NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पहले की जासूसी से भले सरकारें गिरी हों, लेकिन पेगासस की जासूसी के पास है लोकतंत्र को तबाह करने की ताक़त 
ऐसा नहीं है कि पहली बार सरकार अपने नागरिकों की चोरी-छिपे छानबीन करवा रही हो। अब तक का इतिहास तो यही बताता है कि सरकारों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए वह सब किया है जो वह कर सकती थीं, इसमें चोरी-छिपे दूसरों की निजी बातचीत को सुनना, पर उसे अपनी कुर्सी के लिए इस्तेमाल करना भी शामिल है।
अजय कुमार
22 Jul 2021
पेगासस

पेगासस जासूसी कांड की खबरों के बाद सरकार जैसी संस्था ही लोकतंत्र और राज्य की सबसे बड़ी दुश्मन बनकर उभरती दिख रही है। अगर आप यह बात नहीं समझ पा रहे हैं तो जरा उन लम्हों के बारे में सोच कर देखिए जिन लम्हों को आप अपनी इजाजत के बिना किसी से भी साझा नहीं करना चाहते लेकिन वह आपकी इजाजत के बिना हर जगह पर फैल जाएं तो कैसा होगा। कैसा होगा जब आपकी निजता की चोरी कर आपको हर तरह से उत्पीड़ित किया जाने लगा जाए। अगर ऐसी स्थिति उत्पन्न होती है तो इसका मतलब यह होगा कि हम इंसान के अस्तित्व पर हमला करने वाले सरकार और राज्य के भीतर से सहारा हासिल कर रहे हैं। जहां एक-दो ताकतवर व्यक्ति चाहे तो किसी रूम में बैठकर न्यायपालिका, विधायिका, कार्यपालिका, जज, नौकरशाह, कारोबार, पत्रकार सबको अपनी तरफ मोड़ने की ताकत से लैस हो सकते हैं।

इसलिए पेगासस की खबर भले भारत की बहुसंख्यक जनता नजरअंदाज कर रही हो, लेकिन जो इसे देख और समझ रहे हैं, वह इस खबर की अहमियत को जरूर जानते होंगे। यह खबर बहुत बड़ी है। लेकिन ऐसा नहीं है कि पहली बार सरकार अपने नागरिकों की चोरी-छिपे छानबीन करवा रही हो। अब तक का इतिहास तो यही बताता है कि सरकारों ने अपनी कुर्सी बचाने के लिए वह सब किया है जो वह कर सकती थीं, इसमें चोरी-छिपे दूसरों की निजी बातचीत को सुनना पर उसे अपनी कुर्सी के लिए इस्तेमाल करना भी शामिल है।

साल 1988 में कर्नाटक में रामकृष्ण हेगड़े की सरकार थी। रामकृष्ण हेगड़े मुख्यमंत्री थे और उस समय हिंदुस्तान के कद्दावर नेताओं में से एक हुआ करते थे। उनकी प्रधानमंत्री बनने की भी संभावना थी। लेकिन उन पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने डीजीपी को आदेश देकर 50 से अधिक नेताओं मंत्रियों के फोन टैप करवाए थे। यह सभी नेता उनके विरोधी थे। विरोधियों ने उन पर दबाव बनाना शुरू किया। उन्हें मजबूरन इस्तीफा देना पड़ा। 

जब रामकृष्ण हेगड़े ने इस्तीफा दिया तो इसका सबसे बड़ा फायदा चंद्रशेखर को पहुंचा। कांग्रेस के समर्थन से चंद्रशेखर प्रधानमंत्री बने और उनकी सरकार बनी। लेकिन 3 साल बाद चंद्रशेखर पर आरोप लगे कि वह हरियाणा के दो सीआईडी पुलिस कर्मियों के जरिए राजीव गांधी के घर के बाहर जासूसी करवा रहे हैं। चंद्रशेखर ने खुद को पाक साफ बताने के लिए अपना मामला ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमेटी को सौंप दिया। उससे कुछ भी निकल कर नहीं आया। लेकिन राजीव गांधी के मन में चंद्रशेखर को लेकर शक के बीज पैदा हो गए थे। इसका परिणाम यह हुआ कि कांग्रेस ने चंद्रशेखर के सरकार से अपने समर्थन को वापस ले लिया। जबकि उसके बाद यह मुद्दा शांति के झोली में चला गया। इसके बारे में ज्यादा जानकारी सामने नहीं आई।

