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CAA/NRC को लेकर यूपी में विरोध, 11 लोगों की मौत
जिलों से मिली खबरों के मुताबिक मरने वालों में से कई की मौत गोली लगने से हुई है , मगर पुलिस महानिदेशक ने पुलिस की गोली से किसी की भी मौत होने से इनकार किया है।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
21 Dec 2019
UP protest
Image courtesy: India Today

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में हुए  प्रदर्शनों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गयी है जिनमें आठ साल का बच्चा भी शामिल है।

अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि मेरठ जिले से चार लोगों की मौत की खबर है। कानपुर में दो लोगों की मौत हुई है। वाराणसी में प्रदर्शन के दौरान भगदड़ में आठ साल के एक बच्चे की मौत हो गयी।

उन्होंने बताया कि जुमे की नमाज के बाद राज्य के विभिन्न जिलों में पुलिस के साथ संघर्ष में छह लोगों की मौत हो गयी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया और वाहनों को आग लगा दी।

कानपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया कि एक और व्यक्ति की शनिवार को मौत हो गयी। इस प्रकार शुक्रवार से अब तक मरने वालों की संख्या बढ़कर दो हो गयी है। दोनों मृतकों की पहचान हो गयी है।

अग्रवाल ने बताया कि पूरे शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। विशेषकर संवेदनशील इलाकों में सतर्कता बरती जा रही है। शांति व्यवस्था कायम करने में सहयोग के लिए वरिष्ठ अधिकारी धर्म गुरुओं के संपर्क में हैं।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार देर रात जारी बयान में पूरे प्रदेश में शांति बहाली की अपील करते हुए कहा था कि लोग अफवाहों पर ध्यान नहीं दें और उपद्रवी तत्वों के उकसावे में भी न आएं।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस के नेताओं के बयान और सपा के नेताओं के कृत्य अत्यन्त दुर्भाग्यपूर्ण हैं। राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए सीएए के नाम पर ये दल लगातार भ्रम पैदा कर रहे हैं।

खबर है कि योगी ने लखनऊ से बाहर के अपने सभी कार्यक्रम निरस्त कर दिये हैं। कई जिलों में इंटरनेट सेवाएं बंद हैं। पुलिस और प्रशासन हाई अलर्ट पर है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हिंसक प्रदर्शनों में अब तक बिजनौर में दो, और संभल एवं फिरोजाबाद में एक-एक व्यक्ति की मौत हुई है।

जुमे की नमाज के बाद राज्य की राजधानी लखनऊ और अलीगढ़ में कोई हिंसक वारदात नहीं हुई। फिरोजाबाद, भदोही, बहराइच, फर्रूखाबाद, गोरखपुर और संभल सहित लगभग 20 जिलों से हिंसा की खबरें हैं।

हिंसा से प्रभावित अन्य जिले कानपुर, वाराणसी, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर, अमरोहा, हापुड, हाथरस, बुलंदशहर, हमीरपुर और महोबा हैं।लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, आगरा, अलीगढ़, गाजियाबाद, वाराणसी, मथुरा, मेरठ, मुरादाबाद, मुजफ्फरनगर, बरेली, फिरोजाबाद, पीलीभीत, रामपुर, सहारनपुर, शामली, संभल, अमरोहा, मऊ, आजमगढ और सुल्तानपुर सहित कई बडे़ शहरों में इंटरनेट सेवाएं बंद कर दी गयीं।

अधिकारियों ने बताया कि शुक्रवार को हिंसक भीड़ द्वारा पुलिस पर गोलियां चलाए जाने की भी खबरें हैं। राज्य के विभिन्न हिस्सों में छह पुलिसकर्मियों को गोली लगी है । एक घायल पुलिसकर्मी की हालत नाजुक है।

हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा: उप्र डीजीपी

संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में उत्तर प्रदेश में हुई हिंसा के मद्देनजर राज्य के पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह ने शनिवार को कहा कि हिंसा करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।  डीजीपी ने कहा कि हिंसा में बाहरी लोगों का हाथ है। उन्होंने आशंका जताई कि हिंसा में एनजीओ और राजनीतिक लोग भी शामिल हो सकते हैं।

