NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
सियासत: गृह मंत्री के दावे और ज़मीनी हक़ीक़त का फ़र्क़
अमित शाह ने प्रदेश की योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की जमकर प्रशंसा की। हालाँकि उनकी मौजूदगी में ही शुक्रवार की रात राजधानी में हुई दो हत्याओं ने उनके दावे को धराशायी कर दिया।
असद रिज़वी
31 Oct 2021
amit shah
लखनऊ: “मेरा परिवार-भाजपा परिवार” कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाने आए गृह मंत्री अमित शाह

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 की तैयारियों के लिए गृहमंत्री अमित शाह शुक्रवार को लखनऊ पहुंचे। भाजपा के क़द्दावर नेता शाह ने यहाँ “हिन्दुत्व” को सत्ता के केंद्र में लाने का प्रयास किया।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यता अभियान की शुरुआत करते हुए गृहमंत्री ने अयोध्या में “राम मंदिर” निर्माण और कश्मीर से “धारा 370” ख़त्म करने को भगवा पार्टी की उपलब्धि बताया।

हालाँकि मंच पर लखीमपुर कांड के मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा के पिता केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र “टेनी” की मौजूदगी से शाह विपक्षी दलों के निशाने पर आ गए। 

भाजपा के क़द्दावर नेता शाह ने प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की कानून एवं व्यवस्था की जमकर प्रशंसा करी। हालाँकि उनकी मौजूदगी में ही शुक्रवार की रात राजधानी में हुई दो हत्याओं ने उनके दावे को धराशायी कर दिया।

वहीं सोशल मीडिया पर गृह मंत्री से त्रिपुरा में समुदाय विशेष के विरुद्ध हिन्दू संगठनों द्वारा हो रही हिंसा पर सवाल करने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) की नेता सुमैया राना को पुलिस ने शाह की लखनऊ में मौजूदगी के दौरान नज़रबंद रखा।

“मेरा परिवार-भाजपा परिवार” कार्यक्रम को हरी झंडी दिखाने आये अमित शाह ने “हिन्दुत्व” को चुनावों का मुख्य मुद्दा बनाने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और कश्मीर से धारा 370 हटाने कि, 2014 में नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार बनने से पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

गृह मंत्री पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कैराना से हिंदुओं के पलायन का ज़िक्र करते हुए कहा कि प्रदेश में भाजपा सरकार आने से उनको (हिंदुओं को) पलायन नहीं करना पड़ता है। हालाँकि 2016 में भाजपा द्वारा उठाये गये इस मुद्दे पर ज़मीनी स्तर पर तमाम पड़तालें हुईं थी। जिसमें “पलायन के दावे” पर संदेह जताए गए थे। कई मामलों को ग़लत भी पाया गया था।

शाह ने हिंदुत्व के अपने ऐजेंडे को और धार देते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश बुद्ध, भगवान शिव, श्री राम और श्री कृष्ण धरती है। लेकिन मुग़ल शासन से लेकर 2017 तक ऐसा महसूस नहीं होता था। जब 2017 में  भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार आई तो उसने प्रदेश को उसकी पहचान वापस दिलाई।

हालाँकि शाह के मंच पर लखीमपुर कांड के मुख्य अभियुक्त आशीष मिश्रा के पिता और मोदी सरकार के मंत्री अजय मिश्रा की मौजूदगी पर “विपक्ष” ने शाह को घेर लिया। सपा और कांग्रेस दोनों ने शाह को निशना बनाया।

बुंदेलखंड के दौरे पर गई कांग्रेस की महासचिव और प्रदेश प्रभारी प्रियंका गाँधी ने कहा कि “ यहाँ पूरे बुंदेलखंड में किसान खाद के लिए लाइन में खड़े जान दे रहे हैं। वहाँ लखीमपुर में एक मंत्रीपुत्र कई किसानों को जीप से कुचल देता है और उसका पिता गृहमंत्री के साथ लखनऊ के मंच पर खड़ा है। देश का किसान आपके घमंड को देख रहा है।”

शाह ने अपने भाषण में कहा था की प्रदेश में “कानून एवं व्यवस्था” में इतना सुधार आया है कि अगर दूरबीन लेकर भी ढूँढा जाये तो भी कोई अपराधी नहीं मिलेगा। जिस पर सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अजय मिश्रा की शाह के साथ तस्वीर “सोशल मीडिया” पर साझा करते हुए कहा कि “झूठी दूरबीन लेकर ढूँढने का ढोंग पूरा था जबकि ‘बगल में छोरा जगत ढिंढोरा’ था।”

बता दें कि मंत्री अजय सिंह के बेटे आशीष सिंह पर आरोप हैं कि उसने, तीन विवादित कृषि क़ानूनों का विरोध करने वाले किसानों पर अपनी गाड़ी चढ़ा दी थी। जिसमें चार किसानों, एक पत्रकार की मौत हो गई थी। इस घटना में कुल 8 लोगों ने जान गंवाई। आशीष को अदालत का दबाव पड़ने के बाद गिरफ़्तार कर जेल भेज दिया गया। लेकिन अभी तक उसके पिता अजय मिश्रा ने न तो इस्तीफ़ा दिया और न मोदी ने उन से इस्तीफ़ा माँगा है।

