NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कृषि
मज़दूर-किसान
साहित्य-संस्कृति
भारत
राजनीति
अंधेर नगरी, चौकस राजा!
यहाँ नगरी भले ही अंधेर है पर राजा चौपट नहीं है। वह तो पूरा चौकस है चौकस। उसे सब पता है कि वह क्या कर रहा है कैसे कर रहा है और किसके लिए कर रहा है। 
डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
27 Sep 2020
modi

इधर हम फिल्म एक्टरों के नशे की कहानियों में डूबे रहे, उधर चौकस राजा ने किसानों पर बिल पास करा लिए। अब देखो सरकार किसानों के भले के लिये एक नहीं, दो नहीं, तीन तीन विधेयक एक साथ लाई है। ये विधेयक राज्यसभा में ध्वनि मत से ही पास करवा लिये। मांग होने के बावजूद मत विभाजन तक नहीं करवाया। मानो उच्च सदन में विद्वानों की नहीं, बल्कि जोर जोर से चीखने चिल्लाने वालों की ही जरूरत है। पर ये तीन-तीन 'किसान कल्याण बिल' सरकार ने अपने भले के लिए नहीं, सिर्फ और सिर्फ किसानों के भले के लिए ही पास करवाये। और ये किसान हैं कि इन कानूनों के विरोध में धरना प्रदर्शन कर रहे हैं, भारत बंद कर रहे हैं। 

ये जो किसान हैं न, बहुत ही अजीब हैं, बहुत ही सीधे साधे, भोले भाले हैं। ये किसान कभी भी अपना भला बुरा बिल्कुल नहीं समझेंगे। बस किसी के भी बहकावे में आ जायेंगे, जैसे अपना दिमाग तो है ही नहीं।

कितनी बुरी बात है कि ये किसान मोदी जी के बहकावे में न आ कर विपक्ष के बहकावे में आ रहे हैं।

tirchi nazar_11.png

किसान भाइयों, अपने दिमाग से नहीं, मोदी जी के दिमाग से काम लो, मोदी जी के बहकावे में आओ। इससे तुम्हारा और देश का, दोनों का भविष्य तो बनेगा ही, साथ ही अंबानी अडानी का भविष्य भी बन जायेगा। बेचारे ये अंबानी, अडानी और उनके जैसे अन्य अमीर, इस कोरोना काल में बड़ी ही गरीबी झेल रहे हैं। बेचारा अंबानी तो विश्व के अमीरों की सूची में न जाने कितने ही सप्ताह से चौथे पाँचवें स्थान पर ही अटका पड़ा है। किसान भाइयों, मोदी जी इतना मना रहे हैं, बार बार इतना कह रहे हैं, तो मान भी जाओ और मोदी जी के बहकावे में भी आ जाओ। 

किसान भाइयों अब जब आपको अपनी फसल बेचने मंडी के बाहर जाना ही पड़ेगा तो कहीं भी चले जाओ। बिहार का किसान अपना धान अपनी बैलगाड़ी, ठेलागाडी़ या फिर ट्रेक्टर पे रखे और फिर, चाहे तो केरल में बेच आये या फिर कश्मीर में। और चाहे तो बिना स्मार्ट फोन, बिना इंटेरनेट ई-नाम पर बेच ले। लेकिन किसानों की जिद है कि मंडी में ही बेचेंगे। लेकिन जब सरकार न तो मंडियों को ही रहने देगी और न ही मिनिमम सपोर्ट प्राइस यानी एमएसपी को। तब, तब क्या करोगे, बच्चू? 

