NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नोएडा सफ़ाईकर्मियों का आरोप : 80 हजार घूस लेकर दी ठेके की नौकरी, 3 महीने बाद काम से निकाला
नोएडा अथॉरिटी के कार्यालय पर सफ़ाई मज़दूरों के 9 दिनों तक चले प्रदर्शन के दौरान शहर की सफ़ाई व्यवस्था लगभग ठप पड़ी हुई थी। इसमें बड़ी संख्या ठेके पर तैनात और ढाई प्रतिशत सफाईकर्मियों की थी।
सत्येन्द्र सार्थक
21 Aug 2020
नोएडा

दस प्रतिशत की ब्याज दर से 80 हजार रुपए कर्ज लेकर मैंने ठेकेदार को दिए थे। केवल 3 महीने तक ही नौकरी कर सकी, 11 जून को 7 लोगों के साथ ही मुझे भी ठेकेदार ने काम से निकाल दिया। अभी तक ठेकेदार ने मुझे किसी भी तरह का भुगतान नहीं दिया है। एकमुश्त दी गई राशि और वेतन की मांग करने पर ठेकेदार और उसके आदमी मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। मेरे पास अभी भी आई कार्ड है इसके बिनाह पर मैंने कानूनी कार्रवाई की बात कही तो ठेकेदार ने धमकी दी “तेरे पति को निकाल कर उसकी जगह तूझे काम पर रख लूँगा, बोल कैसा रहेगा?” नोएडा प्राधिकरण के प्रशासनिक कार्यालय पर सफाई कर्मचारियों के प्रदर्शन में शामिल होने आई रीतू ने यह शब्द कहे।

noida1.JPG

ठेके पर सफाईकर्मी की नौकरी के लिए ब्याज पर इतनी बड़ी रकम उठाने के सवाल पर वह कहती हैं “कोठियों में काम करती थी सोचा, सफाईकर्मी की नौकरी अपेक्षाकृत सुविधाजनक रहेगी लेकिन हुआ ठीक उल्टा। कोठियों का काम भी छूट गया, सफाईकर्मी की नौकरी भी नहीं रही और कर्ज का दबाव भी बढ़ता जा रहा है। मेरे 3 बच्चे हैं पति की कमाई पहले ही कम पड़ रही थी अब हर महीने ब्याज चुकाने के कारण घर का खर्च भी ठीक से नहीं चल पा रहा है। सफाई कर्मचारियों के मांगों के प्रति नोएडा प्राधिकरण की उदासीनता से भविष्य के प्रति अनिश्चितता बढ़ती जा रही है।”  

रीतू की बात पूरी भी नहीं हुई थी कि पास में ही बैठी सुनीता, गीता, ज्योति, शीला, विष्णु और गीता ( गीता नाम की दो महिलाएं थीं ) भी अपने साथ हुए धोखे के बारे में बताने लगीं। हाथों में आई कार्ड लिए उन्होंने बताया कि नौकरी देने का झांसा देकर प्रत्येक से ठेकेदार ने 80 हजार रुपए लिए थे। लेकिन अब नौकरी, वेतन और पैसा कुछ भी नहीं दे रहा। उनके अनुसार ऐसे सफाईकर्मियों की संख्या नोएडा में 50 से अधिक है। इन सभी को दो से तीन महीने तक काम करवाने के बाद 11 जून से घर बैठा दिया गया है।

noida2.JPG

पीड़ित महिलाओं ने बताया “हमने पुलिस में शिकायत की तो पुलिसकर्मियों ने कहा यह मामला नोएडा अथॉरटी का है वहीं शिकायत करो तब कार्रवाई होगी। फिर अथारिटी में शिकायत किया तो उन्होंने बताया मामला पुलिस का है अथारिटी इसमें कुछ नहीं कर सकती है। लेकिन हमने अथारिटी को शिकायती पत्र दे दिया था जिस पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।”

वरिष्ठ परियोजना अभियंता, जन स्वास्थ्य एससी मिश्रा ने बताया “सफाईकर्मियों की मांगों पर विचार हो रहा है। जहां तक ठेकेदार द्वारा पैसे लेने की बात मैंने इस मामले को पुलिस को भेजा है, सूचना मिली है कि सफाईकर्मी एफआईआर दर्ज कराने जा रहे हैं। अथॉरिटी इस मामले में कार्रवाई नहीं करेगी। यह पूरी तरह से पुलिस का मामला है।”  