साल 1997 में इंडियन एक्सप्रेस ने टाटा टेप्स का कांड जारी किया। इसमें यह आरोप था कि कैसे उल्फा यानी यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट आसाम टाटा के मालिकाना हक वाले चाय के बागानों से अपने फंडिंग का जुगाड़ कर रहा है। यह आरोप भी किसी अंत तक नहीं पहुंचा। न ही यह पता चला कि सरकार के किस एजेंसी के कहने पर जासूसी की जा रहे थी। 

नीरा राडिया टेप कांड किसी सरकारी एजेंसी द्वारा किया गया अब तक का सबसे चर्चित खुलासा है। इस मामले में आयकर विभाग ने 2008 से लेकर 2009 के बीच कुछ नेताओं पत्रकारों कारोबारियों और चर्चित हस्तियों के बीच के आपसी बातचीत की जासूसी की थी। इस खुलासे से यह पता चला कि किस तरह से भ्रष्टाचार और पैसे की लेनदेन से संसद के गलियारों तक पहुंचे मंत्रियों के मतों को मोड़ा जाता है। नीरा राडिया इसके मुख्य आरोपी थी। जिन पर यह पॉलिटिकल लॉबिंग का आरोप लगा था। यानी जो व्यक्ति महज एक तरह का ब्रोकर है उसकी अभिव्यक्ति तय कर दी थी कि कौन सा मंत्री पद किस नेता को दिया जाए। आयकर विभाग ने इस दौरान 300 से अधिक फोन टेप किए थे।

साल 2011 में जब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री थे और देश के प्रधानमंत्री के द्वार पर मनमोहन सिंह विराजमान थे। तब प्रणब मुखर्जी ने मनमोहन सिंह को एक गोपनीय चिट्ठी लिखी थी। गोपनीय चिट्ठी गोपनीय ना रही उजागर हो गई। उससे यह बात निकलकर के सामने आई कि प्रणब मुखर्जी के ऑफिस की जासूसी की जा रही है।

उसके बाद साल 2013 में स्नूपगेट का प्रकरण सामने आया। जहां पर गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर यह आरोप लगा कि वह और मौजूदा गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर बहुत सारे लोगों की आपसी बातचीत रिकॉर्ड की जा रही है। यहां तक कि पुलिस थाने के हवलदारों की भी बातचीत रिकॉर्ड करने का आरोप लगा है।

भीमा कोरेगांव का मामला जिसमें कई सारे सामाजिक कार्यकर्ताओं को फर्जी आधार पर गिरफ्तार किया गया है। कई सारी रिपोर्टआ चुकी हैं जो यह बताती हैं कि इन सामाजिक कार्यकर्ताओं के डिजिटल उपकरण में इनकी इजाजत के बिना ऐसी सूचनाएं भरी गई थी जो इन्हें अपराधी साबित करें। इनके डिजिटल उपकरण के साथ इन्हें दोषी बनाने के लिए छेड़छाड़ किया गया था। 

जानकारों के मुताबिक अतीत के इन सभी मामलों ज्यादा जो चीज़ पेगासस को बेहद असरदार बनाती है, वह है सोशल मीडिया मैसेजिंग एप्लिकेशन से इस्तेमाल होने वाले उनके एन्क्रिप्शन एल्गोरिदम का उल्लंघन किये बिना विभिन्न एप्लीकेशन में घुसपैठ करने की इसकी वह क्षमता, जो इसके लिए "डार्क मोड" में जाने वाले लोगों का पता लगाने और उनका शिकार करने को संभव भी बना देती है।

