महामारी की यह सियासत महज़ वायरस और टीकों को लेकर ही नहीं हो रही, बल्कि मौजूदा व्यवस्था राजनीतिक क़ैदियों के साथ किस तरह से पेश आ रही है, उसे लेकर भी है।
सरकार की भटकी प्राथमिकताओं ने यह खौफ़नाक मंज़र सामने ला खड़ा किया है. सुनिये, क्या कहते हैं-देश-विदेश में विख्यात रहे बनारस घराने के बड़े शास्त्रीय गायक दिवंगत पं. राजन मिश्र के गायक बेटे पं. रजनीश…
वीरेंद्र राम मिश्रा, राम प्रसन्न सिंह, संतोष कुमार प्रधान, सोनू खान, गाथा जी. नम्बूदिरी
बीते 20-25 दिनों से जब देश के हर हिस्से में कोरोना की इस लहर के बीच हाहाकार मचा हुआ है तब देश की राजधानी में एक छद्म वाक युद्ध चल रहा है और ज़िम्मेदारियों की अदला-बदली की घिनौनी कोशिशें हो रही हैं।