NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
नोएडा में भगत सिंह की प्रतिमा लगाने वाले युवकों को पुलिस ने 12 घंटे तक हिरासत में रखा, प्रतिमा भी हटाई
घटना के विरोध में प्रगतिशील जन आंदोलन और नौजवान भारत सभा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट रजनीकांत मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। दोनों संगठनों ने हटाई गई भगत सिंह की प्रतिमा को फिर से स्थापित करने की मांग की है।
सत्येन्द्र सार्थक
30 Sep 2020
नोएडा में भगत सिंह की प्रतिमा लगाने वाले युवकों को पुलिस ने 12 घंटे तक हिरासत में रखा

नोएडा: “हम भगतसिंह के जन्मदिवस के उपलक्ष्य में कार्यक्रम का आयोजन कर रहे थे, कोरोना वायरस के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए हम ने बहुत कम लोगों को आमंत्रित किया था। दिन में अचानक करीब 12 बजे पुलिस पहुँची और राजेश, अविनाश के साथ मुझे भी सेक्टर 20 के थाने ले गई। हमारे साथ अपराधियों जैसा सलूक करते हुए हवालात में बंद कर दिया गया। 12 घंटे तक हिरासत में रखा गया। एनएसए, गैंगस्टर जैसे गंभीर धाराओं में कार्रवाई कर जिंदगी बर्बाद करने की भी धमकी दी। यही नहीं, महज प्रतिमा लगाने के कारण हमें नोएडा अथॉरिटी की जमीन कब्जाने के आरोप में लंबे समय तक के लिए जेल भेजने की धमकी दी गई।” यह कहना है युवा क्रांति सेना के अतुल यादव का।

युवा क्रांति सेना सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रहने वाला एक स्थानीय संगठन है। संगठन ने 26 सितंबर को नोएडा के निठारी में सेक्टर 31 के ब्लॉक सी स्थित एक पार्क में भगतसिंह की प्रतिमा को स्थापित किया था। 28 सितंबर को उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा था कि अचानक पुलिस पहुँच गई पूरे आयोजन को रोक दिया। घटना के बाद से ही स्थानीय लोगों में रोष है। संस्था से जुड़े सदस्यों का कहना है कि भगतसिंह की मूर्ति को फिर से लगाने की कोशिश करेंगे भले ही उन्हें जेल जाना पड़े। जिन 3 नौजवानों को पुलिस ने हिरासत में लिया था उनमें अतुल लॉ और अविनाश एमबीए के छात्र हैं जबकि राजेश एक स्कूल में प्रिंसिपल हैं।

रात में 12 बजे के करीब जब हिरासत से उन्हें छोड़ा गया तो लौटने पर मालूम पड़ा कि प्रतिमा को चबूतरे सहित हटा दिया गया है। सवाल उठता है कि पुलिस को भगतसिंह की प्रतिमा से ऐसी क्या आपत्ति थी कि उनकी प्रतिमा लगाने वालों के साथ अपराधियों का सलूक किया गया और प्रतिमा को भी हटा दिया?

IMG20200929160124.jpg

वह स्थान जहां भगत सिंह की प्रतिमा लगाई गई थी। अब वहां सिर्फ़ मलबा दिखाई दे रहा है।

इस संबंध में एसएचओ से बात करने की कोशिश की गई तो उनका फोन नहीं लगा। निठारी चौकी प्रभारी हरि सिंह ने फोन पर कोई जानकारी देने से इंकार कर दिया।

संगठन के मुताबिक राजस्थान के अलवर से भगतसिंह के पत्थर की मूर्ति मंगवाई गई थी। जिस पर करीब 50,000 खर्च किए थे। प्रतिमा का वजन 150 किलो था। प्रतिमा तैयार करवाने वाले युवाओं के मुताबिक चबूतरे सहित प्रतिमा का वजन करीब 200 किलो था। मूर्ति के वजन के अनुसार ही मजबूत चबूतरे का निर्माण किया गया था। युवा क्रांति सेना के सदस्यों ने बताया कि हमने प्रतिमा को ढूँढने की बहुत कोशिश की लेकिन अभी तक इसका पता नहीं चल सका है।

