NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
शिक्षा
भारत
राजनीति
ऑनलाइन शिक्षा मूल संवैधानिक उद्देश्य से भटकाव का मॉडल है
शिक्षा केवल एक तकनीकी-मशीनी क्रिया नहीं जिसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों तक शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवा देना मात्र हो। ऑनलाइन शिक्षा का पूरा मॉडल इस मायने में लोकतंत्र विरोधी प्रयास है।
सुधीर कुमार सुथार / शैलजा सिंह
13 Jun 2020
ऑनलाइन शिक्षा
प्रतीकात्मक तस्वीर

कोरोना के इस विश्व संकट के समय ऑनलाइन शिक्षा का जश्न जोरों शोरों से मनाया जा रहा है। पढ़ने वाले, पढ़ाने वाले और शिक्षा संस्थानों में प्रशासनिक व्यवस्था के लोगों में जहाँ इस नए प्रयोग से एक अजीब सी बेचैनी है, वहीं शिक्षण संस्थानों के उच्चाधिकारी, मंत्रालय और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग लगातार ऑनलाइन एजुकेशन को लेकर उत्साहित हैं। इस उत्साह में एक के बाद एक आदेश निकाले जा रहे हैं और माना जा रहा है की शिक्षा का ये माध्यम भारतीय लोकतंत्र में शिक्षा व्यवस्था की सभी खामियों को दूर कर देगा, जिसमें अध्यापकों की उपस्थिति से लेकर, विद्यार्थियों की उपस्थिति, सिलेबस पूरा करवाने से लेकर, एक निश्चित तारीख पर सारा पाठ्यक्रम पूरा करना इत्यादि सभी काम अब तकनीकी ढंग से पूरे हो सकेंगे। इसके साथ ही ये भी माना जा रहा है कि चूँकि ऑनलाइन एजुकेशन में प्रत्येक बात, और गतिविधि को मॉनिटर किया जा सकता है इसीलिए ये अधिक पारदर्शी व्यवस्था भी साबित होगी। इसी प्रकार के न जाने कितने तर्क इसके पक्ष में दिए जा रहे हैं और कोरोना के इस संकटकालीन क्षण को एक आधार बनाकर शिक्षा व्यवस्था में आमूलचूल परिवर्तन की तैयारी जोरों पर है।

हालाँकि ऑनलाइन शिक्षा को प्रोत्साहन देने की शुरुआत लॉकडाउन के दौरान एक वैकल्पिक व्यवस्था के नाम पर हुयी। विद्यार्थियों को शिक्षा के नित्यकर्म से जोड़े रखने हेतु इसे शिक्षक और विद्यार्थी के बीच एक संवाद बने रहने के तर्क  के आधार पर ऑनलाइन इंटरेक्शन को बढ़ावा देने से इसकी शरुआत हुयी। दूसरा इतने लम्बे ब्रेक से विद्यार्थियों के शिक्षण सत्र का नुकसान नहीं हो, ये सरोकार भी इस वैकल्पिक व्यवस्था के आधार में था। परन्तु धीरे धीरे ऐसा प्रतीत होता है की अब सरकार ऑनलाइन शिक्षा को बड़े पैमाने पर लागू करने का मानस बना रही है। आने वाले समय में वस्तुत इसे फेस टू फेस इंटरेक्शन आधारित शिक्षा प्रणाली के विकल्प के रूप में स्थापित किया जाए तो कोई हैरानी नहीं होनी चाहिए। शिक्षण प्रणाली में अन्य प्रयोगों के साथ साथ जो पिछले कुछ वर्षों में लागू किये गए, अब एक और संस्थागत परिवर्तन के प्रयोग की तैयार के रूप में इसे देखा जा सकता है।

इसे पढ़ें : लॉकडाउन में ‘इंडिया’ तो ऑनलाइन पढ़ लेगा लेकिन ‘भारत’ का क्या होगा?

