NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा: मिलिए उस वकील से जो अपना सबकुछ गंवाकर भी दूसरों के लिए लड़ रहा है
पिछले महीने दिल्ली में हुए दंगों के दौरान मोहम्मद यूसुफ़ के घर को जला दिया गया। उनके घर के कीमती सामान को लूट लिया गया लेकिन उन्होंने कई पीड़ितों और पुलिस द्वारा गिरफ़्तार किए गए लोगों के लिए कोर्ट में लड़ाई जारी रखी।
अमित सिंह, तारिक अनवर
21 Mar 2020
तारिक अनवर

दिल्ली: 24 फरवरी का दिन एडवोकेट मोहम्मद यूसुफ़ के लिए हमेशा की तरह एक दिन था। दिन में होने वाली घटनाओं से बेपरवाह वे सुबह ही अपने मुवक्किलों को डिफेंड करने के लिए उत्तरी पूर्वी दिल्ली स्थित घोंडा गांव के भगतां मोहल्ले से कड़कड़डूमा कोर्ट के लिए निकल गए। उस दिन दोपहर के लगभग 1:30 बजे उनके पास फोन आया। फोन करने वाले एक परिचित ने उन्हें सांप्रदायिक तनाव के बारे में बताया।  

परिचित ने जैसे ही फोन रखा, यूसुफ़ ने अपनी मां को स्थिति के बारे में सूचना देने और पूरे परिवार को सुरक्षित जगह पर भेजने के लिए फोन करना चाहा, लेकिन फोन नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने अपने छोटे भाई को फोन किया और उनसे जाफराबाद में अपने एक रिश्तेदार के स्थान पर परिवार को शिफ्ट करने के लिए कहा।

न्यूज़क्लिक से बातचीत में एडवोकेट यूसुफ़ ने बताया, 'मेरी मां ने यह कहते हुए कहीं भी जाने से इनकार कर दिया कि हम दशकों से इलाके में रह रहे हैं और अपने पड़ोसियों पर भरोसा करते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे चिंता नहीं करनी चाहिए क्योंकि चीजें ठीक होंगी।'

दोपहर करीब 3 बजे इलाके में पथराव शुरू हो गया और दो वाहनों में आग लगा दी गई। चारों ओर अराजकता के कारण उनका परिवार जाफराबाद में अपने चाचा के आवास पर शरण लेने के लिए भागा, जहां वे अभी भी रह रहे हैं।

उन्होंने कहा, 'जिस आदमी ने मुझे पहले फोन किया था, उसने एक बार फिर मुझे यह बताने के लिए फोन किया कि हमारे घर के करीब एक मोबाइल शॉप (जिसके मालिक एक ताज मोहम्मद हैं) को आग लगा दी गई है। उसने कहा कि अपना काम खत्म करो और चाचा के घर पहुंचो जहां उनके परिवार ने शरण ली थी।'

यूसुफ़ ने आगे बताया, 'यह क़यामत की रात की तरह था, जो अब तक का सबसे लंबा था। मैं इलाके के लोगों से स्थिति का जायजा लेने के लिए फोन करता रहा। उन्होंने हमें बताया कि दंगाई खुलेआम घूम रहे हैं। चारो तरफ भगदड़ की स्थिति है। वे लोग लूटपाट कर रहे हैं और आग लगा रहे हैं।'  

अगली सुबह (25 फरवरी) को यूसुफ़ ने अपने दोस्त और दिल्ली पुलिस के सिपाही दीपक शर्मा को बुलाया।

यूसुफ़ ने कहा, 'मैंने उनसे जाफराबाद आने और चाबी लेकर मेरे घर जाने और कीमती सामान जैसे दस्तावेज़, नकदी और आभूषण लेने का अनुरोध किया। लेकिन इलाके में फैली जबरदस्त हिंसा के कारण वह उस दिन बहुत व्यस्त था। उन्होंने मुझसे वादा किया कि वह अगले दिन आएंगे और जरूरी मदद करेंगे।'

