NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की गिरती क़ीमतों को नियंत्रित करने के लिए ओपेक प्लस देश सहमत
कोरोना वायरस महामारी के चलते मांगों में कमी के कारण कुल वैश्विक उत्पादन में 15 प्रतिशत की कमी आ सकती है। कुछ गैर-ओपेक देश भी उत्पादन में कटौती करने को राजी हो गए हैं।
पीपल्स डिस्पैच
13 Apr 2020
ओपेक प्लस

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज-ओपेक) और रूस (ओपेक प्लस) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की क़ीमतों में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए मई-जून के महीनों में अपने उत्पादन में रोज़ाना 9.7 मिलियन बैरल कटौती करने के लिए रविवार 12 अप्रैल को सहमति जताई है।

रॉयटर द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस समझौते के अनुसार रूस के साथ अधिकांश ओपेक देश अप्रैल 2020 से दो साल तक के लिए "उत्पादन में कटौती जारी रखेंगे।"

ओपेक प्लस की स्थापना साल 2017 में तेल की क़ीमतों में समन्वय को लेकर ओपेक और रूस के बीच की गई थी। फरवरी महीने में एक समझौता होने का ऐसा ही प्रयास विफल हो गया था, जिसके कारण सऊदी अरब ने अपने रोजाना के उत्पादन में 11 मिलियन बैरल से लेकर 12.5मिलियन बैरल तक की वृद्धि करने की घोषणा की थी।

इस वर्ष की शुरुआत से ऊर्जा संसाधनों में वैश्विक मांग एक तिहाई तक कम हो गई है। सऊदी ने उत्पादन में वृद्धि कर दी जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट आ गई। इस वर्ष की शुरुआत में तेल की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। यह गिरकर अब 32 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। कुछ समय के लिए तो यह 30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था जो कि वर्ष 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कोरोनावायरस महामारी घोषित किए जाने के बाद अधिकांश देशों में लागू किए गए लॉकडाउन के चलते तेल व अन्य ऊर्जा संसाधनों की मांग में गिरावट आई है। दुनिया में ऊर्जा संसाधनों का आयात करने वाले सबसे बड़े देश चीन में इनकी मांगों में भारी गिरावट देखी गई है।

इस समझौते के अनुसार, सऊदी अरब और रूस अपने उत्पादन को प्रति दिन 8.5 मिलियन बैरल तक कम करेंगे।

ओपेक प्लस द्वारा उत्पादन में ये कटौती कुल वैश्विक आपूर्ति का लगभग 10 प्रतिशत होगी। ओपेक ने गैर-ओपेक उत्पादक देशों से भी अपील की है कि वे अपने उत्पादन में कम से कम 5 प्रतिशत की कटौती करें। नॉर्वे और कनाडा ने इस पर अमल करने की अपनी इच्छा व्यक्त की है और उम्मीद है कि कम कीमतों के कारण अमेरिकी उत्पादन पहले की तुलना में काफी कम होगा। अमेरिका दुनिया में तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक उत्पादन में ये "ऐतिहासिक" कटौती कीमतों में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए अभी भी पर्याप्त नहीं होगी।

इस भविष्यवाणी के अनुसार कीमतें इसी स्तर पर रहेंगी या निकट भविष्य में कम भी हो सकती हैं। इस पूर्वानुमान के अनुसार उत्पादन में प्रस्तावित कटौती मांगों में गिरावट के अनुरूप नहीं है।

हालांकि तेल का आयात करने वाले देशों के लिए कीमतों का गिरना बेहतर हो सकता है लेकिन इराक या नाइजीरिया जैसे अधिकांश तेल उत्पादक देशों के लिए ज्यादा दिनों तक तेल की कीमतों में कमी अच्छी नहीं हो सकती हैं क्योंकि इनकी अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर इसी पर निर्भर है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

OPEC Plus countries
falling oil prices
International Market
Coronavirus
Epidemic corona Virus
WHO

Related Stories

कोविड मौतों पर विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट पर मोदी सरकार का रवैया चिंताजनक

प्रधानमंत्री जी... पक्का ये भाषण राजनीतिक नहीं था?

WHO की कोविड-19 मृत्यु दर पर भारत की आपत्तियां, कितनी तार्किक हैं? 

कोविड-19 टीकाकरण : एक साल बाद भी भ्रांतियां और भय क्यों?

लॉकडाउन-2020: यही तो दिन थे, जब राजा ने अचानक कह दिया था— स्टैचू!

कोरोना के दौरान सरकारी योजनाओं का फायदा नहीं ले पा रहें है जरूरतमंद परिवार - सर्वे

हम भारत के लोग: समृद्धि ने बांटा मगर संकट ने किया एक

वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ

स्पेन : 'कंप्यूटर एरर' की वजह से पास हुआ श्रम सुधार बिल

दिल्ली: क्या कोरोना के नए मामलों में आई है कमी? या जाँच में कमी का है असर? 


बाकी खबरें

  • रवि कौशल
    आदिवासियों के विकास के लिए अलग धर्म संहिता की ज़रूरत- जनगणना के पहले जनजातीय नेता
    28 Apr 2022
    जनजातीय समूह मानते रहे हैं कि वे हिंदू धर्म से अलग रीति-रिवाजों और परंपराओं का पालन करते हैं, इसलिए उन्हें अलग धर्म संहिता दी जाना चाहिए, ताकि आने वाली जनगणना में उन्हें अलग समहू के तौर पर पहचाना जा…
  • संदीप चक्रवर्ती
    कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च
    28 Apr 2022
    नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर बीजेपी-आरएसएस की ताक़त बढ़ी तो वह देश को हिन्दू राष्ट्र बना देंगे जहां अल्पसंख्यकों के साथ दोयम दर्जे के नागरिक जैसा बर्ताव किया जाएगा।
  • राज वाल्मीकि
    ब्राह्मणवादी व्यवस्था ने दलितों को ही नहीं बल्कि सम्पूर्ण स्त्री समुदाय को मानवाधिकारों से वंचित रखा: चौथीराम यादव
    28 Apr 2022
    पंडिता रमाबाई के परिनिर्वाण दिवस के 100 साल पूरे होने पर सफाई कर्मचारी आंदोलन ने “पंडिता रमाबाई : जीवन और संघर्ष” विषय पर कार्यक्रम किया।
  • hisab kitab
    न्यूज़क्लिक टीम
    5 साल में रोज़गार दर 46 फ़ीसदी से घटकर हुई 40 फ़ीसदी
    28 Apr 2022
    CMIE के आंकड़ों के मुताबिक भारत की काम करने लायक़ 90 करोड़ आबादी में नौकरी और नौकरी की तलाश में केवल 36 करोड़ लोग हैं। तकरीबन 54 करोड़ आबादी रोज़गार की दुनिया से बाहर है। बेरोज़गरी के यह आंकड़ें क्या कहते…
  • राजु कुमार
    बिना अनुमति जुलूस और भड़काऊ नारों से भड़का दंगा
    28 Apr 2022
    मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी सहित आठ राजनीतिक दलों की ओर से एक प्रतिनिधि मंडल ने खरगोन के दंगा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License