NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
घर पर नोटिस चस्पा, फिर भी घूमते रहे सतपाल महाराज, क्या दर्ज होगी एफआईआर?
26 मई को होम क्वारंटीन का नोटिस चस्पा होने के बावजूद सतपाल महाराज 29 मई को मंत्रिमंडल की बैठक में शरीक हुए। तो क्या उनके विरुद्ध जानबूझ कर मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों और अफसरों का जीवन खतरे में डालने के लिए मुकदमा नहीं दर्ज किया जाना चाहिए?
वर्षा सिंह
01 Jun 2020
सतपाल महाराज

हम तो डूबे हैं सनम, साथ तुमको भी ले डूबेंगे....। उत्तराखंड में सरकार के भीतर हालात कुछ ऐसे ही बन पड़े हैं। लॉकडाउन के 70 दिन पूरे हो चुके हैं। इस दौरान हमने कोरोना को खूब-समझा जाना। लेकिन क्या ये भी जाना कि वीआईपी सिंड्रोम के शिकार लोगों पर कोरोना का असर नहीं होता। उत्तराखंड सरकार के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज, उनकी पत्नी अमृता रावत, बेटे-बहू, पोते समेत उनके आवास पर 22 कोरोना संक्रमित मिले हैं। सतपाल महाराज के देहरादून आवास पर दिल्ली से कुछ लोग मिलने आए थे। जिसके बाद उनके आवास पर 20 मई से 3 जून तक होम क्वारंटीन का नोटिस चस्पा किया गया। लेकिन ये नोटिस 26 को लगाया। 6 दिन ये नोटिस कहां रहा। इस पर सवाल है।

सतपाल महाराज की कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग करें

20 मई को सतपाल महाराज को परिवार समेत क्वारंटीन हो जाना चाहिए था। लेकिन वे 21 और 29 मई की कैबिनेट बैठक में शामिल हुए। जिसमें सभी मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, कैबिनेट मंत्री समेत कई अधिकारी शामिल हुए। 22 मई को मुख्यमंत्री आवास में हुई देवस्थान बोर्ड की बैठक में शामिल हुए। सचिवालय के अपने दफ्तर में गए। कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना कहते हैं कि माना बैठक में आपने एक-दूसरे से दूरी बनाये रखी। लेकिन कई बार यहां अनौपचारिक मुलाकातें भी होती हैं। फिर सभी ने एक ही शौचालय का इस्तेमाल किया। क्या इस तरह संक्रमण की आशंका नहीं है।

धस्माना कहते हैं कि लॉकडाउन के 65 दिनों तक क्वारंटीन रहे मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत इन्हीं दिनों में श्रीनगर अस्पताल और नैनीताल दौरे पर गए। इससे पहले वे सिर्फ योगी आदित्यनाथ के पिता की अंत्येष्टि और विधायक पुष्कर धामी के घर अंत्येष्टि कार्यक्रम में शामिल हुए थे। इस लिहाज से तो मुख्यमंत्री समेत पूरी कैबिनेट को क्वारंटीन होना चाहिए।

पौड़ी के चौबट्टाखाल में डर का माहौल

इसी दौरान पर्यटन मंत्री पौड़ी में अपने विधानसभा क्षेत्र चौबट्टाखाल के दौरे पर भी परिवार समेत गए। वरिष्ठ पत्रकार गुणानंद जखमोला बताते हैं कि पौड़ी के चौबट्टाखाल तहसील के कई गांवों में डर का माहौल है। वह बताते हैं कि सतपाल महाराज अनुमति से अधिक संख्या में लोगों के साथ यहां आए। अपनी पत्नी अमृता रावत के गांव रिंगवाड़ी में गए। जहां उनके बेटे सुयश और पत्नी मोहिनी का जोरदार स्वागत किया गया। फूल-मालाएं पहनायी गईं। वह अपने पैतृक गांव सैंडियागैड गए। चौबट्टाखाल के कई गांवों में भ्रमण के दौरान उन्होंने राहत सामाग्री बांटी। मास्क-सेनेटाइजर बांटे। अब चौबट्टाखाल में उनके संपर्क में आए लोग चाहते हैं कि उनकी कोरोना टेस्टिंग की जाए। गुणानंद जखमोला कहते हैं कि पर्यटन मंत्री दरअसल अपने बेटे को अपने विधानसभा क्षेत्र में लॉन्च कर रहे थे। लेकिन फूल-मालाओं से लदा ये कार्यक्रम अब कोरोना वायरस की जद में आ गया है।

यही नहीं, सतपाल महाराज के कॉन्टैक्ट में वे पत्रकार भी आए जो मंत्रिमंडल की बैठक को कवर करने गए थे। देहरादून के पत्रकार भी इस समय डरे हुए हैं।

