NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
फिलिस्तीन
न नकबा कभी ख़त्म हुआ, न फ़िलिस्तीनी प्रतिरोध
फिलिस्तीनियों ने इजरायल द्वारा अपने ही देश से विस्थापित किए जाने, बेदखल किए जाने और भगा दिए जाने की उसकी लगातार कोशिशों का विरोध जारी रखा है।
अब्दुल रहमान
17 May 2022
palestine
हजारों की तादाद में फिलिस्तीनी नागरिक इजरायल के बलात कब्जे वाले वेस्ट बैंक के केंद्र में स्थित रामल्ला शहर में 1948 में हुए नकबा (अपनी जमीन से बेदखली के रूप में आई तबाही) की 74 वीं वर्षगांठ मनाते हैं। फोटो: मोहम्मद अबू जैद

इससे कुछ दिन पहले ही, जब फिलिस्तीनी अपने पूर्वजों की भूमि से बलात खदेड़े जाने, जिसे वहां नकबा या तबाही के रूप में जाना जाता है, उसकी 74वीं वर्षगांठ की तैयारी में जुटे थे, तभी एक महत्त्वपूर्ण घटना हुई। इजरायली सुप्रीम कोर्ट ने दक्षिणी वेस्ट बैंक में उनके कब्जे वाली जमीन की बाबत मासाफर यट्टा के निवासियों की ओर से 23 वर्ष पहले दायर एक याचिका को खारिज कर दिया और इजरायल की सेना को उस जगह बने सैकड़ों घरों को ध्वस्त करने की इजाजत दे दी। अदालत ने कहा कि वे "फायरिंग रेंज" में आते हैं। यह घटना इजरायल की तरफ से फिलिस्तीनी जमीन को ज्यादा से ज्यादा हथियाने और फिलिस्तीनियों को अपने ही वतन में शरणार्थी रहने पर मजबूर करने की एक प्रणालीगत नीति का हिस्सा है। यह हर रोज का नकबा भी, फिलिस्तीनियों को अपनी आजादी की खातिर, अपनी जमीन पर फिर से कब्जा पाने के लिए और वतन वापसी के खुद के अधिकार को लेकर लड़ने का उनका मनोबल तोड़ने में फेल हो जाता है।

1948 में जब जबरन विस्थापन, जातीय संहार और फिलिस्तीनी लोगों के खिलाफ हिंसा की अकेली सबसे बड़ी घटना हुई, तब से ही हजारों और फिलिस्तीनियों ने यहूदी की औपनिवेशिक बस्ती बसाने की परियोजना की हिंसा का मुकाबला करना जारी रखा है। हालांकि उसकी इस प्रोजेक्ट से फिलिस्तीनी जमीन का नक्शा लगातार सिकुड़ रहा है, जबकि इजरायली राजसत्ता इजरायल के गैरकानूनी बस्तियों के विस्तार और फिलिस्तीनियों के विस्थापन के पक्ष में शासन करना जारी रखे हुई है।

फिलिस्तीन की एक राजनीतिक कार्यकर्ता अरवा अबू हैशश ने पीपुल्स डिस्पैच को बताया, “हम मानते हैं कि 1948 से शुरू हुआ नकबा आज तक जारी है, वह एक सतत प्रक्रिया है, और इसकी कई अभिव्यक्तियां हैं (जैसे कि फिलिस्तीनियों का विस्थापन, उनकी हत्या, उनकी गिरफ्तारी, बलात उनकी भूमि हड़पना, पानी की चोरी.. और इसी तरह की कई और वारदातें)। इजरायल का कब्जा फिलिस्तीनी लोगों को एक व्यवस्थित आधार पर और रोजमर्रे के स्तर पर विस्थापित कर रहा है और उनकी हत्याएं कर रहा है।”

हैशश ने जोर देकर कहा, “मासाफर यट्टा तो सिर्फ एक उदाहरण है कि हम आज उस विस्थापन की याद के साथ जी रहे हैं जिसके तहत फिलिस्तीनियों को लगातार निशाना बनाया जाता रहा है। शेख जाराह ऐसा ही एक और उदाहरण है, जहां दर्जनों परिवार हरदम इस खौफ में जीते हैं कि कब उन्हें अपने घर से बेदखल कर दिया जाए।"