लेकिन शर्मा शायद यह महसूस करने में विफल रहे कि हर गुजरते मिनट उन लोगों के लिए एक रियायती अवधि की तरह थे जिन्हें निशाना बनाया जा रहा था। युसूफ को उनके एक पड़ोसी से लगभग 11 बजे फोन आया जिसने उन्हें सूचित किया कि दंगाईयों ने उनके फ्लैट में तोड़फोड़ की है।  

image 1_15.JPG

उन्होंने बताया, 'मैंने क्षेत्र के कुछ प्रभावशाली लोगों को तुरंत कॉल किए, लेकिन ये व्यर्थ गए। मेरी मदद के लिए कोई आगे नहीं आया। मैंने अपने एक शुभचिंतक राकेश राणा को फोन किया, जिन्होंने दो पुलिसकर्मियों का नंबर दिया, जिन्हें उसी क्षेत्र में तैनात किया गया था। लेकिन उन्होंने भी मदद नहीं की। इस बीच, मेरे भाई ने टोल फ्री नंबर 100 पर पुलिस हेल्पलाइन को फोन किया। वहां से हमें आश्वासन दिया गया कि पुलिस टीम जल्द ही भेज दी जाएगी, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ।'

हालांकि जैसा कि कांस्टेबल शर्मा ने वादा किया था वो चाबी लेने आए। यूसुफ़ ने उन्हें समझाया कि मूल्यवान वस्तुएं कहां रखी गई हैं।

एडवोकेट यूसुफ़ कहते हैं, 'वह 10 मिनट में लौट आया। उसके दोनों हाथ काले थे मानो वे राख में डूब गए हों। उसने मुझे गले लगाया और जोर से रोने लगा। पछतावा व्यक्त करते हुए कि वह मेरा घर नहीं बचा सका। इस पल मुझे एहसास हुआ कि मेरा घर जला दिया गया था। मैं सदमे में फर्श पर बैठ गया। सैकड़ों सवाल मेरे ज़हन में घूम रहे थे: मेरे पड़ोसी आगे क्यों नहीं आए। जब दंगाई मेरे घर में तोड़-फोड़ कर रहे थे; जब वे घर में आग लगा रहे थे तो वे क्या कर रहे थे। दशकों के हमारे संबंध कहां चले गए। मेरा उन पर और उनका मुझ पर जो भरोसा था उसका क्या होगा?  उन पर जो भरोसा था और उस पर हमारा क्या भरोसा था? मैं खुद से पूछ रहा था कि उन्होंने घर क्यों जलाया? उन्हें लूटना चाहिए था जो वे चाहते थे, कोई समस्या नहीं थी।'

यूसुफ़ आगे कहते हैं कि अब सबसे बड़ी चुनौती मां को इस खबर के बारे में बताने की थी। उन्होंने अपनी भावनाओं को नियंत्रित किया। साहस जुटाया और अपनी मां को बताया कि उनके घर को जला दिया गया है। वो कहते हैं कि जब भी मैं उस पल को याद करता हूं, तो यह मुझे झकझोर देता है - मेरी मां जोर जोर से रोने लगी। यह दूसरा अवसर था जब मैंने उनकी आंखों में आंसू देखे, मेरे पिता डेढ़ साल पहले ही गुज़रे थे।

यूसुफ़ ने कहा कि उन्होंने अपने इलाके एक इंस्पेक्टर को घटना के बारे में बताने के लिए फोन किया। उन्होंने कहा, 'उन्हें भी बुरा लगा और उन्होंने मुझसे कहा कि दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने मुझे आर्थिक मदद की पेशकश की, लेकिन मैंने इनकार कर दिया, उनसे निष्पक्ष जांच करने और न्याय सुनिश्चित करने का आग्रह किया।'

एडवोकेट यूसुफ़ के अनुसार सबसे पहले मदद के लिए जो हाथ आगे बढ़े वो उसके दो गैर मुस्लिम दोस्तों के थे। उन्होंने मुझे उनसे मिलने के लिए कहा। लेकिन मैं नहीं गया। यह महसूस करते हुए कि वे मुझे पैसे की पेशकश करेंगे और मुझे इसे स्वीकार करने में बुरा लगेगा। हालांकि बाद में उनके नाराज होने और गुस्से का इजहार करने के बाद मुझे उनसे मिलने जाना पड़ा।

दंगाईयों की वीडियो गैलरी दिखाने के बाद केवल 2 गिरफ्तारी

इस पूरे मामले में अब तक केवल दो लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। वसूली के नाम पर यूसुफ़ के घर से संबंधित एक छोटा गैस सिलेंडर दिखाया गया है। हालांकि यूसुफ़ को उम्मीद है कि निष्पक्ष और भेदभाव रहित जांच होगी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह उन लोगों को पहचान सकते हैं जो कथित वीडियो में दिखाई दे रहे हैं जो अब न्यूज़क्लिक के पास भी है। यूसुफ़ ने कहा कि वे सभी स्थानीय थे और वह उन्हें स्पष्ट रूप से पहचान सकते हैं।

