NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नंदीग्राम; साज़िश के बाप-बेटे और ‘माँ’ और क़ब्रों से निकलते अस्थिपंजरों का सच 
ममता ने स्वीकार किया है, "14 मार्च 2007 को पुलिस यूनिफार्म और हवाई चप्पल पहने जिन कथित पुलिसवालों ने गोली चलाई थी वे बाप-बेटे -शुभेन्दु अधिकारी और शिशिर अधिकारी- के भेजे हुए लोग थे।"
बादल सरोज
02 Apr 2021
ममता बनर्जी के साथ शुभेंदु अधिकारी व उनके पिता शिशिर अधिकारी। फाइल फोटो। साभार : गूगल
ममता बनर्जी के साथ शुभेंदु अधिकारी व उनके पिता शिशिर अधिकारी। फाइल फोटो। साभार : गूगल

कम्युनिस्ट भविष्यवक्ता नहीं होते किन्तु वे भविष्यदृष्टा पक्के से होते हैं।

नंदीग्राम और सिंगूर को लेकर खड़े किये गए झूठ के तूमार के चलते 2011 में चुनाव हारने के बाद बुद्धदेब भट्टाचार्य ने कहा था कि "दस साल में सारा सच सामने आ जाएगा....."  और 28 मार्च को नंदीग्राम की एक चुनावी सभा में ममता बनर्जी ने खुद अपने श्रीमुख से सच उगल  ही दिया। ममता ने कहा कि "14 मार्च 2007 को पुलिस यूनिफार्म और हवाई चप्पल पहने जिन कथित पुलिसवालों ने  गोली चलाई थी वे बाप-बेटे -शुभेन्दु अधिकारी और शिशिर अधिकारी- के भेजे हुए लोग थे।"

ठीक यही बात थी जिसे बंगाल की तब की सरकार, सीपीएम और वाममोर्चा लगातार कहते रहे हैं। अंतर यह कि इस बार यह बात; तब की अपनी पार्टी के अपने सबसे भरोसेमंद बाप-बेटे की साज़िश की जानकारी खुद साज़िश की ‘माँ’ कह रही हैं।

14 ग्रामीणों की मौत वाले इस गोलीकाण्ड के बाद जब्ती और पोस्टमॉर्टम में जो गोलियां निकली थीं, उनके बारे में भी तभी रिपोर्ट आ गयी थी कि वे पुलिस द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली गोलियाँ नही थीं। सीबीआई तक ने जाँच में वाममोर्चा सरकार को निर्दोष पाया था। फिर अपराधी कौन था?  यह गोलाबारूद किसका था? साज़िश की ‘माँ’ के मुताबिक यही बाप-बेटे इस साजिश की पटकथा के लेखक, निर्देशक और सूत्रधार थे। यही थे जो माओवादियों को हथियार पहुंचाते थे - यही थे जो कभी इन पर तो कभी उन पर गोलियाँ चलवाकर वामफ्रंट की सरकार के खिलाफ माहौल बनाते थे - जिसके बहाने ममता कलकत्ता में भूख हड़ताल करतीं थी और जिन्हें सिरहाना देने - कभी आडवाणी तो कभी राजनाथ– पहुँच जाते थे। पहुंच तो और भी जाते थे - मगर उनके बारे में एकदम आखिर में।

कम्युनिस्टों के खिलाफ इस तरह की साजिशें उतनी ही पुरानी हैं जितने पुराने कम्युनिस्ट हैं। बेहतरी की ओर समाज के परिवर्तन के लिए और शासकों के शोषण के विरुद्ध लड़ाई लड़ने वाले उनके वैचारिक और संग्रामी पूर्वजों के साथ भी इसी तरह के छल-कपट सत्ताधीशों ने किए हैं। ऐसी अनगिनत सत्यकथाओं से भरा पड़ा है मानव सभ्यता के वर्गसंघर्ष का इतिहास।