तकनीकी तौर पर भारतीय परिस्थितयों में ऑनलाइन एजुकेशन कितना सफल हो सकती है इसके ऊपर काफी लिखा गया है। परन्तु हम यहाँ ऑनलाइन एजुकेशन, शिक्षा के एक माध्यम के तौर पर कितना उचित है इस पर बात करेंगे। ऑनलाइन एजुकेशन के इस विचार में शिक्षा को केवल दो तारीखों के बीच पूरा किया जाने वाला एक अभ्यास समझ कर अलग अलग प्रोग्राम (या जिन्हें हम डिग्री कहते हैं ) पर लागू किया जाने के रूप में देखा जा रहा है। अगर बीए की डिग्री तीन साल में जुलाई से तीसरी जुलाई तक पूरी होनी है तो उसके बीच में सभी शिक्षण सम्बन्धी गतिविधियां पूरी हो जायें। इसमें पढ़ने-पढ़ाने  से लेकर परीक्षा तक की सारी गतिविधियां शामिल हैं।

परन्तु तारीखों की इस होड़ में ये तथ्य पीछे छूट जाता है कि शिक्षा का अभिप्राय केवल बीए या बीएससी के डिग्री से ही नहीं है अपितु एक विद्यार्थी की सामाजीकरण की प्रक्रिया से है। ये सामाजीकरण एक विद्यार्थी को घर/परिवार/गांव/शहर  के आरामदायक और संरक्षित स्थानों से बाहर निकलकर उसे  आसपास के लोगों, समुदायों और संस्थानों से जोड़ने की एक नियंत्रित प्रक्रिया के रूप में होता है। इस प्रक्रिया का प्रमुख उद्देश्य है विद्यार्थी को एक संवेदनशील  सामाजिक प्राणी के रुप में विकसित करना।

इसे भी पढ़ें : ऑनलाइन एजुकेशन तो ठीक है लेकिन कहीं ये 'डिजिटल खाई' तो नहीं बना रहा है? 

सामाजीकरण की इस प्रक्रिया के तीन प्रमुख आयाम होते हैं: पहला शिक्षण संसथान के उस स्थान विशेष तक पहुँच जो एक बिल्डिंग हो या एक कैंपस हो। दूसरा, शिक्षक वर्ग के साथ संवाद  और तीसरा अपने सहकर्मियों या सहपाठियों के साथ संवाद। इन तीन प्रकार के संवादों के बीच एक अन्योन्यक्रिया से मिलकर एक समाज से पूर्व समाज की रुपरेखा बनती है। इसी नन्हे  समाज जो वृहत समाज का एक छोटा नमूना होता है तक पहुँच और उसके मूल्यों के साथ सम्बन्ध वो तत्व हैं जो शिक्षा का अभिन्न अंग होते हैं। एक समान समाज की रुपरेखा जिसमें अलग अलग संस्कृतियों के विद्यार्थी एक दूसरे के साथ समानता के आधार पर दिनचर्या साझा करना सीखते हैं, इसी प्रकार के शिक्षा के केंद्रों की परिकल्पना संविधान में शिक्षा के अधिकार, समानता और न्याय के सिद्धांतों में अंतर्निहित है।

अन्य शब्दों में, शिक्षा केवल एक तकनीकी-मशीनी क्रिया नहीं जिसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों तक शिक्षण सामग्री उपलब्ध करवा देना मात्र हो। वर्तमान में हो रहे ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ावा देने के  प्रयास शिक्षण सामग्री की उपलब्धता को शिक्षा की उपलब्धता के समान देखे जा रहे है।  शिक्षण सामग्री की उपलब्धता ऑनलाइन, ऑफलाइन, प्रिंटेड, हाथों से लिखे नोट्स, नाटक, फिल्में , और,  कठपुतली के शो भी हो सकते हैं परन्तु शिक्षा की उपलब्धता का प्रश्न एक व्यापक , लोकतान्त्रिक और प्रतिनिधित्व से जुड़ा प्रश्न हैं। ये प्रश्न शिक्षण संस्थानों और उसमें उपस्थित  जन-संस्थानों तक पहुँच और उनके रोजमर्रा के जीवन में एक  मानवीय गरिमा के साथ शिरकत करने से जुड़ा हुआ प्रश्न है।  चूँकि ये, संस्थान वो बिल्डिंग या कैंपस से बाहर बसते समाज का ही एक नमूना हैं, शिक्षा तक उपलब्धता समाज में एक नागरिक के रूप में एक विद्यार्थी की पहुँच का सवाल है न की केवल शिक्षण सामग्री तक पहुँच का। 