उन्होंने, 'वे स्थानीय लड़के हैं, बाहरी नहीं। उनमें से बहुत कम नकाबपोश हैं। उनमें से अधिकांश के चेहरे स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। मैं उनमें से ज्यादातर को जानता हूं।'

यह पूछे जाने पर कि क्या वह अभी भी मानते हैं कि उनके मामले में निष्पक्ष जांच चल रही है, उन्होंने कहा कि पुलिस को अपना काम करने देना चाहिए।

उन्होंने कहा, 'एक बार मामला अदालत में आ जाएगा, तभी मैं इस पर टिप्पणी कर सकूंगा। लेकिन हां, मैं बाहरी लोगों के शामिल होने की कहानी को खारिज करता हूं। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की भागीदारी के बिना कभी इस तरह की घटना नहीं हो सकती।'

उन्होंने कहा, 'उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा-संबंधी मामलों की पुलिस जांच की कड़ी आलोचना हुई है, लेकिन मुझे उम्मीद है कि यह निष्पक्ष होगी। कम से कम मेरे मामले में जैसा कि मुझे विभिन्न अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया है।'

यूसुफ़ के भाई की शिकायत के आधार पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 147 (दंगा), 148 (दंगाई, घातक हथियार से लैस), 149 (गैरकानूनी असेंबली), 380 (आवास गृह में चोरी) 452 (चोट, हमले या गलत नियति की तैयारी के बाद घर में घुसने) समेत तमाम अन्य धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है।

दूसरों के लिए न्याय सुनिश्चित करने की लड़ाई जारी है

पीड़ित होने के बावजूद दंगा पीड़ितों के साथ न्याय की यूसुफ़ की लड़ाई जारी है। वास्तव में वे कहते हैं कि इस घटना ने उन्हें नुकसान का दर्द महसूस कराया है और इसलिए वह अब अदालत में वह बेहतर तर्क दे सकते हैं।

यूसुफ़ कहते हैं, 'मैं कई पीड़ितों और उन लोगों का प्रतिनिधित्व कर रहा हूं जिन्हें पुलिस ने गिरफ़्तार किया है। यह सच है कि मुझे लगभग एक करोड़ का भारी नुकसान हुआ है, लेकिन मैंने इसे अपने पेशेवर कर्तव्यों पर हावी नहीं होने दिया। यह उन सभी के लिए एक कठिन समय है जो पीड़ित हैं और मुझे उनके साथ खड़े होने की आवश्यकता है। पहले, एक विशेष समुदाय को निशाना बनाया गया और उनके जान-माल का नुकसान हुआ और अब उसी समुदाय को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उनके लड़कों को पुलिस द्वारा झूठे आरोपों में हिरासत में लिया जा रहा है। इसलिए, यह हमारे लिए मजबूत रहने और अपना सर्वश्रेष्ठ देने का समय है ताकि पीड़ितों को न्याय मिल सके और अपराधियों को जेल भेजा जा सके।'

Delhi Violence
Mohammad Yusuf
Delhi Houses Burnt
Delhi Communal Violence
Ghonda Village
Delhi Lawyers

Related Stories

उमर खालिद पर क्यों आग बबूला हो रही है अदालत?

जहांगीरपुरी हिंसा : अब 'आप' ने मुख्य आरोपी अंसार को 'बीजेपी' का बताया

जहांगीरपुरी हिंसा: वाम दलों ने जारी की फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट

दिल्ली हिंसा: उमर ख़ालिद के परिवार ने कहा ज़मानत नहीं मिलने पर हैरानी नहीं, यही सरकार की मर्ज़ी है

दिल्ली हिंसा में पुलिस की भूमिका निराशाजनक, पुलिस सुधार लागू हों : पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह

दिल्ली दंगों के दो साल: इंसाफ़ के लिए भटकते पीड़ित, तारीख़ पर मिलती तारीख़

दिल्ली हिंसा मामले में पुलिस की जांच की आलोचना करने वाले जज का ट्रांसफर

अदालत ने फिर उठाए दिल्ली पुलिस की 2020 दंगों की जांच पर सवाल, लापरवाही के दोषी पुलिसकर्मी के वेतन में कटौती के आदेश

मीडिया लीक की जांच के लिए दिल्ली पुलिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता: आसिफ तन्हा के वकील

दिल्ली दंगे: गिरफ़्तारी से लेकर जांच तक दिल्ली पुलिस लगातार कठघरे में


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License