नीयर ईस्ट (यूएनआरडब्ल्यूए) में फिलिस्तीन शरणार्थियों के बारे में संयुक्त राष्ट्र राहत और कार्य एजेंसी के जनवरी 2020 के आंकड़े बताते हैं कि दुनिया भर में अकेले अरब में ही 6,293,390 फिलिस्तीनी शरण लिए हुए हैं, जिनमें कब्जे वाले गाजा और वेस्ट बैंक में रहने वाले शरणार्थी भी शामिल हैं। दस लाख से अधिक ऐसे शरणार्थी हैं, जो पश्चिम एशिया में यूएनआरडब्ल्यूए के साथ पंजीकृत नहीं हैं। नकबा के समय, कम से कम 700,000 फिलिस्तीनियों को उन जगहों पर अपने घर छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था, जो अब इजरायल के अंदर आते हैं।

इस साल 11 मई को, नेफ्टाली बेनेट सरकार ने कब्जे वाले वेस्ट बैंक में बसावट के लिए 4,000 से अधिक नए घरों का निर्माण करने का एक नया फरमान जारी किया है। पिछले साल अक्टूबर में 3,000 और बस्तियों को मंजूरी दी गई थी।

कब्जे वाले पश्चिमी तट और पूर्वी यरुशलम में 250 से अधिक अवैध इजरायली बस्तियां पहले से ही हैं, जहां लगभग 750,000 लोग अवैध रूप से रहते हैं। कब्जे वाले वेस्ट बैंक के सी क्षेत्र के लगभग आधे हिस्से या कहें कि इसके कुल रकबे के 18 फीसद भाग को इजरायली सेना का "फायरिंग जोन" घोषित कर दिया गया है।

फिलिस्तीनी पीपुल्स पार्टी के महासचिव बासम अल-सलही ने पीपुल्स डिस्पैच को बताया, उनके पूरे सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करने के बावजूद, “फिलिस्तीनी लोगों ने इस नकबा के दुष्प्रभाव से खुद को उबारा है तथा अपने को पुनर्संगठित किया है। उन्होंने एक कब्जाए लोगों के रूप में अपने राष्ट्रीय आंदोलन तथा पुनर्जागरण को फिर से शुरू किया। उन्होंने आगे कहा कि फिलिस्तीन लोग “अभी भी आत्मनिर्णय, राज्य, फिलिस्तीन को वापस करने के अपने वैध अधिकारों के लिए तथा फिलिस्तीन में औपनिवेशिक रंगभेद परियोजना के खिलाफ संघर्ष कर रहे हैं।”

अरवा अबू हैशश ने कहा, “फिलिस्तीनियों को पता है कि इजरायल के कब्जे के तहत रहने का मतलब उन्हें किसी भी समय विस्थापित कर दिए जाने तथा हत्या कर दिए जाने एवं हिंसा के खतरे के तहत रहना है।” इसलिए उनके पास विरोध करते रहने के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। इसलिए वे विरोध करते रहे हैं।

पिछले दो वर्षों से फिलिस्तीनियों ने हर अवसर पर कब्जे की ताकतों का विरोध किया है, चाहे वह अल-अक्सा पर उनके पर बार-बार किए जाने वाले हमले का विरोध हो, गाजा पर आक्रमण या जेनिन के फिलिस्तीनियों के गांवों और कब्जे वाले पश्चिमी तट के अन्य स्थानों पर किए गए हमले हों।

फिलिस्तीनी पत्रकार शिरीन अबू अक्लेह की क्रूर हत्या और उनकी मय्यत पर गमजदा होने वालों पर हिंसक हमलों के साथ, एक बार फिर दुनिया ने यहूदी परियोजना और इजरायल की हिंसा अपनी आंखों से देखी है। इजरायल जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम और वैश्विक उत्तर के अन्य देशों से वित्तीय मदद और राजनीतिक समर्थन का उपभोग कर रहा है, परंतु दुनिया के अधिक से अधिक लोग फिलिस्तीन के साथ एकजुटता में खड़े हैं और इजरायल की दमनात्मक कार्रवाइयों को जायज मानने से इनकार कर रहे हैं।

