NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
आंदोलन
उत्पीड़न
अंतरराष्ट्रीय
अफ्रीका
सूडान में तख्तापलट के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन जारी, 3 महीने में 76 प्रदर्शनकारियों की मौत
24 जनवरी को तख्तापलट के खिलाफ हुए देश-व्यापी विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों द्वारा तीन और प्रदर्शनकारियों की गोली मार कर हत्या कर दी गई है और दर्जनों लोग घायल हुए हैं।
पवन कुलकर्णी
27 Jan 2022
Sudan
प्रदर्शनकारी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए तख्तापलट बलों के द्वारा रेड डाई वाटर कैनन और आँसू गैस का इस्तेमाल किया गया (फोटो: सूडानी रेजिस्टेंस कमेटी)

25 अक्टूबर को सूडान में हुए सैन्य तख्तापलट के तीन महीने बाद भी, सैन्य तानाशाही हर कुछ दिनों के बाद हो रहे व्यापक देश-व्यापी विरोध प्रदर्शनों के आगे सत्ता पर अपनी मजबूत पकड़ बना पाने में विफल रहा है। विरोध प्रदर्शनों से बलपूर्वक सख्ती से निपटने के लिए सेना, पुलिस और कुख्यात मिलिशिया को तैनात करते हुए सैन्य तानाशाही द्वारा तख्तापलट के बाद से अब तक कम से कम 76 प्रदर्शनकारियों को मार डाला गया है।

सैन्य तानाशाही को उखाड़ फेंकने और तख्तापलट में शामिल जनरलों के खिलाफ मुकदमा चलाने के आह्वान पर कम से कम 23 शहरों में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन और रैलियां हुईं, इनमें तीन लोग सोमवार, 24 जनवरी को हुई कार्यवाई में मारे गये।

राजधानी खार्तूम में 22 वर्षीय थाबित मौव्या बशीर, जिसके सिर पर गोली मारी गई थी और 23 वर्षीय मोहम्मद अमीर एलैश, जिसके सीने में गोली मारी गई थी, की राजधानी खार्तूम में मौत हो गई। बाद में रात में एलैश के अंतिम संस्कार के जुलूस पर भी गोलीबारी की गई। सेंट्रल कमेटी ऑफ़ सूडानीज डॉक्टर्स (सीसीएसडी) की ओर से जारी एक बयान के मुताबिक, उस दोपहर को शहर भर के विभिन्न जनसमूह बिंदुओं से जुटकर जब प्रदर्शनकारियों की रैलियों ने तख्तापलट नेता और सेना प्रमुख अब्देल फ़तेह अल-बुरहान के तख्त, राष्ट्रपति भवन की ओर रुख किया तो सुरक्षा बलों ने उसे चारों तरह से “घेर लिया” और “विभिन्न दिशाओं से” हमला कर दिया था।

पड़ोस के ओमदुर्मन में, अल-अरबियन स्ट्रीट में रैली पर भारी गोलीबारी की गई। अल गेज़िरा राज्य की शहरी राजधानी, वाद मदनी शहर में सुरक्षा बलों ने गसिम मोहम्मद, जोकि स्वंय भी अपने बीसवें वर्ष में था, को भी मार डाला। उसके सिर और कंधे पर गोली मारी गई थी। मंगलवार, 25 जनवरी के दिन उसके अंतिम संस्कार में शहर के हजारों निवासियों ने हिस्सा लिया।

सोमवार को कई अन्य शहरों में भी बड़े विरोध प्रदर्शन देखने को मिले, जिनमें दार्फुर और कोर्दोफान के क्षेत्रों में, और एल गेदरेफ़, सूडान पोर्ट और कस्साला राज्यों में विरोध प्रदर्शन हुए।

लाइव बुलेट्स और आंसू गैस के गोलों और स्टेन ग्रेनेड्स से भी सीधे प्रदर्शनकारियों के शरीर पर दागे जाने से कई दर्जन लोग घायल हो गए हैं। तख्तापलट के बाद से सुरक्षा बलों द्वारा अब तक 2000 से अधिक लोगों को घायल किया जा चुका है। उनमें से 250 से अधिक लोग पिछले सप्ताह से अभी भी अपना इलाज करा रहे हैं। कम से कम 24 प्रदर्शनकारियों को अपने अंग या अन्य अंगों को गंवाना पड़ा है।

