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आंदोलन
भारत
राजनीति
सिर्फ़ कश्मीर ही नहीं, देश का लोकतंत्र ख़तरे में है: ग़ुलाम नबी आज़ाद
नई दिल्ली में मंगलवार को कश्मीर मसले पर आयोजित एक प्रदर्शन में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि सरकार यूरोपीय संघ के सांसदों को कश्मीर लेकर जा रही है लेकिन देश के विपक्षी सांसदों को राज्य में जाने से रोका जा रहा है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Oct 2019
jantar mantar protest

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद किसी विदेशी प्रतिनिधिमंडल के पहले कश्मीर दौरे के तहत 27 यूरोपीय सांसदों का एक दल मंगलवार को वहां की यात्रा पर है। इसे लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा कि मोदी सरकार यूरोपीय सांसदों को वहां जाने की अनुमति दे रही है लेकिन भारतीय नेताओं को ऐसा करने से रोक रही है जो भारत के लोकतंत्र और इसकी संप्रभुता का अपमान है।

कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने यह बात मंगलवार को नई दिल्ली के जंतर मंतर पर कश्मीर को लेकर आयोजित एक प्रदर्शन के दौरान कही। इस प्रदर्शन का आयोजन एक्टिविस्टों, कलाकारों, साहित्यकारों और छात्रों के एक समूह द्वारा किया गया था। इसका मक़सद कश्मीरी आवाम के लिए एकजुटता प्रर्दशित करना था।
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आयोजकों का कहना था कि कश्मीर में अभूतपूर्व तरीक़े से मीडिया और संचार सुविधाओं पर दो महीने से अधिक समय से लगाम लगाई गई है। राज्य में भय और अनिश्चितता का माहौल है। कश्मीरियों को मूल नागरिक अधिकार जैसे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, सभा और आंदोलन की स्वतंत्रता से वंचित कर दिया गया है। सैन्य बलों ने राजनेताओं, नेताओं, वकीलों, पत्रकारों, शिक्षकों, छात्रों और दस साल से कम उम्र के बच्चों के बीच हज़ारों लोगों को हिरासत में लिया है। बच्चों सहित नागरिकों को प्रताड़ित और बेरहमी से पीटा जा रहा है और बिजली के झटके दिए जा रहे हैं।

इस दौरान ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा, "कश्मीर के एकीकरण पर जब चर्चा हो रही थी तब आंबेडकर, नेहरू, पटेल समेत तमाम नेताओं ने महीनों तक चर्चा की लेकिन इस क़ानून में बदलाव करते समय इस सरकार ने संसद के साथ धोखा किया। इस पर कोई भी चर्चा नहीं हुई। यह प्रवृत्ति सिर्फ़ कश्मीर के लिए नहीं है बल्कि इससे देश का लोकतंत्र ख़तरे में आ गया है।”

इस प्रदर्शन को आज़ाद के अलावा भाकपा माले के नेता दीपांकर भट्टाचार्य, आरजेडी नेता नवल किशोर, एडवा की मैमूना मुल्लाह, एनी राजा, शबनम हाशमी समेत तमाम नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने संबोधित किया।
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इस दौरान यह मांग भी की गई कि जम्मू और कश्मीर के भविष्य के बारे मे कोई क़दम जम्मू और कश्मीर के लोगों की सहमति के बिना न लिया जाए। साथ ही जम्मू-कश्मीर में तैनात सैनिकों की तत्काल वापसी की जाए। इसके अलावा पुलिस, अर्धसैनिक बलों और सैन्य कर्मियों द्वारा बच्चों और उनके माता पिता के उत्पीड़न को समाप्त किया जाय।

प्रदर्शन के दौरान यह भी मांग की गई कि सशस्त्र बलों द्वारा पूछताछ की आड़ में की जा रही यातना के अवैध अभ्यास को समाप्त किया जाय। संचार अवसंरचना की तत्काल बहाली, मोबाइल, इंटरनेट और टेलीफ़ोन पर लगे सभी तरह के प्रतिबंध तत्काल ख़त्म किए जाएं। गिरफ़्तार किए गए लोगों को तत्काल रिहा किया जाय।

इस दौरान समाज के सभी वर्गों, राजनीतिक दलों, ट्रेड यूनियनों, छात्र संगठनों और व्यक्तियों से अपील की गई कि वे कश्मीरियों के साथ खड़े हों, ख़ासकर युवा और जम्मू-कश्मीर के छात्र जो भारत में हर जगह कार्यस्थलों, पड़ोस और शैक्षणिक संस्थानों में हैं।

Jammu and Kashmir
Article 370
Constitution of India
ghulam nabi azad
European Union
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BJP
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Congress
CPM
Internet Ban in Kashmir
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