निठारी के सेक्टर 31 के ब्लॉक सी में स्थित उक्त पार्क को 2018 से ही भगत सिंह के नाम से लोग जानते हैं। 22 सितंबर को युवा क्रांति सेना के नौजवानों ने अथॉरिटी के अधिकारियों से भगतसिंह की प्रतिमा लगाने की लिखित अनुमति मांगी। अनुमति तो मिल गई लेकिन इसका कोई लिखित प्रमाण संस्था के पास नहीं है। अनुमति का दस्तावेज दिखाने के सवाल पर अतुल कहते हैं “हमने लेना जरूरी नहीं समझा। हम सोच भी नहीं सकते कि नोएडा प्रशासन को भगतसिंह की प्रतिमा लगाने से कोई समस्या हो सकती है। हमने अनुमति लेने की महज औपचारिकता पूरी की थी और अनुमति मिली। अधिकारियों का रवैया भी बेहद सकारात्मक था।”

26 सितंबर को भगतसिंह के प्रतिमा की स्थापना करवाई गई। 27 सितंबर को अथॉरिटी के अधिकारियों ने प्रतिमा के लगाने के लिए फूलों के पौधे भिजवाए, जिन्हें लगाया गया। तब तक सबकुछ ठीक चल रहा था। 28 सितंबर की सुबह अथॉरिटी की तरफ से फोन करके बताया गया कि मूर्ति लगाने के खिलाफ अथॉरिटी को शिकायत मिली है, जिस पर संज्ञान लेते हुए अनुमति को निरस्त कर दिया गया है। अब प्रतिमा हटानी पड़ेगी।

राजेश बताते हैं “हमने प्रतिमा हटाने से साफ इंकार कर दिया। फिर हमारे घर वालों को डराया गया कि हम पर एनएसए की कार्रवाई की जाएगी। मेरे भाई को धमकी दी गई तेरा भाई और बाप दोनों जेल जाएंगे। इसके बाद हमारे परिवार के लोग डर गए। पुलिस हम पर लगातार यह दबाव बनाती रही कि हम प्रतिमा हटा लें, पर हम तैयार नहीं हुए।”

एसडीएम को ज्ञापन सौंपते लोग.jpg

सिटी मजिस्ट्रेट को ज्ञापन सौंपते कार्यकर्ता

घटना के विरोध में प्रगतिशील जन आंदोलन और नौजवान भारत सभा ने जिलाधिकारी कार्यालय पर विरोध प्रदर्शन कर सिटी मजिस्ट्रेट रजनीकांत मिश्रा को ज्ञापन सौंपा। दोनों संगठनों ने नोएडा प्राधिकरण और पुलिस प्रशासन द्वारा हटाई गई भगत सिंह की प्रतिमा को फिर से स्थापित करने और हटाने की कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के खिलाफ तत्काल निलंबन की कार्रवाई करने की मांग की। साथ ही कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी।

प्रगतिशील जन आंदोलन के अध्यक्ष बिजेन्द्र सिंह ने कहा “प्रदेश की जनता के लिए इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या हो सकता है कि शहीदों को याद करने वालों को भी प्रशासन प्रताड़ित कर रहा है। हम घटना की निंदा करते हैं और उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करते हैं कि प्रतिमा को तत्काल स्थापित किया जाए।”

युवा क्रांति सेना के अध्यक्ष रोहित यादव ने बताया “ भगतसिंह पूरे देश के युवाओं के आदर्श हैं उनकी प्रतिमा लगाने से नोएडा प्रशासन को आखिर समस्या क्यों हो रही है? यदि कोई आपत्ति थी तो प्रशासन को हमें पर्याप्त समय देना चाहिए था। जबरन प्रतिमा हटा देना सीधे-सीधे तानाशाही रवैया है जिसका हम विरोध करते हैं। हम डीएम से मिलकर प्रतिमा को फिर से स्थापित करवाने की कोशिशों में लगे हैं। हम सभी कानूनी पहलूओं पर भी विचार कर रहे हैं।”

