NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
क्या नीतीश सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने में नाकाम हो गई?
नीतीश सरकार के योजना एवं विकास मंत्री ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "यह मांग पुरानी हो चुकी है। ...अब हम विशेष राज्य के दर्जे की मांग नहीं करेंगे। बिहार के हर क्षेत्र में विशेष सहायता की मांग की जाएगी जिसकी ज़रुरत भी है।"
एम.ओबैद
29 Sep 2021
क्या नीतीश सरकार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने में नाकाम हो गई?
सौजन्यः आज तक

बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। नीतीश सरकार के योजना एवं विकास मंत्री के बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दिलाने को लेकर दिए गए बयान के बाद सियासी गलियारे में भूचाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इस बयान के बाद नीतीश कुमार पर हमला बोल दिया है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक नीतीश सरकार के योजना एवं विकास मंत्री बिजेंद्र यादव ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि "यह मांग पुरानी हो चुकी है। यहां तक कि कमेटी की रिपोर्ट भी आ गई फिर भी विशेष राज्य का दर्जा नहीं मिला। अब हम विशेष राज्य के दर्जे की मांग नहीं करेंगे। बिहार के हर क्षेत्र में विशेष सहायता की मांग की जाएगी जिसकी जरुरत भी है।" बिहार सरकार के मंत्री के इस बयान के बाद नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार पर हमला बोल दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग पटना विश्वविद्यालय को केंद्रीय विश्वविद्यालय का दर्जा नहीं दिला पाए वो बिहार को विशेष राज्य का दर्जा कहां दिला पाएंगे? 

तेजस्वी ने कहा कि नीतीश कुमार अब थक चुके हैं। उन्हें सिर्फ कुर्सी की चिंता है। इसीलिए अपमान और विरोधाभास सहते हुए कुर्सी से चिपके हैं। तेजस्वी यादव ने तंज कसते हुए कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अगर महागठबंधन को बिहार की 40 में से 39 सीटें मिलती है तो जो भी प्रधानमंत्री बनेंगे वह स्वयं पटना आकर बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की घोषणा करेंगे।

इससे पहले कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और एमएलसी प्रेमचंद्र मिश्रा ने आरोप लगाया था कि जेडीयू-बीजेपी सरकार शुरू से ही इस मुद्दे पर राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा था कि विशेष राज्य के दर्जे के सवाल पर जब केंद्र सरकार नीतीश कुमार की बात नहीं मान रही है तो जेडीयू को एनडीए गठबंधन से अलग हो जाना चाहिए।

साल 2012 में जब इस मुद्दे को जोर शोर से उछाला जा रहा था तब बीबीसी से बात करते हुए अर्थशास्त्री प्रोफेसर नवल किशोर चौधरी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा था कि ''मेरी राय में विशेष राज्य का मुद्दा सत्ता पक्ष की तरफ़ से इसलिए उछाला जा रहा है क्योंकि एक-एक कर सामने आती जा रही उसकी विफलताओं पर से लोगों का ध्यान हट जाए। दूसरी बात ये कि संदेहास्पद ग्रोथ रेट का ढोल मीडिया के ज़रिए पिटवाने वाली ये सरकार अपने शासनकाल में बढ़ती ग़रीबी, भ्रष्टाचार और बिगड़ती क़ानून-व्यवस्था को छिपाने और केंद्र की बेइंसाफी पर शोर मचाने का बहाना ढूंढती रही है। अब ये विशेष राज्य वाला बहाना नीतीश जी को सबसे कारगर लगता है।''

सीपीआई (एमएल) के महासचिव दीपंकर भट्टाचार्य ने इसे जनहित के मूलभूत सवालों को टालने वाला सियासी ढकोसला करार दिया था। उन्होंने कहा था कि, ''नीतीश जी के लिए तो यह एक राजनीतिक सौदेबाजी का मुद्दा है, या कहें कि उनकी सोची-समझी राजनीतिक चाल है। जब वह केंद्र में मंत्री थे, उसी समय सीपीआई (एमएल) ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग लेकर संसद के सामने बड़ा प्रदर्शन किया था। उस समय उनकी ख़ामोशी और अब उनका शोर एक ढोंग नहीं तो और क्या है?''

