NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
पंजाब: कांग्रेस के दांव से बीजेपी भौंचक्की
राहुल गांधी ने अपने एक ही फ़ैसले से भाजपा की बाज़ी पलट दी है। पंजाब में दलित मुख्यमंत्री देकर राहुल गांधी ने मोदी और योगी को बुरी तरह घेर लिया है।
शंभूनाथ शुक्ल
20 Sep 2021
cartoon

पंजाब में कांग्रेस की कलह में भाजपा चुप रहती तो उसके लिए बेहतर रहता, लेकिन वह कैप्टन अमरिंदर के साथ ऐसे सहानुभूति दिखाने लगी जैसे कैप्टन उसकी ही पार्टी के हों। नतीजा यह हुआ कि राहुल गांधी के दाँव से अमरिंदर तो अपनी लाज बचा ले गए लेकिन भाजपा के लिए अब उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल निकालना मुश्किल हो गया है।

राहुल गांधी ने अपने एक ही फ़ैसले से भाजपा की बाज़ी पलट दी है। पंजाब में दलित मुख्यमंत्री देकर राहुल गांधी ने मोदी और योगी को बुरी तरह घेर लिया है। ये तीनों राज्य पंजाब के क़रीब हैं और इनमें विधानसभा चुनाव तभी होने हैं, जब पंजाब के होंगे। इनमें भी दलितों की आबादी ख़ासी है। अब या तो भाजपा भी कांग्रेस की राह पर चल कर किसी एक में दलित मुख्यमंत्री के रास्ता बनाए अथवा अपनी पराजय की आशंका में घिरी रहे।

यह सच है कि उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कुछ भी दाँव पर नहीं है लेकिन वहाँ बीजेपी का पूरा भविष्य है। उत्तर प्रदेश विधानसभा में जीत का मतलब होता है 2024 की जीत के आसार लेकिन यदि यूपी हारे तो केंद्र भी गया। उत्तर प्रदेश में दलित आबादी भी खूब है, लगभग 22 प्रतिशत। इसलिए यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या भाजपा का केंद्रीय नेतृत्त्व यूपी में मुख्यमंत्री बदलेगा? इसी के साथ एक और सवाल खड़ा होता है कि क्या केंद्र की मोदी सरकार के पास उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बदलने का साहस है? ज़ाहिर है, एकदम नहीं। तब फिर किसकी हाई कमान कमजोर हुई? सच बात तो यह है कि भाजपा एक फूला हुआ ग़ुब्बारा है और अगर सुई की नोक बराबर छेद हुआ तो सारी हवा फुस्स! बीजेपी की सारी ताक़त इसमें ज़ाया जाती है कि कैसे वह कांग्रेस तथा अन्य विरोधी दलों की अंदरूनी कलह को बढ़वाए। किसी के फटे में पैर अड़ाने का जो हश्र होता है, वही आज बीजेपी के साथ घट रहा है। 

कांग्रेस ने पंजाब में चरणजीत सिंह चन्नी को मुख्यमंत्री बना कर दूर की राजनीति भी खेली है। इस नाम की घोषणा होते ही बीजेपी के हाथ के तोते उड़ गए। फ़ौरन ‘मी-टू’ का दाँव चला गया कि कैप्टन की सरकार में मंत्री रहते हुए चन्नी पर एक महिला आईएएस अफ़सर के साथ दुर्व्यवहार का मामला उठा था और कैप्टन ने उसका नोटिस भी लिया था। दरअसल 2018 में एक महिला आईएएस अधिकारी ने शिकायत की थी कि मंत्री चरण जीत सिंह चन्नी ने उन्हें अश्लील मैसेज भेजे हैं। किंतु ख़ुद बीजेपी के दामन पर इतने दाग हैं कि इसके परवान चढ़ने के पहले ही जवाब आ गया कि विधायक कुलदीप सेंगर और स्वामी चिन्मयानंद पर तो बलात्कार के आरोप हैं, इन्हें कौन संरक्षण दिए हुए है। इसलिए यह मामला सिरे चढ़ा नहीं और 20 सितंबर को चन्नी ने मुख्यमंत्री की शपथ ले ली। चन्नी के शपथ लेते ही पंजाब, हरियाणा, हिमाचल, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और हिमाचल के दलितों के चेहरे खिल गए। इससे उनमें यह उम्मीद जगी है कि अब राष्ट्रीय दल भी उनके महत्त्व को समझने लगे हैं।

