NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
मध्य प्रदेश रेत खनन पर माकपा ने कहा शिवराज सरकार रेत माफियों की है
मंगलवार को सरकार ने रेत व्यपारियों को राहत देने का ऐलान किया। जिसमें रेत व्यपारियों को चार माह की रोयल्टी का 50 फीसद माफ करने और बाकी का 50 फीसद अगले साल जमा करने का  निर्णय किया गया है। जिसका अब चौतरफ़ा विरोध हो रहा है।  यहां तक कि सरकार के कई मंत्री भी इस निर्णय  खुलकर विरोध  कर रहे हैं।  जबकि विपक्षी माकपा  का कहना है कि  कैबिनेट बैठक कर रेत माफियों को राहत देने के निर्णय से साफ हो गया है कि यह सरकार रेत माफियाओं की सरकार है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
24 Jun 2021
CPM

भोपाल : मध्य प्रदेश सरकार की कैबिनेट द्वारा हाल ही में कुछ ऐसे निर्णय लिए गए उसका विरोध शुरू हो गया। दरअसल मंगलवार को सरकार ने रेत व्यपारियों को राहत देने का एलान किया। जिसमें रेत व्यपारियों को चार माह की रोयल्टी का 50 फीसद माफ करने और बाकी का 50 फीसद अगले साल जमा करने का  निर्णय किया गया है।  जिसका अब चौतरफ़ा विरोध हो रहा है।  यहाँ तक कि सरकार के कई मंत्री भी इस निर्णय का  खुलकर विरोध  कर रहे हैं। जबकि विपक्षी माकपा  का कहना है कि  कैबिनेट बैठक कर रेत माफियों को राहत देने के निर्णय से साफ हो गया है कि यह सरकार रेत माफियाओं की सरकार है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के राज्य सचिव जसविंदर सिंह ने उक्त बयान जारी कर कहा है कि शिवराज सिंह चौहान सरकार ने यह फैसला उस समय किया है जब कोरोना कर्फ्यू के दौरान सारे बाजार, व्यापार, रोज़गार ठप्प होने के बावजूद बिजली कंपनिया उपभोक्ताओं से मनमाने और जबरिया बिल वसूल रही हैं। फ़र्ज़ी और जबरिया वसूली में उपभोक्ताओं की क़ुरकियाँ कर रही हैं और राज्य सरकार खामोशी से यह सब देख रही है।

जसविंदर सिंह ने कहा है कि सरकार को खरीफ की बोवनी के लिए खाद और बीज के लिये लुटते किसानों का दर्द भी नहीं दिखा क्योंकि सरकार की सरकार की प्राथमिकताओं में बिजली उपभोक्ता और किसान नहीं बल्कि रेत और खदान माफिया हैं।

माकपा ने कहा है कि सरकार की प्राथमिकता इससे भी साफ हो जाती है कि कर्ज़ में डूबी प्रदेश सरकार ने हाल ही में 11000 करोड़ का और कर्ज लेने की अनुमति केंद्र से मांगी है, वहीं दूसरी तरफ रेत माफियाओं से मिलने वाली सैंकड़ों करोड़ की रोयल्टी माफ कर दी है।

जसविंदर सिंह ने कहा है कि पिछले डेढ़ दशक से रेत और खनन माफियाओं ने न केवल हमारी नदियों और जमीन को खोखला किया है बल्कि अवैध निकासी को पकड़ने वाले पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों पर भी जान लेवा हमले किए हैं, क्योंकि वे जानते हैं कि यह सरकार उन्हीं की सरकार है।

मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने सरकार के इस फैसले की निंदा करते हुए इसे वापस लेने की मांग करते हुए जनता से बिजली बिलों की जबरिया वसूली और खाद बीज की कालाबाजारी रोकने की पहल करने की मांग की है।  

जबकि सरकार के कई मंत्री भी इसका विरोध जता रहे है।  खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कहा इन्हे राहत देने के बजाए इनसे रकम वसूल कर सीएम रिलीफ फंड में डाल जाए, इसी तरह कृषि मंत्री ने भी सवाल उठाए हैं।

