NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
दूरदर्शन चेन्नई के कर्मचारियों का आरोप : '30 दिन काम करने के बाद सिर्फ़ 7 दिन का हुआ भुगतान'
दूरदर्शन में लंबे समय के लिए अस्थायी कर्मचारी रखने का सिलसिला काफ़ी वक़्त से चला आ रहा है और यह कथित तौर पर उच्च अधिकारियों की जानकारी के साथ होता है।
श्रुति एमडी
26 Jun 2021
दूरदर्शन
तस्वीर सौजन्य : दूरदर्शन पोढिगाई

चेन्नई के दूरदर्शन केंद्र का ज़्यादातर काम अस्थायी कर्मचारी करते हैं और कथित तौर उन्हें इसका पूरा पैसा नहीं दिया जाता है। कई कर्मचारियों ने न्यूज़क्लिक को बताया कि वह हर महीने 2 हफ़्ते से 30 दिन तक काम करते हैं, मगर उन्हें सिर्फ़ 7 दिन का पैसा दिया जाता है।

दूरदर्शन में लंबे समय के लिए आक्समिक कर्मचारी रखने का सिलसिला काफ़ी वक़्त से चला आ रहा है और यह कथित तौर पर उच्च अधिकारियों की जानकारी के साथ होता है।

दूरदर्शन में टीवी चैनल चलाने के लिए सभी आवश्यक काम कथित तौर पर अस्थायी कर्मचारी ही करते हैं, जैसे एडिटर, रिसोर्स पर्सन, रिपोर्टर, एंकर और सेट वर्कर।

दूरदर्शन कर्मचारियों का कहना है कि वह ऐसे शोषण भरे माहौल में इस उम्मीद में काम करते हैं कि भविष्य में उनके लिए स्थायी कर्मचारी बनने की उम्मीद जगेगी और उन्हें एक सरकारी कर्मचारी होने के फ़ायदे मिल पाएंगे।

न्यूज़क्लिक ने जिन कर्मचारियों से बात की उन्होंने अपना नाम नहीं बताया क्योंकि डर है कि प्रशासन उन्हें निशाना बनाएगा। उन्होंने एक कर्मचारी का उदाहरण दिया जिसने इस प्रथा पर सवाल उठाए थे और उसे अगले प्रोजेक्ट में काम नहीं दिया गया था।

कर्मचारियों का कहना है कि एनडीए के राज में, दूरदर्शन लगभग पूरी तरह से अस्थायी और अनुबंध कर्मचारियों के साथ काम करता है; चुनिंदा स्थायी कर्मचारी ही बचे हैं जो कुछ साल में रिटायर होने वाले हैं।

21 साल से अस्थायी कर्मचारी

दूरदर्शन चेन्नई के साथ क़रीब 10 साल संपादक के तौर पर काम कर रहे एक कर्मचारी ने दावा किया, "हम महीने में 15 दिन काम करते हैं, मगर हमें सिर्फ़ 7 दिन का भुगतान किया जाता है। किसी किसी को किस्मत से बाक़ी महीने के लिए फ्रीलांस काम मिल जाता है।"

उन्होंने न्यूज़क्लिक को बताया, "हमने प्रशासन के साथ समझौता कर के 15 दिन काम करना शुरू किया; पहले, हम 30 दिन काम करते थे। जो समझौते में शामिल नहीं थे, वह अभी भी 30 दिन काम करते हैं।"

उन्होंने आरोप लगाया, "मैं एक एडिटर हूँ मगर मेरी बहाली 'पोस्ट-प्रोडक्शन असिस्टेंट' के तौर पर हुई है क्योंकि एडिटर को ज़्यादा पैसा मिलना चाहिये। मुझे एक दिन का ₹1,980 मिलता है और काग़ज़ों पर मैं 7 दिन ही काम करता हूँ, ऐसे में मुझे हर महीने ₹13,860 मिलता है।"

एक कर्मचारी जो दूरदर्शन चेन्नल के साथ 21 साल हैं, ने कहा, "यही यहाँ का नियम है, यह दशकों से चला आ रहा है।" उन्होंने दावा किया कि यह सिलसिला 2004-05 में शुरू हुआ था जब कर्मचारियों को महीने में 21 दिन के लिये रखा जाता था। उन्होंने कहा, "हम सीनियर के अनुरोध पर 2 दिन और काम करते थे।"

कर्मचारियों ने दावा किया कि साल बीतते गए और हर महीने 21 दिन का भुगतान 10 दिन हो गया, और अब यह 4 से 10 दिन का है। एक कर्मचारी ने दावा किया, "यह बदलाव दिल्ली के अधिकारियों से इजाज़त लेकर किया गया था।"

