NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
पर्यावरण
भारत
लक्षद्वीप में विरोध प्रदर्शन हुआ तेज़, द्वीपसमूह में पहली बार लगा देशद्रोह का आरोप
सुल्ताना के खिलाफ लगाये गये आरोपों को क्षेत्र में पिछले हफ्ते से गहन होते जा रहे विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि में देखा जा सकता है, जिसमें 7 जून को सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक पानी के भीतर विरोध प्रदर्शन करने और 12 घंटे की भूख हड़ताल शामिल थी।
सुमेधा पाल
12 Jun 2021
लक्षद्वीप
पानी के भीतर विरोध प्रदर्शन। चित्र स्रोत: बिज़नेस इनसाइडर 

अरब सागर में भारत के दक्षिणी कोने पर 36 द्वीपों के समूह लक्षद्वीप के नागरिक यहाँ के प्रशासक और भाजपा नेता प्रफुल खोड़ा पटेल द्वारा प्रस्तावित सुधारों के खिलाफ अपने आंदोलन को जारी रखे हुये हैं।

जबकि इस बीच विरोध प्रदर्शनों में तेजी आई है, पुलिस अधिकारियों की ओर से फिल्म निर्माता और अभिनेत्री आयशा सुल्ताना के खिलाफ राजद्रोह के आरोप के जरिये प्रशासन की ओर से कार्यवाई में भी उसी मात्रा में सख्ती बरती जा रही है। अभिनेत्री पर पटेल को केंद्र द्वारा छोड़े गए “जैव-हथियार” के तौर पर संदर्भित करने का आरोप है, जिन्होंने द्वीप में स्थापित कोविड-19 प्रोटोकॉल्स को खत्म कर दिया था, जिसके चलते यहाँ पर कोविड-19 की स्थिति बिगड़ गई।

सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से जुड़े एक स्थानीय राजनीतिज्ञ की शिकायत के बाद आयशा सुल्ताना के खिलाफ कावारत्ती पुलिस थाने में मामला दर्ज किया गया था। भाजपा ने अपनी शिकायत में आधार के तौर पर एक मलयालम टीवी चैनल के शो का हवाला दिया था।

सुल्ताना के खिलाफ आरोप ने सुधारों का विरोध कर रहे लोगों की आलोचना को प्रकाश में ला दिया है, जिन्होंने इस कदम को असंवैधानिक बताया है और प्रतिरोध आंदोलन को दबाने का प्रयास बताया है, जो अब वैश्विक ध्यान आकृष्ट करता जा रहा है।

सुल्ताना के खिलाफ आरोप, क्षेत्र में पिछले एक हफ्ते से चल रहे गहन विरोध प्रदर्शनों की पृष्ठभूमि से आते हैं, जिसमें 7 जून को सुबह 6 बजे से लेकर शाम 6 बजे तक पानी के नीचे रहकर विरोध प्रदर्शन और 12 घंटे की भूख हड़ताल शमिल थी। जहाँ एक ओर निवासियों ने भूख हड़ताल में हिस्सा लिया, वहीं दूसरी तरफ सभी दुकानें एवं प्रतिष्ठान पूरी तरह से बंद रहे।

न्यूज़क्लिक के साथ अपनी बातचीत में, लक्षद्वीप बचाओ अभियान से जुड़ी एक कार्यकर्ता, यासीन निसद ने बताया “उनके खिलाफ लगाये गए आरोप, क्षेत्र में चल रहे नैरेटिव से पूरी तरह से भिन्न हैं। यह एक ऐसे वक्त में लगाया गया है जब प्रशासक और भाजपा सभी क्षेत्रों में छानबीन का सामना करना पड़ रहा है। विरोध प्रदर्शनों का सिलसिला जारी है और सरकार अब हमें बागियों के तौर पर प्रदर्शित करने वाले नैरेटिव गढ़ने में प्रयासरत है।”

उन्होंने आगे कहा “हालाँकि, सच्चाई यह है कि हमारे द्वीपों को बचाने की लड़ाई में वे अकेली नहीं हैं। हम सभी इन नुकसानों के लिए प्रशासनिक सुधारों को दोषी ठहरा रहे हैं। हमें मिल रहे समर्थन में उत्तरोत्तर बढ़ोत्तरी की वजह से हमें लगता है कि हमारे खिलाफ मामलों में इजाफा हो रहा है। जो लोग इन मुद्दों पर अपने बयान दे रहे हैं उन्हें धमकाया जा रहा है और उनकी प्रोफाइल पर नजर रखी जा रही है। लेकिन इस सबके बावजूद, लोग सत्ता के बेजा इस्तेमाल और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ लगातार खड़े हो रहे हैं।

