NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
लोकसभा-विधानसभा समेत हर लोकल चुनाव के लिए एक ही वोटर लिस्‍ट का क्या मामला है?
एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय में लोकसभा, विधानसभा और स्थानीय निकाय चुनाव के लिए कॉमन वोटर लिस्ट तैयार करने को लेकर बैठक हुई है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
29 Aug 2020
लोकसभा-विधानसभा समेत हर लोकल चुनाव के लिए एक ही वोटर लिस्‍ट
Image courtesy: Indian express

एक देश और एक चुनाव का मामला अभी अधर में लटका हुआ है लेकिन सरकार कॉमन वोटर लिस्ट की दिशा में आगे बढ़ती दिख रही है। इसका मतलब लोकसभा, विधानसभा चुनाव और लोकल चुनावों के लिए एक ही वोटर लिस्ट का इस्तेमाल किया जाएगा। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक पीएम के प्रधान सचिव पीके मिश्रा की अध्यक्षता में 13 अगस्त को इस मुद्दे को लेकर एक बैठक हुई।

आपको बता दें कि उत्‍तर प्रदेश, उत्‍तराखंड, मध्‍य प्रदेश, ओडिशा, असम, अरुणाचल प्रदेश, नगालैंड, जम्‍मू और कश्‍मीर जैसे राज्यों में स्थानीय चुनावों के लिए अलग से वोटर लिस्ट बनती है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अक्सर अपने भाषणों में देश में एक वोटर लिस्ट की चर्चा करते रहते हैं। पिछले साल जून में राज्यसभा में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अभी तक कई जगह अलग मतदाता सूची है लेकिन इसको हमें बदलना चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य-केंद्र मिलकर कानून बनाएं और एक ही सूची पर बात करें, इसके लिए सबसे सर्वश्रेष्ठ पंचायत चुनाव की सूची होती है।

आपको यह भी बता दें कि एक ही मतदाता सूची की मांग नई नहीं है। विधि आयोग ने 2015 में अपनी 255वीं रिपोर्ट में इसकी सिफारिश की थी। चुनाव आयोग ने भी 1999 और 2004 में इसी तरह का रुख अपनाया था।

क्या है मामला?

देश के कई राज्यों में पंचायत और नगरपालिका चुनावों के लिए मतदाताओं की सूची संसद और विधानसभा चुनावों के लिए उपयोग की जाने वाली सूची से भिन्न होती है। अंतर इस तथ्य से उपजा है कि हमारे देश में चुनावों की देखरेख और संचालन का जिम्मा दो संवैधानिक संस्थाओं - भारत के चुनाव आयोग (EC) और राज्य चुनाव आयोगों (SECs) को दिया जाता है।

1950 में गठित चुनाव आयोग पर भारत के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के कार्यालयों और संसद, राज्य विधानसभाओं और विधान परिषदों के चुनाव कराने की ज़िम्मेदारी होती है। दूसरी ओर राज्य चुनाव आयोग नगरपालिका और पंचायत चुनावों की निगरानी करता है। वे स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अपने स्वयं के मतदाता सूची तैयार करने के लिए स्वतंत्र हैं और इस सूची को चुनाव आयोग के साथ समन्वित करने की आवश्यकता भी नहीं है।

हालांकि ऐसा नहीं है कि अभी प्रत्येक राज्य चुनाव आयोग अलग से सूची तैयार कर रहे हैं। कुछ प्रदेशों में राज्य चुनाव आयोगों ने कानून बनाकर स्थानीय निकाय चुनावों के लिए चुनाव आयोग के मतदाताओं की सूची का उपयोग करने की अनुमति दे दी है। हालांकि अब भी कई राज्य ऐसे हैं जहां पर अलग से सूची तैयार की जा रही है।

वर्तमान में, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा, असम, मध्य प्रदेश, केरल, ओडिशा, असम, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर को छोड़कर सभी राज्य स्थानीय निकाय चुनावों के लिए चुनाव आयोग की मतदाता सूची को अपनाते हैं।

क्या कर रही है सरकार?

