NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
मज़दूर-किसान
भारत
राजनीति
खोरी गांव में चल रही तोड़-फोड़ की कार्रवाई के ख़िलाफ़ दिल्ली में हुई प्रेस कांफ्रेंस
"खोरी को पूरी दुनिया से काट कर एक गुमनाम मौत देने की पूरी साजिश है हरियाणा सरकार और फरीदाबाद नगर निगम की इसलिए आज इस बात की सख़्त ज़रूरत है कि खोरी की खबर को मीडिया और व्यापक जन आबादी तक ले जाया जाए।"
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Jul 2021
khori village

फरीदाबाद के खोरी गांव में भारी पुलिस बल के साथ प्रशासन पिछले कई दिनों से तोड़ फोड़ जारी रखे हुआ है।  इस बीच मंगलवार शाम को दिल्ली के प्रेस क्लब ऑफ़ इण्डिया में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस हुई, जिसमे खोरी गांव को उजाड़ने के लिए चल रही तोड़ फोड़ की कार्रवाई के खिलाफ पत्रकारों और नागरिक समाज के लोगों ने आवाज़ बुलंद की, इस कॉन्फ्रेंस में गांव के पीड़ित परिवार भी शामिल हुए और उन्होंने अपनी व्यथा मीडया के सामने रखी। आपको बता दें कि पुलिस प्रशासन ने खोरी गांव में मीडिया के जाने पर पाबंदी लगा रखी है।

प्रेस कांफ्रेंस में आए पीपल्स यूनियन ऑफ सिविल लिबर्टीज के उपाध्यक्ष एन डी पंचोली ने कहा कि स्वतंत्रता सेनानियों ने कभी यह सोचा भी नहीं होगा कि उनके देश में लोगों को उजाड़ा जायेगा और प्रधानमंत्री अपने लिए सेंट्रल विस्टा जैसा प्रोजेक्ट बनवाएगा। उनका कहना था की खोरी की लड़ाई हम सब की लड़ाई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आवास का अधिकार मूलभूत अधिकार के साथ-साथ मानवाधिकार भी है।

डीयू के प्रोफेसर एन सचिन का कहना था कि खोरी में जारी तोड़ फोड़ की मीडिया रिपोर्टिंग लगभग न के बराबर है। पहले राज्य ने यहां के मजदूरों से मजदूरी करवाई और अब उन्हें बेघर कर रही है।  बी के यू (क्रांतिकारी) की किसान नेता सुखविंदर कौर का कहना था कि भारत में न्याय हासिल करना कठिन है। उन्होंने बल दिया कि लोगों को बेघर किया जा रहा है और उन्हें कोई आवास नहीं दिया जा रहा है इसलिए पुनर्वास एक धोखा है। उन्होंने कहा कि जब हजारों एकड़ जंगल की जमीन बेची जा रही है तो खोरी को पर्यावरण के नाम पर हटाना अन्याय है।

भारतीय किसान पंचायत हरियाणा के अध्यक्ष रविंदर सिंह मूरथल ने कहा कि अभी खोरी की घटना हाल में जनता पर हुए प्रहार का एक उदाहरण है। उन्होंने कहा कोर्ट अमीरों, मंत्रियो और कॉरपोरेट का है। हम खोरी के लोगों के साथ हैं।

वरिष्ठ पत्रकार अनिल चामडिया जी ने कहा कि यह ज़मीन पर्यावरण के नाम पर खाली करा कर कॉरपोरेट के लोगों को दे दी जाएगी और इस अन्याय प्रक्रिया को खोरी के लोग झेल रहे हैं। उन्होंने वकीलों से अपील की कि 27 जुलाई को होने वाली सुनवाई में खोरी के लोगों की ओर से पहुंचे।

खोरी की निवासी नूर सलमा का कहना था की घरों के टूटने के बाद लोग भयंकर अमानवीय स्थिति में जी रहे हैं। न उनके पास पानी है न भोजन। यहां तक कि पुलिस इन लोगों तक बाहर के लोगों की मदद तक नहीं पहुंचने दे रही है। पुलिस कहती है कि उन्हें मरने दो।
एक अन्य निवासी महफूज़ न अपने वक्तव्य में कहा, "गरिमा मित्तल का कहना है कि 3.77 लाख रूपये दे कर उन्हें ढबुआ में घर दिया जाएगा जिसे 2500 की किश्तों में लोगों को देना होगा। अगर सरकार पुनर्वास करवा रही है तो पैसे हम क्यों दे और अब तो हमारे पास है भी नहीं देने के लिए।" उनका कहना था कि 27 की सुनवाई बेकार है क्योंकि तब तक सारे घर टूट जायेंगे। हमें घरों को टूटने से रोकना है।