नोएडा अथॉरिटी के कार्यालय पर सफाई मजदूरों के 9 दिनों तक चले प्रदर्शन के दौरान शहर की सफाई व्यवस्था लगभग ठप पड़ी हुई थी। इसमें बड़ी संख्या ठेके पर तैनात और ढाई प्रतिशत सफाईकर्मियों की थी। ढाई प्रतिशत सफाईकर्मियों की संख्या नोएडा प्राधिकरण में 3,211 है जिसमें से करीब 2,000 सफाईकर्मी हैं और ठेका पर तैनात सफाईकर्मियों की संख्या 3,500 है। ढाई प्रतिशत शब्द उन कर्मचारियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है जिनके वेतन का ढाई प्रतिशत कमीशन के तौर पर प्राधिकरण और सफाईकर्मियों के बीच मध्यस्तता करने वाले ठेकेदारों को दिया जाता है। यह प्राधिकरण को करीब 30 वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

प्रदर्शन करने वालों में सैकड़ों की संख्या में ऐसे कर्मचारी शामिल थे जिन्हें मनमाने तरीके से निकाल दिया गया है, एक या दो महीने काम करवाने के बाद भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया है, ईपीएफ में कंपनी का अंशदान नहीं जमा किया गया है, ईएसआईसी की सुविधा नहीं दी गई है या किसी मामूली बात पर निकाल दिया गया है।

कर्मचारियों का आरोप है कि ऐसी शिकायतों के प्रति प्राधिकरण पूरी तरह उदासीन रहता है। बबीता, पिंकी और गुड्डन ने बताया कि ठेकेदार ने उन्हें दो महीने से वेतन नहीं दिया है मांगने पर ठेकेदार काम से निकालने की धमकी देता है।

ठेका सफाईकर्मियों का वेतन 11,600 रुपये प्रतिमाह है। प्राधिकरण करीब एक दर्जन ठेका कंपनियों के द्वारा इनकी तैनाती करता है। मुख्य नियोक्ता होने के बावजूद नोएडा प्राधिकरण इसके प्रति सतर्क नहीं रहता है कि ठेकेदारों द्वारा सफाईकर्मियों से काम लेने के दौरान श्रम कानूनों का पालन किया जाता है या नहीं। जिसके कारण ठेकेदारों द्वारा इनका उत्पीड़न करना आसान हो जाता है।

भारतीय बाल्मीकि समाज मोर्चा के नगर अध्यक्ष ताराचंद गहलोत ने बताया “सफाईकर्मियों को इस वेतन में काम करने में परेशानी नहीं, परेशानी ठेकेदारों के उत्पीड़न से है। यदि अथॉरिटी इसी वेतन पर कर्मचारियों को खुद नियुक्त करे उनको काफी राहत मिलेगी। अथॉरिटी सफाईकर्मियों को जो भुगतान देती है उसका बड़ा हिस्सा ठेकेदार ले लेते हैं और सफाईकर्मियों का उत्पीड़न भी करते हैं।”

ठेका सफाईकर्मियों का आरोप है कि वैसे तो हमारे काम के घंटे निश्चित हैं लेकिन यह ठेकेदार की मर्जी के मोहताज हैं। 40 वर्षीय ओमबीती देवी ने बताया “हमें अपना का खत्म करने के बाद सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करनी पड़ती है, ऐसा नहीं करने पर ठेकेदार गाली-गलौज करता है और काम से निकालने की धमकी देता है। वह काम भी करने पड़ते हैं जो महिला सफाईकर्मियों के नहीं हैं जैसे- रिक्शा चलाना, माली का कार्य और सीवर का मलबा उठाना आदि।”

ठेके पर काम कर रहे सफाई कर्मचारियों को काम किए गए महीने का वेतन अगले महीने की 25 तारीख को मिलता है। ऐसे में जब उन्हें काम से निकाला जाता है तो एक महीने का वेतन उन्हें नहीं दिया जाता है। शीला देवी ने बताया “पहले रविवार को छुट्टी मिलती थी, अब वह नहीं दी जा रही है और ना ही इसका कोई भुगतान किया जाता है। यदि असंतुष्ट कर्मचारी ठेकेदार से किसी तरह की पूछताछ करते हैं तो उनके साथ मारपीट की जाती है।”

सफाईकर्मियों ने अखिल भारतीय सफाई मजदूर कांग्रेस के नेतृत्व में 31 जुलाई को मुख्य कार्यपालक अधिकारी को ज्ञापन सौंपा था। जिसमें चेतावनी दी गई थी कि अगर उनकी मांगों पर विचार नहीं किया जाता है तो 10 अगस्त से प्राधिकरण कार्यालय के बाहर वह प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन के साथ अखबार की एक कटिंग भी संलग्न थी जिसका था शीर्षक था “भारत में सभी संविदा कर्मचारियों को समान काम समान वेतन के आदेश जारी।” ज्ञापन की प्रतिलिपि प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और जिलाधिकारी को भी भेजी गई थी।

