NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
क़रीब 400 रोहिंग्या दो महीने तक समुद्र में फंसे रहने के बाद बांग्लादेश लौटे
वे शरणार्थी शिविरों में बदतर आर्थिक स्थिति से निजात पाने के लिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश कर रहे थे। इस कोशिश में दो दर्जन से अधिक लोगों की मौत हो गई।
पीपल्स डिस्पैच
16 Apr 2020
रोहिंग्या

बांग्लादेश के अधिकारियों ने आज यानी 16 अप्रैल को निर्णय लिया है कि 396 रोहिंग्या शरणार्थियों को म्यांमार भेजा जाएगा। 15 अप्रैल को इन्हें बांग्लादेश के तट रक्षकों द्वारा समुद्र से बचाया गया था। मलेशिया पहुंचने की कोशिश में वे करीब दो महीने से समुद्र में फंसे हुए थे।

इन लोगों में बड़ी संख्या में महिलाएं और बच्चे हैं। ख़राब मौसम के संपर्क में लगातार रहने और पर्याप्त भोजन और पानी की कमी के चलते इनमें से कुछ लोग बीमार हैं।

हालांकि न तो बांग्लादेश और न ही म्यांमार पक्षकार हैं। जबरन निर्वासन शरणार्थियों की स्थिति से संबंधित यूनाइटेड नेशन्स कन्वेंशन और प्रोटोकॉल (1951) के अनुच्छेद 33 का उल्लंघन होगा।

ढाका ट्रिब्यून के अनुसार लगभग 480 लोग क़रीब दो महीने पहले कॉक्स बाज़ार के शरणार्थी शिविरों से निकल कर मलेशिया जाने के लिए निकले। चूंकि वे वहां की बंदरगाह पर उतरने में विफल रहे इसलिए वे पिछले दो महीनों से समुद्र में ही थे। इसके चलते लगभग दो दर्जन लोगों की मौत हो गई।

पूर्वी एशियाई क्षेत्र के सभी देशों ने covid-19 संक्रमण को रोकने के लिए रक्षात्मक क़दम के तौर पर सीमा पर सख्ती बढ़ा दी है। इंडोनेशिया, मलेशिया और फिलीपींस जैसे तीन प्रमुख देशों में 16 अप्रैल तक Covid-19संक्रमण के 5000 से अधिक मामले सामने आए हैं। थाईलैंड में 2500 से अधिक मामले हैं।

5 अप्रैल को मलेशियाई अधिकारियों ने क़रीब 200 ऐसे रोहिंग्याओं को हिरासत में ले लिया था जब वे इसके लैंगकावी द्वीप के पास यहां प्रवेश करने की कोशिश कर रहे थे।

पिछले एक दशक में एक लाख से अधिक रोहिंग्या उत्पीड़न से ख़ुद को बचाने के लिए म्यांमार से निकल चुके हैं। म्यांमार उन्हें नागरिक मानने से इंकार करता है और धर्म के आधार पर उनके ख़िलाफ़ भेदभाव करता है। ज़्यादातर रोहिंग्या मुस्लिम हैं।

म्यांमार की सेना द्वारा राखाइन प्रांत में रोहिंग्या के गांवों पर हमला करने के बाद रोहिंग्या समूह के लोगों ने बड़ी संख्या में 2017 में पलायन किया था। इस दौरान हजारों लोग देश से बाहर चले गए थे। इनमें से अधिकांश लोग अब पड़ोसी देश बांग्लादेश में शरणार्थी शिविरों में रहते हैं। इनमें से कुछ लोग मलेशिया और भारत सहित दुनिया के विभिन्न हिस्सों में चले गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय म्यांमार में सरकार के ख़िलाफ़ नरसंहार के आरोपों की जांच कर रहा है।

शरणार्थी शिविरों में रहन-सहन की स्थिति ने बेहतर आजीविका तलाशने के लिए सैकड़ों रोहिंग्याओं को समुद्र पार करने और मलेशिया या अन्य पूर्व एशियाई देशों में जाने को मजबूर कर दिया। हालांकि, मलेशिया और अन्य देशों ने उनके प्रवेश को रोकने के लिए क़दम उठाए हैं। इन प्रयासों में बड़ी संख्या में शरणार्थियों की मौत हर साल हो जाती है।

Rohingya
Bangladesh
Malaysia
myanmaar
Philippines
United Nations Convention and Protocol
Rohingya Community

Related Stories

क्या श्रीलंका जैसे आर्थिक संकट की तरफ़ बढ़ रहा है बांग्लादेश?

पाम ऑयल पर प्रतिबंध की वजह से महंगाई का बवंडर आने वाला है

निचले तबकों को समर्थन देने वाली वामपंथी एकजुटता ही भारत के मुस्लिमों की मदद कर सकती है

कैसे सैन्य शासन के विरोध ने म्यांमार को 2021 के तख़्तापलट के बाद से बदल दिया है

भारत-बांग्लादेश संबंध का मौजूदा दौर

भाजपा का हिंदुत्व वाला एजेंडा पीलीभीत में बांग्लादेशी प्रवासी मतदाताओं से तारतम्य बिठा पाने में विफल साबित हो रहा है

अपने क्षेत्र में असफल हुए हैं दक्षिण एशियाई नेता

त्रिपुरा और बांग्लादेश में अल्पसंख्यक विरोधी हिंसा की बराबरी करना क्यों बेमानी है?

बांग्लादेश सीख रहा है, हिंदुस्तान सीखे हुए को भूल रहा है

तालिबान से 10 देशों की वार्ता और बांग्लादेश में नफ़रत के ख़िलाफ़ आवाज़ें, दिखाती हैंं राह


बाकी खबरें

  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    किसान आंदोलन के 11 महीने पूरे, एसकेएम ने कहा- जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, किसान घर नहीं लौटेंगे
    27 Oct 2021
    “दिल्ली की सीमाओं पर किसान आंदोलन ने देश के करोड़ों अन्नदाताओं के लिए, गंभीर कठिनाइयों से जूझते हुए, इस मांग के साथ कि उनकी आजीविका को अनियमित बाजारों में कॉर्पोरेट लूट से बचाया जाए, ग्यारह महीने पूरे…
  • सौजन्य: NDTV
    न्यूज़क्लिक टीम
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटे में 13,451 नए मामले, 585 मरीज़ों की मौत
    27 Oct 2021
    देश में एक्टिव मामलों की संख्या घटकर 0.48 फ़ीसदी यानी 1 लाख 62 हज़ार 661 हो गयी है।
  • श्रुति एमडी
    वेलफेयर बोर्ड के पास जमा ₹4,000 करोड़, मगर निर्माण मज़दूरों को नहीं मिल रहा लाभ
    27 Oct 2021
    इस क्षेत्र की अनौपचारिक प्रकृति के कारण कंस्ट्रक्शन के काम से जुड़े मज़दूरों में वित्तीय सुरक्षा का अभाव है।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    सूडान : 10 लाख से ज़्यादा नागरिक तख़्तापलट के विरोध में सड़कों पर आए
    27 Oct 2021
    सेना की तरफ़ से हो रहे हमलों में सात प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई, मगर प्रदर्शनकारी अभी भी डटे हुए हैं।
  • ndps
    अजय कुमार
    NDPS कानून और आर्यन खान: क्या सच? क्या झूठ?
    27 Oct 2021
    अगर कोई केवल नशे का आदी है तो NDPS कानून जेल नहीं बल्कि रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजने की बात करता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License