तमिलनाडु यूनियन ऑफ़ जर्नलिस्ट्स के आफिस बियरर पुरुषोत्तमन ने कहा, "अगर लेबर क़ानून बनाने वाली सरकार ही उसे लागू नहीं करेगी, तो बाक़ी टीवी चैनल उसे लागू कैसे करेंगे। यह पत्रकारों के लिए दयनीय स्थिति है।"

स्थायी नौकरी का सपना

पहले अस्थायी कर्मचारियों ने कथित तौर पर क़ानूनी लड़ाईयां लड़ी हैं और स्थायी नौकरी पाने में कामयाब हुए हैं।

एक कर्मचारी ने न्यूज़क्लिक को बताया, "8 से 10 साल पहले कर्मचारियों को हर महीने 10 दिन काम के लिए रखा जाता था, जो एक साल में 120 दिन होते थे। 2 कर्मचारियों ने स्थायी नौकरी की मांग करते हुए कोर्ट केस किया और दूरदर्शन के साथ लंबे समय तक काम और एक साल में 120 दिन काम की बिना पर वह केस जीत गए।"

एक अन्य वरिष्ठ कर्मचारी ने बताया, "उनमें से एक कर्मचारी जब केस जीती तब वह 53 साल की थीं, उन्होंने सिर्फ़ 7 साल काम किया और रिटायर हो गईं। दूसरा कर्मचारी भी युवा नहीं था।"

भविष्य में ऐसे मामले होने से रोकने के लिए प्रशासन ने काम के दिनों को महीने में 7 दिन कर दिया। कर्मचारी ने बताया, "अब हम काग़ज़ों के हिसाब से महीने में 7 दिन काम करते हैं जो कि साल में 84 दिन होते हैं। क़ानूनी लड़ाई लड़ कर जीतने के लिए यह बहुत कम है।"

यह पूछे जाने पर कि कर्मचारी ऐसी परिस्थितियों में काम करना क्यों जारी रखते हैं, दूरदर्शन के एक संपादक ने कहा, “हम में से कई लोग आशान्वित हैं कि किसी दिन हमें एक स्थायी कर्मचारी के रूप में भी काम पर रखा जाएगा। हम उस दिन का सपना देखते हैं जब आवेदनों की घोषणा की जाएगी।"

यह देखते हुए कि उनमें से कई अपनी नौकरी के लिए अच्छी तरह से योग्य हैं और लंबे समय से डीडी से जुड़े हुए हैं, उनका मानना ​​है कि नौकरी के उद्घाटन के मामले में, वे पसंदीदा उम्मीदवार होंगे। वे उस पल का इंतजार कर रहे हैं।

इससे पहले स्थायी भर्तियां 1997 में की गई थीं, जब सूचना अधिकारी के चार पद भरे गए थे।

बिखरी ट्रेड यूनियन

सभी कार्यकर्ताओं ने एकमत से कहा कि आमतौर पर स्थायी कर्मचारी ही मजबूत ट्रेड यूनियन बनाते हैं, और क्योंकि डीडी चेन्नई में केवल शीर्ष स्तर के अधिकारी ही स्थायी हैं, कोई यूनियन नहीं है।

एक कर्मचारी ने कहा, "केवल प्रोड्यूसर और प्रोडक्शन असिस्टेंट ही स्थायी होते हैं; बाक़ी सभी को दिन-प्रतिदिन के आधार पर लिया जाता है, यहां तक ​​कि अनुबंध के आधार पर भी नहीं।"

कुल मिलाकर लगभग 200 अस्थायी कर्मचारी दूरदर्शन चेन्नई के साथ काम कर रहे हैं - 60 समाचार अनुभाग से जुड़े हैं, 20 कृषि के साथ और अधिकांश लाइटिंग, सेट और कार्यक्रमों आदि पर काम करते हैं।

भले ही दूरदर्शन चेन्नई में श्रमिकों की कोई ट्रेड यूनियन नहीं है, लेकिन उनमें से अधिकांश डीडी के बाहर यूनियनों से संबद्ध हैं, जैसे कैमरामैन यूनियन, बढ़ई यूनियन, संपादक संघ आदि।

अस्थायी कर्मचारियों के अलावा, कई और परिवार हैं जो दूरदर्शन चेन्नई पर निर्भर हैं। कई कलाकार और अतिथि जिन्हें परियोजनाओं के लिए नियमित रूप से काम पर रखा गया था, वे कोविड-19 लॉकडाउन के दौरान कम प्रोग्राम के कारण काम से बाहर हैं। साथ ही दूरदर्शन का बजट बरक़रार रहने के बाद भी प्रशासन ऊपर से धन की कमी की शिकायत कर रहा है।

न्यूज़क्लिक ने कर्मचारियों के इन आरोपों पर दूरदर्शन चेन्नई की टिप्पणी लेनी चाही मगर अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है। दूरदर्शन से टिप्पणी मिलने पर ख़बर को अपडेट किया जाएगा।

इस लेख को मूल अंग्रेज़ी में पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

‘Paid for 7 Days After Working for Upto 30 Days,’ Allege Doordarshan Chennai Staff

Casual Labour
Doordarshan
Media Jobs
Government Jobs
Chennai

Related Stories

भारत में नौकरी संकट जितना दिखता है उससे अधिक भयावह है!