यूपीए काल में विशेष दर्जा की मांग को नीतीश ने जोर-शोर से उठाया

केंद्र में जब यूपीए सरकार थी तब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग जोर शोर से उठाते रहे हैं। एनडीसी की बैठकों में नीतीश इसकी मांग करते रहे हैं। 15 मार्च 2009 को एनडीए की लुधियाना में हुई महारैली में उन्होंने इस मांग को पुरजोर तरीके उठाया था। इस रैली में घटक दलों के बड़े नेता मौजूद थें। गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री और मौजूदा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी इस महारैली में मौजूद थें। इसी महारैली में कहा गया था कि विशेष राज्य का दर्जा दो और समर्थन पाओ। ज्ञात हो कि लोकसभा चुनाव इसी साल हुए थे और इसमें जेडीयू को 20 सीटें हासिल हुई थी, वहीं एक साल बाद बिहार में विधानसभा चुनाव होने थे। 

बता दें कि साल 2005 में हुए बिहार विधानसभा चुनावों में जेडीयू और गठबंधन की जीत के बाद नीतीश कुमार राज्य के मुख्यमंत्री बने। और साल 2005 के बाद से हुए विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी और गठबंधन की जीत के बाद वे लगातार मुख्यमंत्री बनते रहे हैं। साल 2015 में बिहार विधानसभा चुनावों में नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू एनडीए से अलग होकर आरजेडी के साथ चुनाव लड़ी और गठबंधन की जीत के बाद वे फिर बिहार के मुख्यमंत्री बने।

पटना में अधिकार रैली

साल 2012 में 4 नवंबर को नीतीश कुमार ने बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को तेज करते हुए राजधानी पटना के गांधी मैदान अधिकार रैली आयोजित की थी। इस दौरान उन्होंने कहा था कि जिस प्रकार बिहार के इतिहास के बिना देश का इतिहास नहीं लिखा जा सकता है उसी प्रकार बिना बिहार के विकास के देश के समावेशी विकास की संकल्पना नहीं की जा सकती है। इसी मंच से उन्होंने बिहार को विशेष दर्जा की मांग को लेकर दिल्ली में अधिकार रैली आयोजित करने का ऐलान किया था।

दिल्ली में अधिकार रैली

साल 2013 में 17 मार्च को दिल्ली के रामलीला मैदान में जेडीयू की तरफ से बिहार के विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को लेकर अधिकार रैली का आयोजन किया गया था। इस रैली में भी पार्टी के बड़े नेता मौजूद थे। इस रैली को सफल बनाने के लिए पार्टी के समर्थक भारी संख्या में बिहार से दिल्ली आए थे। इस मंच से भी उन्होंने केंद्र से बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग की थी। उन्होंने कहा था कि "यही सही समय कि केंद्र बिहार को विशेष राज्य का दर्जा दे। सुविधाओं के मामले में बिहार की उपेक्षा हुई है। बिहार विशेष राज्य बना तो विकास होगा। अगर केंद्र की ओर से राज्य को पूरा सहयोग मिले तो वह जल्द ही विकसित राज्यों में शामिल हो जाएगा। विशेष दर्जे के मानदंडों में भी बदलाव होने जरूरी है।"

नीतीश ने किया था बिहार बंद का आह्वान

साल 2014 में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने विशेष राज्‍य का कार्ड खेला था। बिहार को विशेष राज्‍य का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर मुख्‍यमंत्री ने 2 मार्च को राज्‍यव्‍यापी बंद का आह्वान किया था। मुख्यमंत्री खुद गांधी मैदान में धरने पर बैठे थे। सीएम आवास से गांधी मैदान जाते समय उन्होंने एक बार फिर सवाल खड़ा करते हुए कहा था सीमांध्र को ही विशेष राज्‍य का दर्जा क्‍यों दिया जा रहा है?

बिहार बंद का असर राज्‍यभर में देखने को मिला था। जदयू कार्यकर्ताओं ने मनेर के पास नेशनल हाइवे संख्‍या 30 पर आगजनी कर यातायात को बाधित किया था।

विशेष राज्य का दर्जा मिलने की परिस्थितियां


विशेष राज्य के दर्जे का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है। किसी राज्य की भौगोलिक, सामाजिक, आर्थिक और संसाधन की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा दिया जाता है। केंद्र सरकार उपरोक्त परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विशेष राज्य का दर्जा देती है।

