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अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की गिरती क़ीमतों को नियंत्रित करने के लिए ओपेक प्लस देश सहमत
कोरोना वायरस महामारी के चलते मांगों में कमी के कारण कुल वैश्विक उत्पादन में 15 प्रतिशत की कमी आ सकती है। कुछ गैर-ओपेक देश भी उत्पादन में कटौती करने को राजी हो गए हैं।
पीपल्स डिस्पैच
13 Apr 2020
ओपेक प्लस

पेट्रोलियम निर्यातक देशों के संगठन (ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पेट्रोलियम एक्सपोर्टिंग कंट्रीज-ओपेक) और रूस (ओपेक प्लस) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की क़ीमतों में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए मई-जून के महीनों में अपने उत्पादन में रोज़ाना 9.7 मिलियन बैरल कटौती करने के लिए रविवार 12 अप्रैल को सहमति जताई है।

रॉयटर द्वारा प्रकाशित की गई एक रिपोर्ट में लिखा गया है कि इस समझौते के अनुसार रूस के साथ अधिकांश ओपेक देश अप्रैल 2020 से दो साल तक के लिए "उत्पादन में कटौती जारी रखेंगे।"

ओपेक प्लस की स्थापना साल 2017 में तेल की क़ीमतों में समन्वय को लेकर ओपेक और रूस के बीच की गई थी। फरवरी महीने में एक समझौता होने का ऐसा ही प्रयास विफल हो गया था, जिसके कारण सऊदी अरब ने अपने रोजाना के उत्पादन में 11 मिलियन बैरल से लेकर 12.5मिलियन बैरल तक की वृद्धि करने की घोषणा की थी।

इस वर्ष की शुरुआत से ऊर्जा संसाधनों में वैश्विक मांग एक तिहाई तक कम हो गई है। सऊदी ने उत्पादन में वृद्धि कर दी जिसके कारण अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में तेल की कीमतों में गिरावट आ गई। इस वर्ष की शुरुआत में तेल की कीमत 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास थी। यह गिरकर अब 32 डॉलर प्रति बैरल हो गया है। कुछ समय के लिए तो यह 30 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था जो कि वर्ष 1991 के खाड़ी युद्ध के बाद सबसे निचले स्तर तक पहुंच गया था।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा कोरोनावायरस महामारी घोषित किए जाने के बाद अधिकांश देशों में लागू किए गए लॉकडाउन के चलते तेल व अन्य ऊर्जा संसाधनों की मांग में गिरावट आई है। दुनिया में ऊर्जा संसाधनों का आयात करने वाले सबसे बड़े देश चीन में इनकी मांगों में भारी गिरावट देखी गई है।

इस समझौते के अनुसार, सऊदी अरब और रूस अपने उत्पादन को प्रति दिन 8.5 मिलियन बैरल तक कम करेंगे।

ओपेक प्लस द्वारा उत्पादन में ये कटौती कुल वैश्विक आपूर्ति का लगभग 10 प्रतिशत होगी। ओपेक ने गैर-ओपेक उत्पादक देशों से भी अपील की है कि वे अपने उत्पादन में कम से कम 5 प्रतिशत की कटौती करें। नॉर्वे और कनाडा ने इस पर अमल करने की अपनी इच्छा व्यक्त की है और उम्मीद है कि कम कीमतों के कारण अमेरिकी उत्पादन पहले की तुलना में काफी कम होगा। अमेरिका दुनिया में तेल का सबसे बड़ा उत्पादक है।

हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक उत्पादन में ये "ऐतिहासिक" कटौती कीमतों में गिरावट को नियंत्रित करने के लिए अभी भी पर्याप्त नहीं होगी।

इस भविष्यवाणी के अनुसार कीमतें इसी स्तर पर रहेंगी या निकट भविष्य में कम भी हो सकती हैं। इस पूर्वानुमान के अनुसार उत्पादन में प्रस्तावित कटौती मांगों में गिरावट के अनुरूप नहीं है।

हालांकि तेल का आयात करने वाले देशों के लिए कीमतों का गिरना बेहतर हो सकता है लेकिन इराक या नाइजीरिया जैसे अधिकांश तेल उत्पादक देशों के लिए ज्यादा दिनों तक तेल की कीमतों में कमी अच्छी नहीं हो सकती हैं क्योंकि इनकी अर्थव्यवस्था बड़े पैमाने पर इसी पर निर्भर है।

साभार : पीपल्स डिस्पैच

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falling oil prices
International Market
Coronavirus
Epidemic corona Virus
WHO

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