सोमवार को हुई कार्यवाई के दौरान गोलीबारी की चपेट में आने के दौरान भाग रहे कई प्रदर्शनकारियों का उनके रिहायशी इलाकों तक पीछा किया गया, जहाँ पर घरों में आंसू गैस के गोले दागे जाने की खबरें हैं। खारर्तूम में एक हथगोले से आग लगने से एक घर जल कर खाक हो गया।

प्रदर्शनकारियों का इलाज करने पर अस्पतालों पर हमले और चिकित्सा कर्मियों को हिरासत में लिए जाने की भी खबरें आ रही हैं।

सोमवार 24 जनवरी को विरोध प्रदर्शनों से एक दिन पहले शाम को सड़कों पर कार्यवाई की अगुआई करने वाली रेजिस्टेंस कमेटी के चार सदस्यों को खारर्तूम में सेना के द्वारा हिरासत में ले लिया गया था।

रेडियो दबंग  ने अपनी खबर में बताया है कि प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक गिरफ्तार अल हसन याह्या, एज्ज़ेलदीन अल मुबारक, मोहम्मद दफल्लाह और मुजाहिद बबिकिर को “अज्ञात स्थान पर ले जाने से पहले बुरी तरह से मारा पीटा गया था और गाली-गलौज की गई थी।”

22 जनवरी की रात को महिला अधिकार कार्यकर्ता अमिरा ओस्मान को भी सुरक्षा बलों ने उनके घर से गिरफ्तार कर लिया था। सुरक्षा बलों ने खार्तूम में साउथर्न बेल्ट रेजिस्टेंस कमेटी के मुख्यालय पर भी छापा मारा था।

उस दिन के विरोध प्रदर्शनों पर हिंसक कार्यवाई के बाद, खार्तूम के अल कलाक्ला अल गुब्बा पड़ोस में क्षेत्रीय कमेटियों ने एक बयान में कहा, “आज “24 जनवरी के मार्च” में शांतिपूर्ण क्रांतिकारियों पर जिस प्रकार से बर्बर हमलों और अपमान को हमने होते देखा है, वह ज्यादा दिन नहीं चल पायेगा, क्योंकि भोर का उजाला अनिवार्य रूप से आने वाला है।”

बयान में घोषणा की गई है, “हमारे प्रदर्शन जारी रहेंगे और हम सड़कों को तब तक बंद रखेंगे, जब तक अल बुरहान और तख्तापलट करने वाले शासन को अपदस्थ नहीं कर दिया जाता है, हत्यारों को न्याय के कटघरे में खड़ा नहीं कर दिया जाता है, और सभी नियमित सैन्य बलों का पुनर्गठन नहीं कर दिया जाता है। ऐसा इसलिए क्योंकि उन्होंने इस बात को साबित कर दिया है कि वे लोगों की रक्षा कर पाने में असमर्थ हैं, उल्टा वे सिर्फ उन्हें मार डालने में सक्षम हैं।”

खार्तूम के बुर्री में क्षेत्रीय कमेटी ने प्रदर्शनकारियों से आस-पड़ोस की बस्ती में पूर्ण लॉकडाउन की घोषणा करते हुए बस्ती में बाड़बंदी करने का आह्वान किया है। नील नदी वाले राज्य के अतबारा शहर में, जहाँ पर 2018 में दिसंबर रिवोल्यूशन का पहला विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ था, की आरसी ने पूरे शहर में लॉकडाउन लगाये जाने की घोषणा की है। कई अन्य क्षेत्रीय कमेटियों ने भी प्रतिरोध को तेज किये जाने का आह्वान किया है।

स्थानीय क्षेत्रीय कमेटियों के द्वारा जारी किये गए इस आह्वान पर देश भर में कई मुख्य सड़कों को अवरुद्ध करने के लिए अस्थाई बैरिकेड की तस्वीरों को सोशल मीडिया पर व्यापक तौर पर साझा किया गया।

अगले देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के लिए तैयारियां जोरों पर चल रही हैं- जिसे “लाखों लोगों का मार्च” के रूप में बताया जा रहा है, जिसका आयोजन 30 जनवरी को किया जा रहा है। इस बीच स्थानीय स्तर पर प्रदर्शनों और अड़ोस-पड़ोस की बैरिकेडिंग के काम के साथ सिविल नाफ़रमानी के कई अन्य स्वरूपों को पूरे सप्ताह भर जारी रखा जायेगा।