साल 1969 में पांचवें वित्त आयोग के अनुशंसा पर केंद्र ने तीन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा दिया था। एनडीसी अर्थात नेशनल डेवलपमेंट काउंसिल ने पहाड़ी क्षेत्र, दुर्गम क्षेत्र, कम जनसंख्या, आदिवासी क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर के साथ साथ प्रति व्यक्ति आय और कम राजस्व के आधार पर इन राज्यों की पहचान की थी।


किन राज्यों को कब मिला विशेष राज्य का दर्जा
 

देश के कुल ग्यारह राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त है। सबसे पहले तीन राज्यों को विशेष राज्य का दर्जा मिला था। इनमें असम (1969), नागालैंड (1969), और जम्मू-कश्मीर (1969) हैं। वहीं हिमाचल प्रदेश को जनवरी 1971 और सिक्किम को जनवरी 1975 में दर्जा मिला था जबकि मणिपुर, मेघालय और त्रिपुरा को जनवरी 1972 में ये दर्जा मिला था। अरूणाचल प्रदेश और मिजोरम को फरवरी 1987 में विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त हुआ था जबकि उत्तराखंड को सितंबर 2011 में दिया गया था।

विशेष राज्य का दर्जा मिलने के फ़ायदे

विशेष राज्य का दर्जा प्राप्त राज्यों को केंद्र सरकार से 90 प्रतिशत अनुदान मिलता है और बाकी 10 प्रतिशत रकम बिना किसी ब्याज के मिलती है। जिन राज्यों को विशेष दर्जा प्राप्त नहीं है उन्हें केवल 30 प्रतिशत राशि ही अनुदान के रूप में मिलती है और 70 प्रतिशत राशि उनपर केंद्र का कर्ज होता है। इसके अलावा विशेष दर्जा वाले राज्यों को कस्टम, एक्साइज, कॉर्पोरेट, इनकम टैक्स में भी छूट मिलती है। केंद्र सरकार हर साल प्लान बजट बनाती है और इस प्लान बजट में से 30 प्रतिशत राशि विशेष दर्जा प्राप्त राज्यों को मिलता है। अगर विशेष राज्य जारी बजट को खर्च नहीं कर पाती है तो पैसा अगले वित्त वर्ष के लिए जारी कर दिया जाता है।

 

Nitish Kumar
Bihar
Special Status
Demand
centre
UPA
NDA

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • Sustainable Development
    सोनिया यादव
    सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत काफी पीछे: रिपोर्ट
    03 Mar 2022
    एनुअल स्टेट ऑफ इंडियाज एनवायरमेंट 2022 रिपोर्ट के मुताबिक सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने में भारत फिलहाल काफी पीछे है। ऐसे कम से कम 17 प्रमुख सरकारी लक्ष्य हैं, जिनकी समय-सीमा 2022 है और धीमी गति…
  • up elections
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पूर्वांचल की जंग: 10 जिलों की 57 सीटों पर सामान्य मतदान, योगी के गोरखपुर में भी नहीं दिखा उत्साह
    03 Mar 2022
    इस छठे चरण में शाम पांच बजे तक कुल औसतन 53.31 फ़ीसद मतदान दर्ज किया गया। अंतिम आंकड़ों का इंतज़ार है। आज के बाद यूपी का फ़ैसला बस एक क़दम दूर रह गया है। अब सात मार्च को सातवें और आख़िरी चरण के लिए…
  • election
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी चुनाव: बस्ती के इस गांव में लोगों ने किया चुनाव का बहिष्कार
    03 Mar 2022
    बस्ती जिले के हर्रैया विधानसभा में आधा दर्ज़न गांव के ग्रामीणों ने मतदान बहिष्कार करने का एलान किया है। ग्रामीणों ने बाकायदा गांव के बाहर इसका बैनर लगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि जब तक उनकी…
  • gehariyaa
    एजाज़ अशरफ़
    गहराइयां में एक किरदार का मुस्लिम नाम क्यों?
    03 Mar 2022
    हो सकता है कि इस फ़िल्म का मुख्य पुरुष किरदार का अरबी नाम नये चलन के हिसाब से दिया गया हो। लेकिन, उस किरदार की नकारात्मक भूमिका इस नाम, नामकरण और अलग नाम की सियासत की याद दिला देती है।
  • Haryana
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने
    03 Mar 2022
    यूनियन नेताओं ने गुरुवार को कहा पंचकुला-यमुनानगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बरवाला टोल प्लाजा पर हड़ताली कार्यकर्ताओं और सहायकों पर  हरियाणा पुलिस ने लाठीचार्ज  किया।  
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License