NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी, राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में पेट्रोल 100 के पार
सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा जारी मूल्य अधिसूचना के मुताबिक गुरुवार को पेट्रोल 24 पैसे प्रति लीटर और डीजल 29 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ। यह इस महीने में 14वीं बढ़ोतरी है, जिसके चलते देश भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
27 May 2021
पेट्रोल, डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी जारी

नयी दिल्ली : पेट्रोल की कीमत गुरुवार को महाराष्ट्र के ठाणे जिले में 100 रुपये प्रति लीटर के स्तर को पार कर गई, जबकि मुंबई में इसकी कीमत 99.94 रुपये प्रति लीटर हो गई है।

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों द्वारा जारी मूल्य अधिसूचना के मुताबिक गुरुवार को पेट्रोल 24 पैसे प्रति लीटर और डीजल 29 पैसे प्रति लीटर महंगा हुआ।

यह इस महीने में 14वीं बढ़ोतरी है, जिसके चलते देश भर में पेट्रोल-डीजल की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं। हालांकि, इससे पहले पांच राज्यों में जारी विधानसभा चुनावों के दौरान दो सप्ताह से अधिक समय तक दाम में कोई बदलाव नहीं किया गया।

पेट्रोल की कीमत पहले ही राजस्थान, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों में 100 रुपये का आंकड़ा पार कर चुकी थी और गुरुवार को महाराष्ट्र भी इस सूची में शामिल हो गया।

महाराष्ट्र के ठाणे में अब पेट्रोल 100.06 रुपये प्रति लीटर और डीजल 91.99 रुपये प्रति लीटर के भाव पर मिल रहा है।

मुंबई में पेट्रोल की कीमत बढ़कर 99.94 रुपये प्रति लीटर हो गई, जबकि डीजल की कीमत बढ़कर 91.87 रुपये हो गई।

वैट और माल ढुलाई शुल्क जैसे स्थानीय करों के आधार पर विभिन्न राज्यों में ईंधन की कीमतें अलग-अलग होती हैं।

देश में पेट्रोल पर सबसे अधिक मूल्य वर्धित कर (वैट) राजस्थान में लगाता है, जिसके बाद मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र का स्थान है।

दिल्ली में पेट्रोल की कीमत 93.84 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत 84.61 रुपये प्रति लीटर हो गई।

तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल का दाम लगातार ऊंचा बना हुआ है। कच्चे तेल का दाम 70 डालर प्रति बैरल के आसपास चल रहा है।

एक समय ख़ासतौर से 2014 से पहले यूपीए सरकार के समय में तेल के दाम बढ़ने पर मुख्य धारा के मीडिया में बड़ी-बड़ी हेडलाइन बनतीं थी और उस पर घंटों-घंटों बहस होती थी। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) जो उस समय विपक्ष में थी लगातार तेल, गैस के दामों को लेकर सड़कों पर उतरती थी और मनमोहन सरकार से इस्तीफ़ा मांगती थी। तेल-गैस के साथ सभी तरह की महंगाई उस समय एक बड़ा मुद्दा था, लेकिन मोदी सरकार आने के बाद से ऐसा नहीं रहा। टीवी स्क्रीन पर अब लगातार नौवें दिन तेल के दाम बढ़ने पर हेडलाइन और बहस नहीं दिखाई देती।

तेल विपणन कंपनियों द्वारा जारी मूल्य अधिसूचना में कहा गया है कि ईंधनों के दाम पूरे देश में एक साथ बढ़ाये गये हैं लेकिन राज्यों में इन पर लगने वाले बिक्री कर अथवा मूल्य वर्धित कर (वैट) की दर अलग होने से यह वृद्धि अलग अलग हो सकती है।

