NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अब महंगी चीनी के लिये तैयार रहें लोग
इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने 3 जनवरी 2020 को सूचना दी है कि चीनी उत्पादन पिछले पांच साल में सबसे कम है।
राकेश सिंह
07 Jan 2020
sugar production
Image courtesy: BW

इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन (ISMA) ने 3 जनवरी 2020 को सूचना दी है कि देश में अक्टूबर से दिसंबर तक चीनी उत्पादन में 30.22 प्रतिशत की गिरावट आई है। आईएसएमए ने चालू वर्ष के पहले तीन महीनों (अक्टूबर-दिसंबर) में नवीनतम उत्पादन आंकड़ों को जारी करते हुए कहा कि कुल चीनी उत्पादन दिसंबर 2019 तक घटकर 7.79 मिलियन टन रह गया है। जबकि पिछले साल समान समय में ये 11.17 मिलियन टन था। ये चीनी उत्पादन पिछले पांच साल में सबसे कम है।

आईएसएमए ने अपने पहले अनुमान में 2018-19 के 3.31 करोड़ टन की तुलना में इस पूरे साल में केवल 2.6 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान लगाया है। दूसरा अनुमान अगले महीने जारी किया जाएगा और तब ही स्थिति पूरी तरह साफ हो पाएगी। भारत में चीनी उद्योग करीब एक लाख करोड़ रुपये का है। देश में 550 से अधिक चीनी मिलें हैं। इनमें करीब 5 लाख मजदूर काम करते हैं।

रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने पहले ही यह अनुमान लगाया था कि इस साल देश में गन्ने का रकबा कम रहने से इस बार चीनी की किमतें  बढ़ेंगी। महाराष्ट्र और  कर्नाटक के बाढ़ से प्रभावित गन्ने की फसल में सुक्रोज की मात्रा में भी गिरावट होने से महाराष्ट्र में चीनी की औसत रिकवरी पिछले साल के 10.5 प्रतिशत से घटकर 10 प्रतिशत रह गई है।

जबकि कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय ने वर्ष 2019-20 के लिए प्रमुख खरीफ फसलों की पैदावार के प्रथम अग्रिम अनुमान जब सितम्बर में जारी किए थे, तो कुल गन्‍ना उत्‍पादन 377.77 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया था। ये पिछले साल के 349.78 मिलियन टन के औसत गन्‍ना उत्‍पादन से 27.99 मिलियन टन अधिक है।
graph1.JPG
देश के 2.5 से 3 करोड़ किसान परिवारों की आजीविका गन्ने की खेती पर निर्भर है। देश के करीब 50 लाख हेक्टेयर जमीन में गन्ना उगाया जाता है। इसके बावजूद केंद्र सरकार ने 2017 के बाद से गन्ने की फेयर एंड रेम्युनरेटिव प्राइस (एफआरपी) में कोई वृद्धि नहीं की है। उत्तर प्रदेश, पंजाब और उत्तराखंड जैसे प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों ने भी राज्य परामर्श मूल्य (एसएपी) में कोई बढ़ोतरी नहीं की है। इसके बावजूद किसानों का करीब 35,000 करोड़ रुपया चीनी मिलों पर बकाया है।
graph 3_0.JPG
भारत दुनिया का चीनी की सबसे ज्यादा खपत वाला देश है। भारत में पिछले साल करीब 2.6 करोड़ टन चीनी की खपत हुई थी। भारत में चीनी की 35 प्रतिशत खपत घरेलू उपभोक्ता और शेष 65 फीसद थोक में कई खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों में होती है। देश में हाल में केवल 2 वर्ष ऐसे आए हैं, जब चीनी की सालाना उपलब्धता सालाना खपत से कम रही है। 2016-17 में चीनी की उपलब्धता केवल 2.03 करोड़ टन रही थी, जबकि सालाना  खपत 2.45 करोड़ टन थी।
 