चन्नी को मुख्यमंत्री बना कर कांग्रेस ने कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिंह दोनों ख़ेमों की नाखुशी को भी बहुत हद तक मैनेज कर लिया है। भले चन्नी कैप्टन विरोधी ख़ेमे के हों किंतु सिद्धू का रास्ता ब्लॉक हुआ, इससे कैप्टन खुश हुए। कैप्टन और सिद्धू दोनों ने चरणजीत सिंह चन्नी के नाम पर प्रसन्नता जतायी है। यह कांग्रेस हाई कमान की बहुत बड़ी जीत है। उसने बीजेपी के समक्ष एक चुनौती भी पेश कर दी है कि है तुम्हारी झोली में इस दाँव की काट? यद्यपि पंजाब में बीजेपी का कुछ भी दाँव पर नहीं है लेकिन यूपी, उत्तराखंड व हिमाचल में तो उसी की सरकार है। उसके पास कोई दलित चेहरा तक नहीं है। पंजाब में दलित हिंदू और सिख दोनों हैं। चन्नी पंजाब के दलित सिख समाज से आते हैं, जिन्हें रामदासिया सिख कहा जाता है। लेकिन उनके मुख्यमंत्री बनाने से हिंदू दलित भी खूब खुश है। यूँ भी पंजाब में सिख आबादी बहुसंख्यक है, इसलिए किसी हिंदू का पंजाब में मुख्यमंत्री बनना असंभव सा है। लेकिन दोनों समुदायों के रीति-रिवाजों और धार्मिक मान्यताओं में काफ़ी साम्य है इसलिए वहाँ पर समुदाय से अधिक महत्त्वपूर्ण जाति बन जाती है। अक्सर लड़ाई जट-सिख, मज़हबी सिख (ओबीसी समुदाय) और रामदासिया सिखों के बीच बंट जाती है। हिंदू भी इसी आधार पर विभाजित हो जाते हैं।

बीजेपी चुनाव में मुसलमानों को माइनस ही नहीं करती बल्कि उनके समक्ष हिंदू समुदाय की संख्या को रख देती है। ज़ाहिर है, इससे उसका पक्ष वोट की नज़र से बड़ा हो जाता है। इससे समाज में समरसता नष्ट होती है और समुदायों के बीच परस्पर द्वेष बढ़ता है। वह यह समझ नहीं पाती कि मुस्लिम समाज को माइनस कर देने से उसका वोट कम भी होता है। उसके हिस्से में सिर्फ़ 80 प्रतिशत मतदाता आते हैं, जबकि उसके विरोधियों के बीच 100 प्रतिशत मत बटते हैं। हिंदू समुदाय में असंख्य विभेद हैं, जातियाँ हैं उन्हें ज़बरिया नहीं हाँका जा सकता। इसलिए हर जाति से सत्ता के प्रति चाहत बढ़नी स्वाभाविक है।

दलित और पिछड़े भी सत्ता में बँटवारा चाहते हैं। बीजेपी ने जितने भी राज्य में अपनी सत्ता स्थापित की, उनमें से अधिकांश में सिर्फ़ एक ही जाति के मुख्यमंत्री हैं। यूपी, उत्तराखंड और हिमाचल इसके उदाहरण हैं। उत्तराखंड में तो उसने भी मुख्यमंत्री बदलने के प्रयोग किए, लेकिन तीनों बार मुख्यमंत्री आए एक ही जाति से। ऐसे में अन्य जातियों में विद्रोह स्वाभाविक है। काठ की हांडी एक ही बार चढ़ाई जा सकती है। लेकिन बीजेपी इस कड़वी सच्चाई से आँखें मूँदे है। यही कारण है कि कांग्रेस की हर चाल पर वह प्रहार अवश्य करती है। उसे लगता है, कि कांग्रेस की कोई भी सधी हुई चाल उसके सपनों की दुनिया को ध्वस्त कर सकती है।

कैप्टन अमरिंदर सिंह उम्रदराज हो चुके हैं, पूर्व पटियाला रियासत के महाराजा रहे हैं इसलिए उनकी सोच सामंती है। वे मुख्यमंत्री तो रहे लेकिन पब्लिक की दुःख-तकलीफ़ों से वे दूर रहे। इसके अलावा वे आलाकमान की हर बात काटते रहे। राहुल गांधी जब भी कोई बयान देते फ़ौरन कैप्टन मोदी के सहायक की तरह मोदी का बचाव करने को कूद पड़ते। अभी 28 अगस्त को तो उन्होंने हद कर दी। केंद्र सरकार द्वारा जलियाँवाला बाग़ के जीर्णोद्धार पर राहुल गांधी ने आपत्ति करते हुए ट्वीट किया फ़ौरन कैप्टन ने केंद्र सरकार का बचाव करते हुए ट्वीट कर दिया, कि इसमें आपत्तिजनक तो कुछ भी नहीं है। ऐसी कई बातें थीं, जिनके कारण उनकी रवानगी तय थी।

लेकिन बड़ा सवाल यह था कि उनके बाद कौन?

