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राजनीति
शाहनवाज़ आलम की गिरफ़्तारी का विरोध, कांग्रेसियों और पुलिस के बीच कई बार झड़प
न्यूज़क्लिक से बात करते हुए डीसीपी दिनेश सिंह ने इस बात कि पुष्टि की कि शाहनवाज़ को मजिस्ट्रेट के समने पेश किया गया जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।
असद रिज़वी
30 Jun 2020
शाहनवाज़ आलम की गिरफ़्तारी का विरोध

उत्तर प्रदेश सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून (सीएए) के विरोधियों पर लगातार शिकंजा कस रही है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के अध्यक्ष शाहनवाज़ आलम को सीएए के विरुद्ध 2019 में हुए एक हिंसक प्रदर्शन में शामिल होने के आरोप में सोमवार की रात गिरफ़्तार कर लिया गया। जिसका विरोध कर रहे कांग्रेसियों से पुलिस-प्रशासन की कल शाम से अब तक कई बार झड़प हो चुकी है।

शाहनवाज़ को रात क़रीब 8 बजे मुख्यमंत्री आवास कालिदास मार्ग के निकट एक अपार्टमेंट के बाहर से सादी वर्दी में आये पुलिसकर्मीयों ने गिरफ़्तार किया। उनके साथ दो और लोगों को भी हिरासत में लिया गया। जिसमें एक आशीष अवस्थी हैं, जिनका दावा है कि वह पत्रकार हैं और दूसरे को कांग्रेस पार्टी का ड्राइवर बताया जा रहा है।

कांग्रेस (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) के अध्यक्ष की गिरफ़्तारी की ख़बर मिलते ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार ‘लल्लू’ और कार्यकर्ता हज़रतगंज थाने में जमा हो गए। कांग्रेसियों ने अपने नेता की गिरफ़्तारी का विरोध किया और योगी सरकार विरोधी नारे लगाये। इस दौरान वहाँ मौजूद पुलिस अधिकारियों से अजय कुमार ‘लल्लू’ की कहासुनी भी हुई। प्रदर्शन बढ़ता देख पुलिस ने लाठीचार्ज कर प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को थाने से खदेड़ दिया।

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पुलिस का आरोप है कि 19 दिसंबर 2019 को राजधानी लखनऊ के परिवर्तन चौक पर सीएए के विरुद्ध हुए प्रदर्शन में हिंसा भड़काने में शाहनवाज़ की भी भूमिका है। डीसीपी पुलिस (मध्य) लखनऊ दिनेश सिंह का कहना है कि शुरू से ही 19 दिसंबर को हुई हिंसा के लिए दर्ज एफ़आईआर 600/19, को लेकर शाहनवाज़ की भूमिका संदेह के दायरे में थी। अब शाहनवाज़ के विरुद्ध पर्याप्त सबूत मिलने के बाद उनको गिरफ़्तार किया गया है

न्यूज़क्लिक से बात करते हुए डीसीपी दिनेश सिंह ने इस बात कि पुष्टि की कि शाहनवाज़ को मजिस्ट्रेट के समने पेश किया गया जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि विवादास्पद संशोधित नगरिकता क़ानून के विरुद्ध नागरिक संगठनों ने 19 दिसंबर 2019 प्रदर्शन का ऐलान किया था जिसने कई विपक्षी दल भी शामिल हुए थे। लखनऊ में परिवर्तन चौक पर प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के टकराव में बाद प्रदर्शन में हिंसा हो गई थी। हिंसा के दौरान सरकारी और ग़ैर-संपत्ति दोनो का नुक़सान हुआ था।

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इसे पढ़ें : लखनऊ दिन भर : ख़ास रपट :  लाठीचार्ज, पथराव, आगज़नी, एक मौत

न्यूज़क्लिक ने भी 19 दिसंबर कि रात हज़रतगंज थाने में रात 11:17 पर लिखी गई एफ़आईआर को हासिल किया। एफ़आईआर में कांग्रेसी नेता सदफ़ जाफ़र समेत कुल 34 लोगों को नामज़द किया गया है। अभियुक्तों के विरुद्ध दंगा भड़काने,हत्या का प्रयास करने और आपराधिक षड्यंत्र आदि की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। बता दें इन में से ज़्यादातर को गिरफ़्तार कर के जेल भेज दिया गया था। जो अब ज़मानत पर रिहा भी हो चुके हैं।