द्वीप समूह के निवासियों का मानना है कि द्वीप में क्वारंटाइन संबंधी मानक प्रक्रिया में ढील दिए जाने की वजह से केंद्र शासित प्रदेश में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को गति प्रदान की है। इससे पहले तक, स्वास्थ्य विभाग केरल के कोच्चि, कर्नाटक के मंगलुरु से लक्षद्वीप लौटने वाले प्रत्येक व्यक्ति का परीक्षण हो रहा था, जो नौकाओं द्वारा द्वीपों से जुड़े हुए हैं। यहाँ तक कि जो लोग जांच में नेगेटिव पाए जाते थे, उन्हें भी अनिवार्य रूप से 14 दिनों के लिए होम क्वारंटाइन में रहना पड़ता था - एक ऐसा नियम, जिसे पटेल ने पहले नजरअंदाज किया, और फिर हटा दिया।

इसके अलावा, बाद में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मई में एक सर्कुलर जारी किया गया था जिसमें कहा गया था कि दूरस्थ द्वीपों से राजधानी कावारात्ती द्वीप, अगत्ती द्वीप और कोच्चि के लिए एम्बुलेंस  सेवाओं वाले मरीजों को चार सदस्यीय समिति के द्वारा जांच के लिए अपने दस्तावेजों को जमा करना होगा। कमेटी तब सिफारिश करेगी कि कौन से मामले में निकासी जरुरी है और किसमें नहीं। लेकिन आदेश में समय सीमा निर्धारित नहीं की गई है जिसके भीतर प्रत्येक अनुरोध की समीक्षा पूरी कर ली जाएगी। कोविड-19 प्रक्रिया के तहत द्वीपों से निकासी के संबंध में स्पष्टता की मांग करते हुए निवासियों ने अदलात का भी रुख किया था।

इस बारे में द्वीप के कार्यकर्ता एवं फिल्म निर्माता फ्रोज नेदियाथ का कहना था “कुछ लोग हैं जो विभिन्न तरीकों से लक्षद्वीप की समस्याओं को विकृत करने की कोशिश में लगे हैं। हमें यहाँ जीवन गुजारना है बजाय कि उनके झूठों का मुकाबला करना है जिनका द्वीप की समस्याओं से कोई लेना-देना नहीं है। यह हमारा देश है।”

उन्होंने आगे कहा “लक्षद्वीप के इतिहास में पहली बार, भारत का यह क्षेत्र (लक्षद्वीप) 12 घंटे की भूख हड़ताल पर है। सारी दुनिया इस तथ्य को देख रही है कि 70,000 लोगों को अपने अस्तित्व के लिए, अपनी जमीन के लिए अपनी ही सरकार के खिलाफ विरोध करने के लिए मजबूर होना पड़ा है। और यह देश की कमजोरी के संकेत हैं। देखिये, ये सब धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक भारत में हो रहा है। हमारे पूर्वजों ने ब्रिटिश तानशाहों से इतना अधिक कष्ट उठाकर जो आजादी हासिल की थी, वह आज कहाँ है? यह भी एक सवाल के रूप में सामने आया है।

इस बीच, आम जनता और मीडिया के ध्यानाकर्षण की वजह से हमलों के बाद, लक्षद्वीप प्रशासन में बंदरगाहों, जहाजरानी एवं नौ-परिवहन के निदेशक ने मछली पकड़ने वाली नौकाओं पर सरकारी कर्मचारियों की तैनाती के अपने पिछले आदेश को वापस ले लिया है। रिपोर्टों के मुताबिक, एक अन्य आदेश में जिसमें अधिकारियों को बंदरगाहों, जहाजों और अन्य पोतों के इर्दगिर्द ‘लेवल2’ सुरक्षा को बढ़ाने का निर्देश दिया गया था, उसे भी रद्द कर दिया गया है। 

इन सुधारों को भीषण महामारी के बीच में पेश किया गया है, जिसने ख़राब कोविड-19 प्रबंधन के कारण द्वीपवासियों की चिंताएं काफी बढ़ा दी हैं। प्रमुख सुधारों में से कुछ इस प्रकार हैं: लक्षद्वीप पशु संरक्षण विनियमन, लक्षद्वीप असमाजिक गतिविधि रोकथाम विनियमन, लक्षद्वीप विकास प्राधिकरण विनियमन और लक्षद्वीप पंचायत कर्मचारी नियमों में संशोधन। 