समिति ने कहा हम इस बात पर बल देना चाहते हैं कि जिस जंगल को बचाने के लिए खोरी के गांव उजाडे जा रहे हैं वह पहले ही 1970-80 के दशक में गैर-कानूनी खदानों की वजह से बर्बाद हो चुके थे और उन खदानों में काम करने वाले मजदूरों के परिवार आज वहां रह रहे हैं। इन मजदूरों का जंगल उजाड़ने में कोई योगदान नहीं है। हमारी सभी से यह अपील है कि इस मुद्दे पर तत्काल हस्तक्षेप करने की ज़रूरत है और खोरी के लोगों को बेघर करने के खिलाफ़ बोलना होगा। यह उनके मूलभूत अधिकार का हनन है।

समीति ने एकबार फिर अपनी मांगे दोहराई जो इस प्रकार हैं-

•    खोरी में तोड़ फोड़ पर तत्काल रोक।
•    जिनके घर टूटे हैं उन्हें उचित मुआवजा।
•    खोरी गांव से गिरफ़्तार लोगों को तत्काल रिहा किया जाए।
•    पानी, बिजली और साफ़-सफ़ाई का तत्काल इंतजाम
•    भूमि माफिया और लोगों को ठगने में शामिल अधिकारिओं के खिलाफ़ कार्रवाई।

ये तोड़फोड़ 7 जून को सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी आदेश के अनुसार किया जा रहा है। एक अंदाजे के मुताबिक़ अभी तक 5000 से ज्यादा घरों को जमींदोज़ कर दिए गए हैं और उनमें रहने वाले लोग इस बारिश-गर्मी में बेपनाह, भूखे प्यासे मौसम की मार झेल रहे हैं। तोड़-फोड़ की प्रक्रिया पिछले साल सितंबर में ही आरंभ हो गई थी जिसे अब पूरी निर्ममता के साथ खोरी में जारी रखा गया है। खोरी बचाने के लिए संघर्ष कर रही खोरी मज़दूर आवास संघर्ष समिति के मुताबिक इस गांव में  5000 गर्भावती महिलाएं, 20000 बच्चे और हजारों बुजुर्ग और बीमार हैं। खोरी की पूरी आबादी डेढ़ लाख से ज्यादा की है। जब से सुप्रीम कोर्टका ऑर्डर आया है लोगों में इतनी दहशत है कि अब तक लगभग 7 लोगों ने आत्महत्या कर ली है और कई दहशत  के मारे लापता हो गए हैं।

समिति ने कहा "खोरी को पूरी दुनिया से काट कर एक गुमनाम मौत देने की पूरी साजिश है।" इसलिए आज इस बात ले सख़्त ज़रूरत है कि खोरी की खबर को मीडिया और व्यापक जन आबादी तक ले जाया जाए।"

खोरी गांव में सक्रिय प्रतिरोध का पहला प्रर्दशन 30 जून को हुआ जिसमें राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा खोरी के निवासियों पर बर्बर लाठी चार्ज किया गया। 7 जून को खोरी वासियों की बड़ी सभा हुई। भारी संख्या में एकत्र हो कर लोगों ने अपना प्रतिरोध दर्ज़ कराया। 8 जून को जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन पर भी पुलिस का दमन हुआ और 600 से ज्यादा लोगों को हिरासत में ले लिया गया। इसके अलावा खोरी में लगातार वहां के निवासियों को गिरफ़्तार कर रही है और वहां काम कर रहे राजनीतिक कार्यकर्ताओं के भी पीछे पड़ी है। 15 जुलाई को खोरी में  बुल्डोजर और JCB के प्रवेश को रोकने के लिए किए गए प्रर्दशन पर पुलिस ने भयंकर लाठी चार्ज किया और तीन राजनीतिक कार्यकर्ताओं के अलावा 6 खोरी के लोगों को गिरफ़्तार किया जिसमें 3 महिलाएं भी थी।

समिति का आरोप है कि पुलिस कस्टडी में राजनीतिक कार्यकर्ताओं को घंटों बेरहमी से पीटा गया। इन सब के पीछे एक ही उद्देश है खोरी की आवाज़ को दबाना है।

