NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सोनभद्र : अनवर अली लिंचिंग में परिवार को नहीं मिला न्याय
लिंचिंग के एक साल बाद भी, अनवर अली के परिवार को न्याय नहीं मिला है। वादा किया गया मुआवज़ा भी नहीं मिला है। सिस्टम उन्हें सता रहा है और पुलिस ने उनके परिजनों को धारा 111 के तहत नोटिस देकर पुलिस कार्यालय में हाज़िरी देने को कह दिया है।
सौरभ शर्मा
12 Mar 2020
Translated by महेश कुमार
सोनभद्र

सोनभद्र : पच्चीस वर्षीय हसनैन अनवर शेख़ अपने पिता अनवर अली को न्याय दिलाने के लिए ख़ासी भाग दौड़ और मशक्कत कर रहे हैं, जिन्हें मार्च 2019 में सोनभद्र ज़िले के परसोई गांव में हिंसक भीड़ ने मार दिया था।

हसनैन ने न्यूज़क्लिक को बताया कि हादसे के बाद से दो होली बीत चुकी है लेकिन अफ़सरान और प्रशासन मामले की जांच करन में एक इंच भी आगे नहीं बढ़ा है, जिसकी वजह से परिवार को काफ़ी परेशानी झेलनी पड़ रही है।

उन्होंने कहा, "हम ग़रीब लोग हैं और हमें विस्थापित होकर परसोई से ओबरा शहर आना पड़ा, केवल इसलिए कि हम गाँव में डर में जी रहे थे और उन हमलावरों का हम पर दबाव था जिन्होंने इमाम चौक को हटाने के लिए मेरे पिता का क़त्ल किया था।” इमाम चौक एक पवित्र इस्लामी संरचना है जहाँ ताज़िया रखा जाता है।

हसनैन ने कहा कि जब से उनके पिता की मृत्यु हुई है, शायद ही परिवार गांव का दौरा कर पाया है। हालाँकि, उनकी माँ अभी भी उसी गाँव के घर में रहती हैं क्योंकि इसे उनके पिता ने बनवाया था।

हसनैन ने बताया, “वह उन्हीं यादों के साथ जीना चाहती है। मेरी माँ डरती है कि किसी दिन एक भीड़ आएगी और इमाम चौक को नुकसान पहुँचाएगी, ठीक उसी तरह जैसे मेरे पिता की हत्या की गई थी।” हसनैन ने कहा कि उन्हें लगता है कि किसी ने उनके गांव को "श्राप" दे दिया है क्योंकि ऐसी घटनाएं पहले कभी नहीं हुई थीं और लोग इलाके में अक्सर शांति से रहते थे। उन्होंने आगे कहा, “लेकिन अब, लोग हमारे ख़िलाफ़ हैं। वे हमें देखना भी नहीं चाहते हैं और ये वही लोग हैं, जिनके साथ मैं बचपन से बड़ा हुआ, साथ खेला था।”

अनवर ने आरोप लगाया कि जो कुछ भी हुआ है, वह उसके पिता की लिंचिंग के मुख्य आरोपी रविन्द्र खरवार के कारण हुआ है, जो राजकीय स्कूल में एक शिक्षक है।

“न तो उसे गिरफ़्तार किया गया और न ही पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया। जब मेरे पिता की मृत्यु हुई थी तो वे गाँव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) संगठन को चलाते थे। वे एक प्रभावशाली व्यक्ति हैं जिनके राजनेताओं से अच्छे संबंध हैं।” अनवर ने आगे बताया कि वह ज़िले के एक अलग ब्लॉक में एक प्राथमिक स्कूल में स्थानान्तरण लेने में भी कामयाब रहा, जहाँ वह नियमित रूप से बच्चों को पढ़ाने जा रहा है।

न्यूज़क्लिक ने चोपन ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय का दौरा किया और स्थानीय लोगों ने इस बात की पुष्टि की कि रविंदर खरवार वास्तव में वहां पढ़ा रहे हैं। हालांकि, रविवार के बाद से, स्कूल के प्रधानाध्यापक टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे और स्कूल रजिस्टर हमारी पहुंच से परे था।

केस में कार्यवाही में हुई प्रगति के बारे में पूछे जाने पर, ज़िला पुलिस कार्यालय (एस.पी. कार्यालय) ने कहा कि उन्हें अपने रिकोर्ड्स को देखना होगा। उस समय ओबरा पुलिस स्टेशन में 19 लोगों के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147, 148, 149, 295 और 302 के तहत केस दर्ज किया गया था। नाबालिगों सहित तेरह लोगों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया था, लेकिन बाद में सबको रिहा कर दिया गया था।

अली की पोस्टमार्टम रिपोर्ट, जिसे न्यूज़क्लिक ने हासिल किया था, उसमें स्पष्ट रूप से लिंचिंग का उल्लेख किया गया था कि अनवर अली पर एक धारदार हथियार से हमला किया गया था और उनके शरीर पर कई चोटों के निशान पाए गए थे। हालांकि, तत्कालीन पुलिस अधीक्षक (एसपी), सालमंतज जयप्रताज पाटिल इस केस को हत्या के मामले के रूप में जांच करने पर अड़े थे, उन्होंने ज़ोर देकर कहा था कि लिंचिंग से पहले दोनों समुदायों के बीच छह महीने से विवाद चल रहा था।

‘पीड़ित’ से एक संभावित ‘ख़तरा’ 