इसी बंगाल में 1969 में संयुक्त फ्रंट की सरकार के समय लोहियावादी राजनारायण और जनसंघ ने मिलकर रबीन्द्र सरोवर "काण्ड" के नाम पर षड़यंत्री मुहिम छेड़ी। संसोपाई राजनारायण ट्रक भरकर कपड़े लेकर दिल्ली कूच पर निकल पड़े थे। ठीक आम चुनावों के बीच 1971 की फरवरी में ऑल इंडिया फारवर्ड ब्लॉक के राष्ट्रीय सचिव हेमन्त बसु की कलकत्ता में दिनदहाड़े हत्या कर उसका आरोप सीपीएम पर मढ़ा गया- ताकि वाम फ्रंट की एकता बिखेरी जा सके। माओवादियों के पूर्व संस्करण नक्सलवादियों का इस्तेमाल कर सिद्धार्थ शंकर राय की सरकार ने सीपीएम नेतृत्व की हत्याओं की श्रृंखला छेड़ी थी - अब यह दस्तावेजी इतिहास है। सिंगूर और नंदीग्राम इन्हीं लोगों की साजिशों का आधुनिक संस्करण था।

इसका नतीजा क्या सिर्फ सीपीएम ने ही भुगता? नहीं पूरे बंगाल ने भोगा - इस कदर भोगा कि वर्तमान ही नही इतिहास का हासिल भी दांव पर लग गया। मजदूर वर्ग के एक मजबूत दुर्ग, एक चमचमाते लाइट हाउस के कमजोर होने का असर देश के जनतांत्रिक आंदोलन पर भी पड़ा। अन्धेरा पसरा तो साँप-बिच्छू-कबरबिज्जू का "खेला होबे" होने लगा।

ममता की सार्वजनिक आत्म-अपराध-स्वीकारोक्ति के बाद 29 मार्च के अपने संदेश और वक्तव्य में बुद्धदेब भट्टाचार्य ने इसे सूत्रबद्द करते हुए ठीक ही कहा है कि "अपने साजिशी नाटक से बंगाल को इस दशा में पहुंचाने वाले कुटिल षडयंत्रकारी आज दो हिस्सों में टूट कर एक दूसरे पर कीचड़ फेंक रहे हैं। मगर बंगाल को क्या मिला? नंदीग्राम और सिंगूर में मरघट की शांति है : श्मशान का सन्नाटा है। पिछले 10 वर्षों में एक भी उद्योग नहीं लगा। बंगाल के युवक-युवतियों की मेधा, योग्यता और कार्यकुशलता बेकार बैठी है या शर्मनाक दाम पर काम करते हुए मारी मारी घूम रही है। जनता के जिस आपसी सौहार्द्र पर बंगाल गर्व करता था आज वह ज़ख़्मी और लहूलुहान पड़ा है। ममता की गोदी में बैठ साम्प्रदायिक राजनीति के विषधर उस बंगाल में पहुँच गये हैं जहाँ वे नगरपालिका तक का चुनाव नहीं जीतते थे। इस घृणित राजनीति के सामाजिक असर भी हुए; महिलाओं का उत्पीड़न उप्र, मप्र जैसे स्त्रियों के लिए नरक जैसे प्रदेशों से होड़ लेने लगा। नीचे तक वास्तविक लोकतांत्रीकरण का वाम का अद्भुत काम उलट दिया गया है।"

बुद्धदेव ने ठीक कहा है कि "यह इस सबको उलट देने का समय है। युवा ही इस विपदा को रोकेंगे। रोजगार बड़ा सवाल है, बंगाल के पुराने गौरव को लौटाने की ज़िद का समय है। संयुक्त मोर्चा इसी सबका वाहक है।"  यकीनन बंगाल की जनता इस बार ऐसा ही करेगी।

आखिर में यह कि नंदीग्राम और सिंगूर की साजिश के पर्दाफाश के बाद  आत्मावलोकन और पुनरावलोकन का जिम्मा उन बुद्धिजीवियों और कथित सिविल सोसायटी की सेलेब्रिटीज का भी है जिन्होंने मेहनतकश जनता की सरकार के खिलाफ प्रायोजित होहल्ले में अपराधियों के सुर में अपना सुर मिलाया था। अब प्रमाणित हुए षड्यंत्रकारियों के साथ फोटू खिंचवाया था। मीडिया में जगह पाने के लिये सीपीएम, वाम और बंगाल सरकार को बुरी तरह गरियाया था। बुद्धदेब भट्टाचार्य को सद्दाम हुसैन तक बताया था। कौआ कान ले गया सुनकर बिना अपना कान छूकर देखे कौए के पीछे भागने वाले इन विद्वजनों/जनियो को साजिशों के बाप, बेटे, माँ के इन सत्योदघाटनो के बाद खुद को आईने में निहारना चाहिये। देश, बंगाल, नंदीग्राम, सिंगूर की जनता से माफी मांगनी चाहिये।

