NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
"नये पेशों से जुड़े युवाओं के बीच ट्रेड यूनियन ले जाने की ज़रूरत"
सीपीएम के पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव ने अपने दो लेखों में नये-नये पेशों से जुड़े युवाओं के बीच पैठ बनाने और पार्टी कमेटियों के संचालन में नयापन लाने पर ज़ोर दिया है।
सरोजिनी बिष्ट
07 Oct 2019
new profession

मज़दूर हमेशा से कम्युनिस्ट पार्टियों की राजनीति की धुरी रहे हैं। मार्क्स का नारा- 'दुनिया के मजदूरो एक हो!'- इसकी सबसे बड़ी गवाही है। एटक, सीटू, ऐक्टू जैसे देश के कई प्रमुख केंद्रीय मजदूर संगठनों को विभिन्न कम्युनिस्ट पार्टियां संचालित भी करती हैं। लेकिन ये मजदूर संगठन आज एक बड़ी चुनौती से जूझ रहे हैं। और यह चुनौती है, श्रम बाज़ार या रोज़गार का बढ़ता अनौपचारीकरण (इन्फॉर्मलाइजेशन)।

अनौपचारीकरण का सरल शब्दों में मतलब है- ऐसी व्यवस्था जिसमें कामगारों का कोई खाता-बही नहीं होता। काम कीजिए और पैसे लेकर निकलिए। नियोक्ता (मालिक) की ओर से न कोई सामाजिक सुरक्षा और न ही किसी तरह की कोई जिम्मेदारी। संचार क्रांति के बाद रोज़गार का अनौपचारीकरण एक नये मुकाम पर पहुंच गया है। मोबाइल ऐप के जरिये आज देश में लाखों की संख्या में लोग खासकर युवा विभिन्न पेशों से जुड़े हुए हैं। ये लोग एक-दूसरे से अलग-थलग रहते हुए आवंटित किया गया काम करते हैं। ऐसे में, इनके लिए संगठित होना कठिन है और मजदूर संगठनों के लिए भी इन्हें अपने साथ जोड़ना आसान नहीं है।

बदलाव की इस आंधी से ट्रेड यूनियनों का गढ़ माना जाने वाला पश्चिम बंगाल भी अछूता नहीं है। कोलकाता से लेकर राज्य के छोटे-मझोले शहरों तक में ऐप कैब, फूड डिलीवरी, ई-कॉमर्स की पकड़ बढ़ती जा रही है। मोबाइल ऐप के जरिये 'अदृश्य नियोक्ता' के लिए हजारों युवा काम कर रहे हैं। नयी पीढ़ी के बीच अनौपचारिक क्षेत्र के बढ़ते दायरे को देखते हुए वामपंथी पार्टियों को यह समझ में आ गया है कि अब अगर इनके बीच अपने मजदूर संगठनों को नहीं ले जाया गया तो अस्तित्व पर संकट मंडरा सकता है।

युवा शक्ति के बिना न तो कोई राजनीतिक दल दीर्घजीवी हो सकता है और न ही मजदूर संगठन। ऐसा नहीं है कि मोबाइल ऐप के जरिये नये-नये पेशों में काम करनेवाले युवाओं के रोजगार में कोई समस्या नहीं है। पश्चिम बंगाल के कई शहरों में 'जोमैटो' के डिलीवरी ब्वॉयों का आंदोलन देखने को मिल चुका है, क्योंकि उन्हें वादे के अनुरूप रोज़ काम नहीं दिया जा रहा। ऐप कैब के ड्राइवर भी अपने एग्रीगेटर के खिलाफ आंदोलित हो चुके हैं। लेकिन इन नये पेशों के कामगारों को अभी तक ढंग से संगठित नहीं किया गया है।

