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राजनीति
पेगासस विवाद : कांग्रेस ने संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग की
कांग्रेस ने अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाते हुए कार्यवाही भी बाधित की। विपक्षी सदस्यों ने पत्रकारों, नेताओं, मंत्रियों, न्यायाधीशों और अन्य लोगों की जासूसी कराए जाने के आरोपों पर गहन जांच की मांग की।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट/भाषा
20 Jul 2021
पेगासस विवाद : कांग्रेस ने संयुक्त संसदीय समिति से जांच की मांग की

नयी दिल्ली: कांग्रेस ने पेगासस जासूसी विवाद को लेकर मंगलवार को सरकार पर हमला और तेज कर दिया और मामले में संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) से जांच कराए जाने की मांग की।

कांग्रेस ने अन्य विपक्षी पार्टियों के साथ संसद के दोनों सदनों में यह मुद्दा उठाते हुए कार्यवाही भी बाधित की। विपक्षी सदस्यों ने पत्रकारों, नेताओं, मंत्रियों, न्यायाधीशों और अन्य लोगों की इजराइली पेगासस स्पाईवेयर से जासूसी कराए जाने के आरोपों पर दोनों सदनों में हंगामा किया और इस संबंध में गहन जांच की मांग की।

इस मुद्दे पर अपनी रणनीति तय करने के लिए विभिन्न दलों के नेताओं ने संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुलाकात की। इनमें से कई नेताओं ने इस मुद्दे पर चर्चा की मांग करते हुए दोनों सदनों में कार्यस्थगन नोटिस भी दिया था।

कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि सरकार को स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि उसने पेगासस स्पाईवेयर खरीदा है या नहीं और इस संबंध में संयुक्त संसदीय जांच करानी चाहिए।

गोहिल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने फोन टैपिंग के मुद्दे पर राष्ट्रीय सुरक्षा और संविधान के तहत मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर चर्चा करने के लिए राज्यसभा और लोकसभा दोनों में कार्यस्थगन नोटिस दिया था।’’ उन्होंने कहा कि पार्टी की मांग है कि सरकार जासूसी और फोन टैपिंग मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच कराने का आदेश दे।

उन्होंने कहा, ‘‘जो मंत्री इस मामले पर भ्रम पैदा करने की कोशिश कर रहे हैं उन्हें स्पष्ट रूप से जवाब देना चाहिए कि सरकार ने पेगासस स्पाइवेयर खरीदा है या नहीं। यदि हां, तो सरकार को पूरे मामले की संयुक्त संसदीय समिति से जांच का आदेश देना चाहिए।’’

सरकार ने सोमवार को लोकसभा में नेताओं, पत्रकारों और अन्य लोगों के खिलाफ पेगासस सॉफ्टवेयर का उपयोग कर जासूसी करने के आरोपों को साफ तौर पर खारिज कर दिया। सरकार ने कहा कि देश के कानून के तहत नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था है ऐसे में अवैध निगरानी संभव नहीं है और आरोप लगाया कि ऐसा करके देश के लोकतंत्र को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।

एक अंतरराष्ट्रीय मीडिया संघ ने रविवार को बताया कि स्पाइवेयर के माध्यम से हैकिंग के लिए भारत में दो मंत्रियों, 40 से अधिक पत्रकारों, तीन विपक्षी नेताओं और एक मौजूदा न्यायाधीश सहित 300 से अधिक लोगों के सत्यापित मोबाइल फोन नंबरों को निशाना बनाया गया है।

दिल्ली कांग्रेस ने पेगासस जासूसी मुद्दे पर प्रदर्शन किया, न्यायिक जांच की मांग

दिल्ली कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने पत्रकारों और नेताओं के विरुद्ध ‘पेगासस’ मामले में यहां मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) मुख्यालय के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने कथित जासूसी की घटना की न्यायिक जांच की मांग की।

दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष अनिल कुमार के नेतृत्व में प्रदर्शनकारी नारे लगाते और हाथ में तख्तियां लिए हुए दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थित पार्टी कार्यालय से निकले और भाजपा मुख्यालय तक गए।