इन सबसे सरकार खूब किरकिरी हो रही है लेकिन ऐसा लगता है सरकार इनसे बेफिक्र अपने निर्णय पर आगे बढ़ रही हैं। आपको बता दें राज्य में ग्वालियर-चंबल इलाके से लेकर बुंदेलखंड, जबलपुर, होशंगाबाद में रेत के अवैध कारोबार का मुद्दा हमेशा बना हुआ है। मुरैना में तो एक आईपीएस अधिकारी नरेंद्र कुमार की खनन माफियाओं द्वारा हत्या भी कर दी गई थी। अभी वहां के हालात नहीं सुधरे हैं।

इलाका कोई भी हो जब भी अवैध खनन कारोबारियों के खिलाफ प्रशासन ने कार्रवाई करने की कोशिश की है तो माफिया ही उन पर हमला करने से नहीं चूके हैं। अवैध खनन को लेकर कांग्रेस की ओर से लगातार आरोप लगाए जाते रहे हैं।  अब सरकार के इस फ़ैसले ने एकबार फिर मध्य प्रदेश में रेत खनन का अवैध कारोबार मुद्दाबना दिया है, जिसमें सिर्फ विपक्ष ही नहीं बल्कि सरकार के खुद के मंत्री भी सवाल उठा रहे हैं। 

Madhya Pradesh
Shivraj Singh Chauhan
sand mining
CPIM

Related Stories

परिक्रमा वासियों की नज़र से नर्मदा

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

कड़ी मेहनत से तेंदूपत्ता तोड़ने के बावजूद नहीं मिलता वाजिब दाम!  

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

मनासा में "जागे हिन्दू" ने एक जैन हमेशा के लिए सुलाया

‘’तेरा नाम मोहम्मद है’’?... फिर पीट-पीटकर मार डाला!

श्रृंगार गौरी के दर्शन-पूजन मामले को सुनियोजित रूप से ज्ञानवापी मस्जिद-मंदिर के विवाद में बदला गयाः सीपीएम

कॉर्पोरेटी मुनाफ़े के यज्ञ कुंड में आहुति देते 'मनु' के हाथों स्वाहा होते आदिवासी

एमपी ग़ज़ब है: अब दहेज ग़ैर क़ानूनी और वर्जित शब्द नहीं रह गया

मध्यप्रदेशः सागर की एग्रो प्रोडक्ट कंपनी से कई गांव प्रभावित, बीमारी और ज़मीन बंजर होने की शिकायत


बाकी खबरें

  • बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी
    18 May 2022
    ज़िला अस्पतालों में डॉक्टरों के लिए स्वीकृत पद 1872 हैं, जिनमें 1204 डॉक्टर ही पदस्थापित हैं, जबकि 668 पद खाली हैं। अनुमंडल अस्पतालों में 1595 पद स्वीकृत हैं, जिनमें 547 ही पदस्थापित हैं, जबकि 1048…
  • heat
    मोहम्मद इमरान खान
    लू का कहर: विशेषज्ञों ने कहा झुलसाती गर्मी से निबटने की योजनाओं पर अमल करे सरकार
    18 May 2022
    उत्तर भारत के कई-कई शहरों में 45 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पारा चढ़ने के दो दिन बाद, विशेषज्ञ जलवायु परिवर्तन के चलते पड़ रही प्रचंड गर्मी की मार से आम लोगों के बचाव के लिए सरकार पर जोर दे रहे हैं।
  • hardik
    रवि शंकर दुबे
    हार्दिक पटेल का अगला राजनीतिक ठिकाना... भाजपा या AAP?
    18 May 2022
    गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले हार्दिक पटेल ने कांग्रेस को बड़ा झटका दिया है। हार्दिक पटेल ने पार्टी पर तमाम आरोप मढ़ते हुए इस्तीफा दे दिया है।
  • masjid
    अजय कुमार
    समझिये पूजा स्थल अधिनियम 1991 से जुड़ी सारी बारीकियां
    18 May 2022
    पूजा स्थल अधिनयम 1991 से जुड़ी सारी बारीकियां तब खुलकर सामने आती हैं जब इसके ख़िलाफ़ दायर की गयी याचिका से जुड़े सवालों का भी इस क़ानून के आधार पर जवाब दिया जाता है।  
  • PROTEST
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा
    18 May 2022
    पंजाब के किसान अपनी विभिन्न मांगों को लेकर राजधानी में प्रदर्शन करना चाहते हैं, लेकिन राज्य की राजधानी जाने से रोके जाने के बाद वे मंगलवार से ही चंडीगढ़-मोहाली सीमा के पास धरने पर बैठ गए हैं।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License