NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
निज़ामुद्दीन मरकज़: अदालत ने पुलिस को आवासीय हिस्से की चाबियां सौंपने का निर्देश दिया
अदालत ने कहा, ‘‘धारा 60 (मौखिक साक्ष्य पर साक्ष्य अधिनियम), धारा 310 (स्थानीय निरीक्षण पर दंड प्रक्रिया संहिता) क्या है? आपने कौन सी धाराएं रखी हैं? किसी जगह को निगरानी में रखने का मतलब यह नहीं है कि आप उस पर ताला लगा दें। फोटो लें और वहां से हट जाएं। क्या बरामद हुआ? मामला केवल इतना था कि लोग वहां रह रहे थे।’’
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
23 Aug 2021
nizamuddin markaz

नयी दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शहर की पुलिस को निज़ामुद्दीन मरकज के आवासीय हिस्से की चाबी वहां रहने वालों को सौंपने का सोमवार को निर्देश दिया। पिछले साल तबलीगी जमात के एक कार्यक्रम के संबंध में एक प्राथमिकी के मद्देनजर अधिकारियों द्वारा इसे बंद कर दिया गया था।

जमात नेता मौलाना साद की मां की याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति योगेश खन्ना ने निर्देश दिया कि उन्हें दो दिनों के भीतर चाबियां सौंपी जाएं और स्पष्ट किया कि अभी के लिए वहां रहने वाले संपत्ति के किसी भी गैर-आवासीय हिस्से में प्रवेश नहीं कर सकते हैं।

अदालत ने एक निचली अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर नोटिस जारी किया जिसमें याचिकाकर्ता जो एक वरिष्ठ नागरिक हैं, उन्हें उनके आवास तक जाने से वंचित किया गया था और आवासीय परिसर को बंद करने के किसी भी आदेश के अस्तित्व पर पुलिस से स्थिति रिपोर्ट मांगी गई थी।

न्यायाधीश ने कहा, ‘‘इस बीच, आवासीय परिसर की चाबियां आज से दो दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं। याचिकाकर्ता को अगले आदेश तक मरकज परिसर के किसी अन्य हिस्से में प्रवेश नहीं करने का निर्देश दिया जाता है।’’ अदालत ने कहा, ‘‘निस्सन्देह परिसर को सील करने का कोई आदेश नहीं है और एक अप्रैल, 2020 से आवासीय परिसर में ताला लगा हुआ है।’’

अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता परिवार के ग्यारह सदस्यों के साथ परिसर में रह रहा था और कहा कि उन्हें अतिथि गृह में रहने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। न्यायमूर्ति खन्ना ने कहा, ‘‘हम लोगों को उनके अपने घर के अलावा अतिथि गृह या किसी अन्य स्थान पर रहने की अनुमति नहीं दे सकते।’’

अदालत ने कहा, ‘‘धारा 60 (मौखिक साक्ष्य पर साक्ष्य अधिनियम), धारा 310 (स्थानीय निरीक्षण पर दंड प्रक्रिया संहिता) क्या है? आपने कौन सी धाराएं रखी हैं? किसी जगह को निगरानी में रखने का मतलब यह नहीं है कि आप उस पर ताला लगा दें। फोटो लें और वहां से हट जाएं। क्या बरामद हुआ? मामला केवल इतना था कि लोग वहां रह रहे थे।’’

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका जॉन ने कहा कि ये धाराएं वर्तमान मामले पर लागू नहीं हैं और उनके मुवक्किल का आवास नहीं छीना जा सकता।

अभियोजन पक्ष के वकील अधिवक्ता अमित अहलावत ने कहा कि निवासी प्रासंगिक समय पर, कोविड-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए रह रहे थे।

वकील फुजैल अहमद अय्यूबी के माध्यम से दाखिल अपनी याचिका में, याचिकाकर्ता खदीजा ने कहा है कि 31 मार्च, 2020 को, अधिकारियों द्वारा सैनिटाइजेशन के कथित उद्देश्य के लिए पूरी निज़ामुद्दीन मस्जिद को खाली करा लिया गया था और बंद कर दिया गया था। अधिकारियों ने आवासीय हिस्से सहित मरकज की चाबियां एक अप्रैल, 2020 को दिल्ली पुलिस को सौंप दी थी।

याचिका में कहा गया है कि चाबियां सौंपे हुए कई महीने बीत जाने के बावजूद याचिकाकर्ता या उसके परिवार के सदस्यों को अपने आवास में प्रवेश करने से रोका जा रहा है।