सिंह ने कहा, 'हम किसी को बख्शेंगे नहीं, क्योंकि उन्होंने हिंसा की है, लेकिन हम किसी निर्दोष को गिरफ्तार नहीं करेंगे।' उन्होंने कहा, पुलिस सतर्क है और गश्त कर रही है। विभिन्न शहरों के गणमान्य लोगों से अपील की गयी है कि वे शांति व्यवस्था बनाये रखने में सहयोग करें। जहां भी मामले दर्ज हुए हैं, वहां का स्थानीय पुलिस प्रशासन गिरफ्तारियां कर रहा है। किसी निर्दोष को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। पूरी छानबीन के बाद ही गिरफ्तारी होगी।

डीजीपी ने बताया कि लखनऊ में 218 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। यह पूछे जाने पर कि क्या हिंसा करने वालों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून और गुंडा एक्ट लगाया जाएगा, सिंह ने कहा कि अगर ऐसा कुछ होगा, तो बता दिया जाएगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंसा में बाहरी लोगों का हाथ है। जब पूछे जाने पर कि क्या इसमें राजनीतिक लोगों का हाथ हो सकता है, उन्होंने कहा कि विवेचना जारी है, टीमें बनायी गयी है जो सभी पहलुओं से जांच कर रही है। उन्होंने इस हिंसा में एनजीओ और राजनीतिक लोगों के शामिल होने की आशंका जताई है।

यह पूछ जाने पर कि क्या हिंसा में बांग्लादेश के लोग शामिल हो सकते हैं, सिंह ने कहा कि जांच जारी है। इंटरनेट बंद करने किए जाने के सवाल पर डीजीपी ने कहा कि जहां स्थानीय प्रशासन ने उचित समझा, उन जगहों पर इंटरनेट सेवा बंद की गई है।
 
इस बीच, लखनऊ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कलानिधि नैथानी ने बताया कि 218 लोगों को जेल भेजा गया है। कई लोगों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने दावा किया कि अराजक तत्व शहर छोड़कर भाग गये हैं। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने भीड़ को भड़काकर एकत्र किया है, उन पर भी कार्रवाई की जाएगी और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

जिद छोड़े केंद्र सरकार: मायावती

बसपा सुप्रीमो मायावती ने केन्द्र सरकार से शनिवार को कहा कि वह संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी पर अपनी जिद छोड़कर अपने फैसले वापस ले।
 
मायावती ने ट्वीट किया, 'अब तो सीएए और एनआरसी के विरोध में केन्द्र सरकार के राजग में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अतः बसपा की मांग है कि वे अपनी जिद छोड़कर इन फैसलों को वापस ले।' उन्होंने प्रदर्शनकारियों से भी अपील है कि वे अपना विरोध शान्तिपूर्ण ढंग से ही प्रकट करें।

अब तो नए सीएए व एनआरसी के विरोध में केन्द्र सरकार के एनडीए में भी विरोध के स्वर उठने लगे हैं। अतः बीएसपी की मांग है कि वे अपनी ज़िद को छोड़कर इन फैसलों को वापस ले। साथ ही, प्रदर्शनकारियों से भी अपील है कि वे अपना विरोध शान्तिपूर्ण ढंग से ही प्रकट करें।

— Mayawati (@Mayawati) December 21, 2019

मायावती ने इससे पहले एक ट्वीट में कहा था कि देश एवं व्यापक जनहित में केन्द्र को चाहिए कि वह नए नागरिकता कानून को वापस लेकर अर्थव्यवस्था की बदहाली, बढ़ती महंगाई एवं बेरोजगारी, रुपये की गिरती कीमत आदि की राष्ट्रीय समस्याओं को दूर करने पर ध्यान केन्द्रित करे।<
उल्लेखनीय है कि बसपा का एक प्रतिनिधिमंडल बुधवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविन्द से मिला था और उसने इस मुद्दे को उठाया था। पार्टी के महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा के नेतृत्व वाले प्रतिनिधिमंडल ने जामिया मिल्लिया इस्लामिया में रविवार को हुई हिंसा की न्यायिक जांच की मांग की थी । साथ ही नागरिकता कानून को वापस लेने की भी मांग की थी।

(समाचार एजेंसी भाषा के इनपुट के साथ)

 

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