(बादल सरोज वरिष्ठ लेखक और पत्रकार हैं। आप किसान और मज़दूर संगठन से भी जुड़े हैं। लेख में व्यक्त विचार व्यक्तिगत हैं। ) 

West Bengal
West Bengal Elections 2021
mamta banerjee
TMC
Suvendu Adhikari
Shishu Adhikari
Nandigram

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

बढ़ती हिंसा और सीबीआई के हस्तक्षेप के चलते मुश्किल में ममता और तृणमूल कांग्रेस

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?

पश्चिम बंगाल: विहिप की रामनवमी रैलियों के उकसावे के बाद हावड़ा और बांकुरा में तनाव

टीएमसी नेताओं ने माना कि रामपुरहाट की घटना ने पार्टी को दाग़दार बना दिया है

बंगाल हिंसा मामला : न्याय की मांग करते हुए वाम मोर्चा ने निकाली रैली


बाकी खबरें

  • RELIGIOUS DEATH
    श्रुति एमडी
    तमिलनाडु : किशोरी की मौत के बाद फिर उठी धर्मांतरण विरोधी क़ानून की आवाज़
    27 Jan 2022
    कथित रूप से 'जबरन धर्मांतरण' के बाद एक किशोरी की हालिया खुदकुशी और इसके ख़िलाफ़ दक्षिणपंथी संगठनों की प्रतिक्रिया ने राज्य में धर्मांतरण विरोधी क़ानून की मांग को फिर से केंद्र में ला दिया है।
  • cb
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: ‘बीजेपी-कांग्रेस दोनों को पता है कि विकल्प तो हम दो ही हैं’
    27 Jan 2022
    उत्तर प्रदेश से अलग होने के बाद उत्तराखंड में 2000, 2007 और 2017 में भाजपा सत्ता में आई। जबकि 2002 और 2012 के चुनाव में कांग्रेस ने सरकार बनाई। भाजपा और कांग्रेस ही बारी-बारी से यहां शासन करते आ रहे…
  •  नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    न्यूज़क्लिक प्रोडक्शन
    नौकरी दो! प्राइम टाइम पर नफरती प्रचार नहीं !
    27 Jan 2022
    आज के एपिसोड में अभिसार शर्मा बात कर रहे हैं रेलवे परीक्षा में हुई धांधली पर चल रहे आंदोलन की। क्या हैं छात्रों के मुद्दे और क्यों चल रहा है ये आंदोलन, आइये जानते हैं अभिसार से
  • सोनिया यादव
    यूपी: महिला वोटरों की ज़िंदगी कितनी बदली और इस बार उनके लिए नया क्या है?
    27 Jan 2022
    प्रदेश में महिलाओं का उम्मीदवार के तौर पर चुनाव जीतने का औसत भले ही कम रहा हो, लेकिन आधी आबादी चुनाव जिताने का पूरा मददा जरूर रखती है। और शायद यही वजह है कि चुनाव से पहले सभी पार्टियां उन्हें लुभाने…
  • यूपी चुनाव:  उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    रवि शंकर दुबे
    यूपी चुनाव: उन्नाव पीड़िता की मां के बाद अब सोनभद्र की ‘किस्मत’ भी कांग्रेस के साथ!
    27 Jan 2022
    यूपी में महिला उम्मीदवारों के लिए प्रियंका गांधी की तलाश लगातार जारी है, प्रियंका गांधी ने पहले उन्नाव रेप पीड़िता की मां पर दांव लगाया था, और अब वो सोनभद्र नरसंहार में अपने भाई को खो चुकी महिला को…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License