NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पेट्रोल, डीजल के बढ़े हुए दाम वापस लो! : देशव्यापी प्रतिवाद
अखिल भारतीय किसान महासभा, अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा, इंकलाबी नौजवान सभा, एक्टू तथा भाकपा माले समेत कई वामपंथी संगठनों और यूनियनों ने इस अभियान का आह्वान किया था।
अनिल अंशुमन
29 Jun 2020
देशव्यापी प्रतिवाद

“आज पूरी दुनिया में कोरोना महामारी से जूझ रहीं अनेक देशों की सरकारें अपने देश की जनता को हर तरह की सहुलियतें देकर आपदा से लड़ने में सक्षम बना रहीं हैं। लेकिन सिर्फ भारत ही एक ऐसा देश है, जहां की वर्तमान मोदी सरकार आये दिन बेतहाशा मूल्यवृद्धि कर जनता से ही वसूली करने में जुटी हुई है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट के बावजूद सरकार पेट्रोल, डीजल के दामों में हर दिन बढ़ोत्तरी करके महामारी और लॉकडाउन से त्रस्त निरीह लोगों की जेब पर डाका डाल रही है। जबकि कोरोना से जंग में जनता को सशक्त बनाने के लिए उसे तो और रियायत देनी चाहिए थी।  

27 जून को बिहार भाकपा माले विधायक दल नेता महबूब आलम ने पेट्रोल,डीजल मूल्यवृद्धि की वापसी की मांग को लेकर आहूत देशव्यापी प्रतिवाद अभियान का नेतृत्व किया। साथ ही सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि इस मूल्यवृद्धि के जरिये वह खस्ताहाल जनता को कंगाल और कोरपोरेट, निजी कंपनियों को मालामाल करने में जुटी हुई है।  

wirodh 14.jpg
मोदी सरकार द्वारा डीजल, पेट्रोल की कीमतों में की जा रही अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि के खिलाफ 27 जून को यह देशव्यापी प्रतिवाद प्रदर्शित हुआ। अखिल भारतीय किसान महासभा, अखिल भारतीय खेत ग्रामीण मजदूर सभा, इन्क़लाबी नौजवान सभा व एक्टू तथा भाकपा माले समेत कई वामपंथी संगठनों और यूनियनों ने इस अभियान का आह्वान किया था।

डीजल,  पेट्रोल का दाम क्यों 80 रु। के पार , जवाब दो मोदी सरकार ! डीजल –पेट्रोल की कीमत बढ़ाकर लॉकडाउन महामारी से जूझ रही जनता पर अतिरिक्त बोझ क्यों ? कच्चे तेल के टैक्स चोर, नरेंद्र मोदी गद्दी छोड़ो! लॉकडाउन से तबाह किसानों पर बंद करो महंगाई की मार , होश में आओ मोदी सरकार ! जैसे नारों के साथ सड़कों पर विरोध मार्च निकाले गए तथा केंद्र सरकार के पुतले जलाकर पेट्रोल – डीजल के बढ़े हुए दाम वापस लेने कि मांग की गयी।

बिहार व झारखण्ड के अनेक स्थानों के साथ साथ ओड़िसा , पश्चिम बंगाल , असम , उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ , पंजाब , हरियाणा और उत्तराखंड इत्यादि राज्यों में यह प्रतिवाद हुआ। बिहार की राजधनी पटना में टेम्पो  रिक्शा यूनियन के सदस्यों व नागरिक समाज के लोगों के साथ साथ काफी संख्या में महिला व छात्र – युवाओं और शहरी असंगठित क्षेत्र के मजदूरों की सक्रीय भागीदारी रही।    

wirodh 13.jpgवहीं, किसानों ने केंद्र व राज्य की सरकारों द्वारा प्रायः हर दिन हो रही डीजल पेट्रोल मूल्यवृद्धि को किसानों के लिए दुहरी मार बताते हुए अपना रोष प्रकट किया। खेती के इस मौसम में इस मूल्यवृद्धि से प्रायः हर किसान पर पड़ने वाले 10000 रु। प्रति एकड़ के अतिरिक्त के बोझ के कारण सड़कों पर विरोध प्रकट कर मोदी,नितीश सरकारों के खिलाफ बिहार विधान सभा चुनावों में इसका हिसाब चुकता करने का भी ऐलान किया।