(सत्येन्द्र सार्थक स्वतंत्र पत्रकार हैं।)

noida
UttarPradesh
Bhagat Singh
Bhagat Singh's statue
UP police

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

ग्राउंड रिपोर्ट: चंदौली पुलिस की बर्बरता की शिकार निशा यादव की मौत का हिसाब मांग रहे जनवादी संगठन

यूपी में  पुरानी पेंशन बहाली व अन्य मांगों को लेकर राज्य कर्मचारियों का प्रदर्शन

क्या वाकई 'यूपी पुलिस दबिश देने नहीं, बल्कि दबंगई दिखाने जाती है'?

मलियाना नरसंहार के 35 साल, क्या मिल पाया पीड़ितों को इंसाफ?

अलविदा शहीद ए आज़म भगतसिंह! स्वागत डॉ हेडगेवार !

ख़ान और ज़फ़र के रौशन चेहरे, कालिख़ तो ख़ुद पे पुती है

कर्नाटक: स्कूली किताबों में जोड़ा गया हेडगेवार का भाषण, भाजपा पर लगा शिक्षा के भगवाकरण का आरोप

मनरेगा मज़दूरों के मेहनताने पर आख़िर कौन डाल रहा है डाका?


बाकी खबरें

  • leather industry
    न्यूज़क्लिक टीम
    बंद होने की कगार पर खड़ा ताज नगरी का चमड़ा उद्योग
    10 Feb 2022
    आगरा का मशहूर चमड़ा उद्योग और उससे जुड़े कारीगर परेशान है। इनका कहना है कि सरकार इनकी तरफ ध्यान नही दे रही जिसकी वजह से पॉलिसी दर पॉलिसी इन्हें नुकसान पे नुक्सान हो रहा है।
  • Lakhimpur case
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    लखीमपुर कांड: मुख्य आरोपी और केंद्रीय मंत्री के बेटे आशीष मिश्रा को मिली ज़मानत
    10 Feb 2022
    केंद्रीय मंत्री के बेटे की ओर से पेश वकील ने अदालत से कहा था कि उनका मुवक्किल निर्दोष है और उसके खिलाफ कोई सबूत नहीं है कि उसने किसानों को कुचलने के लिए घटना में शामिल वाहन के चालक को उकसाया था।
  • uttarakhand
    मुकुंद झा
    उत्तराखंड चुनाव : टिहरी बांध से प्रभावित गांव आज भी कर रहे हैं न्याय की प्रतीक्षा!
    10 Feb 2022
    उत्तराखंड के टिहरी ज़िले में बने टिहरी बांध के लिए ज़मीन देने वाले ग्रामीण आज भी बदले में ज़मीन मिलने की आस लगाए बैठे हैं लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
  •  Bangladesh
    पीपल्स डिस्पैच
    बांग्लादेश: सड़कों पर उतरे विश्वविद्यालयों के छात्र, पुलिस कार्रवाई के ख़िलाफ़ उपजा रोष
    10 Feb 2022
    बांग्लादेश में शाहजलाल विज्ञान और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के छात्रों के खिलाफ हुई पुलिस कार्रवाई के बाद, देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्र एकजुटता की लहर दौड़ गई है। इन प्रदर्शनकारी छात्रों ने…
  • Newsletter
    ट्राईकोंटिनेंटल : सामाजिक शोध संस्थान
    वैश्विक निरक्षरता के स्थिर संकट के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाएँ
    10 Feb 2022
    संयुक्त राष्ट्र ने नोट किया कि 'दुनिया भर में 150 करोड़ से अधिक छात्र और युवा कोविड-19 महामारी के कारण बंद स्कूल और विश्वविद्यालयों से प्रभावित हो रहे हैं या प्रभावित हुए हैं'; कम से कम 100 करोड़…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License