ईस्ट खार्तूम आरसी कोआर्डिनेशन ने कहा है, “वे भ्रमित हैं, जो सोचते हैं कि क्रांति को परास्त किया जा सकता है। सूडान में सैन्य एवं गैर-सैन्य तख्तापलट के दिन अब पूरे हो चुके हैं।”

साभार: Peoples Dispatch 

अंग्रेज़ी में प्रकाशित इस मूल आलेख को पढ़ने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें: 76 pro-democracy protesters killed in three months since the coup in Sudan

Sudan
Army rule
militants
Protests
africa

Related Stories

हापुड़ अग्निकांड: कम से कम 13 लोगों की मौत, किसान-मजदूर संघ ने किया प्रदर्शन

झारखंड: नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज विरोधी जन सत्याग्रह जारी, संकल्प दिवस में शामिल हुए राकेश टिकैत

अफ़ग़ानिस्तान में सिविल सोसाइटी और अधिकार समूहों ने प्रोफ़ेसर फ़ैज़ुल्ला जलाल की रिहाई की मांग की

जानिए: अस्पताल छोड़कर सड़कों पर क्यों उतर आए भारतीय डॉक्टर्स?

सूडान : 10 लाख से ज़्यादा नागरिक तख़्तापलट के विरोध में सड़कों पर आए

कश्मीर में प्रवासी मज़दूरों की हत्या के ख़िलाफ़ 20 अक्टूबर को बिहार में विरोध प्रदर्शन

तमिलनाडु: दलदली या रिहायशी ज़मीन? बेथेल नगर के 4,000 परिवार बेदखली के साये में

स्वाज़ीलैंड में अभूतपूर्व लोकतंत्र समर्थक प्रदर्शनों से अफ़्रीका के अंतिम सम्राट परेशान

सूडान में लगातार हो रही नस्लीय हत्या के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन

हिमाचल प्रदेश: बस किराये में बढ़ोतरी पर विपक्ष सहित मज़दूर संगठनों का विरोध


बाकी खबरें

  • tirchi nazar
    डॉ. द्रोण कुमार शर्मा
    तिरछी नज़र: 'सरकार जी' ने भक्तों के साथ की वर्चुअल मीटिंग
    31 Oct 2021
    दीपावली के शुभ अवसर पर आयोजित उस मीटिंग में सरकार जी ने सबसे पहले भक्तों को भक्त होने का महत्व बताया। भक्तों को बताया कि वह चमचों से किस तरह अलग हैं।
  • raid
    राजेंद्र शर्मा
    लक्ष्मी जी और ईडी का छापा
    31 Oct 2021
    जब ईडी ने लक्ष्मी जी पर मनी लॉन्डरिंग के आरोप में कर डाली छापेमारी!
  • Communalism
    शंभूनाथ शुक्ल
    अति राष्ट्रवाद के भेष में सांप्रदायिकता का बहरूपिया
    31 Oct 2021
    राष्ट्रवाद का अर्थ है अपने देशवासियों से प्रेम न कि किसी राजनीतिक विचारधारा के प्रति समर्पण। अपने देश के संविधान को मानना और उस पर अमल करना ही राष्ट्र के प्रति समर्पण का भाव है।
  • hafte ki baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    यूपी में भाजपा के आगे विपक्षी इतने सुस्त क्यों और तीन अन्य खबरें
    30 Oct 2021
    यूपी में भाजपा के आगे मुख्य विपक्षी इतने सुस्त क्यों नजर आ रहे हैं? एनसीबी या इस जैसी अन्य एजेंसियां संविधान और राज्य के प्रति जवाबदेह हैं या सरकार चलाने वाले सर्वसत्तावादी सियासतदानों के प्रति? 32…
  • COP26
    रश्मि सहगल
    कॉप26 : भारत कर रहा है पर्यावरणीय संकटों का सामना  
    30 Oct 2021
    विकसित दुनिया कार्बन का मुख्य उत्सर्जक है, इसलिए इसे वैश्विक जलवायु परिवर्तन विरोधी प्रयासों के लिए अवश्य ही धन देना चाहिए। फिर भी, भारत घरेलू पर्यावरण संबंधी चिंताओं को नजरअंदाज नहीं कर सकता है।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License