इसे भी पढ़ें : डीयू : छात्र-शिक्षक ऑनलाइन क्लासेस और एग्ज़ाम के ख़िलाफ़

ऑनलाइन शिक्षा का पूरा मॉडल इस मायने में लोकतंत्र विरोधी प्रयास है। इस प्रकार की शिक्षा पद्धति से न केवल विद्यार्थियों की संवेदनशीलता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा अपितु इससे उसके मनः-मस्तिष्क में पहले से स्थापित सामाजिक छवि और मजबूत होंगी। महिलाओं, कमजोर वर्गों, सहकर्मियों और समाज के अन्य तबकों के प्रति जागरूकता और उनके दृष्टिकोण को समझने और जानने की प्रवृतियों का ह्रास ऑनलाइन शिक्षा पद्धति का सीधा परिणाम होगा। एक प्रकार से युवा पीढ़ी तक शिक्षा को पहुंचाकर जो कुछ भी भारतीय समाज ने अब तक अर्जित किया है, ऑनलाइन शिक्षा को बढ़ चढ़कर लागू करने के ये प्रयास उसे नष्ट करने का ही काम करेंगे।

भारतीय  ज्ञान परम्पराओं में भी शिक्षा को एक सामुदायिक गतिविधि के रूप में देखा गया है न की एक व्यक्तिगत क्रिया के रूप में। भारतीय ज्ञान परम्पराओं में तो किसी व्यक्ति विशेष के साथ लेखन को आरोपित करना भी संभव नहीं है क्योंकि अक्सर कई ग्रंथों (बौद्ध ग्रंथों, जैन ग्रंथों,  वेदों, उपनिषदों,  सूफी परम्पराओं सहित)  को कई व्यक्तियों के विचारों का संग्रह माना जाता है। 

भारतीय संविधान में समानता और न्याय के संवैधानिक प्रावधान जहाँ एक और अस्पृश्यता को समाप्त करने का प्रयास कर रहे थे वहीं दूसरी और कैसे लोकतान्त्रिक संस्थाओं को अधिक जनतांत्रिक बनाया जाए इस पर भी ध्यान रखे हुए थे। ये दोनों ही प्रयास व्यावहारिक जगत में ऐसे फिजिकल स्पेस का निर्माण करने की दिशा में कदम थे जो सभी वर्गों, समुदायों और व्यक्तियों के लिए खुले हों। अर्थात व्यक्ति और समुदाय के संबंधों को एक ही जितनी महत्ता प्रदान थी। शिक्षण और शोध  की पूरी प्रक्रिया को क्लासरूम के वातावरण से व्यक्तिपरक वर्चुअल जगत में बदल देने से संविधान के इन उद्देश्यों का निहितार्थ ही बदल जाता है। नैतिकता का जो पाठ व्यक्ति अलग अलग पृष्ठभूमियों से आने वाले लोगों के साथ रहकर, खाकर और समय व्यतीत करके सीखता है , ऑनलाइन शिक्षा का ये मॉडल उन सबको केवल एक कमरे की चारदीवारी में  बंद कर केवल अपनी पृष्ठभूमि से प्राप्त नैतिकता तक सीमित कर देता हैं।  इसमें महिला सहपाठियों के साथ , दूसरे राज्यों, देशों,  भाषाओँ  और संस्कृतियों  के साथ रहने से प्राप्त नैतिकता और समायोजन से युक्त मानसिक विकास की संभावनाएं समाप्त प्राय  हो जाती हैं।

शिक्षा पद्धति का ये सवाल वास्तव में केवल तकनीक से जुड़ा सवाल नहीं है और न ही केवल फ़ोन और इंटरनेट की उपलब्धता का है। वास्तव में  ये सवाल शिक्षा से जुडी  संवैधानिक और सामाजिक नैतिकता का है जिसकी महत्ता को शिक्षा नीति  की बदलती प्राथमिकताओं में कहीं पीछे छोड़  दिया गया है। 

लेखक सुधीर कुमार सुथार सेंटर फॉर पोलिटिकल स्टडीज, जेएनयू और शैलजा सिंह भारती कॉलेज (दिल्ली विश्वविद्यालय) डिपार्टमेंट ऑफ़ पोलिटिकल साइंस, में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। सुधीर से sudhir131@gmail.com और शैलजा से shailza134@gmail.com पर संपर्क किया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें : डीयू ऑनलाइन एग्ज़ाम प्रकरण: क्या एबीवीपी अंतत: सरकार के कवच का काम करेगी?

