NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
कोविड-19
नज़रिया
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
बैठे बैठे बोर हुए करना है कुछ काम, चलो राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं...
प्रधानमंत्री के संबोधन से दो बातें बिल्कुल साफ़ हो गईं कि उनके पास अब कहने को कुछ बचा नहीं है और दूसरा उनका संदेश सबके लिए है, सिवाए उनकी अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के।
मुकुल सरल
21 Oct 2020
modi
मंगलवार, 20 अक्टूबर को राष्ट्र को संबोधित करते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। स्क्रीन शॉट  

बैठे बैठे बोर हुए करना है कुछ काम, चलो राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं...जी हां, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का मंगलवार, 20 अक्टूबर का संबोधन सुनकर यही लगा। इस संबोधन से दो बातें बिल्कुल साफ़ हो गईं कि उनके पास अब कहने को कुछ बचा नहीं है और दूसरा उनका संदेश सबके लिए है, सिवाए उनकी अपनी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के। वरना क्या वजह है कि “अभी लापरवाह होने का समय नहीं है”, का संदेश देने वाले प्रधानमंत्री की पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष समेत सभी नेता बिहार चुनाव में खुलेआम कोरोना प्रोटोकॉल की धज्जियां उड़ा रहे हैं। मध्यप्रदेश उपचुनाव में कलश यात्राएं निकाली जा रही हैं। क्या ये संदेश उनके लिए नहीं था।

क्या जो बात प्रधानमंत्री इस बहाने कह रहे हैं कि हमने ऐसे कई वीडियो देखे हैं जिसमें लोग लापरवाही बरत रहे हैं, वह इसमें यह भी जोड़ सकते थे कि हम बिहार चुनाव में देख रहे हैं कि किस तरह हमारी ही पार्टी के ही नेता अपने प्रचार में, अपनी रैलियों में न दो गज़ की दूरी का पालन कर रहे हैं न सही ढंग से मास्क लगा रहे और न लगवा रहे हैं...।

लेकिन नहीं उनका भाषण हमेशा दूसरों के लिए होता है। जैसे रामचरित मानस में कहा गया है कि “पर उपदेश कुशल बहुतेरे, जे आचरहिं ते नर न घनेरे” अर्थात दूसरों को उपदेश देना तो बहुत आसान है लेकिन स्वयं उन उपदेशों पर अमल करना कठिन। इसे ही दूसरी ज़बान में इस तरह कहा गया है कि ख़ुद मियां फ़ज़ीहत, दूसरों को नसीहत...।  

“जब तक दवाई नहीं, तब तक ढिलाई नहीं का” संदेश देने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यह संदेश अपने राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी को भी देकर सबके सामने उदाहरण उपस्थित कर सकते थे कि मान्यवर आप महाराष्ट्र में जहां कोरोना संक्रमण की दर अभी भी देश में सबसे ज़्यादा है, वहां मंदिर खोलने के लिए राज्य सरकार पर इतना दबाव क्यों बना रहे हैं और वो भी इतने गैरज़िम्मेदाराना, असंवैधानिक पत्र लिखकर। वे पूछ सकते थे कि जब मेरी सरकार ने ही मंदिर-स्कूल इत्यादि खोलने का प्रस्ताव सबसे अंत में दिया है, तो फिर इस तरह एक राज्य सरकार को टार्गेट करना ठीक है क्या!

लेकिन वे कोश्यारी को क्या समझाते। जब वे खुद राम मंदिर का शिलान्यास करने के लिए इतने उतावले थे कि बीच और पीक कोरोना काल में 5 अगस्त को उन्होंने अयोध्या में पूरा आयोजन करा डाला। जिसमें वह जिस संत नृत्यगोपाल दास के संपर्क में आए उन्हें बाद में कोरोना की पुष्टि हुई। और इस दौरान अयोध्या में सरयू तट पर जो भीड़ उमड़ी उसमें सारे नियम-कायदे धराशाई हो गए।