इस दौरान पुलिस ने अवरोधक लगाकर उन्हें रोका। प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कुमार ने आरोप लगाया कि जासूसी में सरकार की भूमिका थी और यह राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा है।

पेगासस विवाद से सरकार का कोई लेना देना नहीं: प्रल्हाद जोशी

केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी ने मंगलवार को पेगासस जासूसी विवाद को लेकर विपक्ष के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि इससे सरकार को कोई लेना देना नहीं है लेकिन इसके बावजूद यदि विपक्षी दल इस मुद्दे को संसद में उठाना चाहते हैं तो वह नियमों के तहत इसे उठा सकते हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) संसदीय दल की बैठक के बाद पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए संसदीय कार्य मंत्री जोशी ने कहा, ‘‘इसमें सरकार को कोई ताल्लुक नहीं है। इसमें सरकार का तनिक भी ‘लिंक’ नहीं है।’’

उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन इसके बावजूद यदि वह इस मुद्दे को उठाना चाहते हैं तो उठाए...उचित नियमों व प्रक्रिया के तहत उठाएं।’’

जोशी ने कहा कि इस बारे में सरकार ने पहले ही बयान दे कर अपना रुख स्पष्ट कर दिया है। उन्होंने कहा, ‘‘सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्री ने पहले ही इस बारे में (लोकसभा में) बयान दे दिया है।’’

ज्ञात हो कि सूचना प्रौद्योगिकी और संचार मंत्री अश्विनी वैष्णव ने पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिये भारतीयों की जासूसी करने संबंधी खबरों को भारतीय लोकतंत्र की छवि को धूमिल करने का प्रयास बताया था।

उन्होंने लोकसभा में स्वत: आधार पर दिये गए अपने बयान में सोमवार को कहा था कि जब देश में नियंत्रण एवं निगरानी की व्यवस्था पहले से है तब अनधिकृत व्यक्ति द्वारा अवैध तरीके से निगरानी संभव नहीं है।

लोकसभा बैठक दिनभर के लिए स्थगित

लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी सदस्यों ने महंगाई और पेगासस जासूसी मामले समेत विभिन्न विषयों पर आसन के समीप आकर नारेबाजी की और उनके हंगामे के कारण सदन की बैठक दो बार के स्थगन के बाद दिनभर के लिए स्थगित कर दी गयी।

विपक्ष संसद के मानसून सत्र में सरकार को तीन केंद्रीय कृषि कानूनों, पेगासस जासूसी मामला और महंगाई समेत विभिन्न विषयों पर घेरने का प्रयास कर रहा है।

विपक्ष के शोर शराबे के कारण मानसून सत्र में निचले सदन में लगातार दूसरे दिन कामकाज नहीं हो सका।

सुबह 11 बजे सदन की बैठक शुरू होने पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने प्रश्नकाल शुरू कराया। इस दौरान विपक्षी सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर आसन के समीप आ गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के बीच ही कृषि राज्य मंत्री कैलाश चौधरी ने भाजपा सदस्य जसकौर मीणा के पूरक प्रश्न का उत्तर दिया।

अध्यक्ष ने प्रदर्शन कर रहे विपक्षी सदस्यों से कहा कि सदन में तख्तियां लाना नियम प्रक्रिया के तहत उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने कल कहा था कि वह हर विषय पर जवाब देने को तैयार है। उन्होंने नारेबाजी कर रहे सदस्यों से कहा कि वे अपने स्थान पर जाकर बैठें और जिन मुद्दों पर भी चर्चा करना चाहते हैं, सरकार उसके लिए तैयार है।

बिरला ने कहा, ‘‘ सरकार हर विषय पर चर्चा की प्रतिबद्धता व्यक्त कर चुकी है। तो फिर विपक्ष नारेबाजी क्यों कर रहा है। यह उचित नहीं है। जिस विषय पर चर्चा चाहते हैं, उसके लिए नोटिस दें। ’’

हालांकि विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और अध्यक्ष ने 11:05 बजे बैठक को दोपहर दो बजे तक के लिए स्थगित कर दिया।

