NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पटना मेट्रो: पुनर्वास का इंतिज़ाम नहीं, अतिक्रमण हटाने पहुंची पुलिस के डंडे से हुई चाय वाले की मौत!
पटना के कंकड़बाग इलाका के मलाही पकड़ी चौराहे के दोनों तरफ की सड़कों के बीच में खाली पड़ी जमीन पर पिछले कई सालों से दर्जनों परिवार 50 सालों से रह रहे हैं। पटना में मेट्रो निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है इसलिए ये जगह खाली कराई जा रही है।
राहुल कुमार गौरव
21 Oct 2021
patna

पटना वासियों की सुखद यात्रा के लिए सैकड़ों झोपड़ियां उजाड़ दी गईं हैं। 5 अक्टूबर के दिन अतिक्रमण हटाने गई प्रशासन की टीम और झोपड़ी में रह रहे लोगों के बीच झड़प हो गई। रह रहे भूमिहीन गरीबों का कहना है कि पुलिस बिना कोई नोटिस दिए जगह खाली कराने पहुंची थी। इसलिए हम लोग जगह खाली नहीं कर रहे थे फिर पुलिस ने हमें दौड़ा-दौड़ाकर पीटा, छोटे से छोटा सामान तोड़ दिया और घरों में आग लगा दी। दावा ये भी किया जा रहा है कि पुलिस की लाठीचार्ज में 40 साल के राजेश ठाकुर के सिर पर चोट लगी और उनकी मौत हो गई।

कोई तो जिंदा कर दो मेरे पापा को...

मृतक राजेश ठाकुर की 12 साल की एक बेटी और दो बेटे हैं। राजेश के परिजनों का आरोप है कि 5 अक्टूबर के दिन लाठीचार्ज में राजेश को सिर पर चोट लगी थी। उसके बाद वो अपनी चाय की दुकान पर चले गए। फिर अपने उजाड़े गए घर से सामान इकट्ठा करते-करते रात हो गई। अगले दिन डॉक्टर के पास जाना था लेकिन रात में ही सिर दर्द के बाद उनकी मौत हो गई। बेटा अभी भी सबको कह रहा है कि कोई तो जिंदा कर दो मेरे पापा को।

अगले दिन यानी 6 अक्टूबर को मृतक के परिजनों व आक्रोशित लोगों ने मृतक के परिजन को सरकारी नौकरी व मुआवजा देने की मांग की। भरोसा देने एएसपी सदर संदीप सिंह व एसडीएम सदर पहुंचे। लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ।

पटना के कंकड़बाग इलाका के मलाही पकड़ी चौराहे के दोनों तरफ की सड़कों के बीच में खाली पड़ी जमीन पर पिछले कई सालों से दर्जनों परिवार 50 सालों से रह रहे हैं।

पटना में मेट्रो निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है इसलिए ये जगहें खाली कराई जा रही हैं। 5 अक्टूबर को बस्तियों को हटाने के दौरान पुलिस की लाठियों के साथ-साथ नगर निगम के कर्मचारी भी लाठियां चला रहे थे। पुलिस के द्वारा हुए लाठीचार्ज में दर्जनों लोग घायल हुए हैं।

लालू यादव का दिया घर नीतीश ने तोड़ दिया:

63 वर्षीय सुनीता देवी बताती है "ई घर लालू यादव का दिया हुआ है। बच्चों का यहीं जन्म हुआ-शादी हुई, प्रशासन अचानक क्रेन लेकर आया और मारपीट कर घर तोड़कर चले गए। घर का सारा कीमती सामान भी ले गए।"

"यहां अधिकतर लोग कूड़ा उठाते हैं झाड़ू लगाते हैं दूसरे के घर में बर्तन मारते हैं और नाला साफ करके मजदूरी करते हैं। अगर हम सब लोग यहां के निवासी नहीं हैं तो हम सभी लोगों को इस पते पर आधार कार्ड, राशन कार्ड, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट और गैस कनेक्शन क्यों दिया गया?"