और इस कौन का ऐसा जवाब कांग्रेस ने दिया है कि 2022 में पंजाब पर दोबारा जीत को काफ़ी हद तक पुख़्ता कर लिया है। साथ ही उसने बीजेपी को घेर लिया है। दरअसल कांग्रेस 2022 जीतने के लिए नहीं बल्कि 2024 को जीतने की रणनीति पर काम कर रही है। बीजेपी भी इस बात को समझ रही है, इसलिए उसकी बेचैनी स्वाभाविक लगती है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। विचार व्यक्तिगत हैं।)

punjab
Congress
BJP
Dalits
Captain Amarinder Singh
Charanjit Singh Channi
cartoon click
Irfan ka cartoon
cartoon
Rahul Gandhi
sonia gandhi
Amit Shah
Narendra modi

Related Stories

भाजपा के इस्लामोफ़ोबिया ने भारत को कहां पहुंचा दिया?

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

तिरछी नज़र: सरकार जी के आठ वर्ष

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

हैदराबाद : मर्सिडीज़ गैंगरेप को क्या राजनीतिक कारणों से दबाया जा रहा है?

कार्टून क्लिक: उनकी ‘शाखा’, उनके ‘पौधे’

ग्राउंड रिपोर्टः पीएम मोदी का ‘क्योटो’, जहां कब्रिस्तान में सिसक रहीं कई फटेहाल ज़िंदगियां

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट


बाकी खबरें

  • Jharkhand
    अनिल अंशुमन
    झारखंड : ‘भाषाई अतिक्रमण’ के खिलाफ सड़कों पर उतरा जनसैलाब, मगही-भोजपुरी-अंगिका को स्थानीय भाषा का दर्जा देने का किया विरोध
    02 Feb 2022
    पिछले दिनों झारखंड सरकार के कर्मचारी चयन आयोग द्वारा प्रदेश के तृतीय और चतुर्थ श्रेणी की नौकरियों की नियुक्तियों के लिए भोजपुरी, मगही व अंगिका भाषा को धनबाद और बोकारो जिला की स्थानीय भाषा का दर्जा…
  • ukraine
    पीपल्स डिस्पैच
    युद्धोन्माद फैलाना बंद करो कि यूक्रेन बारूद के ढेर पर बैठा है
    02 Feb 2022
    मॉर्निंग स्टार के संपादक बेन चाकों लिखते हैं सैन्य अस्थिरता बेहद जोखिम भरी होती है। डोंबास में नव-नाजियों, भाड़े के लड़ाकों और बंदूक का मनोरंजन पसंद करने वाले युद्ध पर्यटकों का जमावड़ा लगा हुआ है।…
  • left candidates
    वर्षा सिंह
    उत्तराखंड चुनाव: मज़बूत विपक्ष के उद्देश्य से चुनावी रण में डटे हैं वामदल
    02 Feb 2022
    “…वामदलों ने ये चुनौती ली है कि लूट-खसोट और उन्माद की राजनीति के खिलाफ एक ध्रुव बनना चाहिए। ये ध्रुव भले ही छोटा ही क्यों न हो, लेकिन इस राजनीतिक शून्यता को खत्म करना चाहिए। इस लिहाज से वामदलों का…
  • health budget
    विकास भदौरिया
    महामारी से नहीं ली सीख, दावों के विपरीत स्वास्थ्य बजट में कटौती नज़र आ रही है
    02 Feb 2022
    कल से पूरे देश में लोकसभा में पेश हुए 2022-2023 बजट की चर्चा हो रही है। एक ओर बेरोज़गारी और गरीबी से त्रस्त देश की आम जनता की सारी उम्मीदें धराशायी हो गईं हैं, तो
  • 5 election state
    रवि शंकर दुबे
    बजट 2022: क्या मिला चुनावी राज्यों को, क्यों खुश नहीं हैं आम जन
    02 Feb 2022
    पूरा देश भारत सरकार के आम बजट पर ध्यान लगाए बैठा था, खास कर चुनावी राज्यों के लोग। लेकिन सरकार का ये बजट कल्पना मात्र से ज्यादा नहीं दिखता।
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License