अभी हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने भी इस मुद्दे गौर किया औरअपना बयान दिया कि हम भारत सरकार से गुज़ारिश करते हैं कि वह स्वयं अपने कानून और 2022 तक सभी बेघरों को घर देने के अपने लक्ष्य का सम्मान करे और 1,00,000 लोगों के घरों को बक्श दे जो मुख्यतः मजदूर और हाशिए से आए लोग हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार विशेषज्ञ का कहना है कि हमें बेहद चिंता है कि भारत का उच्चतम न्यायालय जिसने अतीत में आंतरिक विस्थापन और बेघर होने के खिलाफ़ आवास के अधिकार की रक्षा की है, अब वही खोरी के मामले में आंतरिक विस्थापन और लाखों लोगों के बेघर होने के खतरे के बाजूद खोरी को खाली करवा रही है।

Khori village
Khori Evictions
Khori Demolition
Haryana

Related Stories

हिसारः फसल के नुक़सान के मुआवज़े को लेकर किसानों का धरना

हड़ताल के कारण हरियाणा में सार्वजनिक बस सेवा ठप, पंजाब में बैंक सेवाएं प्रभावित

हरियाणा: आंगनबाड़ी कर्मियों का विधानसभा मार्च, पुलिस ने किया बलप्रयोग, कई जगह पुलिस और कार्यकर्ता हुए आमने-सामने

हरियाणा : आंगनवाड़ी कर्मचारियों की हड़ताल 3 महीने से जारी, संगठनों ने सरकार से की बातचीत शुरू करने की मांग

केंद्र सरकार को अपना वायदा याद दिलाने के लिए देशभर में सड़कों पर उतरे किसान

हरियाणा: आंगनवाड़ी कर्मचारियों के आंदोलन के 50 दिन पूरे

हरियाणा की 20,000 हड़ताली आंगनवाड़ी कार्यकर्ता करनाल में करेंगी रैली

हरियाणा: यूनियन का कहना है- नाकाफी है खट्टर की ‘सौगात’, जारी रहेगी आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल

MSP की कानूनी गारंटी ही यूपी के किसानों के लिए ठोस उपलब्धि हो सकती है

आंशिक जीत के बाद एमएसपी और आपराधिक मुकदमों को ख़ारिज करवाने के लिए किसान कर रहे लंबे संघर्ष की तैयारी


बाकी खबरें

  • Goa
    न्यूज़क्लिक टीम
    गोवा चुनावः क्या है मछली बेचने वालों के मुद्दे और भाजपा का रिपोर्ट कार्ड?
    04 Feb 2022
    गोवा एक तटीय प्रदेश है। बड़ी आबादी मछली कारोबार से जुड़ी हैं। लेकिन बावजूद इसके इनके मुद्दे पूरी चुनाव चर्चा से गायब हैं। हमने मापसा की मछली मार्केट में कुछ मछली बेचने वालों के साथ बात की है कि उनके…
  • journalist bodies
    ऋत्विका मित्रा
    प्रेस की आजादी खतरे में है, 2021 में 6 पत्रकार मारे गए: रिपोर्ट 
    04 Feb 2022
    छह पत्रकारों में से कम से कम चार की कथित तौर पर उनकी पत्रकारिता से संबंधित कार्यों की वजह से हत्या कर दी गई थी। 
  • Modi
    नीलांजन मुखोपाध्याय
    उत्तर प्रदेश चुनाव: बिना अपवाद मोदी ने फिर चुनावी अभियान धार्मिक ध्रुवीकरण पर केंद्रित किया
    04 Feb 2022
    31 जनवरी को अपनी "आभासी रैली" में प्रधानमंत्री मोदी ने उत्तर प्रदेश में पिछले समाजवादी पार्टी के "शासनकाल के डर का जिक्र" छेड़ा, जिसके ज़रिए कुछ जातियों और उपजातियों को मुस्लिमों के साथ मिलने से…
  • russia china
    एम. के. भद्रकुमार
    रुस-चीन साझेदारी क्यों प्रभावी है
    04 Feb 2022
    व्लादिमीर पुतिन और शी जिनपिंग के बीच शुक्रवार को होने वाली मुलाक़ात विश्व राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने जा रही है।
  •  Lucknow
    असद रिज़वी
    यूपी चुनाव: लखनऊ में इस बार आसान नहीं है भाजपा की राह...
    04 Feb 2022
    वैसे तो लखनऊ काफ़ी समय से भगवा पार्टी का गढ़ रहा है, लेकिन 2012 में सपा की लहर में उसको काफ़ी नुक़सान भी हुआ था। इस बार भी माना जा रहा है, भाजपा को कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License