उससे पहले 2008-09 में चीनी का उपलब्धता केवल 1.45 करोड़ टन थी। जबकि उस समय मांग 2.29 करोड़ टन थी। 2009 में आमतौर पर 22 रु. किलो मिलने वाली चीनी के दाम बढ़कर 45 रुपये किलो तक पहुंच गए थे। जबकि उससे एक साल पहले 2007-08 में देश में चीनी की उपलब्धता 2.64 करोड़ टन थी। भारत ने 2007-08 में 1.13 करोड़ टन के अतिरिक्त स्टाक को खपाने के लिए 50 लाख टन चीनी का निर्यात किया था। फिर उत्पादन कम होने पर 2008-09 में 50 लाख टन चीनी का आयात किया था। 
graph 2_1.JPG
इस बार भी चीनी के उत्पादन में गिरावट के बावजूद चीनी निर्यात तेजी से हो रहा है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के आंकड़ों के अनुसार मिलों ने अब तक सरकार के मैक्सिमम एडमिशेबल एक्सपोर्ट क्वांटिटी कोटा (MAEQ) के तहत 2.5 मिलियन टन से अधिक चीनी के निर्यात के लिए अनुबंध किया है। सरकार का कहना है कि जिन मिलों ने अपने निर्यात का कोटा पूरा कर लिया है,वे इच्छा होने पर और निर्यात कर सकते हैं। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में चीनी की उपलब्धता कम होने से बीते तीन महीने में चीनी के दाम में 15 फीसद से अधिक की वृद्धि हुई है। चीनी का भाव बीते तीन महीने में करीब 45 डॉलर प्रति टन तक बढ़ा है। सरकार ने चीनी मिलों को प्रति टन निर्यात पर 10,448 रुपये सब्सिडी भी देने की घोषणा की है।

इंटरनेशनल शुगर ऑर्गनाइजेशन के अनुसार इस वर्ष वैश्विक खपत के मुकाबले चीनी का उत्पादन करीब 50 लाख टन कम रहने वाला है। इस साल वैश्विक चीनी उत्पादन करीब 17.19 करोड़ टन रहने का अनुमान है जबकि खपत 17.67 करोड़ टन हो सकती है। पिछले साल में भारत ने 38 लाख टन चीनी का निर्यात किया था। इस बार सरकार मे 60 लाख टन चीनी निर्यात का लक्ष्य तय किया है। इंडियन शुगर मिल्स एसोसिएशन के अनुमान के अनुसार पिछले साल देश में 331.5 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जिसमें से 145 लाख टन स्टॉक बचा हुआ है। मिलों का मानना है कि इस पुराने स्टॉक के साथ नए उत्पादन से वे निर्यात को भी पूरा कर सकते हैं। इसके बाद भी देश में करीब 40 लाख टन का बफर स्टॉक बनाने के लिए चीनी बची रहेगी।
 
चीनी उद्योग जगत के इन दावों पर भरोसा नहीं करने के कई कारण हैं। सबसे बड़ा कारण उत्पादन के आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठने वाले सवालिया निशान हैं। उत्पादन के आंकड़ें जब वास्तव में अंतिम रूप से आयेंगे तो उनमें काफी गिरावट आ चुकी होगी। महाराष्ट्र के कुछ जिलों में तो चीनी मिलें गन्ने की कमी के कारण पेराई बंद भी कर चुकी हैं। उत्तर प्रदेश में चीनी उत्पादन में मामूली वृद्धि की बात कही जा रही है। जबकि उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल क्षेत्र के कुछ जिलों में कमोबेश सभी सहकारी चीनी मिलें बंद पड़ी हैं। ऐसे में अगले एक महीने में जब तक स्थिति पूरी तरह साफ हो जाएगी, सरकारी अमला तब ही शायद नींद से जागेगा। लेकिन तब तक सट्टेबाज, जमाखोर और मुनाफाखोर अपना काम पूरा कर चुके होंगे और महंगी चीनी से आम उपभोक्ताओं के मुंह का स्वाद कड़वा हो चुका होगा।    