अब जब मंडी रहेगी ही नहीं तो बाहर तो जाना ही पड़ेगा। बाहर उसे व्यापारी मिलेगा। व्यापारी तो पहले भी मिलता था पर अब धोती कुर्ते की बजाय सूट बूट वाला कार्पोरेट व्यापारी मिलेगा। वही जो अंग्रेजी मिली टूटी-फूटी हिन्दी बोलेगा। वही कार्पोरेट व्यापारी, जिस पर हमारे सरकार जी, जी जान से मेहरबान हैं। उसी पर पहले कॉर्पोरेट टैक्स कम किया था। अब उसी कार्पोरेट व्यापारी के लिए मंडी टैक्स भी समाप्त किया जा रहा है। सरकारी आमदनी भले ही घट जाये, रिजर्व बैंक से भले ही रिजर्व फंड लेना पड़े, आम जनता पर भले ही टैक्स का बोझ बढ़ता जाये, पर कॉर्पोरेट पर मेहरबानी तो जारी रहनी ही चाहिए। सरकार जी का यही सारा फंडा है और इसी के लिए सारा फंड है।

यही कॉर्पोरेट न सिर्फ किसान से फसल खरीदेगा अपितु कांट्रैक्ट फार्मिंग यानी करार खेती भी करायेगा। अब वह करार खेती कब बे-करार में बदल जाये, पता नहीं। लेकिन अगर ऐसा हो जाये तो किसान भाइयों, घबराइएगा मत। सरकार ने इस ऐतिहासिक कानून में पूरी एहतियात बरती हुई है कि आपको न्याय न मिल पाये, आप कोर्ट में न जा पायें। सरकारी अफसर ही सारा न्याय निपटा देंगे। 

अब अधिक खरीदने के बाद व्यापारी को जमाखोरी भी करनी ही पड़ेगी। आखिर कानून का पालन जो करना है। अब जमाखोरी कानूनी हो गई है। तो कानून के अनुसार काम करना ही होगा। व्यापारी अगर कानून अनुसार जमाखोरी नहीं करेगा तो सरकार उससे जबरदस्ती करवायेगी।  जब सरकार जमाखोरी करवायेगी तो कालाबाजारी भी करवायेगी। आखिर बिना कालाबाजारी के जमाखोरी का क्या लाभ। वैसे भी लाभ तो कमाना ही पड़ेगा, यह तो बिजनेस का पहला उसूल है। पहले फसल खरीदने में पैसा लगाओ, फिर जमाखोरी में पैसा लगाओ। इतना पैसा लगा कर भी अगर लाभ नहीं कमाया तो बन गये भई बिजनेसमैन। अब अगर एमआरपी मतलब मैक्सिमम रिटेल प्राइस बढ़ा कर नहीं बेचा तो काहे के बिजनेसमैन। 

वहाँ एमएसपी में एम मिनिमम था तो यहाँ एमआरपी में एम मैक्सिमम है। मिनिमम से कम में खरीद की है तो मैक्सिमम से अधिक में बेचना भी पड़ेगा ही। आखिर मिनिमम और मैक्सिमम में संतुलन भी तो बनाए रखना है। फिर अर्थशास्त्र के सिद्धांत का भी तो ध्यान रखना है। जब सारे के सारे खेतों से फसल कट कर बाजार में आयेगी तो कितनी सारी होगी। उस समय कम से कम में ही तो खरीद करनी पड़ेगी। और फिर जब जमाखोरों के पास गोदामों में जमा स्टॉक धीरे धीरे, रुक रुक कर बाजार में आयेगा तो अधिक से अधिक मूल्य में ही तो बिकेगा। बाजार का सिद्धांत भी यही सिखाता है और कौटिल्य का अर्थशास्त्र भी हमें यही बताता है। इसमें न तो मोदी जी की कोई गलती है और न ही व्यापारी का कोई स्वार्थ। 

मुझे लगता है कि योगेन्द्र यादव ने इन कानूनों के नामों का साधारण हिन्दी में बड़ा ही मनोरंजक लेकिन सटीक अनुवाद किया है। आपके लिए प्रस्तुत है :

1. मंडी तोड़ो, एम एस पी छोड़ो कानून 

2. जमाखोरी कालाबाजारी अनुमति कानून और

3. बंधुआ किसान कानून 

यहाँ नगरी भले ही अंधेर है पर राजा चौपट नहीं है। वह तो पूरा चौकस है चौकस। उसे सब पता है कि वह क्या कर रहा है कैसे कर रहा है और किसके लिए कर रहा है। 

(इस व्यंग्य स्तंभ के लेखक पेशे से चिकित्सक हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

Satire
Political satire
tirchi nazar
Narendra modi
Farmer protest
Farm Bills
TV media
bollywood

Related Stories

किसानों और सत्ता-प्रतिष्ठान के बीच जंग जारी है

पंजाब: आप सरकार के ख़िलाफ़ किसानों ने खोला बड़ा मोर्चा, चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर डाला डेरा

ब्लैक राइस की खेती से तबाह चंदौली के किसानों के ज़ख़्म पर बार-बार क्यों नमक छिड़क रहे मोदी?