सेक्टर 6 में नोएडा अथॉरिटी के प्रशासनिक भवन पर 10 अगस्त से 18 अगस्त तक सफाईकर्मियों का प्रदर्शन चला। जिसके तहत रोजाना 500-600 की संख्या में सफाई कर्मचारी अथारिटी के गेट पर बाहर जमे रहते थे, इनमें महिलाएं भी बड़ी संख्या में शामिल थीं।

नोएडा प्राधिकरण ने प्रदर्शन को देखते हुए ठेकेदारों पर दबाव डालना शुरू कर दिया। 14 अगस्त को जन स्वास्थ्य के वरिष्ठ परियोजना अभियंता ने नोटिस जारी कर ठेकेदारों को चेतावनी देते हुए कहा “5 दिनों से आपके द्वारा अनुबंध में प्रावधानित सेक्टरों एवं ग्रामों में सफाई का कार्य नहीं कराया जा रहा है। आपके सभी कर्मचारी हड़ताल पर जाकर सेक्टर 6 प्राधिकरण कार्यालय पर धरना प्रदर्शन कर रहे हैं......... 14 अगस्त से तुरंत सफाई का कार्य प्रारंभ नहीं किया जाता है तो अनुबंध की शर्तों के अनुसार आपको काली सूची में डालने की कार्यवाही की जाएगी।”

इसके बाद प्राधिकरण प्रशासन ने ठेकेदारों को किए जाने वाले भुगतान में 5 प्रतिशत की कटौती कर दी। साथ ही यह चेतावनी भी दी कि जितने दिनों तक सफाईकर्मी काम नहीं करेंगे उतने दिनों का उनका वेतन काट लिया जाएगा। नतीजन ठेकेदारों ने सफाईकर्मियों पर काम पर लौटने का दबाव बनाया लेकिन प्रदर्शन जारी रहा।

16 अगस्त तक प्राधिकरण के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन नियमित रूप से चलता रहा। लेकिन किसी जिम्मेदार अधिकारी से सफाईकर्मचारियों की समझौते के लिए किसी तरह की बातचीत नहीं हुई। प्राधिकरण पर दबाव बनाने के लिए सफाईकर्मियों ने 17 अगस्त को रैली निकालने की योजना बनाई। तय किया गया कि 17 अगस्त को सफाईकर्मियों बड़ी संख्या में इकट्ठा होकर रैली निकाल पर प्राधिकरण कार्यालय पहुंचकर कर घेराव करेंगे।

पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार नोएडा स्टेडियम के गेट नंबर 5 पर हजारों की संख्या में सफाईकर्मी इकट्ठा हुए। लेकिन पहले से ही भारी संख्या में मौजूद पुलिस फोर्स की चेतावनी के बाद जुलूस निकालने की योजना को स्थगित कर दिया गया। अधिकांश सफाईकर्मी अथारिटी पहुंचे और तय स्थान पर पहले की तरह ही गेट पर जाकर बैठ गए। इस दौरान प्रदर्शन जारी रहा और एक-एक करके वक्ता मंच से अपनी बात रख रहे थे। दोपहर बाद पुलिस ने बलपूर्वक सफाईकर्मियों को प्रदर्शन स्थल से हटा दिया और उनके पोस्टर्स भी उखाड़ कर फेंक दिए।

18 अगस्त को नोएडा अथॉरिटी और सफाईकर्मियों के प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई। पुलिस की मौजूदगी में हुई बातचीत में सफाईकर्मियों से प्रदर्शन समाप्त करने को कहते हुए मांगों पर ठोस कार्रवाई के लिए प्राधिकरण ने 15 दिनों का समय मांगा। प्रदर्शन के दौरान सफाईकर्मियों के नेता कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलने तक धरना जारी रखने की बात कह रहे थे। वहीं, प्राधिकरण ने कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया है।

अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के जिलाध्यक्ष जय प्रकाश पार्चा ने बताया “ढाई प्रतिशत कर्मचारियों ने नियमितीकरण की प्रक्रिया चल रही है और ठेका सफाईकर्मियों का वेतन ढाई प्रतिशत करे बराबर करने के मामले कार्रवाई के लिए अथॉरिटी ने 15 दिनों का समय मांगा है।”

वहीं, उत्तर प्रदेश राज्य सफाई कर्मचारी संघ के नगर अध्यक्ष सोनू कजानिया ने बताया “ प्राधिकरण प्रशासन ने हमारी मांगों पर ठोस कार्रवाई के लिए 15 दिनों का समय मांगा है यदि इस बीच हमें कोई लिखित आश्वासन नहीं मिलता है तो हम फिर से सड़क पर उतरने को मजबूर होंगें।”

सफाईकर्मियों की मांगें-

1- ठेकेदारी प्रथा बंद की जाये और सफाई कर्मचारियों को रेगुलर किया जाए.