सदन की बैठक पुन: शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी सुबह की तरह जारी रही। पीठासीन सभापति किरीट सोलंकी ने प्रदर्शन कर रहे सदस्यों से अपने स्थान पर जाने का और कार्यवाही चलने देने का आग्रह किया। उन्होंने हंगामे के बीच ही आवश्यक दस्तावेज सदन के पटल पर रखवाए।

शोर-शराबे के बीच ही वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मौजूदा वित्त वर्ष में 23,674.81 करोड़ रुपये अतिरिक्त व्यय के लिए सदन की मंजूरी मांगी।

शोर-शराबा थमता नहीं देख सोलंकी ने दोपहर 2:10 बजे सदन की कार्यवाही को अपराह्न तीन बजे तक स्थगित कर दिया।

अपराह्न तीन बजे बैठक पुन: शुरू हुई तो विपक्षी सदस्यों की नारेबाजी जारी रही। पीठासीन सभापति सोलंकी ने हंगामा जारी रहने पर बैठक को दिनभर के लिए स्थगित कर दिया।

बुधवार को ईद-उल-अजहा की वजह से अवकाश होने के कारण सदन की अगली बैठक अब बृहस्पतिवार, 22 जुलाई को होगी।

राज्यसभा में भी पेगासस सहित विभिन्न मुद्दों पर कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के सदस्यों के सरकार से जवाब की मांग के कारण मंगलवार को राज्यसभा की बैठक बाधित रही। इन मुद्दों पर हंगामे की वजह से उच्च सदन में शून्यकाल भी नहीं हो पाया।

सदन की बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के आनंद शर्मा ने पेगासस के जरिये कथित जासूसी का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा एक गंभीर मुद्दा है और इस पर तत्काल चर्चा होनी चाहिए, इसलिए उन्होंने उच्च सदन में नियत कामकाज रोक कर इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए नियम 267 के तहत एक नोटिस दिया है।

सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि वह मुद्दे की गंभीरता को समझते हैं और नोटिस पर विचार करने के बाद व्यवस्था देंगे। इस दौरान विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेगासस के साथ-साथ अन्य मुद्दों पर हंगामा शुरू कर दिया।

शर्मा ने कहा कि कोविड-19 महामारी की वजह से उत्पन्न अनिश्चितता की स्थिति के बीच संसद का यह सत्र आयोजित हो रहा है और बैठकों की संख्या सीमित है। उन्होंने कहा कि पेगासस के जरिये कथित जासूसी के मुद्दे को हल्के में नहीं लिया जा सकता क्योंकि यह राष्ट्र हित से जुड़ा मुद्दा है।

इस पर सभापति ने कहा कि राष्ट्र हित और राज्य हित दोनों से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने सदस्यों से शून्यकाल चलने देने की अपील की। लेकिन सदन में व्यवस्था बनते न देख उन्होंने बैठक शुरू होने के करीब पांच मिनट के अंदर ही कार्यवाही दोपहर बारह बजे तक यह कहते हुए स्थगित कर दी कि कुछ लोग नहीं चाहते कि सदन चले।

बसपा नेता मायावती ने जासूसी मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग की

लखनऊ: बहुजन समाज पार्टी सुप्रीमो मायावती ने पेगासस जासूसी मामले में स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच कराये जाने की मांग की है।

मंगलवार को बसपा नेता ने ट्वीट किया, ‘‘ जासूसी का गंदा खेल तथा ब्लैकमेल आदि कोई नई बात नहीं किन्तु काफी महंगे उपकरणों से निजता भंग करके मंत्रियों, विपक्षी नेताओं, अफसरों व पत्रकारों आदि की जासूसी करना अति-गंभीर व खतरनाक मामला...जिसका भंडाफोड़ हो जाने से यहां देश में भी खलबली व सनसनी फैली हुई है। ’’

मायावती ने कहा, ‘‘ इसके सम्बंध में केन्द्र की बार-बार अनेकों प्रकार की सफाई, खंडन व तर्क लोगों के गले नहीं उतर पा रहे हैं। सरकार तथा देश की भी भलाई इसी में है कि मामले की गंभीरता को ध्यान में रखकर इसकी पूरी स्वतंत्र व निष्पक्ष जांच यथाशीघ्र कराई जाए ताकि आगे जिम्मेदारी तय की जा सके।’’

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