पटना मेट्रो के लिए उजाड़े गए लोगों के पास वोटर कार्ड, आधार कार्ड, उज्जवला गैस कनेक्शन सब है लेकिन प्रशासन इन्हें यहां का निवासी नहीं मानता?

ये भी पढ़ें: क्या बिहार उपचुनाव के बाद फिर जाग सकती है नीतीश कुमार की 'अंतरात्मा'!

वहीं यहाँ की रहने वाली सुदामा राम डोम ने कहा "मैं डोम जाति से हूं। हमारे बाप दादा ने कभी कोई आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड नहीं बनवाया। हम लोग बनवाए हैं और इसी पते पर बनवाया गया है। हम लोग करीब 50 सालों से यहां रह रहे हैं। एक दिन पहले माइक से अनाउंस करके अगले दिन बिना नोटिस दिए हम लोगों का सब कुछ तबाह कर दिया। प्रशासन ने बर्तन तक नहीं छोड़े, घर जला दिए। लोकतंत्र है कि हिटलर शाही?"

65 वर्षीय हरिशंकर बताते हैं "हम लोग यहां कई वर्षों से झोपड़ी बनाकर रह रहे हैं और अपना जीवन यापन कर रहे हैं। सरकार द्वारा किसी तरह की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई जाती है और समय-समय पर झोपड़ी को तोड़कर गरीबों को परेशान किया जाता है। हम लोगों ने सरकार से रहने की कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की मांग की है। और हम लोग कर भी क्या सकते हैं"

पुनर्वास का इंतिज़ाम नहीं

65 वर्षीय सरस्वती देवी बताती है "नीतीश बाबू चाहे मेट्रो बनाएँ या पटना को स्मार्ट सिटी। हम तो सरकार से ना तो खाने को मांग रहे, न कोई नौकरी मांग रहे। मांग रहे हैं तो रहने के लिए थोड़ी सी जमीन जहाँ अपने बच्चों को पाल सकें।"

मलाही पकड़ी में मेट्रो निर्माण के लिए जमीन आवंटित होने के बाद जिन अतिक्रमणकारियों की झुग्गी-झोंपड़ियों को प्रशासन ने मंगलवार को हटाया था, उन्हें कहीं बसाने का अब तक कोई इंतजाम नहीं हुआ है। पटना सदर अंचल कार्यालय से मिली सूचना के अनुसार अभी तक इनके पुनर्वास के लिए पूर्व में कोई योजना बनी ही नहीं थी। हटाये गये लोगों का कहना है कि करीब दो माह पूर्व जिला प्रशासन की ओर से उन्हें आश्वासन दिया गया था कि उनके रहने की वैकल्पिक व्यवस्था कंकड़बाग खेल परिसर के बगल में की जायेगी।

सरकारी महकमों का क्या कहना है?

इस सारे मसले पर पटना जिला अधिकारी चंद्रशेखर सिंह न्यूज़क्लिक को बताते हैं "प्रशासन कई बार इन लोगों से निवेदन कर रहा था कि अतिक्रमण हटा दिया जाए। माइक से अनाउंसिंग भी कराई गई थी। लेकिन यह लोग जबरदस्ती वहीं बैठे हुए थे और जगह खाली नहीं कर रहे थे। इन लोगों की वजह से मेट्रो के कार्य में बाधा पहुंच रही थी। इसलिए हम लोग अतिक्रमण हटाने आए तो इन्होंने हम पर ही हमला कर दिया जिस पर जवाबी कार्रवाई पुलिस के द्वारा की गई थी।"

डीएम साहब आगे बताते हैं "अगले दिन इन लोगों ने जिस राजेश ठाकुर का शव रखकर चक्काजाम किया। वो हमारे लाठीचार्ज में घायल नहीं हुआ था। बाकी इन लोगों के बसने की बात है तो सरकार भूमिहीनों को जमीन मुहैया कराएगा। अनाधिकृति रूप से रह रहे लोगों को बसाने का कोई प्रावधान नहीं है।

ये भी पढ़ें: नीतीश सरकार ने विकास के नाम पर चलवा दिया बुलडोज़र, बेघर हुए सैकड़ों ग़रीब