मामले की अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।

आपको बता दें पिछले एक साल में इस मरकज के नाम पर इतनी राजनीति हुई कि भारत में कोरोना फैलने के लिए इसे ही दोषी ठहराया गया। हालांकि बाद में कई अदालतों ने सरकार के इस तरह के निष्कर्ष की कलई खोल दी। कई बार अदलतों में सरकारों को फटकार भी लगी। लेकिन इन सबके बाद भी मरकज एक साल से बंद है।

कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान मरकज में आयोजित तबलीगी जमात कार्यक्रम और विदेशियों के ठहरने के संबंध में महामारी रोग अधिनियम, आपदा प्रबंधन अधिनियम, विदेश अधिनियम और दंड संहिता के विभिन्न प्रावधानों के तहत एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी। मगर, सच्चाई तो यह भी है कि जब 15 मार्च को तब्लीग़ी जमात की सभा जुटी थी, तब संसद सत्र चल रहा था। मध्य प्रदेश के विधायकों को बैंगलोर में एक साथ रखा गया था। कई सामूहिक सभायें आयोजित की गयी थीं।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

Nizamuddin Markaz
tabligi jamat
Delhi High court

Related Stories

दिल्ली उच्च न्यायालय ने क़ुतुब मीनार परिसर के पास मस्जिद में नमाज़ रोकने के ख़िलाफ़ याचिका को तत्काल सूचीबद्ध करने से इनकार किया

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

मैरिटल रेप : दिल्ली हाई कोर्ट के बंटे हुए फ़ैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, क्या अब ख़त्म होगा न्याय का इंतज़ार!

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

अदालत ने ईडब्ल्यूएस श्रेणी के 44 हजार बच्चों के दाख़िले पर दिल्ली सरकार से जवाब मांगा

दिल्ली: तुगलकाबाद के सांसी कैंप की बेदखली के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने दी राहत

मैरिटल रेप: घरेलू मसले से ज़्यादा एक जघन्य अपराध है, जिसकी अब तक कोई सज़ा नहीं

मैरिटल रेप को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट सख्त, क्या अब ख़त्म होगा महिलाओं का संघर्ष?

ख़बर भी, नज़र भी: भाजपा के अपने ही बाग़ी हुए जा रहे हैं

पायलटों की सेवाएं समाप्त करने का निर्णय खारिज किये जाने के खिलाफ एअर इंडिया की अर्जी अदालत ने ठुकराई


बाकी खबरें

  • भाषा
    ब्रिटेन के प्रधानमंत्री इस महीने के अंत में भारत आ सकते हैं
    05 Apr 2022
    जॉनसन की भारत यात्रा 22 अप्रैल के आसपास हो सकती है। पिछले साल कोविड-19 महामारी के कारण दो बार ब्रिटेन के प्रधानमंत्री को भारत का दौरा रद्द करना पड़ा था। 
  • भाषा
    आगे रास्ता और भी चुनौतीपूर्ण, कांग्रेस का फिर से मज़बूत होना लोकतंत्र के लिए ज़रूरी: सोनिया गांधी
    05 Apr 2022
    ‘‘हम भाजपा को, सदियों से हमारे विविधतापूर्ण समाज को एकजुट रखने और समृद्ध करने वाले सौहार्द व सद्भाव के रिश्ते को नुकसान नहीं पहुंचाने देंगे।’’
  • भाषा
    'साइबर दूल्हो' से रहें सावधान, साइबर अपराध का शिकार होने पर 1930 पर करें फोन
    05 Apr 2022
    अगर आप अपने परिवार के किसी सदस्य की शादी के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन विज्ञापन देख रहे हैं, तो थोड़ा होशियार हो जाएं। साइबर ठग अब शादी के नाम पर भी ठगी करने में जुट गए हैं। देश के महानगरों मे अब तक इस तरह…
  • मीनुका मैथ्यू
    श्रीलंकाई संकट : राजनीति, नीतियों और समस्याओं की अराजकता
    05 Apr 2022
    वित्तीय संस्थानों के कई हस्तक्षेपों के बावजूद श्रीलंकाई सरकार अर्थव्यवस्था की व्यवस्थित गिरावट को दूर करने में विफल रही है।
  • इंद्रजीत सिंह
    विभाजनकारी चंडीगढ़ मुद्दे का सच और केंद्र की विनाशकारी मंशा
    05 Apr 2022
    इस बात को समझ लेना ज़रूरी है कि चंडीगढ़ मुद्दे को उठाने में केंद्र के इस अंतर्निहित गेम प्लान का मक़सद पंजाब और हरियाणा के किसानों की अभूतपूर्व एकता को तोड़ना है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License