ग्राउंड रिपोर्टः डीज़ल-पेट्रोल की महंगी डोज से मुश्किल में पूर्वांचल के किसानों की ज़िंदगी

सावधान: यूं ही नहीं जारी की है अनिल घनवट ने 'कृषि सुधार' के लिए 'सुप्रीम कमेटी' की रिपोर्ट 

ग़ौरतलब: किसानों को आंदोलन और परिवर्तनकामी राजनीति दोनों को ही साधना होगा

देशभर में घटते खेत के आकार, बढ़ता खाद्य संकट!

पीएम के 'मन की बात' में शामिल जैविक ग्राम में खाद की कमी से गेहूं की बुआई न के बराबर

कृषि क़ानूनों के निरस्त हो जाने के बाद किसानों को क्या रास्ता अख़्तियार करना चाहिए

किसानों की ऐतिहासिक जीत के मायने


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    पंजाब: धार्मिक ग्रंथों का अपमान निंदनीय, लेकिन इसके लिए 'लिंचिंग' कितनी जायज़?
    20 Dec 2021
    पंजाब में बेअदबी की घटनाओं पर राजनीति जारी है। लेकिन बीते दो दिन में दो लिंचिंग के मामलों पर सरकार से लेकर विपक्ष तक सब ख़ामोश हैं।
  • उपेंद्र स्वामी
    दुनिया भर की : चिली में वामपंथी छात्र नेता होंगे सबसे युवा राष्ट्रपति
    20 Dec 2021
    चिली के ‘नवउदारवादी’ आर्थिक मॉडल को दफ़न कर देने का वादा करने वाले कानून के इस पूर्व छात्र ने रविवार को राष्ट्रपति के पद के लिए हुए चुनावों (रन-ऑफ़) में धुर दक्षिणपंथी जोस एंटोनियो कास्त को क़रारी मात…
  • न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    प्रशासन की अनदेखी का खामियाज़ा भुगत रहे मरीज़़ : अनिश्चितकालीन हड़ताल पर गए जूनियर डॉक्टर्स, अब मरीज़ों का क्या होगा?
    20 Dec 2021
    NEET, पीजी काउंसलिंग समेत कई मांगों के नहीं माने जाने पर जूनियर डॉक्टर्स ने अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू कर दी है, इतना ही नहीं डॉक्टरों ने इमरजेंसी सेवाएं देने से भी मना कर दिया है, जिसके कारण मरीज़ों…
  • modi
    बादल सरोज
    हिंदुत्व की काशी करवट: यूपी चुनाव से पहले ख़ास नैरिटेव की तैयारी
    20 Dec 2021
    काशी और फिर अयोध्या में जो किया और दिखाया गया वह हिंदू आचरण नहीं, हिंदुत्व लीला का मंचन है। एकदम शुद्ध रेडियोएक्टिव और खांटी हिन्दुत्व का मंचन।
  • banaras
    विजय विनीत
    फिर बनारस आ रहे हैं मोदी, रखेंगे अमूल प्लांट की आधारशिला, लेकिन किसान नाराज़, नहीं मिला ज़मीन का मुआवज़ा 
    20 Dec 2021
    औद्योगिक विकास प्राधिकरण (सीडा) यह दावा कर रहा है कि सभी किसानों को मुआवजा दे दिया गया है। जबकि सच यह है कि ज़्यादातर किसानों को फूटी कौड़ी नहीं मिल सकी है। ज़मीन का मुआवज़ा न मिलने की वजह के कई…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License