हाल ही में प्रकाशित, पार्टी के बांग्ला मुखपत्रों के शारदीय अंक में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीएम) के राज्य सचिव सूर्यकांत मिश्र ने इस विषय पर दो लेख लिखे हैं, जिनमें डिलीवरी ब्वॉय, ऐप कैब चालक जैसे नये पेशों से जुड़े युवाओं को संगठित करने पर जोर दिया गया है।
उन्होंने लिखा है कि इन नये पेशों से जुड़े युवाओं को संगठित करना राज्य में चल रही भाजपा और तृणमूल की द्विध्रुवीय राजनीति का मुकाबला करने के लिए जरूरी है।

दैनिक पत्र 'गणशक्ति' के शारदीय अंक में 'पार्टी संगठन को घिसे-पिटे ढर्रे से मुक्त करना होगा' शीर्षक वाले लेख में सूर्यकांत मिश्र लिखते हैं, 'कुछ नये पेशा क्षेत्रों में कार्यरत लोगों के बीच स्वत:स्फूर्त आंदोलन सृजित होते देखा जा रहा है। जैसे कि, आईटी और विभिन्न नयी-नयी सेवाएं देनेवाले पेशे, फूड डिलीवरी ब्वॉय, कैब चालक इत्यादि। हमें पारंपरिक क्षेत्रों तक न सीमित रहकर इन स्वत:स्फूर्त आंदोलनों में भी योगदान देना होगा। आंदोलन को स्वत:स्फूर्तता पर न छोड़कर उन्हें संगठित करने के लिए हमें पहलकदमी लेनी होगी।'

ट्रेड यूनियन एक जमाने में वामपंथी दलों की बड़ी ताकत हुआ करती थीं। लेकिन संगठित क्षेत्रों के लगातार सिमटने से इस ताकत में निरंतर हृास हुआ है। उदाहरण के लिए, बैंकिंग और बीमा क्षेत्र में वाम यूनियनों की तूती बोलती थी, लेकिन आज ये दोनों ही क्षेत्र विलय और विनिवेश की ओर बढ़ रहे हैं। रेलवे में पहली कॉरपोरेट ट्रेन ने उसके भविष्य की भी इबारत लिख दी है। एक तरफ संगठित क्षेत्र सिमट रहा है, तो दूसरी तरफ अनौपचारिक क्षेत्र में नये-नये पेशे और कार्यक्षेत्र सामने आ रहे हैं जिनमें नयी पीढ़ी काम कर रही है।

लेख में सीपीएम के राज्य सचिव मौजूदा हालात की तस्वीर कुछ इस तरह पेश करते हैं- 'कामगारों का 94 प्रतिशत हिस्सा अभी असंगठित उद्योग क्षेत्र में काम कर रहा है। शिक्षा, स्वास्थ्य समेत अनेक योजनाओं व सेवाओं में बड़ी संख्या में महिलाएं काम करती हैं। बहुत से छात्र-युवा मामूली कमाई वाले पेशों में लगे हैं। बहुत से विद्यार्थी पढ़ाई-लिखाई के साथ पार्ट-टाइम काम भी करते हैं।'

सूर्यकांत मिश्र कहते हैं कि नयी पीढ़ी के इन युवाओं को सीपीएम और उसके जन संगठनों के तहत लाना होगा।

साप्ताहिक बांग्ला मुखपत्र 'देशहितैषी' के शारदीय अंक में सूर्यकांत मिश्र ने 'पार्टी कमेटी के संचालन के बारे में' शीर्षक से एक लेख लिखा है, जिसमें उन्होंने पार्टी के नेताओं से अपने कामकाज के तरीके में बदलाव लाने को कहा है। उन्होंने घंटों चलनेवाली बैठकों को संक्षिप्त करने की बात कही है। वामपंथी नेताओं के लंबे और 'कठिन' भाषणों की ओर इशारा करते हुए सूर्यकांत मिश्र लिखते हैं, 'बैठकों को बहुत लंबा चलाना ठीक नहीं है। इसके अलावा भाषण भी तय विषय पर ही केंद्रित होना चाहिए।'

