NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
यूरोप
डेनिश सरकार द्वारा सीरियाई शरणार्थियों का निवास परमिट रद्द करने के फ़ैसले का बढ़ता विरोध
एक्टिविस्ट और मानवाधिकार संगठनों का दावा है कि डेनिश सरकार का शरणार्थियों के लिए सीरिया के हिस्से को सुरक्षित घोषित करना और उन्हें वापस भेजने का कदम जमीनी वास्तविकताओं के गलत मूल्यांकन पर आधारित है।
पीपल्स डिस्पैच
21 Apr 2021
Denmark

डेनमार्क द्वारा सीरियाई शरणार्थियों के निवास परमिट को रद्द करने के फ़ैसले का विरोध लगातार बढ़ता जा रहा है। 19 अप्रैल को मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह और संगठनों ने एक बयान जारी कर डेनिश इमिग्रेशन सर्विस की कंट्री ऑफ ऑरिजिन रिपोर्ट का खंडन किया है, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया है कि सीरिया के कुछ हिस्से अब शरणार्थियों के लौटने के लिए सुरक्षित हैं। निष्कर्ष के आधार पर डेनमार्क के अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में सैकड़ों सीरियाई लोगों के निवास परमिट को रद्द कर दिया है।

अधिकांश सीरियाई जिनके निवास परमिट रद्द कर दिए गए हैं, उन्हें या तो सीरिया लौटने के लिए मजबूर किया जाएगा या उन्हें "निर्वासन केंद्रों" में भेज दिया जाएगा। 2017 के आंकड़ों के अनुसार, डेनमार्क में 40,000 से अधिक सीरियाई शरणार्थी हैं।

सीरियाई लोगों के निवास परमिट को रद्द करने का कदम डेनमार्क को ऐसा करने वाला पहला यूरोपीय देश बना, हालांकि इस तरह की नीति इस क्षेत्र में कई अन्य देशों में संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त के शरणार्थी (UNHCR) द्वारा इस तरह के कदमों के खिलाफ चेतावनी के बावजूद चर्चा की जा रही है।

सीरियाई शरणार्थियों के निवास परमिट रद्द कर के डेनमार्क यूरोपीय संघ का ऐसा करने वाला पहला देश बन गया है। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायुक्त की इस तरह के कदमों के खिलाफ चेतावनी के बावजूद, यूरोप के कई और देश इस तरह की नीतियों पर विचार कर रहे हैं।

यह स्वीकार करते हुए कि, डेनिश सरकार का दमिश्कऔर आस पास के क्षेत्रों से आए सीरियाई शरणार्थियों को दी हुई "अस्थायी सुरक्षा" को रद्द करने का निर्णय "हमारे परिसाक्ष्य" पर आधारित है,  मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और अधिकार संगठनों ने दावा किया है कि, "हम बाद के सरकारी निष्कर्षों या नीतियों में अपने विचारों को नहीं ढूंढ पा रहे हैं और न ही हम यह स्वीकार कर सकते हैं कि डेनमार्क की सीरियाई शरणार्थी नीति पूरी तरह से ज़मीन पर वास्तविक परिस्थितियों को दर्शाती है।” बयान के हस्ताक्षरकर्ताओं में  कई सीरियाई कार्यकर्ताओं और विद्वानों के साथ ह्यूमन राइट्स वॉच की सारा कायाली भी शामिल हैं।

सीरियाई शरणार्थियों को वापस जाने के लिए मजबूर करने के फैसले की  संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त के शरणार्थी (UNHCR), यूरोपीय संघ और अन्य मानवाधिकार संगठनों ने भी आलोचना की है।

सीरिया में युद्ध के शुरुआती वर्षों के दौरान हजारों सीरियाई लोगों ने दमिश्क और आसपास के क्षेत्रों को छोड़ कर चले गए थे जब सरकारी बलों ने युद्ध के शुरुआती वर्षों में खोए इलाकों पर वापस अपना नियंत्रण स्थापित करने के लिए हमले शुरू कर दिए थे। इसे अब पूरा एक दशक हो चुका है। विद्रोह का केंद्र रहे दमिश्क और आसपास के क्षेत्र वापस अब बशर अल-असद के नेतृत्व वाली सरकार के पूर्ण नियंत्रण में हैं और देश में युद्ध मुख्य रूप से उत्तरी भागों में सीमित है। हालांकि, मानवाधिकार समूहों का दावा है कि सीरिया के कुछ शरणार्थियों को सरकार द्वारा उत्पीड़न का सामना करना पड़ सकता है, और तो और देश में युद्ध अभी भी खत्म नहीं हुआ है।

Europe/Denmark
European Union
Syria
Civil War in Syria
UNHCR
Syrian Refugees

Related Stories

डेनमार्क: प्रगतिशील ताकतों का आगामी यूरोपीय संघ के सैन्य गठबंधन से बाहर बने रहने पर जनमत संग्रह में ‘न’ के पक्ष में वोट का आह्वान

सिर्फ़ कश्मीर ही नहीं, देश का लोकतंत्र ख़तरे में है: ग़ुलाम नबी आज़ाद


बाकी खबरें

  • CAA
    नाइश हसन
    यूपी चुनाव: सीएए विरोधी आंदोलन से मिलीं कई महिला नेता
    07 Feb 2022
    आंदोलन से उभरी ये औरतें चूल्हे-चौके, रसोई-बिस्तर के गणित से इतर अब कुछ और बड़ा करने जा रही हैं। उनके ख़्वाबों की सतरंगी दुनिया में अब सियासत है।
  • Nirmala Sitharaman
    प्रभात पटनायक
    इस बजट की चुप्पियां और भी डरावनी हैं
    07 Feb 2022
    इस तरह, जनता को ज़्यादा से ज़्यादा बढ़ती मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन, मोदी सरकार को तो इस सब को देखना और पहचानना तक मंज़ूर नहीं है। लेकिन, यह अपने आप में अनिष्टकारी है क्योंकि जब भुगतान…
  • caste
    विक्रम सिंह
    आज़ाद भारत में मनु के द्रोणाचार्य
    07 Feb 2022
    शिक्षा परिसरों का जनवादीकरण और छात्रों, अध्यापकों, कुलपतियों और अन्य उच्च पदों में वंचित समुदायों का प्रतिनिधित्व बढ़ाये बिना शिक्षण संस्थानों को मनु के ब्राह्मणवाद से छुटकारा नहीं दिलवाया जा सकता है।
  • UP
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: पांच साल पत्रकारों ने झेले फ़र्ज़ी मुक़दमे और धमकियां, हालत हुई और बदतर! 
    07 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने पिछले पांच सालों में जिस तरह से मीडिया का गला घोंटा है उसे लोकतंत्र का चौथा खंभा शायद कभी नहीं भुला पाएगा। पूर्वांचल की बात करें तो जुल्म-ज्यादती के भय से थर-थर कांप रहे…
  • hum bharat ke log
    अतुल चंद्रा
    हम भारत के लोग : इंडिया@75 और देश का बदलता माहौल
    07 Feb 2022
    पुराने प्रतीकों की जगह नए प्रतीक चिह्न स्थापित किये जा रहे हैं। भारत की स्वतंत्रता के इतिहास को नया जामा पहनाने की कोशिश हो रही है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License