Coronavirus
COVID-19
Online Classes
Online Education
education system

Related Stories

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

पूर्वोत्तर के 40% से अधिक छात्रों को महामारी के दौरान पढ़ाई के लिए गैजेट उपलब्ध नहीं रहा

कोरोना लॉकडाउन के दो वर्ष, बिहार के प्रवासी मज़दूरों के बच्चे और उम्मीदों के स्कूल

कर्नाटक: वंचित समुदाय के लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य के मुद्दों, सूदखोरी और बच्चों के अनिश्चित भविष्य पर अपने बयान दर्ज कराये

लॉकडाउन में लड़कियां हुई शिक्षा से दूर, 67% नहीं ले पाईं ऑनलाइन क्लास : रिपोर्ट

शिक्षा बजट: डिजिटल डिवाइड से शिक्षा तक पहुँच, उसकी गुणवत्ता दूभर

शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 

विश्वविद्यालयों का भविष्य खतरे में, नयी हकीकत को स्वीकार करना होगा: रिपोर्ट

ऑनलाइन शिक्षा में विभिन्न समस्याओं से जूझते विद्यार्थियों का बयान


बाकी खबरें

  • Drugs worth Rs 313 crore seized from three people in Gujarat
    भाषा
    गुजरात में तीन लोगों के पास से 313 करोड़ रुपये मूल्य की मादक पदार्थ जब्त
    11 Nov 2021
    एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि इससे पहले पुलिस ने मंगलवार को महाराष्ट्र के ठाणे के रहनेवाले सज्जाद घोसी नाम के व्यक्ति को एक गुप्त सूचना के आधार पर खम्भलिया कस्बे के एक अतिथिगृह से गिरफ्तार किया…
  • sc
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    त्रिपुरा हिंसा:सुप्रीम कोर्ट वकीलों, पत्रकार के खिलाफ यूएपीए के तहत दर्ज प्राथमिकी रद्द करने के अनुरोध पर करेगी सुनवाई
    11 Nov 2021
    प्रधान न्यायाधीश एन वी रमण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और हिमा कोहली की पीठ को अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने सूचित किया कि तथ्य खोज समिति का हिस्सा रहे दो वकील और एक पत्रकार के खिलाफ उनकी सोशल मीडिया…
  • Varun Gandhi said on Kangana Ranaut's remarks about independence - call it madness or sedition
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    आजादी को लेकर कंगना रनौत की टिप्पणी पर बोले वरूण गांधी - इसे पागलपन कहूं या देशद्रोह
    11 Nov 2021
    कंगना रनौत की आलोचना करते हुए गांधी ने ट्वीट कर कहा, ''कभी महात्मा गांधी जी के त्याग और तपस्या का अपमान, कभी उनके हत्यारे का सम्मान, और अब शहीद मंगल पाण्डेय से लेकर रानी लक्ष्मीबाई, भगत सिंह,…
  •  PM's parliamentary constituency Banaras breathing poisonous air
    विजय विनीत
    स्पेशल रिपोर्टः ज़हरीली हवा में सांस ले रहे पीएम के संसदीय क्षेत्र बनारस के लोग
    11 Nov 2021
    दिवाली के बाद से ही पीएम नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में स्थिति दमघोंटू बनी हुई है। इस शहर की एयर क्वालिटी इंडेक्स (एक्यूआई) 300 से नीचे उतरने का नाम नहीं ले रही है। यह स्थिति उन लोगों के…
  • maharastra
    भाषा
    महाराष्ट्र राज्य सड़क परिवहन निगम के कर्मचारियों की हड़ताल जारी, मंत्री ने यूनियन से बात की
    11 Nov 2021
    एमएसआरटीसी के एक अधिकारी ने कहा, "आज राज्य भर में सभी 250 डिपो बंद हैं। कल, कम से कम तीन डिपो चालू थे, लेकिन आज वे भी बंद हैं।" एमएसआरटीसी के कर्मचारी, घाटे में चल रहे निगम के राज्य सरकार में विलय की…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License