सीपीएम के पश्चिम बंगाल के राज्य सचिव के इन दो लेखों ने बता दिया है कि अब वह खुद को आज के युवाओं के मिजाज के हिसाब से बदलने के लिए बेचैन है। और, इस बेचैनी से बाकी वामपंथी पार्टियां भी अछूती नहीं हैं।

(लेखिका स्वतंत्र पत्रकार हैं। लेख में व्यक्त विचार निजी हैं।)

New profession
youth issues
trade unions
Indian Youth
CPM
communist parties
Central labor organizations
Leftist leaders
West Bengal

Related Stories

राज्यपाल की जगह ममता होंगी राज्य संचालित विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति, पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने पारित किया प्रस्ताव

प. बंगाल : अब राज्यपाल नहीं मुख्यमंत्री होंगे विश्वविद्यालयों के कुलपति

पश्चिम बंगालः वेतन वृद्धि की मांग को लेकर चाय बागान के कर्मचारी-श्रमिक तीन दिन करेंगे हड़ताल

मुंडका अग्निकांड: सरकारी लापरवाही का आरोप लगाते हुए ट्रेड यूनियनों ने डिप्टी सीएम सिसोदिया के इस्तीफे की मांग उठाई

मछली पालन करने वालों के सामने पश्चिम बंगाल में आजीविका छिनने का डर - AIFFWF

‘जलवायु परिवर्तन’ के चलते दुनियाभर में बढ़ रही प्रचंड गर्मी, भारत में भी बढ़ेगा तापमान

किधर जाएगा भारत— फ़ासीवाद या लोकतंत्र : रोज़गार-संकट से जूझते युवाओं की भूमिका अहम

निचले तबकों को समर्थन देने वाली वामपंथी एकजुटता ही भारत के मुस्लिमों की मदद कर सकती है

बढ़ती हिंसा और सीबीआई के हस्तक्षेप के चलते मुश्किल में ममता और तृणमूल कांग्रेस

बलात्कार को लेकर राजनेताओं में संवेदनशीलता कब नज़र आएगी?


बाकी खबरें

  • Goa
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनावः क्या है मछली बेचने वालों के मुद्दे और भाजपा का रिपोर्ट कार्ड?
    04 Feb 2022
    गोवा एक तटीय प्रदेश है। बड़ी आबादी मछली कारोबार से जुड़ी हैं। लेकिन बावजूद इसके इनके मुद्दे पूरी चुनाव चर्चा से गायब हैं। हमने मापसा की मछली मार्केट में कुछ मछली बेचने वालों के साथ बात की है कि उनके…
  • journalist bodies
    ऋत्विका मित्रा
    प्रेस की आजादी खतरे में है, 2021 में 6 पत्रकार मारे गए: रिपोर्ट 
    04 Feb 2022
    छह पत्रकारों में से कम से कम चार की कथित तौर पर उनकी पत्रकारिता से संबंधित कार्यों की वजह से हत्या कर दी गई थी। 
  • Modi
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    उत्तर प्रदेश चुनाव: बिना अपवाद मोदी ने फिर चुनावी अभियान धार्मिक ध्रुवीकरण पर केंद्रित किया
    04 Feb 2022
    31 जनवरी को अपनी "आभासी रैली" में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में पिछले समाजवादी पार्टी के "शासनकाल के डर का जिक्र" छेड़ा, जिसके ज़रिए कुछ जातियों और उपजातियों को मुस्लिमों के साथ मिलने से…
  • russia china
    एम. के. भद्रकुमार
    रुस-चीन साझेदारी क्यों प्रभावी है
    04 Feb 2022
    व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को होने वाली मुलाक़ात विश्व राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है।
  •  Lucknow
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव: लखनऊ में इस बार आसान नहीं है भाजपा की राह...
    04 Feb 2022
    वैसे तो लखनऊ काफ़ी समय से भगवा पार्टी का गढ़ रहा है, लेकिन 2012 में सपा की लहर में उसको काफ़ी नुक़सान भी हुआ था। इस बार भी माना जा रहा है, भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License