तमिलनाडु: दलदली या रिहायशी ज़मीन? बेथेल नगर के 4,000 परिवार बेदखली के साये में

"ना ओला ना ऊबर, सरकार अपने हाथ में ले नियंत्रण- तमिलनाडु के ऑटो चालकों की मांग

बेरोज़गार भारत एक पड़ताल: केंद्र और राज्य सरकारों के 60 लाख से अधिक स्वीकृत पद खाली

चेन्नई यौन उत्पीड़न मामला बाल शोषण के कई अन्य पहलू से भी पर्दा उठाता है!

उपचार नहीं मिलने से मेरे पति और मां की एक घंटे के अंतराल में मौत हो गई: दूरदर्शन की पूर्व महानिदेशक

तमिलनाडु चुनाव: चेन्नई ‘स्मार्ट सिटी‘ अमीरों और कुलीनों के लिए एक परियोजना

हरियाणा की प्राइवेट नौकरियों में बाहरी की एंट्री बंद करने वाला क़ानून क्या सही है?

यूपी: आख़िर कब UPSSSC अभ्यर्थियों की ज़िंदगी होगी रौशन, 2 बरस से लटकी भर्तियां पूरी होंगी?

यूपी: आख़िर क्यों युवा और विपक्ष सरकारी नौकरी में पहले पांच साल कॉन्ट्रैक्ट सिस्टम का विरोध कर रहे हैं?


बाकी खबरें

  • अभिलाषा, संघर्ष आप्टे
    महाराष्ट्र सरकार का एससी/एसटी (अत्याचार निवारण) अधिनियम को लेकर नया प्रस्ताव : असमंजस में ज़मीनी कार्यकर्ता
    04 Apr 2022
    “हम इस बात की सराहना करते हैं कि सरकार जांच में देरी को लेकर चिंतित है, लेकिन केवल जांच के ढांचे में निचले रैंक के अधिकारियों को शामिल करने से समस्या का समाधान नहीं हो सकता”।
  • रवि शंकर दुबे
    भगवा ओढ़ने को तैयार हैं शिवपाल यादव? मोदी, योगी को ट्विटर पर फॉलो करने के क्या हैं मायने?
    04 Apr 2022
    ऐसा मालूम होता है कि शिवपाल यादव को अपनी राजनीतिक विरासत ख़तरे में दिख रही है। यही कारण है कि वो धीरे-धीरे ही सही लेकिन भाजपा की ओर नरम पड़ते नज़र आ रहे हैं। आने वाले वक़्त में वो सत्ता खेमे में जाते…
  • विजय विनीत
    पेपर लीक प्रकरणः ख़बर लिखने पर जेल भेजे गए पत्रकारों की रिहाई के लिए बलिया में जुलूस-प्रदर्शन, कलेक्ट्रेट का घेराव
    04 Apr 2022
    पत्रकारों की रिहाई के लिए आर-पार की लड़ाई लड़ने के लिए संयुक्त पत्रकार संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। जुलूस-प्रदर्शन में बड़ी संख्या में आंचलिक पत्रकार भी शामिल हुए। ख़ासतौर पर वे पत्रकार जिनसे अख़बार…
  • सोनिया यादव
    बीएचयू : सेंट्रल हिंदू स्कूल के दाख़िले में लॉटरी सिस्टम के ख़िलाफ़ छात्र, बड़े आंदोलन की दी चेतावनी
    04 Apr 2022
    बीएचयू में प्रशासन और छात्र एक बार फिर आमने-सामने हैं। सीएचएस में प्रवेश परीक्षा के बजाए लॉटरी सिस्टम के विरोध में अभिभावकों के बाद अब छात्रों और छात्र संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है।
  • टिकेंदर सिंह पंवार
    बेहतर नगरीय प्रशासन के लिए नई स्थानीय निकाय सूची का बनना ज़रूरी
    04 Apr 2022
    74वां संविधान संशोधन पूरे भारत में स्थानीय नगरीय निकायों को मज़बूत करने में नाकाम रहा है। आज जब शहरों की प्रवृत्तियां बदल रही हैं, तब हमें इस संशोधन से परे देखने की ज़रूरत है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License