NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निर्भया के दोषियों को फांसी, क्या अब अपराधों पर लगेगी रोक?
इस लंबी कानूनी लड़ाई के अंजाम तक पहुंचने का लोगों ने स्वागत किया तो वहीं एक सवाल आज भी सभी के मन में है कि क्या ये सज़ा महिलाओं खिलाफ अपराधों पर रोक लगा पाएगी?
सोनिया यादव
20 Mar 2020
निर्भया के दोषियों को फांसी
Image courtesy:NDTV

साल 2012 के निर्भया गैंगरेप और हत्या मामले में आख़िरकार आज करीब सात सालों की क़ानूनी लड़ाई अपने अंजाम तक पहुंच गई। शुक्रवार, 20 मार्च की सुबह करीब 5.30 बजे सभी चार दोषियों को एक साथ फांसी के फंदे पर लटका दिया गया। इस लंबी कानूनी लड़ाई के अंजाम तक पहुंचने का लोगों ने स्वागत किया तो वहीं एक सवाल आज भी सभी के मन में है कि क्या ये सज़ा महिलाओं खिलाफ अपराधों पर रोक लगा पाएगी?

क्या है पूरा ममला?

साल 2012 तारीख 16 दिसंबर की रात दिल्ली में एक पैरामेडिकल छात्रा (निर्भया) के साथ चलती बस में 6 लोगों ने बर्बर्तापूर्ण दुष्कर्म की घटना को अंजाम दिया था। हालत बिगड़ने पर जनदबाव में उस समय की सरकार ने निर्भया को इलाज के लिए सिंगापुर भेजा लेकिन 29 दिसंबर 2012 को सिंगापुर में निर्भया की इलाज के दौरान मौत हो गई। घटना के नौ महीने बाद यानी सितंबर 2013 में निचली अदालत ने 5 दोषियों को फांसी की सज़ा सुनाई थी। एक अन्य दोषी को नाबालिग होने की वजह से 3 साल के लिए सुधार गृह भेज दिया गया। इसके बाद पहले हाई कोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट ने इस सज़ा को बरकरार रखा। ट्रायल के दौरान मुख्य दोषी राम सिंह ने तिहाड़ जेल में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। तब से मामला कोर्ट और न्यायिक प्रक्रिया के बीच संघर्ष कर रहा था।

किसने क्या कहा?

दोषियों को सज़ा मिलने के बाद निर्भया की मां आशा देवी ने खुशी जताई और कहा कि उनका सात साल का संघर्ष आज पूरा हुआ है। 20 मार्च का दिन निर्भया के नाम, देश की बेटियों के नाम पर याद रखा जाएगा। आज उन्हें इंसाफ मिला है, लेकिन उनकी लड़ाई जारी रहेगी।

आशा देवी ने मीडिया से कहा, “7 साल के बाद हमें इंसाफ मिला है। न्याय जरूर मिलता है, देर से ही सही लेकिन आज मेरी बेटी के साथ इंसाफ़ हुआ है। देश के लोगों ने निर्भया के लिए लड़ाई लड़ी है।”

इस संबंध में निर्भया की वकील ने बताया कि आज हमें इंसाफ मिला है, जिस तरह से दोषियों ने निर्भया के साथ बर्बरता की थी उन्हें फांसी दी जानी जरूरी थी। वकील ने कहा कि देश के सिस्टम में बदलाव होने की जरूरत है, क्योंकि न्याय के लिए अगर सात साल तक इंतजार करना पड़ेगा तो दुख होता है।

हम हारे नहीं, हम लड़ें

राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) की अध्यक्ष रेखा शर्मा ने एक संदेश जारी कर कहा, “लगभग साढ़े सात साल बाद निर्भया को आज इंसाफ मिला है। मैं आशा करती हूं की वो जहां भी होंगी आज उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। मैंने पिछले सात-आठ सालों में निर्भया के परिवार को जूझते, निराश होते, रोते देखा है मुझे आशा है कि आज उन्हें भी सांत्वना मिली होगी।”

रेखा शर्मा ने आगे कहा, हम हारे नहीं, हम लड़े। अपराधियों को सबक मिले, उनके मन में डर हो। जो देरी हुई, वो आगे न हो, जिन लूप होल्स का अपराधियों को फायदा मिला, उस पर भविष्य में काम हो और सभी पीड़िताओं को न्याय मिले।

विश्वास है बदलाव आएगा, ज़रूर आएगा

दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष स्वाति मालिवाल ने कहा, “ये ऐतिहासिक दिन है, निर्भया को सात सालों से भी ज्यादा समय के बाद न्याय मिला है। आज उनकी आत्मा को शांति मिलेगी। देश ने बलात्कारियों को सख्त संदेश दिया है। निर्भया की मां ने न्याय के लिए दर दर की ठोकरे खाईं, सारा देश सड़कों पर उतरा, अनशन किया, लाठी खाई। अब हमें देश में कठोर सिस्टम बनाना है। विश्वास है बदलाव आएगा, ज़रूर आएगा।”

गौरतलब है कि गुरुवार, 19 मार्च को दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ दोषियों के वकील एपी सिंह ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। जिसके बाद सर्वोच्च अदालत में रात ढाई बजे सुनवाई हुई और करीब 3.30 बजे याचिका को खारिज कर दिया गया।

