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पूरे लीबिया में विरोध प्रदर्शन तेज़
दो युद्धरत सरकारों के चलते कठिनाइयों और मुश्किलों में घिरे नागरिक विरोध प्रदर्शन करने सड़कों पर उतर आए।
पीपल्स डिस्पैच
14 Sep 2020
पूरे लीबिया में विरोध प्रदर्शन तेज़

पूर्वी और दक्षिणी लीबिया में सरकार के ख़िलाफ़ जारी लोगों द्वारा विरोध प्रदर्शनों रविवार 13 सितंबर को उस समय तेज़ हो गया जब नाराज़ प्रदर्शनकारियों ने पूर्वी शहर बेंगाजी में एक सरकारी भवन में आग लगा दी। ये प्रदर्शनकारी मांग कर रहे थे कि सरकार इस क्षेत्र में नक़दी की कमी, लगातार बिजली कटौती और ईंधन की बढ़ती क़ीमतों को लेकर लंबे समय से और निरंतर ऐसे मुद्दों का निपटान करे जिसने आम लीबियाई लोगों के जीवन को काफी मुश्किल बना दिया है।

सरकार के ख़िलाफ़ इस तरह के प्रदर्शन देश के दक्षिणी भाग के अन्य शहरों जैसे सबहा और पूर्वी लीबिया में अल-बयदा और अल-मर्ज में हुए।

स्थानीय मीडिया के अनुसार सैंकड़ों प्रदर्शनकारियों ने विभिन्न विरोध प्रदर्शनों में भाग लिया। इन विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों के एक समूह ने हाल ही में निर्माण किए गए कैबिनेट भवन में आग लगा दी और भाग गए। इसके बाद स्थानीय पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई करते हुए उन पर गोलियां चलाई। इसमें पांच प्रदर्शनकारी जख़्मी हो गए और उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया। सुरक्षा बलों ने एक्टिविस्ट मुनीर ज़गेबा के घर पर भी छापा मारा जिन्होंने सोशल मीडिया पर इस विरोध प्रदर्शन के लिए अपना समर्थन ज़ाहिर किया था।

नेशनल अकॉर्ड गवर्नमेंट के ख़िलाफ़ इसी तरह के विरोध प्रदर्शन की ख़बर लीबिया की राजधानी त्रिपोली से सामने आए थे, जिसमें सैकड़ों लोगों ने इस सरकार के नियंत्रण में इस क्षेत्र में रहन सहन की बिगड़ती परिस्थितियों को लेकर सरकार की निंदा की। उन्होंने यह भी मांग की कि सरकार लंबित राजनीतिक सुधारों को लागू करे जिसमें राष्ट्रीय चुनाव कराने और सरकारी भ्रष्टाचार को खत्म करना शामिल था।

पूर्वी लीबिया की सरकार के ख़िलाफ़ पिछले हफ्ते गुरुवार को ये विरोध प्रदर्शन पहली बार शुरू हुए थे जो कि जनरल खलीफा हफ़्तार के नेतृत्व वाली लीबिया की राष्ट्रीय सेना से समर्थन प्राप्त है। इससे पहले हाल के महीनों में इसी तरह के मुद्दों पर विरोध प्रदर्शन देश के पश्चिमी हिस्से में नेशनल अकॉर्ड गवर्नमेंट (जीएनए) के ख़िलाफ़ भी हुए थे।

लीबिया में साल 2011 से गृह युद्ध की स्थिति रही है। इस साल नाटो के आक्रमण ने लीबिया के शासन को उखाड़ फेंका और लीबिया के नेता मुअम्मर गद्दाफी की हत्या कर दी गई। साल 2014 में दो प्रतिद्वंद्वी गुटों के बीच मतभेद के बाद इस संघर्ष ने और भी अधिक हिंसक मोड़ ले लिया जिससे देश के विभिन्न हिस्सों को नियंत्रित करने वाली कई सरकारें बन गईं।

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