कैबिनेट को क्वारंटीन नहीं करने का फैसला

सवाल यही था कि इस स्थिति में क्या मुख्यमंत्री और कैबिनेट मंत्री क्वारंटीन होंगे। राज्य के स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी कहते हैं कि भारत सरकार की निर्धारित गाइडलाइन के मुताबिक अभी मंत्रिमंडल को क्वारंटीन करने की जरूरत नहीं हैं। अमित नेगी ने कहा कि संक्रमित व्यक्ति की कॉन्टेक्ट ट्रेसिंग दो तरह से होती है। अधिक रिस्क वाले और कम रिस्क वाले कॉन्टेक्ट। अधिक रिस्क वाले कॉन्टेक्ट को 14 दिन के लिए होम क्वारेंटीन किया जाता है और कोरोना टेस्ट कराया जाता है। जबकि कम रिस्क वाले कॉन्टेक्ट अपना कार्य पहले की तरह कर सकते हैं। 14 दिनों तक उनके स्वास्थ्य पर निगरानी रखी जाएगी।  उनके मुताबिक मंत्रिमंडल सतपाल महाराज के क्लोज कॉन्टेक्ट में नहीं आया। वे कम रिस्क वाले कॉन्टेक्ट की श्रेणी में हैं। इसलिए अपना कार्य सामान्य रूप से कर सकते हैं। उन्हें क्वारंटीन करने की आवश्यकता नहीं है। 

क्या सतपाल महाराज पर दर्ज होगा हत्या के प्रयास का मुकदमा

सीपीआई-एमएल के गढ़वाल सचिव इंद्रेश मैखुरी उत्तरकाशी के कोरोना पॉजीटिव युवक का हवाला देते हैं जिस पर जिला प्रशासन ने जानकारी छिपाने की बात कह हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया। इंद्रेश कहते हैं कि संस्थागत क्वारंटीन होने के बावजूद उस युवक पर भारतीय दंड संहिता(आईपीसी) की दफा 307 सहित कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया और उसे एम्स ऋषिकेश रेफर किया गया।

लेकिन सतपाल महाराज के घर नोटिस देर से चस्पा क्यों हुआ। 26 मई को होम क्वारंटीन का नोटिस चस्पा होने के बावजूद सतपाल महाराज 29 मई को मंत्रिमंडल की बैठक में शरीक हुए। तो क्या उनके विरुद्ध जानबूझ कर मंत्रिमंडल के अन्य सदस्यों और अफसरों का जीवन खतरे में डालने के लिए मुकदमा नहीं दर्ज किया जाना चाहिए? अगर ऐसा करने के लिए राज्य की पुलिस अन्य लोगों पर हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कर रही है तो आईपीसी की दफा 307 का मुकदमा तो सतपाल महाराज के विरुद्ध भी दर्ज होना चाहिए।

सचिवालय कर्मियों ने भी कोरोना जांच की मांग

उधर, सचिवालय कर्मचारी भी इस समय कोरोना की आशंका से सहमे हुए हैं। उत्तराखंड सचिवालय संघ के अध्यक्ष दीपक जोशी कहते हैं कि मुख्यमंत्री और अपर मुख्य सचिव सचिवालय से उन्होंने सचिवालय और विधानसभा को एक हफ्ते के लिए बंद करने और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों की नियमित जांच कराने का अनुरोध किया। लेकिन इस बारे में अभी तक कोई फैसला नहीं लिया गया है। दीपक जोशी ने मांग की है कि सचिवालय कर्मियों को भी एक सप्ताह या उससे अधिक समय के लिए होम क्वारंटीन संबंधी फैसला लिया जाए। इस दौरान सचिवालय को पूरी तरह बंद रखा जाए। सचिवालय का सेनेटाइजेशन कराया जाए। ताकि संक्रमण का खतरा टाला जा सके। फिलहाल उत्तराखंड सचिवालय संघ ने अपने स्तर से कर्मचारियों को 3 दिन तक सचिवालय में प्रवेश न करने को कहा है।

भाजपा दफ्तर पर भी लगा था क्वारंटीन नोटिस

इसी समय में उत्तराखंड के शासकीय प्रवक्ता मदन कौशिक की प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक कोरोना पॉजीटिव युवक के आने की बात सामने आई। जिसके बाद प्रदेश भाजपा कार्यालय पर भी क्वारंटीन का नोटिस चस्पा किया गया। 26-27 मई के आसपास इस नोटिस की जानकारी मिली लेकिन ये नोटिस बुरी तरह खुरचा हुआ था, जिससे उस पर क्वारंटीन किए जाने की तारीखें नहीं पढ़ी जा सकीं।

कोविड-19 वायरस भी राजनीति का शिकार हुआ

कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्माना 15 मार्च को ही 28 दिनों के लिए क्वारंटीन किए गए थे। उस दौरान वह कोरोना का पहला केस आने के बाद दून अस्पताल की व्यवस्थाएं देखने पहुंचे थे। धस्माना कहते हैं कि महज नर्सिंग स्टेशन तक जाने पर उन्हें पहले 14 दिनों के लिए होम क्वारंटीन होने का नोटिस दिया गया। इसके बाद बाहर निकलने की अनुमति मांगने पर जिलाधिकारी ने केंद्र की नई गाइडलाइन्स का हवाला देकर 14 और दिनों के लिए क्वारंटीन कर दिया। वह कहते हैं कि वीआईपी सिंड्रोम सबसे खतरनाक है। कोरोना रंग-रूप-जाति-धर्म-भाषा या राजनीतिक पार्टी नहीं देखता।

