NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
स्वास्थ्य
भारत
राजनीति
प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र में भी 'आयुष्मान भारत' का बुरा हाल : कार्ड होते हुए भी इलाज नहीं
लगातार मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर अस्पतालों द्वारा आयुष्मान कार्डधारी मरीजों का इलाज करने से इंकार किया जा रहा है।
रिज़वाना तबस्सुम
02 Dec 2019
ayushman yojna
Image courtesy:Social Media

आयुष्मान भारत योजना का ऐलान करते हुए पीएम मोदी और उनकी पूरी टीम ने दावा किया था कि अब देश में गरीब से गरीब लोग भी सरकारी तो सरकारी, किसी भी मंहगे प्राइवेट अस्पताल में भी इलाज करा सकेंगे और वह भी बिल्कुल मुफ्त। लेकिन जब इस योजना की जमीनी हकीकत पर नज़र डालते हैं तो सच्चाई कुछ और ही निकलकर आती है। ये हालत कहीं और की नहीं बल्कि पीएम मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी की है।

मोदी के संसदीय इलाके में आयुष्मान कार्ड का हाल जानने से पहले आयुष्मान कार्ड से परिचित हो लेते हैं। आयुष्मान कार्ड मात्र तीस रुपए में बनवा कर आप 5 लाख रुपए तक का मुफ्त में इलाज करा सकते हैं। यह कार्ड कोई मामूली कार्ड नहीं है। इस कार्ड का नाम है गोल्डन कार्ड जो आयुष्मान भारत स्कीम से जुड़ा है। गोल्डन कार्ड दो जगहों पर बनेंगे। अस्पताल (जो अस्पताल आयुष्मान योजना से जुड़ा होगा) में और कॉमन सर्विस सेंटर (सीएसएसी) पर। सीएससी गांवों में आसानी से मिल जाते है। कुछ गाँव में ग्राम प्रधान भी अपने गाँव वालों का आयुष्मान कार्ड बनाने में मदद कर रहे हैं। आपको बता दें कि, आयुष्मान कार्ड केवल उन्हीं लोगों का बनेगा जिनका नाम बीपीएल (गरीबी रेखा से नीचे) सूची में होगा।

वाराणसी के राजतालाब के नरेंद्र का आयुष्मान कार्ड बना हुआ है। ये पास के ही निजी अस्पताल में जब इलाज के लिए गए तो फ्री में इलाज नहीं हुआ। करीब पाँच हज़ार रुपए इन्हें अपने पास से देना पड़ा। इसी तरह कपसेठी के महंगू को सांस की तकलीफ थी। सरकारी अस्पताल में इलाज के लिए गए। इलाज तो हो गया। उनके पास कार्ड होने की वजह से अस्पताल में भर्ती होने का खर्च भी नहीं लगा लेकिन इसके दवा का खर्च परिजनों को वहन करना पड़ा।

इसके बारे में वाराणसी के सीएमओ वीबी सिंह कहते हैं कि, 'इलाज होना चाहिए और सरकारी अस्पताल में तो बिना आयुष्मान कार्ड के ही इलाज हो जाता है। सीएमओ आगे कहते हैं कि, 'इस समय कहीं-कहीं यह भी संज्ञान में आ रहा है कि कुछ कार्ड इल्लीगल (अवैध) तरीके से बन गए हैं। इसलिए कोई शक हो तो सीएमओ ऑफिस में आकर चेक करा लें कि कार्ड लीगल है या इल्लीगल ( वैध या अवैध)।

मुख्य चिकित्सा अधिकारी यह भी कहते हैं कि ऐसा होता नहीं नहीं है कि कार्ड पर इलाज ना हुआ हो, कभी कभी लोगों के बहकावे में बरगलाकर गलत कार्ड बन गए हैं, मैंने एफ़आईआर भी करा दी है। सीएमओ कहते हैं कि पीड़ित को मेरे ऑफिस में आकर कार्ड चेक कराना चाहिए, अगर फ्रॉड कार्ड हुआ तो उसके लिए हम एफ़आईआर भी कराएंगे।

आयुष्मान कार्ड के बारे में बोलते हुए सामाजिक कार्यकर्ता राजकुमार गुप्ता कहते हैं कि, 'इस जिले में इतने लोगों के आयुष्मान कार्ड बने हुए हैं लेकिन 90% लोग वो हैं जो उस कार्ड के लायक नहीं है। जो गरीब हैं जिन्हें बहुत ज्यादा जरूरत है कार्ड की उसका कार्ड ही नहीं बना हुआ है, क्योंकि उनका सूची (बीपीएल) में नाम ही नहीं है। राजकुमार कहते हैं कि, 'कार्ड जिनके पास हैं वो इलाज कराने में भी सक्षम हैं, लेकिन जो सक्षम नहीं हैं उनका क्या हो। सरकार को चाहिए कि एक बार सर्वे करा ले ताकि पात्र लोगों का आयुष्मान कार्ड बन सके।

जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, अब तक वाराणसी में 176000 आयुष्मान कार्ड बन चुके हैं, जो ऑनलाइन हैं और पूरी तरह वैरिफाइड हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी के अनुसार, केवल उन्हीं लोगों का कार्ड बन सकता हैं जिनका सूची (बीपीएल) में नाम होगा। अगर कोई और है जो आयुष्मान कार्ड बनवाना चाहता है और उसका सूची में नाम नहीं है तो उसका नहीं बन पाएगा।