इन सबमें सबसे महत्वपूर्ण है द्वीप में भू-स्वामित्व एवं नियमन में व्यापक बदलाव, जिसमें प्रशासक के पास भूमि को विकसित करने की अनुमति देने और भूमि के इस्तेमाल पर नियन्त्रण की अन्य शक्तियों के लिए पूर्ण शक्तियाँ निहित हैं। इसके अलावा “ये नियम योजना के लिए भूमि के अधिग्रहण और विकास के संबंध में प्रशासक को अतिरिक्त शक्तियाँ भी प्रदान करते हैं।”

भारत के आठ केंद्र शासित क्षेत्रों (यूटी) में यह सबसे छोटा है, जिसकी कुल 65,000 लोगों की आबादी है - जिसमें से 97% मुस्लिम हैं, जिन्हें अब अपनी जमीन, आजीविका और अन्य अधिकारों को खो देने का डर सता रहा है क्योंकि सरकार इस सुदूर द्वीपसमूह को एक पर्यटक केंद्र के तौर पर विकसित करने की योजना बना रही है। 

मसौदा नीतियों में “विकास” को “भवन, इंजीनियरिंग, खनन, उत्खनन या भूमि पर, उसके ऊपर या भीतर अन्य कार्यों के संचालन” के तौर पर परिभाषित किया गया है। यह केंद्र शासित प्रदेश के प्रशासन को विकास योजना के कामों में बाधा डालने पर किसी को भी कैद करने का अधिकार प्रदान करता है।

अंग्रेज़ी में प्रकाशित मूल आलेख को पढ़ने के लिए नीचे दिये गये लिंक पर क्लिक करें।

Protests in Lakshadweep Intensify, First Ever Sedition Case Charged in Archipelago

Save Lakshadweep
BJP
Praful Khoda Patel
Lakshadweep Reforms
Aisha Sultana
Lakshadweep protest
Lakshadweep Sedition

Related Stories

कॉर्पोरेट के फ़ायदे के लिए पर्यावरण को बर्बाद कर रही है सरकार

अनियंत्रित ‘विकास’ से कराहते हिमालयी क्षेत्र, सात बिजली परियोजनों को मंज़ूरी! 

ग्लेशियर टूटने से तो आपदा आई, बांध के चलते मारे गए लोगों की मौत का ज़िम्मेदार कौन!

दिल्ली के प्रदूषण से कोविड-19 का ख़तरा कई गुना बढ़ सकता है

आपदा के बाद मिले 3800 रुपये,  खेत में बचा दो बोरी धान


बाकी खबरें

  •  Punjab security lapse
    न्यूज़क्लिक टीम
    पंजाब में पीएम की "सुरक्षा चूक" पर पूरी पड़ताल!
    06 Jan 2022
    बोल के लब आज़ाद हैं तेरे में आज अभिसार शर्मा चर्चा कर रहे प्रधानमंत्री के पंजाब दौरे की। साथ ही वे नज़र डाल रहे हैं कि किस तरह मीडिया द्वारा किसानों को टारगेट किया जा रहा है
  • fact check
    राज कुमार
    फ़ैक्ट चेक : संबित ने जर्जर स्कूलों को सपा सरकार का बताया, स्कूल योगी सरकार के निकले
    06 Jan 2022
    एक बार फिर बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने ट्विटर पर फ़ेक न्यूज़ के ज़रिये विपक्ष पर निशाना साधने की कोशिश की है।
  • jnu
    रवि कौशल
    जेएनयू हिंसा के दो साल : नाराज़ पीड़ितों को अब भी है न्याय का इंतज़ार 
    06 Jan 2022
    ऐसा लगता है कि दिल्ली पुलिस की जांच भटक चुकी है। अब तक दोषियों की पहचान तक नहीं की जा सकी है।
  • punjab security
    शंभूनाथ शुक्ल
    'सुरक्षा चूक' की आड़ में राजनीतिक स्टंट?
    06 Jan 2022
    प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट में पंजाब के अधिकारियों को दिए बयान से बचना चाहिए था। और जो कुछ करना था, वह सीधे गृह मंत्रालय के आला अधिकारी करते तो भविष्य में ऐसी किसी भी चूक से प्रशासन सतर्क रहते। तथा…
  • election
    सौरभ शर्मा
    यूपी: युवाओं को रोजगार मुहैय्या कराने के राज्य सरकार के दावे जमीनी हकीकत से मेल नहीं खाते हैं!
    06 Jan 2022
    लगभग 43 उम्मीदवारो को उत्तर प्रदेश में पिछले साल विभिन्न चिकित्सा विभागों द्वारा विभिन्न कोरोना लहरों के दौरान में रोजगार पर रखा गया था। बाद में इन्हें काम से मुक्त कर दिया गया। उन्होंने इस कदम के…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License