NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
शाहनवाज़ आलम की गिरफ़्तारी का विरोध, कांग्रेसियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प
न्यूज़क्लिक से बात करते हुए डीसीपी दिनेश सिंह ने इस बात कि पुष्टि की कि शाहनवाज़ को मजिस्ट्रेट के समने पेश किया गया जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
असद रिज़वी
30 Jun 2020
शाहनवाज़ आलम की गिरफ़्तारी का विरोध

उत्तर प्रदेश सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोधियों पर लगातार शिकंजा कस रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के अध्यक्ष शाहनवाज़ आलम को सीएए के विरुद्ध 2019 में हुए एक हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में सोमवार की रात गिरफ़्तार कर लिया गया। जिसका विरोध कर रहे कांग्रेसियों से पुलिस-प्रशासन की कल शाम से अब तक कई बार झड़प हो चुकी है।

शाहनवाज़ को रात क़रीब 8 बजे मुख्यमंत्री आवास कालिदास मार्ग के निकट एक अपार्टमेंट के बाहर से सादी वर्दी में आये पुलिसकर्मीयों ने गिरफ़्तार किया। उनके साथ दो और लोगों को भी हिरासत में लिया गया। जिसमें एक आशीष अवस्थी हैं, जिनका दावा है कि वह पत्रकार हैं और दूसरे को कांग्रेस पार्टी का ड्राइवर बताया जा रहा है।

कांग्रेस (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के अध्यक्ष की गिरफ़्तारी की ख़बर मिलते ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ और कार्यकर्ता हज़रतगंज थाने में जमा हो गए। कांग्रेसियों ने अपने नेता की गिरफ़्तारी का विरोध किया और योगी सरकार विरोधी नारे लगाये। इस दौरान वहाँ मौजूद पुलिस अधिकारियों से अजय कुमार ‘लल्लू’ की कहासुनी भी हुई। प्रदर्शन बढ़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को थाने से खदेड़ दिया।

4_3.jpg

पुलिस का आरोप है कि 19 दिसंबर 2019 को राजधानी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर सीएए के विरुद्ध हुए प्रदर्शन में हिंसा भड़काने में शाहनवाज़ की भी भूमिका है। डीसीपी पुलिस (मध्य) लखनऊ दिनेश सिंह का कहना है कि शुरू से ही 19 दिसंबर को हुई हिंसा के लिए दर्ज एफ़आईआर 600/19, को लेकर शाहनवाज़ की भूमिका संदेह के दायरे में थी। अब शाहनवाज़ के विरुद्ध पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उनको गिरफ़्तार किया गया है

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए डीसीपी दिनेश सिंह ने इस बात कि पुष्टि की कि शाहनवाज़ को मजिस्ट्रेट के समने पेश किया गया जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि विवादास्पद संशोधित नगरिकता क़ानून के विरुद्ध नागरिक संगठनों ने 19 दिसंबर 2019 प्रदर्शन का ऐलान किया था जिसने कई विपक्षी दल भी शामिल हुए थे। लखनऊ में परिवर्तन चौक पर प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के टकराव में बाद प्रदर्शन में हिंसा हो गई थी। हिंसा के दौरान सरकारी और ग़ैर-संपत्ति दोनो का नुक़सान हुआ था।

2_6.jpg

इसे पढ़ें : लखनऊ दिन भर : ख़ास रपट :  लाठीचार्ज, पथराव, आगज़नी, एक मौत

न्यूज़क्लिक ने भी 19 दिसंबर कि रात हज़रतगंज थाने में रात 11:17 पर लिखी गई एफ़आईआर को हासिल किया। एफ़आईआर में कांग्रेसी नेता सदफ़ जाफ़र समेत कुल 34 लोगों को नामज़द किया गया है। अभियुक्तों के विरुद्ध दंगा भड़काने,हत्या का प्रयास करने और आपराधिक षड्यंत्र आदि की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें इन में से ज़्यादातर को गिरफ़्तार कर के जेल भेज दिया गया था। जो अब ज़मानत पर रिहा भी हो चुके हैं।

हालाँकि कांग्रेस का कहना है कि शाहनवाज़ हिंसा के वक़्त घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। क्यूँकि उनको कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ”लल्लू” के साथ 19 दिसंबर दोपहर 12:00 और 13:00 के बीच ही हिरासत में ले लिया गया था। जबकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव शाम 15:25 पर शुरू हुआ था। उस वक़्त शाहनवाज़ पुलिस लाइन में हिरासत में थे।

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने शाहनवाज़ कि गिरफ़्तारी में जिस एफ़आईआर का ज़िक्र किया है,उस में शाहनवाज़ का नाम नहीं है। इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति के नुक़सान कि वसूली के लिए जो विवादास्पद होर्डिंग लगाई गई है,उन पर भी शाहनवाज़ की तस्वीर नहीं है।

बता दें कि शाहनवाज़ कांग्रेस में शामिल होने से पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के रहने वाले शाहनवाज़,समाजिक संस्था “रिहाई मंच” के संस्थापक सदस्य थे। लेकिन एक दशक तक रिहाई मंच के साथ काम करने के बाद वह सक्रिय राजनीति में आ गये और उन्होंने 2018 मे कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बाद में उनको उत्तर प्रदेश कोंग्रेस (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) का अध्यक्ष बना दिया गया।