सरकार ने मार्च 2020 के मध्य में पेट्रोल, डीजल पर उत्पाद शुल्क में वृद्धि की थी तब से दोनों ईंधनों के दाम में घटबढ रुकी हुई थी। इस दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों इंडियन आयल कार्पोरेशन (आईओसी), भारत पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल), हिन्दुस्तान पेट्रोलियम कार्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) ने उत्पाद शुल्क वृद्धि को ग्राहकों पर डालने के बजाय अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम में आने वाली गिरावट के साथ उसका समायोजन किया। इससे दाम स्थिर रहे। हालांकि जानकारों का कहना था कि जिस स्तर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दामों में गिरावट आई, उसकी तुलना में भारतीय उपभोक्ता को कोई भी लाभ नहीं दिया गया।

(समाचार एजेंसी भाषा इनपुट के साथ )

petrol price hike
Petrol & diesel price
Inflation
Crude Oil

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

आर्थिक रिकवरी के वहम का शिकार है मोदी सरकार

क्या जानबूझकर महंगाई पर चर्चा से आम आदमी से जुड़े मुद्दे बाहर रखे जाते हैं?

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

गतिरोध से जूझ रही अर्थव्यवस्था: आपूर्ति में सुधार और मांग को बनाये रखने की ज़रूरत

मोदी के आठ साल: सांप्रदायिक नफ़रत और हिंसा पर क्यों नहीं टूटती चुप्पी?

जन-संगठनों और नागरिक समाज का उभरता प्रतिरोध लोकतन्त्र के लिये शुभ है

वाम दलों का महंगाई और बेरोज़गारी के ख़िलाफ़ कल से 31 मई तक देशव्यापी आंदोलन का आह्वान

महंगाई की मार मजदूरी कर पेट भरने वालों पर सबसे ज्यादा 

सारे सुख़न हमारे : भूख, ग़रीबी, बेरोज़गारी की शायरी


बाकी खबरें

  • Ukraine
    स्टुअर्ट ब्राउन
    यूक्रेन: एक परमाणु संपन्न राज्य में युद्ध के खतरे
    03 Mar 2022
    यूक्रेन के ऊपर रूस के आक्रमण से परमाणु युद्ध का खतरा वास्तविक बन गया है। लेकिन क्या होगा यदि देश के 15 परमाणु उर्जा रिएक्टरों में से एक भी यदि गोलीबारी की चपेट में आ जाए?
  • banaras
    विजय विनीत
    यूपी का रणः मोदी के खिलाफ बगावत पर उतरे बनारस के अधिवक्ता, किसानों ने भी खोल दिया मोर्चा
    03 Mar 2022
    बनारस में ऐन चुनाव के वक्त पर मोदी के खिलाफ आंदोलन खड़ा होना भाजपा के लिए शुभ संकेत नहीं है। इसके तात्कालिक और दीर्घकालिक नतीजे देखने को मिल सकते हैं। तात्कालिक तो यह कि भाजपा के खिलाफ मतदान को बल…
  • Varanasi District
    तारिक़ अनवर
    यूपी चुनाव : बनारस की मशहूर और अनोखी पीतल पिचकारी का कारोबार पड़ रहा है फीका
    03 Mar 2022
    बढ़ती लागत और कारीगरों की घटती संख्या के कारण पिचकारी बनाने की पारंपरिक कला मर रही है, जिसके चलते यह छोटा उद्योग ज़िंदा रहने के लिए संघर्ष रहा है।
  • migrants
    एपी
    एक सप्ताह में 10 लाख लोगों ने किया यूक्रेन से पलायन: संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी
    03 Mar 2022
    संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी उच्चायोग (यूएनएचसीआर) के आंकड़ों के अनुसार, पलायन करने वाले लोगों की संख्या यूक्रेन की आबादी के दो प्रतिशत से अधिक है। विश्व बैंक के अनुसार 2020 के अंत में यूक्रेन की आबादी…
  • medical student
    एम.ओबैद
    सीटों की कमी और मोटी फीस के कारण मेडिकल की पढ़ाई के लिए विदेश जाते हैं छात्र !
    03 Mar 2022
    विशेषज्ञों की मानें तो विदेशों में मेडिकल की पढ़ाई करने के लिए जाने की दो मुख्य वजहें हैं। पहली वजह है यहां के सरकारी और प्राइवेट कॉलेजों में सीटों की संख्या में कमी और दूसरी वजह है प्राइवेट कॉलेजों…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License