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भारत
राजनीति
डाकपत्र से मतदान की आयु सीमा कम करने का विरोध, चुनाव आयोग से हस्तक्षेप की मांग
कांग्रेस ने आयोग को दिए गए प्रतिवेदन में यह दावा किया गया है कि इस निर्णय को लेकर विधि मंत्रालय ने चुनाव कराने संबंधी नियम -1961 में जो संशोधन किया है उसमें कई कानूनी खामियां हैं।
भाषा
03 Jul 2020
डाकपत्र से मतदान की आयु सीमा कम करने का विरोध

कांग्रेस ने कोरोना महामारी के चलते वरिष्ठ नागरिकों के लिए डाकपत्र से मतदान की सुविधा देने के संदर्भ में आयु सीमा घटाकर 65 साल करने के फैसले का विरोध करते हुए शुक्रवार को निर्वाचन आयोग से आग्रह किया कि वह इस निर्णय एवं इससे जुड़े संशोधन को वापस लेने का निर्देश दे।

विपक्षी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल, केसी वेणुगोपाल, कपिल सिब्बल, अभिषेक मनु सिंघवी और रणदीप सुरजेवाला की ओर से आयोग को दिए गए प्रतिवेदन में यह दावा किया गया है कि इस निर्णय को लेकर विधि मंत्रालय ने चुनाव कराने संबंधी नियम -1961 में जो संशोधन किया है उसमें कई कानूनी खामियां हैं।

कांग्रेस ने कहा, ‘‘जिस तरह से ये निर्णय लिया गया है उससे साफ जाहिर होता है कि इसमें कोई दिमाग नहीं लगाया गया और संबंधित पक्षों के साथ कोई विचार-विमर्श नहीं किया गया।’’

उसने यह आरोप भी लगाया कि इस व्यवस्था से मतदान की गोपनीयता भंग होने का खतरा है, जबकि किसी भी संवैधानिक लोकतंत्र में मतदान की गोपनीयता बहुत महत्वपूर्ण है।

विपक्षी पार्टी ने कहा कि बेहतर विकल्प यह होगा कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग मतदान बूथ बनाए जाएं जिससे संक्रमण का न्यूनतम खतरा होगा।

उसने आग्रह किया, ‘‘निर्वाचन आयोग संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत दी गई शक्तियों का उपयोग करे और इस निर्णय तथा नियम में संशोधन को वापस लेने का निर्देश दे।’’

गौरतलब है कि कोरोना वायरस के बढ़ते मामलों के बीच वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लोकसभा और विधानसभा चुनावों में डाक मतपत्र के लिए मतदाताओं की आयु सीमा कम कर दी गयी है।

विधि मंत्रालय ने अक्टूबर 2019 में चुनाव कराने के नियमों में संशोधन किया था और दिव्यांगों तथा 80 साल या इससे अधिक उम्र के लोगों को लोकसभा और विधानसभा चुनावों में डाक मतपत्र से मतदान की अनुमति प्रदान की थी। अब मंत्रालय ने 19 जून को जारी ताजा संशोधन में 65 वर्ष या इससे अधिक उम्र के लोगों को डाक मतपत्र के इस्तेमाल की अनुमति दी है।

भारत में कोरोना वायरस के प्रकोप के बाद बिहार पहला राज्य है जहां विधानसभा चुनाव होने हैं और इस राज्य के मतदाता उक्त संशोधित नियम का सबसे पहले लाभ उठाएंगे।

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BJP

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