आज निर्भया के इंसाफ से पूरे देश की आंखें नम हैं लेकिन सच्चाई ये है कि ये सज़ा किसी गुनाह का अंत नहीं है। कई प्रगतिशील संगठन और समाजिक कार्यकर्ता अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्यवाई का मांग तो करते हैं लेकिन फांसी की सजा को अपराधों की रोकथाम में सार्थक नहीं मानते। कई लोगों का ये मानना है कि सख़्त सज़ा से अपराधियों के मन में डर बैठेगा और महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध पर रोक लगेगी।

तो वहीं, ऐसा मानने वाले भी लोग हैं कि फांसी का डर महिलाओं को सुरक्षित करने की बजाय ख़तरे में डाल देगा। अपराधी पकड़े जाने के डर से उन्हें जान से मारने की कोशिश करेंगे। हाल-फिलहाल के कई मामलों में ऐसा देखा भी गया है। ऐसे सभी लोगों का मानना है कि ज़रूरत ऐसे मामलों में तत्काल सुनवाई और जल्द से जल्द सज़ा सुनाए जाने की है, क्योंकि हमारे देश में दोषसिद्धि की दर (Conviction rate) बेहद कम है। निर्भया मामले के बाद सरकार ने जस्टिस वर्मा कमेटी बनाई जिसने कानून में कई सुधार किए और पॉक्सो एक्ट भी अस्तित्व में आया लेकिन तमाम दावों और वादों के बाद भी फास्ट ट्रैक अदालत और जल्द-जल्द से सज़ा सुनाए जाने की दर में कोई बदलाव नहीं आया।

nirbhaya case
Nirbhaya gang rape
Nirbhaya convicts hanged
National women commission
crime against women
exploitation of women
violence against women

Related Stories

मायके और ससुराल दोनों घरों में महिलाओं को रहने का पूरा अधिकार

तेलंगाना एनकाउंटर की गुत्थी तो सुलझ गई लेकिन अब दोषियों पर कार्रवाई कब होगी?

यूपी : महिलाओं के ख़िलाफ़ बढ़ती हिंसा के विरोध में एकजुट हुए महिला संगठन

बिहार: आख़िर कब बंद होगा औरतों की अस्मिता की क़ीमत लगाने का सिलसिला?

यूपी से लेकर बिहार तक महिलाओं के शोषण-उत्पीड़न की एक सी कहानी

बिहार: 8 साल की मासूम के साथ बलात्कार और हत्या, फिर उठे ‘सुशासन’ पर सवाल

मध्य प्रदेश : मर्दों के झुंड ने खुलेआम आदिवासी लड़कियों के साथ की बदतमीज़ी, क़ानून व्यवस्था पर फिर उठे सवाल

बिहार: सहरसा में पंचायत का फरमान बेतुका, पैसे देकर रेप मामले को रफा-दफा करने की कोशिश!

बिहार: मुज़फ़्फ़रपुर कांड से लेकर गायघाट शेल्टर होम तक दिखती सिस्टम की 'लापरवाही'

यूपी: बुलंदशहर मामले में फिर पुलिस पर उठे सवाल, मामला दबाने का लगा आरोप!


बाकी खबरें

  • Muzaffarpur
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लापरवाही : छह महीने बाद भी बच्चों को नहीं मिली किताबें, अभिभावकों को चिंता
    05 Oct 2021
    विभाग की ओर से पहली से आठवीं कक्षा के लिए 8.95 लाख सेट किताब की डिमांड राज्य मुख्यालय को भेजी गयी थी, जिसमें केवल पांच हज़ार छात्र-छात्राओं को ही किताब मिल सकी हैं।
  • Molnupiravir
    संदीपन तालुकदार
    क्या है मोल्नुपिरवीर? जिसे कोविड-19 के ख़िलाफ़ लड़ाई में माना जा रहा है ‘गेमचेंजर‘
    05 Oct 2021
    दवा निर्माता मर्क एंड कंपनी ने COVID-19 के ख़िलाफ़ एक नई एंटीवायरल दवा 'मोल्नुपिरवीर' को लेकर एक अध्ययन के परिणाम को प्रकाशित किया है। इसके परिणाम बताते हैं कि ये दवा अस्पताल में भर्ती होने की…
  • TMC
    रबींद्र नाथ सिन्हा
    ममता बनर्जी के कांग्रेस विरोधी सुर और भवानीपुर में बड़ी जीत के मायने क्या हैं? 
    05 Oct 2021
    टीएमसी अन्य राज्यों में अपने पदचिन्हों को विस्तार देने के क्रम में लगी हुई है, लेकिन कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि सीएम के भतीजे के खिलाफ ईडी का मामला उनकी इस आक्रामकता को कुछ हद तक सीमित…
  • VC is running BJP RSS agenda in university
    न्यूज़क्लिक टीम
    "विश्वविद्यालय में भाजपा आरएसएस का एजेंडा चला रहे है वीसी"
    05 Oct 2021
    चंडीगढ़ पुलिस ने 1 अक्टूबर को पंजाब यूनिवर्सिटी उप-कुलपति से मारपीट के आरोप में चार छात्रों पर मामला दर्ज किया| यह मामला एक महीने पहले का है जब यूनिवर्सिटी उप-कुलपति राज कुमार 1 सितम्बर को हो रहे…
  • N. V. Ramana
    सोनिया यादव
    मौजूदा समय में पुलिस-प्रशासन की कार्रवाई को लेकर मुख्य न्यायाधीश की नाराज़गी गंभीर है!
    05 Oct 2021
    बीते कुछ समय में देश के समक्ष ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो शासन-प्रशासन की साठ-गांठ के साथ पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हैं। साल 2020 का दिल्ली दंगा हो या हैदराबाद की महिला डॉक्टर के साथ बलात्कार…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License