NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
बांड बिक्री मामले में बरी करने की सहारा प्रमुख की याचिका ख़ारिज
मुंबई की एक विशेष अदालत ने सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय और तीन अन्य की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें बांड बिक्री मामले में बरी करने की अपील की गई थी।
भाषा
22 Nov 2019
subrata roy
फाइल फोटो, साभार : India Today

मुंबई: सहारा समूह के प्रमुख सुब्रत रॉय को प्रतिभूति नियमों का उल्लंघन कर बांड बिक्री करने के मामले में अदालत से राहत नहीं मिल पाई है। यहां की एक विशेष अदालत ने सहारा प्रमुख और तीन अन्य की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया है जिसमें बांड बिक्री मामले में बरी करने की अपील की गई थी।

अदालत ने उनकी याचिका को इस माह की शुरुआत में खारिज करते हुए कहा कि आरोपियों के खिलाफ मामला चलाने के लिए रिकॉर्ड में पर्याप्त दस्तावेज हैं।

न्यायाधीश एम एम उमर ने अपने आदेश में कहा, ‘‘दस्तावेजी प्रमाणों के आधार पर मेरी राय है कि आरोपियों ने प्रथम दृष्टया ऐसा मामला पेश नहीं किया है जिसमें उन्हें बरी किया जा सके।"

इस मामले में रॉय के अलावा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन और सहारा इंडिया रीयल एस्टेट तथा उनके तीन निदेशकों को आरोपी बनाया गया है।

रॉय और तीनों निदेशकों ने अदालत में याचिका दायर कर उन्हें इस मामले में बरी करने की अपील की थी।

यह मामला कंपनियों द्वारा जारी किए गए वैकल्पिक पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचरों (ओएफसीडी) से जुड़ा है। सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन ने कंपनी कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत प्रस्ताव पारित कर निजी नियोजन के आधार पर मित्रों, सहयोगियों, समूह की कंपनियों, कर्मचारियों और सहारा समूह की अन्य संबद्ध इकाइयों को बिना गारंटी वाले ओएफसीडी जारी कर कोष जुटाने की मंजूरी दी थी।

आरोप है कि कंपनी ने 75 लाख से अधिक अंशधारकों को ओएफसीडी जारी किए, जो निजी नियोजन के लिए 49 व्यक्तियों की सीमा से अधिक है।

कंपनी कानून के प्रावधानों के तहत निजी नियाजन 50 से कम व्यक्तियों को किया जा सकता है। ऐसे में आरोपी कंपनी द्वारा निजी नियोजन के नाम पर सार्वजनिक निर्गम जारी किया गया। कंपनी द्वारा प्रतिभूति अपीलीय न्यायाधिकरण के समक्ष दायर हलफनामे के अनुसार उसने नवंबर, 2009 से अप्रैल, 2011 के दौरान ओएफसीडी जारी कर 6,380.50 करोड़ रुपये जुटाए।

समूह की एक अन्य कंपनी ने भी कथित रूप से दो करोड़ निवेशकों से अप्रैल, 2008 से 2011 के दौरान 19,400 करोड़ रुपये जुटाए।

Bond sale
Mumbai
Sahara Group
Subrata Roy
Sahara Housing Investment Corporation
OFCD
Sahara India Real Estate

Related Stories

मुंबई में अगले साल आईओसी सत्र का आयोजन देश के खेल क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगा: प्रमाणिक

मनी लॉन्ड्रिंग मामले में महाराष्ट्र के मंत्री नवाब मलिक से ईडी कर रही है पूछताछ

मुंबई में बहुमंजिला इमारत में भीषण आग लगने से 7 लोगों की मौत, 16 अन्य घायल

संभावित लॉकडाउन के ख़तरे के बीच बिहार-यूपी लौटने लगे प्रवासी श्रमिक !

मुंबईः दो साल से वेतन न मिलने से परेशान सफाईकर्मी ने ज़हर खाकर दी जान

‘बुल्ली बाई’ ऐप मामला : मुंबई पुलिस ने एक और छात्र को गिरफ़्तार किया

कोविड-19 मामलों की संख्या में आये भारी उछाल से महाराष्ट्र के कमजोर तबकों को एक और लॉकडाउन का डर सताने लगा है!

पत्रकारिता में दोहरे मापदंड क्यों!

जब सार्वजनिक हित के रास्ते में बाधा बनती आस्था!

महाराष्ट्र में भूस्खलन और बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 149 हुई


बाकी खबरें

  • punjab
    भाषा सिंह
    पंजाब चुनावः परदे के पीछे के खेल पर चर्चा
    19 Feb 2022
    पंजाब में जिस तरह से चुनावी लड़ाई फंसी है वह अपने-आप में कई ज़ाहिर और गुप्त समझौतों की आशंका को बलवती कर रही है। पंजाब विधानसभा चुनावों में इतने दांव चले जाएंगे, इसका अंदाजा—कॉरपोरेट मीडिया घरानों…
  • Biden and Boris
    जॉन पिलगर
    युद्ध के प्रचारक क्यों बनते रहे हैं पश्चिमी लोकतांत्रिक देश?
    19 Feb 2022
    हाल के हफ्तों और महीनों में युद्ध उन्माद का ज्वार जिस तरह से उठा है वह इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण है
  • youth
    असद रिज़वी
    भाजपा से क्यों नाराज़ हैं छात्र-नौजवान? क्या चाहते हैं उत्तर प्रदेश के युवा
    19 Feb 2022
    उत्तर प्रदेश के नौजवान संगठनों का कहना है कि भाजपा ने उनसे नौकरियों के वादे पर वोट लिया और सरकार बनने के बाद, उनको रोज़गार का सवाल करने पर लाठियों से मारा गया। 
  • Bahubali in UP politics
    विजय विनीत
    यूपी चुनाव: सियासी दलों के लिए क्यों ज़रूरी हो गए हैं बाहुबली और माफ़िया?
    19 Feb 2022
    चुनाव में माफ़िया और बाहुबलियों की अहमियत इसलिए ज्यादा होती है कि वो वोट देने और वोट न देने,  दोनों चीज़ों के लिए पैसा बंटवाते हैं। इनका सीधा सा फंडा होता है कि आप घर पर ही उनसे पैसे ले लीजिए और…
  • Lingering Colonial Legacies
    क्लेयर रॉथ
    साम्राज्यवादी विरासत अब भी मौजूद: त्वचा के अध्ययन का श्वेतवादी चरित्र बरकरार
    19 Feb 2022
    त्वचा रोग विज्ञान की किताबों में नस्लीय प्रतिनिधित्व की ऐतिहासिक कमी ना केवल श्वेत बहुल देशों में है, बल्कि यह पूरी दुनिया में मौजूद है
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License