देश का युवा उनके संबोधन को बार-बार डिस्लाइक कर उन्हें बेरोज़गारी इत्यादि मुद्दों की ओर लौटने का संदेश दे रहा है, लेकिन वे इसे अनसुना कर अपना ही राग अलाप रहे हैं। उनके भाषण में न मज़दूर है, न किसान, न बेरोज़गार जवान। वे तो अपनी ही धुन में हैं। कोरोना के मामले में भी वे अपनी पीठ थपथपाने से नहीं चूकते, जबकि इस महामारी से निपटने की उनकी योजनाओं की असलियत पूरा देश जानता है। और ये भी दिलचस्प है बात-बात में पड़ोसियों को उनकी ‘औकात’ बताने वाले हमारे नेता कोरोना के मामले में यूरोप और अमेरिका का ही उदाहरण देते हैं। कभी भूले से नहीं बताते कि हमारे हमज़ाद यानी हमारी तरह जलवायु वाले, हमारी तरह सघन जनसंख्या वाले, हमसे भी कमज़ोर अर्थव्यवस्था वाले देश पाकिस्तान, बांग्लादेश, श्रीलंका इत्यादि कोरोना के मामले में क्या कर रहे हैं। उन्होंने कैसे कोरोना और अपनी अर्थव्यवस्था को संभाला। मोदी जी कभी नहीं बताएंगे कि कोरोना संक्रमण और मृत्यु के मामले में हमारी स्थिति इन पड़ोसी देशों से कितनी ख़राब है।

कल 20 अक्टूबर तक के कोविड-19 के आंकड़े देखें तो सबकुछ साफ़ हो जाता है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार भारत में कुल मामले 75 लाख 97 हज़ार 63 थे। जिनमें से 67 लाख 33 हज़ार 328 रिकवर हो गए हैं। इस तरह कुल सक्रिय मामले 7 लाख 48 हज़ार 538 थे। और अब तक मौत का कुल आंकड़ा 1 लाख 15 हज़ार 197 हो गया है।

वहीं जॉन्स हॉपकिन्स विश्वविद्यालय के सेंटर फॉर सिस्टम साइंस एंड इंजीनियरिंग (CSSE) के आंकड़ों के अनुसार पाकिस्तान में कुल केस 3 लाख 24 हज़ार 744 हैं जिसमें से 3 लाख 8 हज़ार 674 रिकवर हो गए हैं। यानी कुल सक्रिय मामले दस हज़ार से भी कम 9,378 हैं। अभी तक कुल मौतों की संख्या 6,692 है।

बांग्लादेश में कुल केस 3 लाख 91 हज़ार 586 दर्ज किए गए हैं। इनमें से 3 लाख 7 हज़ार 141 मरीज़ रिकवर हो गए हैं। अभी कुल सक्रिय मामले 78, 746 हैं और कुल मौतों की संख्या 5,699 है।

रिकवरी रेट की बात की जाए तो भारत का रिकवरी रेट क़रीब 88 फ़ीसदी है, जिसे प्रधानमंत्री ने भी दोहराया, लेकिन पड़ोसी पाकिस्तान का रिकवरी रेट नहीं बताया। पाकिस्तान का रिकवरी रेट करीब 98 प्रतिशत है।  

सही तुलना प्रति 10 लाख जनसंख्या पर हो सकती है। https://www.worldometers.info/coronavirus/ के अनुसार भारत में प्रति 10 लाख पर संक्रमण की दर 5528 है, जबकि पाकिस्तान में 1462 और बांग्लादेश में 2371 है। इसी तरह प्रति 10 लाख पर मृत्यु दर भारत में 84, पाकिस्तान में 30 और बांग्लादेश में 35 है।

मोदी जी कभी नहीं बताएंगे कि प्रति व्यक्ति आय में हम क्यों बांग्लादेश से भी पिछड़ते जा रहे हैं। क्यों ग्लोबल हंगर इंडेक्स यानी वैश्विक भूख सूचकांक में हम 107 देशों में 94 नंबर पर हैं। जब हमारे सरकारी गोदाम अनाज से भरे पड़े हैं तब भी हमारी जनता क्यों भूखी या भुखमरी के कगार पर है। क्यों हम अफगानिस्तान को छोड़कर अपने सभी पड़ोसियों से ग्लोबल हंगर इंडेक्स में पीछे हैं।

ख़ैर, फिर वही बात, बैठे बैठे बोर हुए करना है कुछ काम, चलो राष्ट्र के नाम संदेश देते हैं...

