NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
संयुक्त किसान मोर्चा का 29 नवंबर का संसद कूच स्थगित, 4 को अगली बैठक
एसकेएम ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि क़ानून वापस लिए जाने के मद्देनज़र फ़िलहाल 29 नवंबर को शीत सत्र की शुरुआत के दिन संसद तक होने वाला ट्रैक्टर मार्च स्थगित कर दिया गया है। भविष्य की कार्रवाई पर बैठक चार दिसंबर को होगी।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 Nov 2021
skm
स्क्रीन शॉट

संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने 29 नवंबर का संसद कूच स्थगित कर दिया है। इस आशय का फ़ैसला आज सिंघु बॉर्डर पर हुई एसकेएम की बैठक में लिया गया। अगली रणनीति तय करने के लिए चार दिसंबर को बैठक होगी।

किसान मोर्चा सिंघु बॉर्डर पर आज, शनिवार दोपहर मीडिया को संबोधित करते हुए एसकेएम के नेताओं ने घोषणा की कि प्रधानमंत्री द्वारा तीनों कृषि क़ानून वापस लिए जाने के मद्देनज़र फ़िलहाल 29 नवंबर को शीत सत्र की शुरुआत के दिन संसद तक होने वाला ट्रैक्टर मार्च स्थगित कर दिया है। भविष्य की कार्रवाई पर बैठक चार दिसंबर को होगी।

एसकेएम नेता दर्शन पाल समेत अन्य नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में स्पष्ट किया कि संसद मार्च सिर्फ़ स्थगित किया गया है, समाप्त नहीं। किसान चार दिसंबर तक इंतज़ार करेंगे कि प्रधानमंत्री इन कानूनों को संसद में रद्द कराने के अलावा उनकी अन्य मांगों पर क्या जवाब देते हैं। आपको मालूम है कि एसकेएम ने किसानों की ओर से      प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक खुला पत्र लिखा है, जिसमें उन्होंने अपनी सभी मांगों के बारे में साफ़तौर पर लिखा है। इन मांगों में फ़सल की एमएसपी यानी न्यूनतम समर्थन मूल्य की मांग प्रमुख है। इसके अलावा आंदोलन के दौरान देशभर में किसानों पर किए गए मुकदमे वापस लेने, शहीद किसानों के परिजनों को मुआवज़ा देने और मोर्चा स्थल पर शहीद किसानों की याद में स्मारक बनाने की मांग भी शामिल है।

किसान मोर्चे का प्रधानमंत्री को लिखा गया पूरा पत्र -

21 नवंबर 2021

श्री नरेंद्र मोदी,
प्रधानमंत्री,
भारत सरकार,
नई दिल्ली.

विषय: राष्ट्र के नाम आपका संदेश और आपके नाम किसानों का संदेश

प्रधानमंत्री जी,

देश के करोड़ों किसानों ने 19 नवंबर 2021 की सुबह राष्ट्र के नाम आपका संदेश सुना। हमने गौर किया कि 11 राउंड वार्ता के बाद आपने द्विपक्षीय समाधान की बजाय एकतरफा घोषणा का रास्ता चुना, लेकिन हमें खुशी है कि आपने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा की है। हम इस घोषणा का स्वागत करते हैं और उम्मीद करते हैं कि आपकी सरकार इस वचन को जल्द से जल्द और पूरी तरह निभायेगी।

प्रधानमंत्री जी, आप भली-भांति जानते हैं कि तीन काले कानूनों को रद्द करना इस आंदोलन की एकमात्र मांग नहीं है। संयुक्त किसान मोर्चा ने सरकार के साथ वार्ता की शुरुआत से ही तीन और मांगे उठाई थी:

1. खेती की संपूर्ण लागत पर आधारित (C2+50%) न्यूनतम समर्थन मूल्य को सभी कृषि उपज के ऊपर, सभी किसानों का कानूनी हक बना दिया जाय, ताकि देश के हर किसान को अपनी पूरी फसल पर कम से कम सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद की गारंटी हो सके। (स्वयं आपकी अध्यक्षता में बनी समिति ने 2011 में तत्कालीन प्रधानमंत्री को यह सिफारिश दी थी और आपकी सरकार ने संसद में भी इसके बारे में घोषणा भी की थी)

2. सरकार द्वारा प्रस्तावित "विद्युत अधिनियम संशोधन विधेयक, 2020/2021" का ड्राफ्ट वापस लिया जाए (वार्ता के दौरान सरकार ने वादा किया था कि इसे वापस लिया जाएगा, लेकिन फिर वादाखिलाफी करते हुए इसे संसद की कार्यसूची में शामिल किया गया था)

3. "राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और इससे जुड़े क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन के लिए आयोग अधिनियम, 2021" में किसानों को सजा देने के प्रावधान हटाए जाए ( इस साल सरकार ने कुछ किसान विरोधी प्रावधान तो हटा दिए लेकिन सेक्शन 15 के माध्यम से फिर किसान को सजा की गुंजाइश बना दी गई है)

आपके संबोधन में इन बड़ी मांगों पर ठोस घोषणा ना होने से किसानों को निराशा हुई है। किसान ने उम्मीद लगाई थी की इस ऐतिहासिक आंदोलन से न सिर्फ तीन कानूनों की बला टलेगी, बल्कि उसे अपनी मेहनत के दाम की कानूनी गारंटी भी मिलेगी।

प्रधानमंत्री जी, पिछले एक वर्ष में इस ऐतिहासिक आंदोलन के दौरान कुछ और मुद्दे भी उठे हैं जिनका तत्काल निपटारा करना अनिवार्य है:

4. दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश और अनेक राज्यों में हजारों किसानों को इस आंदोलन के दौरान (जून 2020 से अब तक) सैकड़ों मुकदमो में फंसाया गया हैI इन केसों को तत्काल वापस लिया जाए।

5. लखीमपुर खीरी हत्याकांड के सूत्रधार और सेक्शन 120B के अभियुक्त अजय मिश्रा टेनी आज भी खुले घूम रहे हैं और आपके मंत्रिमंडल में मंत्री बने हुए हैं। वह आपके और अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ मंच भी साझा कर रहे हैं। उन्हें बर्खास्त और गिरफ्तार किया जाए।

6. इस आंदोलन के दौरान अब तक लगभग 700 किसान शहादत दे चुके हैं। उनके परिवारों के मुआवजे और पुनर्वास की व्यवस्था हो। शहीद किसानों स्मृति में एक शहीद स्मारक बनाने के लिए सिंघु बॉर्डर पर जमीन दी जाय।

प्रधानमंत्री जी, आपने किसानों से अपील की है कि अब हम घर वापस चले जाए। हम आपको यकीन दिलाना चाहते हैं कि हमें सड़क पर बैठने का शौक नहीं है। हम भी चाहते हैं कि जल्द से जल्द इन बाकी मुद्दों का निपटारा कर हम अपने घर, परिवार और खेती बाड़ी में वापस लौटें। अगर आप भी यही चाहते हैं तो सरकार उपरोक्त छह मुद्दों पर अविलंब संयुक्त किसान मोर्चा के साथ वार्ता शुरू करे। तब तक संयुक्त किसान मोर्चा अपने पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक इस आंदोलन को जारी रखेगा।

आपका शुभेच्छु,
संयुक्त किसान मोर्चा

kisan andolan
SKM
Samyukt Kisan Morcha
Parliament march Postponed
Parliament winter session

Related Stories

क्यों मिला मजदूरों की हड़ताल को संयुक्त किसान मोर्चा का समर्थन

पूर्वांचल में ट्रेड यूनियनों की राष्ट्रव्यापी हड़ताल के बीच सड़कों पर उतरे मज़दूर

देशव्यापी हड़ताल के पहले दिन दिल्ली-एनसीआर में दिखा व्यापक असर

बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता

"जनता और देश को बचाने" के संकल्प के साथ मज़दूर-वर्ग का यह लड़ाकू तेवर हमारे लोकतंत्र के लिए शुभ है

मोदी सरकार की वादाख़िलाफ़ी पर आंदोलन को नए सिरे से धार देने में जुटे पूर्वांचल के किसान

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

एमएसपी पर फिर से राष्ट्रव्यापी आंदोलन करेगा संयुक्त किसान मोर्चा

बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए

कृषि बजट में कटौती करके, ‘किसान आंदोलन’ का बदला ले रही है सरकार: संयुक्त किसान मोर्चा


बाकी खबरें

  • राजा मुज़फ़्फ़र भट
    जम्मू-कश्मीर में उपभोक्ता क़ानून सिर्फ़ काग़ज़ों में है 
    28 Mar 2022
    सैंकड़ों उपभोक्ताओं की शिकायतों का अभी तक कोई हल नहीं हुआ है। अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद से एक भी नया मामला दर्ज नहीं किया गया है। क़ानूनों को बड़ी तेज़ी से निरस्त और लागू किया जा रहा है, लेकिन…
  • सोनिया यादव
    'राइटिंग विद फायर’ को नहीं मिला ऑस्कर, लेकिन 'खबर लहरिया' ने दिल ज़रूर जीत लिया
    28 Mar 2022
    खबर लहरिया देश का अकेला ऐसा न्यूज़ नेटवर्क है जिसे सिर्फ़ महिलाएं चलाती हैं। यह महिलाएं दलित, मुस्लिम, आदिवासी और पिछड़ी माने जाने वाली जातियों से हैं, जिन्होंने पिछले 20 साल में सुदूर ग्रामीण इलाकों…
  • एम.ओबैद
    बिहार में आम हड़ताल का दिखा असर, किसान-मज़दूर-कर्मचारियों ने दिखाई एकजुटता
    28 Mar 2022
    देश भर में जारी ट्रेड यूनियनों की दो दिवसीय आम हड़ताल का व्यापक असर बिहार में भी देखने को मिला है। इस हड़ताल का सभी वर्गों ने समर्थन किया और इसमें शामिल हुए।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    संसद अपडेट: लोकसभा में मतविभाजन के जरिये ‘दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक’ पेश, राज्यसभा में उठा महंगाई का मुद्दा
    28 Mar 2022
    लोकसभा में सोमवार को ‘दंड प्रक्रिया (पहचान) विधेयक, 2022’ और संविधान (अनुसूचित जातियां और अनुसूचित जनजातियां) आदेश (दूसरा संशोधन) विधेयक पेश किया गया।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
    ऑस्कर 2022: स्मिथ और जेसिका सर्वश्रेष्ठ अभिनेता व अभिनेत्री, ‘ड्राइव माय कार’ सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फिल्म
    28 Mar 2022
    सर्वश्रेष्ठ एनिमेटेड फीचर के लिए ‘एनकैंटो’ ने ऑस्कर जीता जबकि भारतीय वृत्तचित्र ‘राइटिंग विद फायर’ को ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र की श्रेणी में ‘समर ऑफ सोल’ ने मात दे दी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License