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई बैठक में इसमें बदलाव के तरीकों पर चर्चा हुई है। बैठक में मुख्य तौर पर दो विकल्पों पर चर्चा हुई। सबसे पहले, अनुच्छेद 243K और 243ZA के लिए एक संवैधानिक संशोधन पर विचार किया गया। इस संशोधन के बाद देश में सभी चुनावों के लिए एक ही मतदाता सूची का होना अनिवार्य हो जाएगा।

दूसरा, राज्य सरकारों को अपने संबंधित कानूनों को संशोधित करने और नगरपालिका और पंचायत चुनावों के लिए चुनाव आयोग की मतदाता सूची को अपनाने के लिए राजी करना।

आपको बता दें कि अनुच्‍छेद 243K और 243ZA राज्‍यों में स्‍थानीय निकायों के चुनाव से संबंधित हैं। इनके तहत, राज्‍य चुनाव आयोग को मतदाता सूची (वोटर लिस्‍ट) तैयार कराने और चुनाव कराने के अधिकार दिए गए हैं। वहीं, संविधान का अनुच्‍छेद 324(1) केंद्रीय चुनाव आयोग को संसद और विधानसभाओं के सभी चुनावों के लिए वोटर लिस्‍ट तैयार करने और नियंत्रित करने का अधिकार देता है।

इंडियन एक्सप्रेस ने सूत्रों के हवाले से बताया कि कैबिनेट सेक्रेटरी राजीव गाबा, लेजिस्लेटिव सेक्रेटरी जी नारायण राजू, पंचायती राज सेक्रेटरी सुनील कुमार और चुनाव आयोग के तीन प्रतिनिधियों ने इस बातचीत में हिस्सा लिया। 

election
lok sabha
vidhan sabha
One voter list
election commission of India
EC
State Election Commissions
SECs
Narendra modi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • Uttarakhand
    सत्यम कुमार
    उत्तराखंड: विकास के नाम पर विध्वंस की इबारत लिखतीं सरकारें
    18 Sep 2021
    देहरादून में जोगीवाला से पेसिफिक गोल्फ सिटी तक, सहस्त्रधारा रोड को फोर लेन सड़क में बदलने का कार्य शुरू हो चुका है, इसके लिए लगभग 2,200 पेड़ों को काटा जायेगा, जिसके लिये प्रशासन द्वारा पेड़ों को चिह्नित…
  • जांच पर और सवाल करते हैं 9/11 मामले में एफबीआई के सार्वजनिक हुए दस्तावेज 
    अमिताभ रॉय चौधरी
    जांच पर और सवाल करते हैं 9/11 मामले में एफबीआई के सार्वजनिक हुए दस्तावेज 
    18 Sep 2021
    9/11 हमलों की साजिश में सऊदी अरब की कथित सांठगांठ के बारे में लंबे समय से गोपनीय रखे गए एफबीआई के दस्तावेजों का खुलासा कर दिया गया है, जिसके मुताबिक अमेरिका में रह रहे सऊदी के कुछ धार्मिक अधिकारियों…
  • Moplah Rebellion
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    भारतीय मुसलमानों से 'ख़तरे' को भड़काने के लिए संघ परिवार कर रहा है मोपला विद्रोह का इस्तेमाल
    18 Sep 2021
    मोपला विद्रोह पर राम माधव की टिप्पणी भारतीय मुसलमानों को निशाना बनाने और जीने के बुनियादी मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए यह आरएसएस की इतिहास को तोड़-मरोड़कर पेश करने वाली ही एक ओर साज़िश है।
  • Cartoon click
    आज का कार्टून
    कार्टून क्लिक: सबकुछ बिक जाएगा... काग़ज़ के मोल...
    18 Sep 2021
    जब ऐसे उपहारों या स्मृति चिह्न की भी नीलामी हो जिसे राष्ट्रीय संग्रालय में सहेज कर रखना चाहिए, ताकि आने वाली नस्लें प्रेरणा लें, तो कई सवाल और शंकाएं मन में उठती हैं।
  • Mahendra Pratap
    अनिल सिन्हा
    राजा महेंद्र प्रतापः इतिहास से मोदी का वही खिलवाड़ 
    18 Sep 2021
    असल में मोदी और उनका संघ परिवार आज़ादी की एक सांप्रदायिक कथा तैयार करने में लगे हैं। इसमें क्रांतिकारियों के नाम का इस्तेमाल ख़ासतौर पर होता  है जिनमें से शायद ही किसी का वास्तविक संबंध आरएसएस या…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License