अन्य वामपंथी दल व संगठन इस मुद्दे को लाकर लगातार सड़कों पर विरोध प्रकट कर रहें हैं। तो झारखण्ड कि राजधानी रांची में राजद कार्यकर्ताओं ने साइकिल और हाथ रिक्शा चलाकर मूल्यवृद्धि का विरोध किया। कांग्रेस ने भी 30 जून से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। सोशल मीडिया में भी भाजपा के वर्तमान उन सभी मंत्री, सांसदों व नेताओं से सवाल पूछे जा रहें हैं जिन्होंने पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा की गयी मूल्यवृद्धि के खिलाफ सड़कों पर विरोध की धमाचौकड़ी मचाई थी। केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ, स्मृति ईरानी व हेमा मालिनी सरीखे नेताओं के विरोध कार्यक्रमों की तस्वीरें वायरल कर पूछा जा रहा है कि अब जब उनकी सरकार की मूल्यवृद्धि कर रही है तो वे क्यों खामोश हैं !

wirodh - 02.jpg

मन की बात से लेकर कई कई विजुअल, वर्चुवल संबोधनों में मोदी-शाह जी बार-बार देश की जनता से आत्मनिर्भर होने पर जोर डाल रहें हैं लेकिन प्रायः हर दिन ही अपनी सरकार द्वारा डीजल, पेट्रोल की कीमतों में की जा रही है बेतहाशा मूल्यवृद्धि के कारणों पर कुछ नहीं बोल रहें हैं। अभी तक सरकार अथवा उसके किसी भी प्रवक्ता ने एक बार भी जनता को यह नहीं बताया है कि आखिर क्यों अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल में आई भारी गिरावट के बावजूद इस देश के लोगों को सस्ता पेट्रोल,डीजल नसीब नहीं हो रहा है।

कोरोना माहामारी आपदा के भीषण संकटपूर्ण स्थितियों में इस अप्रत्याशित मूल्यवृद्धि से जनजीवन पर पड़ रहे परेशानियों को लेकर गोदी मीडिया में भी कोई चर्चा-विश्लेषण नहीं है। वहीं चायनीज़ सामानों के बहिष्कार के लिए आये दिन तिरंगा लेकर उतारनेवाले राष्ट्रभक्त तो सरकार द्वारा थोपी जा रही महंगाई को कोई मुद्दा ही नहीं मान रहें हैं। सोशल मीडिया में तो यहाँ तक दलील दी जा रही है कि शेर को पालना अगर महंगा पड़ रहा है तो क्या हम गदहा पालने लगें !  

जबकि आर्थिक मामलों के जानकारों व बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार इस मूल्यवृद्धि से सरकार का खज़ाना तो भर जाएगा लेकिन लॉकडाउन से पस्त और खस्ताहाल इस देश की जनता की कमर और भी टूट जायेगी। खासकर रोज रोज मेहनत मजूरी करके गुजर बसर करनेवालों का जीना मुश्किल हो जाएगा। भरपूर फसल उगाकर भी लॉकडाउन की बंदी से लागत खर्चे तक गंवानेवाले किसानों के लिए क़र्ज़ वापसी और अगली खेती,बाड़ी पर गहराया संकट और भी भयावह हो जाएगा।                                                      

खबरें यह भी आ रहीं हैं कि लॉकडाउन काल में महाआफत झेलकर भी गाँव वापसी करने वाले अनेकों प्रवासी मजदूर अब फिर से अपने गांवों से उन्हीं महानगरों,शहरों की ओर पलायन को मजबूर हो रहें हैं। जबकि महामारी आपदा घटने की बजाय दिनों दिन विकराल रूप लेती जा रही है। ऐसे में यह भी तय है कि पेट्रोल, डीजल के आसमान छूते दाम लोगों के संकटों और आक्रोश को बढ़ाएंगे ही!  