साभार: पीपल्स डिस्पैच 

Palestine
Israel
Nakba
Protest
Occupation
israel occupation

Related Stories

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

दिल्लीः एलएचएमसी अस्पताल पहुंचे केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मंडाविया का ‘कोविड योद्धाओं’ ने किया विरोध

बिजली संकट को लेकर आंदोलनों का दौर शुरू

नफ़रत देश, संविधान सब ख़त्म कर देगी- बोला नागरिक समाज

दिल्ली: लेडी हार्डिंग अस्पताल के बाहर स्वास्थ्य कर्मचारियों का प्रदर्शन जारी, छंटनी के ख़िलाफ़ निकाला कैंडल मार्च

यूपी: खुलेआम बलात्कार की धमकी देने वाला महंत, आख़िर अब तक गिरफ़्तार क्यों नहीं

हिमाचल: प्राइवेट स्कूलों में फ़ीस वृद्धि के विरुद्ध अभिभावकों का ज़ोरदार प्रदर्शन, मिला आश्वासन 

स्कीम वर्कर्स संसद मार्च: लड़ाई मूलभूत अधिकारों के लिए है

ख़बर भी-नज़र भी: किसानों ने कहा- गो बैक मोदी!

अल्पसंख्यकों पर हमलों के ख़िलाफ़ 1 दिसंबर को माकपा का देशव्यापी प्रदर्शन


बाकी खबरें

  • News Network
    न्यूज़क्लिक टीम
    आख़िर क्यों हुआ 4PM News Network पर अटैक? बता रहे हैं संजय शर्मा
    25 Feb 2022
    4PM News नामक न्यूज़ पोर्टल को हाल ही में कथित तौर पर हैक कर लिया गया। UP की राजधानी लखनऊ का 4PM News योगी सरकार की नीतियों की आलोचनात्मक रिपोर्टिंग के लिए जाना जाता है। 4PM News का आरोप है कि योगी…
  • Ashok Gehlot
    सोनिया यादव
    राजस्थान : कृषि बजट में योजनाओं का अंबार, लेकिन क़र्ज़माफ़ी न होने से किसान निराश
    25 Feb 2022
    राज्य के बजटीय इतिहास में पहली बार कृषि बजट पेश कर रही गहलोत सरकार जहां इसे किसानों के हित में बता रही है वहीं विपक्ष और किसान नेता इसे खोखला और किसानों के साथ धोखा क़रार दे रहे हैं।
  • ADR Report
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    यूपी चुनाव छठा चरणः 27% दाग़ी, 38% उम्मीदवार करोड़पति
    25 Feb 2022
    एडीआर की रिपोर्ट के अनुसार छठे चरण में चुनाव लड़ने वाले 27% (182) उम्मीदवारों पर आपराधिक मामले दर्ज हैं वहीं 23% (151) उम्मीदवारों पर गंभीर प्रकृति के आपराधिक मामले हैं। इस चरण में 253 (38%) प्रत्याशी…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव 2022: मोदी सभा में खाली कुर्सियां, योगी पर अखिलेश का तंज़!
    25 Feb 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे के इस एपिसोड में वरिष्ठ पत्रकार अभिसार शर्मा बात करेंगे आवारा पशुओं के बढ़ते हुए मुद्दे की, जो यूपी चुनाव में बीजेपी की मुश्किलें बढ़ा सकता है। उसके साथ ही अखिलेश यादव द्वारा…
  • MSME policy
    बी. सिवरामन
    एमएसएमई नीति के नए मसौदे में कुछ भी नया या महत्वपूर्ण नहीं!
    25 Feb 2022
    एमएसएमई मंत्रालय द्वारा MSMEs के लिए लाई गई राष्ट्रीय नीति का मसौदा कितना महत्वपूर्ण?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License