Narendra modi
PM Modi's Address to the nation
COVID-19
Coronavirus
CSSE
Corona in India
Fight Against CoronaVirus
unemployment
poverty
BJP

Related Stories

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना ने फिर पकड़ी रफ़्तार, 24 घंटों में 4,518 दर्ज़ किए गए 

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 3,962 नए मामले, 26 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 84 दिन बाद 4 हज़ार से ज़्यादा नए मामले दर्ज 

कोरोना अपडेट: देश में कोरोना के मामलों में 35 फ़ीसदी की बढ़ोतरी, 24 घंटों में दर्ज हुए 3,712 मामले 

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में 2,745 नए मामले, 6 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में नए मामलों में करीब 16 फ़ीसदी की गिरावट

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में कोरोना के 2,706 नए मामले, 25 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 2,685 नए मामले दर्ज

कोरोना अपडेट: देश में पिछले 24 घंटों में कोरोना के 2,710 नए मामले, 14 लोगों की मौत

कोरोना अपडेट: केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली में फिर से बढ़ रहा कोरोना का ख़तरा


बाकी खबरें

  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    सिंघू बार्डर हत्याकांड, भारत की भूख और राहुल शरणम् कांग्रेस
    16 Oct 2021
    किसान आंदोलन का सदरमुकाम समझे जाने वाले सिंघू बार्डर पर शुक्रवार की सुबह जिस व्यक्ति की नृशंस ढंग से हत्या हुई, वह तरनतारन से कुछ दिनों पहले कैसे निहंगो के टेंट में आया और क्यों आया; इसे कोई नहीं…
  • Essential Commodities Act
    न्यूज़क्लिक टीम
    Essential Commodities Act में संशोधन सलाह के बाद होने चाहिए थे
    16 Oct 2021
    पूर्व कृषि सचिव और भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण के चेयरमैन आशीष बहुगुणा ने न्यूज़क्लिक से एक ख़ास बातचीत में कहा कि केंद्र सरकार को स्टेकहोल्डरों से सलाह करने के बाद ही Essential…
  • Savarkar and Gandhi
    राजेंद्र शर्मा
    गांधी तूने ये क्या किया : ‘वीर’ को कायर कर दिया
    16 Oct 2021
    “गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका में बैठे-बैठे ही ताड़ लिया था कि उनके राष्ट्रपिता के आसन के लिए अगर किसी से खतरा हो सकता था, तो वीर सावरकर से ही हो सकता था। अगले ने सावरकर की वीरता में ही खोट डलवा दिया…
  • Urban Company
    न्यूज़क्लिक टीम
    Urban Company: बिज़नेस मॉडल पर उठते सवाल
    16 Oct 2021
    होम सर्विस मुहैया करवाने वाले प्लेटफॉर्म अर्बन कंपनी के खिलाफ बीती 8 अक्टूबर को महिला कर्मचारियों का एक बड़ा प्रदर्शन देखने को मिला. अर्बन कंपनी, इन महिलाओं को कर्मचारी न मानकर 'पार्टनर्स' की श्रेणी…
  • hunger
    अजय कुमार
    भारत वैश्विक भूख सूचकांक में शामिल 116 देशों के बीच 101 वें पायदान पर
    16 Oct 2021
    केवल 15 देश भारत से बुरे हाल में हैं जिनमें अफगानिस्तान, नाइजीरिया, मोजांबिक, सोमालिया जैसे देश शामिल हैं। 
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License