2- समान वेतन समान कार्य के तहत सभी सफाई ठेका कर्मचारियों को 17,023 रुपये का भुगतान किया जाए।

3- एक वर्ष में कर्मचारियों को बोनस के तौर पर पूरी सैलरी दी जाए।

4- एमएसडब्लू के कर्मचारियों को भी समान कार्य समान वेतन के तौर पर भुगतान किया जाए।

(सत्येन्द्र सार्थक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

noida
noida safai karmchari
Safai Karmchari Andolan
cleanliness workers
safai karmcharis allehged loot

Related Stories

मुद्दा: आख़िर कब तक मरते रहेंगे सीवरों में हम सफ़ाई कर्मचारी?

#Stop Killing Us : सफ़ाई कर्मचारी आंदोलन का मैला प्रथा के ख़िलाफ़ अभियान

नोएडा की झुग्गी-झोपड़ी पुनर्वास योजना ख़त्म, अब भी अधर में लटका है ग़रीबों का भविष्य

नोएडा : प्राइवेट कोचिंग सेंटर पर ठगी का आरोप, सीटू-डीवाईएफ़आई ने किया प्रदर्शन

नोएडा में सांसद के आवास का घेराव करने के आरोप में करीब 600 किसानों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

झुग्गियों को उजाड़ने के ख़िलाफ़ एवं उनके पुनर्वास की मांग को लेकर माकपा का नोएडा प्राधिकरण पर प्रदर्शन, सौंपा ज्ञापन

ग्रेटर नोएडा में सड़क हादसे में पत्रकार सहित दो लोगों की मौत

नोएडा में एक कंपनी में गैस सिलेंडर फटने से घायल एक कर्मचारी की मौत

किसानों ने नोएडा-दिल्ली मार्ग पर चिल्ला बॉर्डर को अवरुद्ध किया

नोएडा में भगत सिंह की प्रतिमा लगाने वाले युवकों को पुलिस ने 12 घंटे तक हिरासत में रखा, प्रतिमा भी हटाई


बाकी खबरें

  • prashant kishor
    अनिल सिन्हा
    नज़रिया: प्रशांत किशोर; कांग्रेस और लोकतंत्र के सफ़ाए की रणनीति!
    04 Dec 2021
    ग़ौर से देखेंगे तो किशोर भारतीय लोकतंत्र की रीढ़ तोड़ने में लगे हैं। वह देश को कारपोरेट लोकतंत्र में बदलना चाहते हैं और संसदीय लोकतंत्र की जगह टेक्नोक्रेट संचालित लोकतंत्र स्थापित करना चाहते हैं…
  • All five accused arrested in the murder case
    भाषा
    माकपा के स्थानीय नेता की हत्या के मामले में सभी पांच आरोपी गिरफ्तार
    04 Dec 2021
    घटना पर माकपा प्रदेश सचिवालय ने एक बयान जारी कर आरएसएस को हत्या का जिम्मेदार बताया है और मामले की गहराई से जांच करने की मांग की है.पुलिस के अनुसार, घटना बृहस्पतिवार रात साढ़े आठ बजे हुई थी और संदीप…
  • kisan andolan
    लाल बहादुर सिंह
    MSP की कानूनी गारंटी ही यूपी के किसानों के लिए ठोस उपलब्धि हो सकती है
    04 Dec 2021
    पंजाब-हरियाणा के बाहर के, विशेषकर UP के किसानों और उनके नेताओं की स्थिति वस्तुगत रूप से भिन्न है। MSP की कानूनी गारंटी ही उनके लिए इस आंदोलन की एक ठोस उपलब्धि हो सकती है, जो अभी अधर में है। इसलिए वे…
  • covid
    भाषा
    कोरोना अपडेट: देशभर में 8,603 नए मामले सामने आए, उपचाराधीन मरीजों की संख्या एक लाख से कम हुई
    04 Dec 2021
    देश में कोविड-19 के 8,603 नए मामले सामने आए हैं, जिसके बाद कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 3,46,24,360 हो गई है।  
  • uttarkhand
    सत्यम कुमार
    देहरादून: प्रधानमंत्री के स्वागत में, आमरण अनशन पर बैठे बेरोज़गारों को पुलिस ने जबरन उठाया
    04 Dec 2021
    4 दिसंबर 2021 को उत्तराखंड की अस्थाई राजधानी देहरादून में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आ रहे हैं। लेकिन इससे पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वागत के लिए आमरण अनशन पर बैठे बेरोजगार युवाओं…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License