इसलिए पेगासस के जरिए जासूसी होते भी रहे, लेकिन वह तभी पता चलता है जब मोबाइल किसी ऐसी लैब में भेजा जाता है जो तकनीकी तौर पर बहुत अधिक उन्नत हो, यह पता लगाने में सक्षम हो कि बिना किसी जानकारी के कैसे मोबाइल में पेगासस स्पाइवेयर मौजूद था। इसलिए यह बहुत बड़ा खतरा है। यहां पर उतनी अधिक मेहनत करने की जरूरत नहीं है कि नेता के घर के सामने सीआईडी के अफसर लगाए जाएं, यहां केवल मोबाइल में पेगासस जैसे स्पाइवेयर पहुंचाने की जरूरत है, जो जीरो क्लिक पर पहुंच जाते हैं— क्लिक करने की भी जरूरत नहीं। बस दुनिया की ऐसी कंपनियों को अथाह पैसा देने की जरूरत होती है जो इस तरह का स्पाइवेयर बना सकती हैं। और अथाह पैसे का जुगाड़ सरकार जनता के टैक्स और पूंजी पतियों को मलाई देकर करते ही रहती है। 

Pegasus
Pegasus Snooping
democracy
Central Government
Narendra modi

Related Stories

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

भारत के निर्यात प्रतिबंध को लेकर चल रही राजनीति

गैर-लोकतांत्रिक शिक्षानीति का बढ़ता विरोध: कर्नाटक के बुद्धिजीवियों ने रास्ता दिखाया

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

PM की इतनी बेअदबी क्यों कर रहे हैं CM? आख़िर कौन है ज़िम्मेदार?

छात्र संसद: "नई शिक्षा नीति आधुनिक युग में एकलव्य बनाने वाला दस्तावेज़"

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

हिमाचल में हाती समूह को आदिवासी समूह घोषित करने की तैयारी, क्या हैं इसके नुक़सान? 


बाकी खबरें

  • mamta banerjee
    भाषा
    तृणमूल कांग्रेस ने बंगाल में चारों नगर निगमों में भारी जीत हासिल की
    15 Feb 2022
    तृणमूल कांग्रेस ने बिधाननगर, चंदरनगर और आसनसोल नगरनिगमों पर अपना कब्जा बरकरार रखा है तथा सिलीगुड़ी में माकपा से सत्ता छीन ली।
  • hijab
    अरुण कुमार त्रिपाठी
    हिजाब विवादः समाज सुधार बनाम सांप्रदायिकता
    15 Feb 2022
    ब्रिटेन में सिखों को पगड़ी पहनने की आज़ादी दी गई है और अब औरतें भी उसी तरह हिजाब पहनने की आज़ादी मांग रही हैं। फ्रांस में बुरके पर जो पाबंदी लगाई गई उसके बाद वहां महिलाएं (मुस्लिम) मुख्यधारा से गायब…
  • water shortage
    शिरीष खरे
    जलसंकट की ओर बढ़ते पंजाब में, पानी क्यों नहीं है चुनावी मुद्दा?
    15 Feb 2022
    इन दिनों पंजाब में विधानसभा चुनाव प्रचार चल रहा है, वहीं, तीन करोड़ आबादी वाला पंजाब जल संकट में है, जिसे सुरक्षित और पीने योग्य पेयजल पर ध्यान देने की सख्त जरूरत है। इसके बावजूद, पंजाब चुनाव में…
  • education budget
    डॉ. राजू पाण्डेय
    शिक्षा बजट पर खर्च की ज़मीनी हक़ीक़त क्या है? 
    15 Feb 2022
    एक ही सरकार द्वारा प्रस्तुत किए जा रहे बजट एक श्रृंखला का हिस्सा होते हैं इनके माध्यम से उस सरकार के विजन और विकास की प्राथमिकताओं का ज्ञान होता है। किसी बजट को आइसोलेशन में देखना उचित नहीं है। 
  • milk
    न्यूज़क्लिक टीम
    राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के साथ खिलवाड़ क्यों ?
    14 Feb 2022
    इस ख़ास पेशकश में परंजॉय गुहा ठाकुरता बात कर रहे हैं मनु कौशिक से राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड से सम्बंधित कानूनों में होने वाले बदलावों के बारे में
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License