राज्य के दूसरे जिले का हाल

ये सिर्फ वाराणसी की हालत नहीं है। लगातार मिल रही रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर अस्पतालों द्वारा आयुष्मान कार्डधारी मरीजों का इलाज करने से इंकार किया जा रहा है। उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में मरीज के पास आयुष्मान कार्ड होने के बावजूद अस्पताल द्वारा इलाज करने से इंकार करने की बात सामने आई है। मरीज के पास आयुष्मान कार्ड देखते ही डॉक्टर इलाज छोड़ उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दे रहे हैं। अस्पतालों की बेरहमी का शिकार हुए ऐसे ही एक मरीज कर्मवीर (45) ने बताय़ा कि उसे यह कहकर वापस लौटा दिया गया कि यहां उसका इलाज नहीं हो पाएगा।

लगातार मिल रही है फर्जीवाड़े की खबर

इन सबके आलवा आयुष्मान योजना में लगातार फर्जीवाड़े की खबर आ रही है। अभी कुछ दिन पहले उत्तर प्रदेश के गाजीपुर से आयुष्मान में फर्जीवाड़े की खबर आई थी। गाजीपुर के बाद मंगलवार को आजमगढ़ में भी एक आयुष्मान मित्र व उसके सहयोगी को हिरासत में लिया गया। गाजीपुर में बीते सोमवार को आईबी की टीम द्वारा बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा करने के बाद जिले में भी हड़कंप मच गया था।

क्या है आयुष्मान भारत योजना

मालूम हो कि, 'मोदीकेयर के नाम से मशहूर आयुष्मान भारत योजना बीते साल 25 सितंबर से शुरू हुई है। केंद्र सरकार आयुष्मान योजना के तहत देश के 10 करोड़ परिवारों या 50 करोड़ लोगों को सालाना 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा उपलब्ध करा रही है। अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा द्वारा शुरू किये गए स्वास्थ्य सुरक्षा योजना ओबामाकेयर की तर्ज पर देश की आयुष्मान भारत योजना को मोदीकेयर भी कहा जाता है। 

Narendra modi
Parliamentary area
आयुष्मान भारत
Ayushman Bharat Scheme
UttarPradesh
health system
health sector in India
Government fail Policy
BJP
modi sarkar
expenses in health sector in india
Ayushman Bharat failure

Related Stories

आशा कार्यकर्ताओं को मिला 'ग्लोबल हेल्थ लीडर्स अवार्ड’  लेकिन उचित वेतन कब मिलेगा?

कोरोना महामारी अनुभव: प्राइवेट अस्पताल की मुनाफ़ाखोरी पर अंकुश कब?

कोरोना अपडेट: उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले में 1 मई से 31 मई तक धारा 144 लागू

दवाई की क़ीमतों में 5 से लेकर 5 हज़ार रुपये से ज़्यादा का इज़ाफ़ा

यूपी: बीएचयू अस्पताल में फिर महंगा हुआ इलाज, स्वास्थ्य सुविधाओं से और दूर हुए ग्रामीण मरीज़

यूपी चुनाव: बीमार पड़ा है जालौन ज़िले का स्वास्थ्य विभाग

बिहार की लचर स्वास्थ्य व्यवस्थाः मुंगेर सदर अस्पताल से 50 लाख की दवाईयां सड़ी-गली हालत में मिली

उत्तराखंड चुनाव 2022 : बदहाल अस्पताल, इलाज के लिए भटकते मरीज़!

यूपीः एनिमिया से ग्रसित बच्चों की संख्या में वृद्धि, बाल मृत्यु दर चिंताजनक

कोविड पर नियंत्रण के हालिया कदम कितने वैज्ञानिक हैं?


बाकी खबरें

  • CORONA
    न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
    कोरोना अपडेट: देश में 24 घंटों में 15 हज़ार से ज़्यादा नए मामले, 278 मरीज़ों की मौत
    23 Feb 2022
    देश में 24 घंटों में कोरोना के 15,102 नए मामले सामने आए हैं। देश में कोरोना संक्रमण के मामलों की संख्या बढ़कर 4 करोड़ 28 लाख 67 हज़ार 31 हो गयी है।
  • cattle
    पीयूष शर्मा
    यूपी चुनाव: छुट्टा पशुओं की बड़ी समस्या, किसानों के साथ-साथ अब भाजपा भी हैरान-परेशान
    23 Feb 2022
    20वीं पशुगणना के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि पूरे प्रदेश में 11.84 लाख छुट्टा गोवंश है, जो सड़कों पर खुला घूम रहा है और यह संख्या पिछली 19वीं पशुगणना से 17.3 प्रतिशत बढ़ी है ।
  • Awadh
    लाल बहादुर सिंह
    अवध: इस बार भाजपा के लिए अच्छे नहीं संकेत
    23 Feb 2022
    दरअसल चौथे-पांचवे चरण का कुरुक्षेत्र अवध अपने विशिष्ट इतिहास और सामाजिक-आर्थिक संरचना के कारण दक्षिणपंथी ताकतों के लिए सबसे उर्वर क्षेत्र रहा है। लेकिन इसकी सामाजिक-राजनीतिक संरचना और समीकरणों में…
  • रश्मि सहगल
    लखनऊ : कौन जीतेगा यूपी का दिल?
    23 Feb 2022
    यूपी चुनाव के चौथे चरण का मतदान जारी है। इस चरण पर सभी की निगाहें हैं क्योंकि इन क्षेत्रों में हर पार्टी की गहरी हिस्सेदारी है।
  • Aasha workers
    वर्षा सिंह
    आशा कार्यकर्ताओं की मानसिक सेहत का सीधा असर देश की सेहत पर!
    23 Feb 2022
    “....क्या इस सबका असर हमारी दिमागी हालत पर नहीं पड़ेगा? हमसे हमारे घरवाले भी ख़ुश नहीं रहते। हमारे बच्चे तक पूछते हैं कि तुमको मिलता क्या है जो तुम इतनी मेहनत करती हो? सर्दी हो या गर्मी, हमें एक दिन…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License