हालाँकि कांग्रेस का कहना है कि शाहनवाज़ हिंसा के वक़्त घटना स्थल पर मौजूद नहीं थे। क्यूँकि उनको कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ”लल्लू” के साथ 19 दिसंबर दोपहर 12:00 और 13:00 के बीच ही हिरासत में ले लिया गया था। जबकि पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक टकराव शाम 15:25 पर शुरू हुआ था। उस वक़्त शाहनवाज़ पुलिस लाइन में हिरासत में थे।

उल्लेखनीय है कि पुलिस ने शाहनवाज़ कि गिरफ़्तारी में जिस एफ़आईआर का ज़िक्र किया है,उस में शाहनवाज़ का नाम नहीं है। इसके अलावा सार्वजनिक संपत्ति के नुक़सान कि वसूली के लिए जो विवादास्पद होर्डिंग लगाई गई है,उन पर भी शाहनवाज़ की तस्वीर नहीं है।

बता दें कि शाहनवाज़ कांग्रेस में शामिल होने से पहले एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। उत्तर प्रदेश के बलिया ज़िले के रहने वाले शाहनवाज़,समाजिक संस्था “रिहाई मंच” के संस्थापक सदस्य थे। लेकिन एक दशक तक रिहाई मंच के साथ काम करने के बाद वह सक्रिय राजनीति में आ गये और उन्होंने 2018 मे कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर ली। बाद में उनको उत्तर प्रदेश कोंग्रेस (अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ) का अध्यक्ष बना दिया गया।

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शाहनवाज़ के साथ हिरासत में लिए गए पत्रकार आशीष अवस्थी ने न्यूज़क्लिक को बताया कि सादे कपड़ों में आई पुलिस ने उनको भी हिरासत में लिया था। लेकिन उनको और शाहनवाज़ को अलग-अलग गाड़ी में ले जाया गया। शाहनवाज़ से मिलने गए आशीष ने बताया की पुलिस गाड़ी में बैठाकर उनको शहर के विभिन क्षेत्रों मैं ले गई। अंत में उनको चित्वापुर थाने लाया गया, जहाँ  उनको लम्बी पूछताछ के बाद रात 12 बजे के क़रीब रिहा किया गया। हालाँकि उनके हिरासत में लिए जाने कि पुलिस ने कोई पुष्टि नहीं की है।

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय सिंह ‘लल्लू’ ने शाहनवाज़ कि गिरफ़्तारी को ग़ैरक़ानूनी बताया है। उन्होंने पुलिस पर आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ सरकार के दबाव में वह शपथ भूल गई है जो उसने वर्दी पहनने से पहले ली थी। रिहाई मंच के अध्यक्ष मोहम्मद शोएब का कहना है की शाहनवाज़ 2008-2018 तक उनके साथ मंच में थे। लेकिन कांग्रेस में शामिल होने में बाद उनकी मंच से सदस्यता ख़त्म हो गई थी। लेकिन मंच उनकी गिरफ़्तारी को निंदनीय मानता है और उनकी रिहाई की माँग करता है।  

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आज, मंगलवार सुबह कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदेश कार्यालय मॉल एवेन्यू से विधानसभा तक विरोध मार्च निकलना चाहते थे। हाथों में काली पट्टी बांध कर जैसे ही कांग्रेसी पार्टी कार्यालय के गेट पर आये, वह मौजूद पुलिस से उनको रोकने की कोशिश करी, जिसमें झड़प हो गई। बाद में पुलिस ने पार्टी में पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। ख़बर लिखे जाने तक किसी के छोड़े जाने की ख़बर नहीं है। अजय सिंह ‘लल्लू’ का आरोप है की सोमवार रात हज़रतगंज थाने मे हुई पुलिस लाठीचार्ज में उनकी पार्टी के एक कार्यकर्ता का हाथ टूट गया है।

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