petrol prices
Petrol & diesel price
Nationwide Protest
AICCTU
All India Kisan Mahasabha
Bharatiya Khet Mazdoor Union
Inquilabi Naujawan Sabha
CPI
Leftist organizations

Related Stories

मुंडका अग्निकांड: 'दोषी मालिक, अधिकारियों को सजा दो'

मुंडका अग्निकांड: ट्रेड यूनियनों का दिल्ली में प्रदर्शन, CM केजरीवाल से की मुआवज़ा बढ़ाने की मांग

मुंडका अग्निकांड के खिलाफ मुख्यमंत्री के समक्ष ऐक्टू का विरोध प्रदर्शन

विधानसभा घेरने की तैयारी में उत्तर प्रदेश की आशाएं, जानिये क्या हैं इनके मुद्दे? 

दिल्ली: ''बुलडोज़र राजनीति'' के ख़िलाफ़ सड़क पर उतरे वाम दल और नागरिक समाज

जेएनयू: अर्जित वेतन के लिए कर्मचारियों की हड़ताल जारी, आंदोलन का साथ देने पर छात्रसंघ की पूर्व अध्यक्ष की एंट्री बैन!

LIC के कर्मचारी 4 मई को एलआईसी-आईपीओ के ख़िलाफ़ करेंगे विरोध प्रदर्शन, बंद रखेंगे 2 घंटे काम

जहाँगीरपुरी हिंसा : "हिंदुस्तान के भाईचारे पर बुलडोज़र" के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

दिल्ली: सांप्रदायिक और बुलडोजर राजनीति के ख़िलाफ़ वाम दलों का प्रदर्शन

कोलकाता : वामपंथी दलों ने जहांगीरपुरी में बुलडोज़र चलने और बढ़ती सांप्रदायिकता के ख़िलाफ़ निकाला मार्च


बाकी खबरें

  • अनिंदा डे
    मैक्रों की जीत ‘जोशीली’ नहीं रही, क्योंकि धुर-दक्षिणपंथियों ने की थी मज़बूत मोर्चाबंदी
    28 Apr 2022
    मरीन ले पेन को 2017 के चुनावों में मिले मतों में तीन मिलियन मत और जुड़ गए हैं, जो  दर्शाता है कि दूसरे विश्व युद्ध के बाद धुर-दक्षिणपंथी फिर से सत्ता के कितने क़रीब आ गए थे।
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    दिल्ली : नौकरी से निकाले गए कोरोना योद्धाओं ने किया प्रदर्शन, सरकार से कहा अपने बरसाये फूल वापस ले और उनकी नौकरी वापस दे
    28 Apr 2022
    महामारी के भयंकर प्रकोप के दौरान स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक सर्कुलर जारी कर 100 दिन की 'कोविड ड्यूटी' पूरा करने वाले कर्मचारियों को 'पक्की नौकरी' की बात कही थी। आज के प्रदर्शन में मौजूद सभी कर्मचारियों…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में आज 3 हज़ार से भी ज्यादा नए मामले सामने आए 
    28 Apr 2022
    देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 3,303 नए मामले सामने आए हैं | देश में एक्टिव मामलों की संख्या बढ़कर 0.04 फ़ीसदी यानी 16 हज़ार 980 हो गयी है।
  • aaj hi baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    न्यायिक हस्तक्षेप से रुड़की में धर्म संसद रद्द और जिग्नेश मेवानी पर केस दर केस
    28 Apr 2022
    न्यायपालिका संविधान और लोकतंत्र के पक्ष में जरूरी हस्तक्षेप करे तो लोकतंत्र पर मंडराते गंभीर खतरों से देश और उसके संविधान को बचाना कठिन नही है. माननीय सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कथित धर्म-संसदो के…
  • न्यूज़क्लिक डेस्क
    जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र: एक कवि का बयान
    28 Apr 2022
    आजकल भारत की राजनीति में तीन ही विषय महत्वपूर्ण हैं, या कहें कि महत्वपूर्ण बना दिए गए हैं- जुलूस, लाउडस्पीकर और बुलडोज़र। रात-दिन इन्हीं की चर्चा है, प्राइम टाइम बहस है। इन तीनों पर ही मुकुल सरल ने…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License