SUGAR CANE
sugar factory
Sugar
sugar price
Sugar Productions
Indian Sugar Mills Association
Ministry of Agriculture and Farmers Welfare

Related Stories

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

महाराष्ट्र: राजनीतिक रस्साकशी के चलते संकट में आया राज्य का चीनी उद्योग

मध्यप्रदेश : शक्कर कारखाने को बचाने के लिए सड़क पर उतरे किसान और मज़दूर

चुनाव 2019: बकाया और कम कीमत से परेशान यूपी के गन्ना किसानों ने हड़ताल नोट पर किए हस्ताक्षर

योगी जी! ज़्यादा गन्ने से शुगर होता है और ज़्यादा राजनीति से ?


बाकी खबरें

  • मध्य प्रदेश : सेंचुरी मिल के प्रदर्शनकर्मियों पर पुलिस कार्रवाई, 800 से अधिक की गिरफ़्तारी
    सुमेधा पाल
    मध्य प्रदेश : सेंचुरी मिल के प्रदर्शनकर्मियों पर पुलिस कार्रवाई, 800 से अधिक की गिरफ़्तारी
    05 Aug 2021
    मिलों के कामगारों के साथ-साथ मजदूरों की यूनियनें भी पर्याप्त क्षतिपूर्ति राशि पाने के अपने अधिकारों एवं कारखाने को खोलने की मांगों को लेकर पिछले चार सालों से संघर्ष करते आ रहे हैं।
  • Viren Dangwal
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    ...आएंगे, उजले दिन ज़रूर आएंगे
    05 Aug 2021
    आज हमारे प्रिय कवि वीरेन डंगवाल (5 अगस्त 1947-28 सितंबर 2015) का जन्मदिन है। इस मौके पर पढ़ते हैं उनकी बेहद ख़ास और उम्मीद जगाती कविता “आएंगे, उजले दिन ज़रूर आएंगे”
  • मीराबाई चानू का सिल्वर मेडल गोल्ड में अपग्रेड हो सकता है? भारतीय मीडिया ने फैलाई गलत ख़बर
    पूजा चौधरी
    मीराबाई चानू का सिल्वर मेडल गोल्ड में अपग्रेड हो सकता है? भारतीय मीडिया ने फैलाई गलत ख़बर
    05 Aug 2021
    भारत की मीराबाई चानू ने टोक्यो ओलंपिक में वेटलिफ़्टिंग के 49 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीता. 24 जुलाई को चीन की झिहुई होउ पहले और मीराबाई चानू दूसरे स्थान पर रहीं. 2 दिन बाद ANI ने एक स्टोरी…
  • प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तीन तलाक कानून को बताया अल्पसंख्यक, महिला व संविधान विरोधी
    सबरंग इंडिया
    प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ताओं ने तीन तलाक़ क़ानून को बताया अल्पसंख्यक, महिला व संविधान विरोधी
    05 Aug 2021
    इन सामाजिक कार्यकर्ताओं की टिप्पणियां उस दिन आई हैं जब सरकार और कई संगठनों ने मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) अधिनियम, 2019 के लागू होने के उपलक्ष्य पर ‘मुस्लिम महिला अधिकार दिवस’ मनाया।
  • जर्मनी को हराकर भारत ने कांस्य पदक जीता, 41 साल बाद ओलंपिक पदक,देशभर से मिल रही है बधाईयाँ
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    जर्मनी को हराकर भारत ने कांस्य पदक जीता, 41 साल बाद ओलंपिक पदक; देशभर से आ रही हैं बधाईयां
    05 Aug 2021
    भारतीय टीम 1980 मास्को ओलंपिक में अपने आठ स्वर्ण पदक में से आखिरी पदक जीतने के 41 साल बाद ओलंपिक पदक जीती है।राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत समूचे भारत ने 41 साल बाद तोक्यो…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License