Bihar
PATNA
Patna Metro
Nitish Kumar
Bihar government
bihar police

Related Stories

बिहार: पांच लोगों की हत्या या आत्महत्या? क़र्ज़ में डूबा था परिवार

बिहार : जीएनएम छात्राएं हॉस्टल और पढ़ाई की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन धरने पर

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बिहारः नदी के कटाव के डर से मानसून से पहले ही घर तोड़कर भागने लगे गांव के लोग

मिड डे मिल रसोईया सिर्फ़ 1650 रुपये महीने में काम करने को मजबूर! 

बिहार : दृष्टिबाधित ग़रीब विधवा महिला का भी राशन कार्ड रद्द किया गया

बिहार : नीतीश सरकार के ‘बुलडोज़र राज’ के खिलाफ गरीबों ने खोला मोर्चा!   

बिहार : जन संघर्षों से जुड़े कलाकार राकेश दिवाकर की आकस्मिक मौत से सांस्कृतिक धारा को बड़ा झटका

बिहार पीयूसीएल: ‘मस्जिद के ऊपर भगवा झंडा फहराने के लिए हिंदुत्व की ताकतें ज़िम्मेदार’

बिहार में ज़िला व अनुमंडलीय अस्पतालों में डॉक्टरों की भारी कमी


बाकी खबरें

  • yogi
    अजय कुमार
    उत्तर प्रदेश : बिल्कुल पूरी नहीं हुई हैं जनता की बुनियादी ज़रूरतें
    09 Feb 2022
    लोगों की बेहतरी से जुड़े सरकारी मानकों के निगाह से देखने पर उत्तर प्रदेश में घाव ही घाव नजर आते हैं। शिक्षा, स्वास्थ्य, ग़रीबी बेरोज़गारी के के हालात इतने बुरे हैं कि लगता है जैसे योगी सरकार ने इन…
  • देबांगना चैटर्जी
    फ़्रांस में खेलों में हिजाब पर लगाए गए प्रतिबंध के ज़रिये हो रहा है विभाजनकारी, भेदभावपूर्ण और ख़तरनाक खेल
    09 Feb 2022
    फ़्रांस में धर्मनिरपेक्षता को बरक़रार रखने के लिए खेलों में हिजाब और दूसरे "सुस्पष्ट धार्मिक चिन्हों" पर प्रतिबंध लगाने की कवायद पूरी तरह से पाखंड, भेदभाव और राजनीतिक हितों से भरी नज़र आती है। आख़िरकार…
  • Modi
    अजय गुदावर्ती
    मोदी की लोकप्रियता अपने ही बुने हुए जाल में फंस गई है
    09 Feb 2022
    अलोकप्रिय नीतियों के बावजूद पीएम की चुनाव जीतने की अद्भुत कला ही उनकी अपार लोकप्रियता का उदाहरण है। जहाँ इस लोकप्रियता ने अभी तक विमुद्रीकरण, जीएसटी और महामारी में कुप्रबंधन के बावजूद अच्छी तरह से…
  • unemployment
    कौशल चौधरी, गोविंद शर्मा
    ​गत 5 वर्षों में पदों में कटौती से सरकारी नौकरियों पर छाए असुरक्षा के बादल
    09 Feb 2022
    संघ लोकसेवा आयोग द्वारा 2016-17 में भर्ती किए गए कुल उम्मीदवार 6,103 की तदाद 2019-20 में 30 फीसदी घट कर महज 4,399 रह गई।
  • SP MENIFESTO
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    जनता की उम्मीदों पर कितना खरा होगा अखिलेश का ‘वचन’
    09 Feb 2022
    समाजवादी पार्टी ने अपने कहे मुताबिक भाजपा के बाद अपने वादों का पिटारा खोल दिया, इस बार अखिलेश ने अपने घोषणा पत्र को समाजवादी वचन पत्र का नाम दिया, इसमें किसानों, महिलाओं, युवाओं पर विशेष ध्यान दिया…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License