ज़िला पुलिस ने पीड़ित के परिवार को ‘द कोड ऑफ़ क्रिमिनल प्रोसीज़र’ (सीआरपीसी) की धारा 111 के तहत यह कहकर कि “वे परसोई गाँव में शांति के लिए ख़तरा पैदा कर सकते हैं” नोटिस दे दिया है। उपरोक्त नोटिस को उप-ज़िला मजिस्ट्रेट ने जारी किया है और पुलिस ने उसे परिवार को दिया है।

photo.png

परिजन बताते हैं, “नोटिस मिलने के बाद, से हम भाइयों को एसडीएम कार्यालय जाना पड़ता है और हाज़िरी लगानी पड़ती है। यह हमारी आजीविका को बहुत अधिक प्रभावित करता है क्योंकि हम बढ़ई हैं और जब भी हमें वहाँ जाना होता है तो हम उस दिल की दिहाड़ी खो देते हैं। हमें नहीं पता कि आख़िर हमने क्या अपराध किया है।”

न कोई राहत और न ही कोई मुआवज़ा 

अनवर ने दावा किया कि उनके पिता की मौत के बाद एसडीएम और ज़िला प्रशासन ने मुआवज़े की घोषणा की थी। हालांकि, जब वह अधिकारी के कार्यालय में जानकारी लेने गया, तो यह कहते हुए उसे भगा दिया गया कि ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई थी।

अनवर ने कहा, “एसडीएम साहब ने हमें यह कहते हुए दुत्कार दिया कि उन्होंने ऐसी कोई घोषणा नहीं की है। मेरे पिता के मारे जाने के अगले दिन, उन्होंने वास्तव में हमसे कहा था कि हमें प्रशासन से कुछ मुआवज़ा मिलेगा। हम तो केवल अपने पिता के लिए न्याय चाहते थे, लेकिन प्रशासन ने मुवावज़े के झूठे दावे क्यों किए?”

अनवर ने कहा कि अच्छा होता कि अगर हमें कुछ मुआवज़ा मिल जाता क्योंकि हमारे पिता को न्याय दिलाने में हमारी कड़ी मेहनत का बहुत सारा पैसा वकीलों की झोली में जा रहा है।

अंग्रेजी में लिखा मूल आलेख आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं।

No Justice for Lynched Man’s Family; Kin Slapped with Section 111 CrPC Notice

Sonbhadra lynching
Anwar Ali lynching case
Mob lynching case
Uttar Pradesh Mob Lynching
mob lynching
sonbhadra
communal violence
mob violence

Related Stories

भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल

सिवनी मॉब लिंचिंग के खिलाफ सड़कों पर उतरे आदिवासी, गरमाई राजनीति, दाहोद में गरजे राहुल

रुड़की : दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवार ने घर के बाहर लिखा 'यह मकान बिकाऊ है', पुलिस-प्रशासन ने मिटाया

मध्यप्रदेश: गौकशी के नाम पर आदिवासियों की हत्या का विरोध, पूरी तरह बंद रहा सिवनी

जोधपुर में कर्फ्यू जारी, उपद्रव के आरोप में 97 गिरफ़्तार

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

बिना अनुमति जुलूस और भड़काऊ नारों से भड़का दंगा

तो इतना आसान था धर्म संसद को रोकना? : रुड़की से ग्राउंड रिपोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने जहांगीरपुरी में अतिक्रमण रोधी अभियान पर रोक लगाई, कोर्ट के आदेश के साथ बृंदा करात ने बुल्डोज़र रोके


बाकी खबरें

  • yogi bulldozer
    सत्यम श्रीवास्तव
    यूपी चुनाव: भाजपा को अब 'बाबा के बुलडोज़र' का ही सहारा!
    26 Feb 2022
    “इस मशीन का ज़िक्र जिस तरह से उत्तर प्रदेश के चुनावी अभियानों में हो रहा है उसे देखकर लगता है कि भारतीय जनता पार्टी की तरफ से इसे स्टार प्रचारक के तौर पर इस्तेमाल किया जा रहा है।”
  • Nagaland
    अजय सिंह
    नगालैंडः “…हमें चाहिए आज़ादी”
    26 Feb 2022
    आफ़्सपा और कोरोना टीकाकरण को नगालैंड के लिए बाध्यकारी बना दिया गया है, जिसके ख़िलाफ़ लोगों में गहरा आक्रोश है।
  • women in politics
    नाइश हसन
    पैसे के दम पर चल रही चुनावी राजनीति में महिलाओं की भागीदारी नामुमकिन
    26 Feb 2022
    चुनावी राजनीति में झोंका जा रहा अकूत पैसा हर तरह की वंचना से पीड़ित समुदायों के प्रतिनिधित्व को कम कर देता है। महिलाओं का प्रतिनिधित्व नामुमकिन बन जाता है।
  • Volodymyr Zelensky
    एम. के. भद्रकुमार
    रंग बदलती रूस-यूक्रेन की हाइब्रिड जंग
    26 Feb 2022
    दिलचस्प पहलू यह है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने ख़ुद भी फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से सीधे पुतिन को संदेश देने का अनुरोध किया है।
  • UNI
    रवि कौशल
    UNI कर्मचारियों का प्रदर्शन: “लंबित वेतन का भुगतान कर आप कई 'कुमारों' को बचा सकते हैं”
    26 Feb 2022
    यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया ने अपने फोटोग्राफर टी कुमार को श्रद्धांजलि दी। इस दौरान कई पत्रकार संगठनों के कर्मचारी भी मौजूद थे। कुमार ने चेन्नई में अपने दफ्तर में ही वर्षों से वेतन न मिलने से तंग आकर…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License