उनका कहना है कि इस दौरान भाजपा अपना राहत अभियान चला रही है लेकिन कांग्रेस की ओर से चलाए जा रहे राहत कार्य रोके जा रहे हैं। राहत-कार्य चलाने पर ही कांग्रेस के वरिष्ठ नेता तिलकराज बेहड़ पर मुकदमा किया गया। टिहरी के जिलाध्यक्ष हिमांशु बिजल्वाण पर क्वारंटीन सेंटर में राहत सामाग्री बांटने पर मुकदमा कायम किया गया। जो पूरी तरह राजनीति से प्रेरित है। धस्माना कहते हैं कि अच्छा होता कि इस खतरनाक वायरस से निपटने के लिए केंद्र और राज्य स्तर पर सर्वदलीय बैठक बनाई गई होती और हम मिलकर इस महामारी का मुकाबला करते।

कोरोना वायरस का संक्रमण अब तेज़ी से फैल रहा है। उत्तराखंड में रविवार शाम तक 922 लोग कोरोना संक्रमित पाए जा चुके हैं। जबकि राज्य में कोरोना की कम जांच और टेस्ट भेजे जाने के बाद उसकी रिपोर्ट के आने में लग रहा लंबा समय, इस मुश्किल हालात को और अधिक मुश्किल बना रहा है। मंत्रिमंडल के सदस्य और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी खुद को होम क्वारंटीन कर सकते हैं। लेकिन चौबट्टाखाल के डरे हुए लोग, देहरादून के डरे हुए पत्रकार, सचिवालय के डरे हुए कर्मचारी, क्या सबकी कोरोना जांच करायी जाएगी। कोरोना वायरस वाकई सत्ता या विपक्ष नहीं देखता। राज्य की जनता को इस समय उनके नेताओं और अधिकारियों की जरूरत है। सभी उनके स्वस्थ्य होने की कामना कर रहे हैं।

Uttrakhand
Coronavirus
Lockdown
SATPAL MAHARAJ
Trivendra Singh Rawat
BJP

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • Hemant Soren
    अनिल अंशुमन
    झारखंड-बिहार: स्थानीय भाषा को लेकर विवाद कहीं महज़ कुर्सी की राजनीति तो नहीं?
    22 Sep 2021
    “किसी भी प्रदेश में वहां की स्थानीय भाषाओं को प्राथमिकता मिलना संविधान सम्मत है। लेकिन अब इस पर भी राजनीति होना संदेह पैदा करता है कि कहीं ये विवाद भी कोई सांप्रदायिक ध्रुविकरण करा कर बुनियादी सवालों…
  • Varanasi
    विजय विनीत
    बदहाली: रेशमी साड़ियां बुनने वाले हाथ कर रहे हैं ईंट-पत्थरों की ढुलाई, तल रहे हैं पकौड़े, बेच रहे हैं सब्ज़ी
    22 Sep 2021
    बनारस से ग्राउंड रिपोर्ट: विश्वविख्यात बनारस की रेशमी साड़ियों का ताना-बाना बिखर रहा है। इसी ताने-बाने में सिसक रही है बुनकरों की जिंदगी। जानने के लिए आपको लिए चलते हैं बनारस की संकरी गलियों में..
  • school
    सौम्या गुप्ता, सी. सरतचंद
    स्कूलों को वक़्त से पहले खोलने की अनुमति क्यों नहीं दी जानी चाहिए
    22 Sep 2021
    केवल स्कूलों को फिर से खोलने से असमान शिक्षा प्रणाली अधिक समान नहीं हो जाएगी जब तक कि सरकारें शिक्षा पर अपने ख़र्च को नहीं बढ़ाती हैं स्थिति में बदलाव लाना असंभव है। स्कूल खोलने से कोविड म्यूटेशन का…
  • SCO
    एम. के. भद्रकुमार
    ईरान की एससीओ सदस्यता एक बेहद बड़ी बात है
    22 Sep 2021
    तेहरान का एससीओ में ज़ोरदार स्वागत के साथ शामिल किया जाना और इस संगठन का जल्दबाज़ी के साथ विस्तार किया जाना दिखाता है कि बीजिंग और मॉस्को के बीच ज़बरदस्त तालमेल है।
  • यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    लाल बहादुर सिंह
    यूपी: योगी सरकार का "विकासोत्सव" बर्बादी का जश्न है
    22 Sep 2021
    योगी जी का विकास का सारा जश्न दरअसल अर्थव्यवस्था के ध्वंस और कोविड से हलकान, हैरान-परेशान जनता को मुंह चिढ़ाने और उसके जले पर नमक छिड़कने जैसा है। कुछ विश्लेषकों ने ठीक नोट किया है कि "यूपी विकासोत्सव…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License