1_21.jpg

शाहनवाज़ के साथ हिरासत में लिए गए पत्रकार आशीष अवस्थी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि सादे कपड़ों में आई पुलिस ने उनको भी हिरासत में लिया था। लेकिन उनको और शाहनवाज़ को अलग-अलग गाड़ी में ले जाया गया। शाहनवाज़ से मिलने गए आशीष ने बताया की पुलिस गाड़ी में बैठाकर उनको शहर के विभिन क्षेत्रों मैं ले गई। अंत में उनको चित्वापुर थाने लाया गया, जहाँ  उनको लम्बी पूछताछ के बाद रात 12 बजे के क़रीब रिहा किया गया। हालाँकि उनके हिरासत में लिए जाने कि पुलिस ने कोई पुष्टि नहीं की है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ‘लल्लू’ ने शाहनवाज़ कि गिरफ़्तारी को ग़ैरक़ानूनी बताया है। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ सरकार के दबाव में वह शपथ भूल गई है जो उसने वर्दी पहनने से पहले ली थी। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब का कहना है की शाहनवाज़ 2008-2018 तक उनके साथ मंच में थे। लेकिन कांग्रेस में शामिल होने में बाद उनकी मंच से सदस्यता ख़त्म हो गई थी। लेकिन मंच उनकी गिरफ़्तारी को निंदनीय मानता है और उनकी रिहाई की माँग करता है।  

5_4.jpg

आज, मंगलवार सुबह कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय मॉल एवेन्यू से विधानसभा तक विरोध मार्च निकलना चाहते थे। हाथों में काली पट्टी बांध कर जैसे ही कांग्रेसी पार्टी कार्यालय के गेट पर आये, वह मौजूद पुलिस से उनको रोकने की कोशिश करी, जिसमें झड़प हो गई। बाद में पुलिस ने पार्टी में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। ख़बर लिखे जाने तक किसी के छोड़े जाने की ख़बर नहीं है। अजय सिंह ‘लल्लू’ का आरोप है की सोमवार रात हज़रतगंज थाने मे हुई पुलिस लाठीचार्ज में उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता का हाथ टूट गया है।

Shahnawaz Alam
Anti CAA
CAA Protesters
BJP
Congress
UttarPradesh
UP police
yogi sarkar
Yogi Adityanath

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

मंडल राजनीति का तीसरा अवतार जाति आधारित गणना, कमंडल की राजनीति पर लग सकती है लगाम 

बॉलीवुड को हथियार की तरह इस्तेमाल कर रही है बीजेपी !


बाकी खबरें

  • पड़ताल: कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के दावे भ्रामक
    राज कुमार
    पड़ताल: कोरोना को लेकर प्रधानमंत्री मोदी के दावे भ्रामक
    15 Aug 2021
    प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने अन्य देशों की तुलना में ज्यादा नागरिकों को बचाया है। ये काफी भ्रामक टिप्पणी है। क्योंकि प्रधानमंत्री कुछ स्पष्ट नहीं कर रहे कि वो किसे “बचाया हुआ” मान रहे हैं। क्या उन…
  • विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    विक्रम और बेताल: सरकार जी और खेल में खेला
    15 Aug 2021
    सरकार जी खेलों की दुनिया को पैसे की दुनिया से अलग ही रखते थे। वे जानते थे कि खिलाड़ी अपनी नैसर्गिक प्रतिभा से ही आगे बढ़ता है न कि सरकारी सहायता से। इसीलिए उन्होंने खेल में सरकारी मदद को सिर्फ़ खेल…
  • अजय कुमार
    कभी रोज़गार और कमाई के बिंदु से भी आज़ादी के बारे में सोचिए?
    15 Aug 2021
    75 साल पहले ही गुलामी से आजादी मिल गई। लेकिन जिसे असली आजादी कहते हैं क्या उसका एहसास भारत के ज्यादातर लोगों ने किया है?
  • आज़ादी@75: आंदोलन के 74 बरस और नई उम्मीद और नया रास्ता दिखाता किसान आंदोलन
    लाल बहादुर सिंह
    आज़ादी@75: आंदोलन के 74 बरस और नई उम्मीद और नया रास्ता दिखाता किसान आंदोलन
    15 Aug 2021
    आज़ादी के अमृत महोत्सव वर्ष का सबसे पवित्र अमृत यह किसान आंदोलन ही है जो संघ-भाजपा के विषवमन का सबसे बड़ा एंटीडोट है।
  • 75वीं सालगिरह के मौके पर लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम। तस्वीर में अजय सिंह (दाएं) अपनी जीवन साथी शोभा सिंह (बाएं) के साथ।
    न्यूज़क्लिक डेस्क
    इतवार की कविता: मर्द खेत है, औरत हल चला रही है
    15 Aug 2021
    आज आज़ादी की 74वीं सालगिरह है और हमारे कवि और पत्रकार अजय सिंह की 75वीं। 15 अगस्त, 1946 को बिहार के ज़िला बक्सर के चौगाईं गांव में अजय सिंह का जन्म हुआ। आज इतवार भी है, यानी मौका भी है और दस्तूर भी…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License