कानून एवं व्यवस्था पर किया गया शाह का दावा उनके लखनऊ में रहते ही कुछ घंटों के भीतर धराशायी हो गया। शुक्रवार देर रात दो घंटे में हुई दो हत्याओं से राजधानी में सनसनी फ़ैला गई। हसनगंज इलाक़े में रात क़रीब 10:30 बजे, एक ठेकेदार की शादी समारोह में चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई। वहीं मलहा गांव (काकोरी) में रात क़रीब 8:30 बजे, नशे में धुत पति ने पत्नी की बांके से गला काटकर उसकी हत्या कर दी।

उधर गृहमंत्री से त्रिपुरा में मुसलमानों पर हिन्दू संगठनों द्वारा हो रहे हमलों पर सवाल पूछने जा रही सपा नेता सुमैया राना को पुलिस ने उनके क़ैसरबाग़ स्थित घर से 24 घंटे तक बाहर नहीं निकलने दिया। सुमैया के अनुसार वह गृहमंत्री मंत्री मिलकर त्रिपुरा के अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर बात करना चाहती थी।

 हाउस अरेस्ट : पुलिस निगरानी में सपा नेता सुमैया राना

सपा नेता ने कहा कि “क्यूँकि देशवासियों की सुरक्षा की ज़िम्मेदारी है गृहमंत्री की है, इस लिये मैं उनसे जानना चाहती हूँ कि उन्होंने त्रिपुरा के हालत क़ाबू करने और हिंसा के ज़िम्मदरों को सज़ा दिलाने के लिये क्या उठाये हैं”। नागरिकता संशोधन क़ानून के विरोध में सक्रिय रही सुमैया के अनुसार पुलिस के पास उनको रोकने का कोई आदेश नहीं था, फ़िर भी उनको घर से बाहर नहीं निकलने दिया गया। 

शाह द्वारा की गई बैठकों में उत्तर प्रदेश का सियासी महत्व साफ़ दिखा। उन्होंने कहा कि मोदी का 2024 में प्रधानमंत्री बनना तभी संभव होगा, जब 2022 में प्रदेश में भाजपा जीतेगी। सत्ता विरोधी लहर का अंदाज़ा शाह को भी था। उन्होंने अपनी पार्टी के सांसद-विधायक, संगठन पदाधिकारियों स्पष्ट कहा है कि हवा में न रहें, ज़मीनी हक़ीक़त, राजनीतिक और सामाजिक समीकरण पर नज़र राखें। विधान चुनाव 2022 के नतीजों को लेकर अतिविश्वास में आने की जरूरत नहीं है।

 

BJP
Amit Shah
Yogi Adityanath
UP Government
UP election 2022
law and order
SP
Congress

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !

गुजरात: भाजपा के हुए हार्दिक पटेल… पाटीदार किसके होंगे?


बाकी खबरें

  • सोनिया यादव
    आंगनवाड़ी की महिलाएं बार-बार सड़कों पर उतरने को क्यों हैं मजबूर?
    23 Feb 2022
    प्रदर्शनकारी कार्यकर्ताओं का कहना है कि केंद्र और राज्य दोनों सरकारों द्वारा घोषणाओं और आश्वासनों के बावजूद उन्हें अभी तक उनका सही बकाया नहीं मिला है। एक ओर दिल्ली सरकार ने उनका मानदेय घटा दिया है तो…
  • nawab malik
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    हम लड़ेंगे और जीतेंगे, हम झुकेंगे नहीं: नवाब मलिक ने ईडी द्वारा गिरफ़्तारी पर कहा
    23 Feb 2022
    लगभग आठ घंटे की पूछताछ के बाद दक्षिण मुंबई स्थित ईडी कार्यालय से बाहर निकले मलिक ने मीडिया से कहा, '' हम लड़ेंगे और जीतेंगे। हम झुकेंगे नहीं।'' इसके बाद ईडी अधिकारी मलिक को एक वाहन में बैठाकर मेडिकल…
  • SKM
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    बंगाल: बीरभूम के किसानों की ज़मीन हड़पने के ख़िलाफ़ साथ आया SKM, कहा- आजीविका छोड़ने के लिए मजबूर न किया जाए
    23 Feb 2022
    एसकेएम ने पश्चिम बंगाल से आ रही रिपोर्टों को गम्भीरता से नोट किया है कि बीरभूम जिले के देवचा-पंचमी-हरिनसिंह-दीवानगंज क्षेत्र के किसानों को राज्य सरकार द्वारा घोषित "मुआवजे पैकेज" को ही स्वीकार करने…
  • राजस्थान विधानसभा
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    राजस्थान में अगले साल सरकारी विभागों में एक लाख पदों पर भर्तियां और पुरानी पेंशन लागू करने की घोषणा
    23 Feb 2022
    मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार को वित्तवर्ष 2022-23 का बजट पेश करते हुए 1 जनवरी 2004 और उसके बाद नियुक्त हुए समस्त कर्मचारियों के लिए आगामी वर्ष से पूर्व पेंशन योजना लागू करने की घोषणा की है। इसी…
  • चित्र साभार: द ट्रिब्यून इंडिया
    भाषा
    रामदेव विरोधी लिंक हटाने के आदेश के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया की याचिका पर सुनवाई से न्यायाधीश ने खुद को अलग किया
    23 Feb 2022
    फेसबुक, ट्विटर और गूगल ने एकल न्यायाधीश वाली पीठ के 23 अक्टूबर 2019 के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें और गूगल की अनुषंगी कंपनी यूट्यूब को रामदेव के खिलाफ मानहानिकारक आरोपों वाले वीडियो के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License