% महिलाएं किसी ना किसी तरह के हिंसा का शिकार हुई हैं। गांव में यह आंकड़ा 31 प्रतिशत का है।

NFHS-5
Anemia
women and children
malnourished children
Malnourished women

Related Stories

5 वर्ष से कम उम्र के एनीमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, 67 फीसदी बच्चे प्रभावित: एनएफएचएस-5

यूपीः एनिमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, बाल मृत्यु दर चिंताजनक

2018 की बाढ़ के बाद दोबारा बनाया गया, केरल का FHC राज्य के लचीले सरकारी स्वास्थ्य तंत्र का प्रतिनिधित्व करता है

क्या रोज़ी-रोटी के संकट से बढ़ गये हैं बिहार में एनीमिया और कुपोषण के मामले?


बाकी खबरें

  • peasant movement
    लाल बहादुर सिंह
    विचार: पूर्व के आंदोलनों से किस तरह अलग और विशिष्ट है किसान आंदोलन
    13 Nov 2021
    कुछ राजनैतिक विश्लेषकों ने भी यह सवाल उठाया है कि किसान आंदोलन का वैचारिक राजनैतिक अवदान अतीत के दूसरे महत्वपूर्ण आंदोलनों जैसा नहीं है। इसी की पड़ताल कर रहे हैं वरिष्ठ लेखक और एक्टिविस्ट लाल बहादुर…
  • DAP Shortage a Symptom of Larger Food Planning Crisis
    इंद्र शेखर सिंह
    डीएपी की कमी बड़े खाद्य संकट का लक्षण है
    13 Nov 2021
    तिलहन और सरसों के दाम पहले से ही ऊंचे चल रहे हैं। दामों के और अधिक बढ़ने से खाना पकाने की सभी वस्तुएं कई घरों की पहुंच से बाहर हो जाएंगी।
  • Zakia Jafri
    संचिता कदम
    एसआईटी  ने सिर्फ़ 'काम' किया, तहक़ीक़ात नहीं की: ज़किया जाफ़री एसएलपी में कपिल सिब्बल
    13 Nov 2021
    एसआईटी न सिर्फ़ पुलिस अधिकारियों के अहम रिकॉर्ड छिपाने जैसे पहलुओं पर ग़ौर करने में नाकाम रही, बल्कि उसने आरोपियों के बयानों की 'सच्चाई का पता लगाये बिना' उनके बयानों को आसानी से स्वीकार कर लिया।
  • covid
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 11,850 नए मामले, 555 मरीज़ों की मौत
    13 Nov 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.40 फ़ीसदी यानी 1 लाख 36 हज़ार 308 हो गयी है।
  • daily
    न्यूज़क्लिक टीम
    JNUTA रिटायर्ड सदस्यों के समर्थन में, बर्ख़ास्तगी को चुनौती देंगे डॉ. कफ़ील और अन्य ख़बरें
    12 Nov 2021
    न्यूज़क्लिक के डेली राउंडअप में आज हमारी नज़र रहेगी JNUTA ने की रिटायर्ड फ़ैकल्टी की पेंशन की मांग, डॉ कफ़ील ख़ान को योगी सरकार ने किया बर्ख़ास्त और अन्य ख़बरों पर।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License