NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
दिल्ली हिंसा में पुलिस की भूमिका निराशाजनक, पुलिस सुधार लागू हों : पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह
‘पुलिस के लिये सबसे सशक्त हथियार नागरिकों का भरोसा एवं विश्वास होता है । नागरिक आपके ऊपर भरोसा तभी करेंगे जब आप उचित तरीके से काम करेंगे । ऐसे में लोगों को साथ लें । सामान्य जनता के प्रति संवेदनशील बनने के साथ विश्व में प्रचलित सर्वोतम पुलिस प्रथाओं का अनुकरण करने की आवश्यकता है। यही तरीका है । ’’
भाषा
17 Mar 2022
delhi police

नयी दिल्ली; उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुई सांप्रदायिक हिंसा से निपटने में दिल्ली पुलिस की भूमिका को निराशाजनक बताते हुए उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक और केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) के पूर्व महानिदेशक प्रकाश सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर निराशा व्यक्त की है। साथ ही उन्होंने पुलिस सुधारों को पूरी तरह से लागू करने की एक बार फिर जोरदार वकालत की है ।

हालिया साम्प्रदायिक हिंसा के दौरान दिल्ली पुलिस पर मूक दर्शक बने रहने के आरोपों के संबंध में प्रकाश सिंह ने कहा कि पुलिस की भूमिका निराशाजनक रही है । उसके कारणों के बारे में अभी तो साफ-साफ नहीं कहा जा सकता है, लेकिन मोटे तौर पर एक गंभीर स्थिति का सामना करते हुए नेतृत्व को जो फैसला लेना चाहिए था, वे नहीं ले पा रहे थे ।

उन्होंने कहा, ‘‘इसका एक सीधा-सा तरीका है कि जब कहीं स्थिति बिगड़ने का संकेत मिलता है या प्रभाव भी दिखता है तो उसी समय उसे दबा दीजिए । गिरफ्तारी कीजिए, अमन कमेटी बनाइए, गश्त लगाइए, छानबीन करिए, जब्ती कीजिए... यही सब होता है । यह सवाल दिल्ली पुलिस से पूछा जाना चाहिए कि आपमें इतनी निष्क्रियता क्यों आ गई है ?’’

जामिया, जेएनयू, सीएए संबंधी प्रदर्शनों से निपटने के तौर तरीक़े पर दिल्ली पुलिस की भूमिका की काफ़ी आलोचना हुई है। इस सवाल पर कि क्या इससे निपटने का कोई और तरीक़ा हो सकता था पूर्व आईपीएस प्रकाश सिंह ने कहा, ‘‘पुलिस के लिये सबसे सशक्त हथियार नागरिकों का भरोसा एवं विश्वास होता है । नागरिक आपके ऊपर भरोसा तभी करेंगे जब आप उचित तरीके से काम करेंगे । ऐसे में लोगों को साथ लें । सामान्य जनता के प्रति संवेदनशील बनने के साथ विश्व में प्रचलित सर्वोतम पुलिस प्रथाओं का अनुकरण करने की आवश्यकता है। यही तरीका है । ’’

उल्लेखनीय है कि 2006 में पुलिस सुधार को लेकर उच्चतम न्यायालय ने महत्वपूर्ण दिशा निर्देश दिए थे । और पुलिस सुधार आयोग ने भी कुछ सिफारिशें की थीं। इन पर अमल संबंधी सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘ ऐसा नहीं है कि पुलिस सुधार की दिशा में बिल्कुल भी काम नहीं किया गया है । कुछ काम हुआ है लेकिन यह पर्याप्त नहीं है । ऐसा भी नहीं है कि पुलिस सुधार कर दिया जाए तो ‘रामराज्य’हो जाएगा लेकिन हिंसा से निपटने के लिए आपके पास जो मशीनरी है, वह बेहतर तरीके से काम करेगी ।’’ वह कहते हैं, दरअसल, पुलिस सुधार का मतलब यह है कि नीति निर्माता यह तय कर दें कि पुलिस कौन-से कानून से चलेगी? किस सिद्धांत का पालन करेगी? उसकी भूमिका क्या होगी? उसके ऊपर जिम्मेदारी क्या रहेंगी ? उसके बाद पुलिस अपने हिसाब से काम करेगी और उसके ऊपर किसी तरह का दबाव नहीं डाला जाएगा । इन बातों पर ध्यान दिया जाना चाहिए ।

उत्तर पूर्वी दिल्ली में हिंसा के दौरान पुलिस पर एक संप्रदाय विशेष के ख़िलाफ़ उपद्रवियों का साथ देने के आरोपों पर उनकी राय पूछे जाने पर प्रकाश सिंह ने कहा कि यह तो जांच का विषय है । लेकिन इन सभी परिस्थितियों के लिये पुलिस तंत्र को आधुनिक, मजबूत एवं व्यवस्थित बनाने की जरूरत है क्योंकि भारत में पुलिस बल की संरचना या फिर अनुसंधान का तरीक़ा..... वह उपनिवेशकालीन ही है।

भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिये कौन से तत्कालिक एवं दीर्घकालिक कदम उठाये जाने चाहिए, इस सवाल पर उन्होंने कहा, ‘‘पुलिस सुधार एवं आधुनिकीकरण इसके महत्वपूर्ण पहलू हैं । यह पहले भी कहा गया है कि किसी राज्य के पुलिस प्रमुख का कार्यकाल एक निश्चित समय के लिये सुनिश्चित हो और कार्य की स्वतंत्रता को प्रोत्साहन दिया जाए। पुलिस के कामकाज में किसी प्रकार का बाहरी हस्तक्षेप न हो। प्रत्येक राज्य में पुलिस सुधार आयोग की स्थापना की जाए । प्रदेशों में थाना प्रभारी से लेकर पुलिस प्रमुख तक का एक स्थान पर कार्यकाल दो वर्ष सुनिश्चित करने के सुझाव आदि पर अमल हो । ’

Delhi Violence
Delhi riots
IPS Prakash Singh
delhi police

Related Stories

दिल्ली: रामजस कॉलेज में हुई हिंसा, SFI ने ABVP पर लगाया मारपीट का आरोप, पुलिसिया कार्रवाई पर भी उठ रहे सवाल

क्या पुलिस लापरवाही की भेंट चढ़ गई दलित हरियाणवी सिंगर?

बग्गा मामला: उच्च न्यायालय ने दिल्ली पुलिस से पंजाब पुलिस की याचिका पर जवाब मांगा

शाहीन बाग़ : देखने हम भी गए थे प तमाशा न हुआ!

शाहीन बाग़ ग्राउंड रिपोर्ट : जनता के पुरज़ोर विरोध के आगे झुकी एमसीडी, नहीं कर पाई 'बुलडोज़र हमला'

जहांगीरपुरी : दिल्ली पुलिस की निष्पक्षता पर ही सवाल उठा दिए अदालत ने!

अदालत ने कहा जहांगीरपुरी हिंसा रोकने में दिल्ली पुलिस ‘पूरी तरह विफल’

मोदी-शाह राज में तीन राज्यों की पुलिस आपस मे भिड़ी!

पंजाब पुलिस ने भाजपा नेता तेजिंदर पाल बग्गा को गिरफ़्तार किया, हरियाणा में रोका गया क़ाफ़िला

उमर खालिद पर क्यों आग बबूला हो रही है अदालत?


बाकी खबरें

  • कोविड-19 उपचार: 3 दवाओं के साथ सॉलिडेरिटी ट्रायल इस बार फिर से आरंभ हो रहा है 
    संदीपन तालुकदार
    कोविड-19 उपचार: 3 दवाओं के साथ सॉलिडेरिटी ट्रायल इस बार फिर से आरंभ हो रहा है 
    07 Aug 2021
    पुनर्प्रयोजन के लिए तीन दवा उम्मीदवारों इमैटिनिब, जो कि एक कैंसर की दवा है; इन्फ्लिक्सीमैब एक एंटीबाडी, और अर्तेसुनेट एक मलेरिया-रोधी दवा है, को शामिल किया गया है।
  • फ़ैक्ट-चेक : भारत पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा?
    प्रियंका झा
    फ़ैक्ट-चेक : भारत पहली बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता करेगा?
    07 Aug 2021
    इस दावे की पड़ताल करते हुए हमने देखा कि 1 अगस्त को इस बारे में कई मीडिया संगठनों ने ख़बर छापी है. हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, अगस्त 2021 में सुरक्षा परिषद की अध्यक्षता भारत के पास रहेगी.…
  • देशद्रोह की जंजीरें खोलती अदालतें
    सबरंग इंडिया
    देशद्रोह की जंजीरें खोलती अदालतें
    07 Aug 2021
    3 अगस्त को, दो अलग-अलग मामलों में, दो उच्च न्यायालयों ने अपने मौलिक अधिकारों को बरकरार रखते हुए राजद्रोह के लिए बुक किए गए व्यक्तियों को जमानत दे दी।
  • शाहीन बाग़ में लगे हुए भारत के मानचित्र
    सौरभ शर्मा
    एंटी-सीएए विरोध की आत्मा को फिर से जीवंत करती एक ग्राफ़िक बुक
    07 Aug 2021
    इटा मेहरोत्रा की 'शाहीन बाग़: ए ग्राफ़िक रिकॉलेक्शन' दृश्यात्मक अर्थ विज्ञान की तलाश करती एक ऐसी किताब है, जो प्रतीक बन चुके विरोध स्थल को मुश्किल समय में फिर से जीवंत करने में मदद करती है।
  • तेहरान में एक नई सुबह की शुरुआत  
    एम. के. भद्रकुमार
    तेहरान में एक नई सुबह की शुरुआत  
    07 Aug 2021
    मंगलवार को तेहरान में उद्घाटन समारोह में नए राष्ट्रपति इब्राहिम रईसी की टिप्पणियों ने एक बार फिर से संकेत दिए हैं कि उनके राष्ट्रपति पद के कार्यकाल में अर्थव्यवस्था को तरजीह दी जायेगी।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License