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'कव्वाली यहां नहीं चलेगी'...क्यों नहीं चलेगी? क्योंकि योगी जी आने वाले हैं!
कला-संगीत और नृत्य में भी हदबंदी की जा रही है। उसे हिन्दू-मुसलमान में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ एक बार फिर हुआ है उत्तर प्रदेश में। इक़बाल और फ़ैज़ की नज़्मों के बाद अब निशाने पर आई है कव्वाली।
न्यूज़क्लिक रिपोर्ट
18 Jan 2020
manjari chaturvedi

देश में अच्छे दिन आ गए हैं और इन अच्छे दिनोंं में सभी का स्वागत नहीं है। यहां तक की कला-संगीत का भी नहीं। कला-साहित्य, गीत -संगीत और नृत्य में भी हदबंदी की जा रही है। उसे हिन्दू-मुसलमान में बांटने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसा ही कुछ एक बार फिर हुआ है उत्तर प्रदेश में। इक़बाल और फ़ैज़ की नज़्मों के बाद अब निशाने पर आई है कव्वाली।

'कव्वाली यहां नहीं चलेगी' यही कहना था उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार के अधिकारियों का। लखनऊ घराने की मशहूर कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी ने ये आरोप यूपी सरकार के अधिकारियों पर लगाया है। साथ ही मंजरी ने ये भी कहा कि वे अधिकारियों के कृत्य से बेहद आहत हैं।

क्या है पूरा मामला?

16 जनवरी, गुरुवार को राजधानी लखनऊ में सातवें काॅमनवेल्थ पार्लियामेंट्री एसोसिएशन इंडिया रीजन काॅन्फ्रेंस में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन था। इसमें लखनऊ घराने की मशहूर कथक नृत्यांगना मंजरी चतुर्वेदी परफॉर्म कर रहीं थीं तभी मंजरी के अनुसार कुछ अधिकारी स्टेज पर आ गए और तुरंत कार्यक्रम को बंद करने की बात करने लगे। मंजरी का कहना है कि पहले उन्हें लगा कि शायद कोई तकनीकी समस्या है लेकिन जब उन्होंने इसकी वजह पूछी तो उन्हें कहा गया कि 'सीएम योगी को कार्यक्रम में आना है, यहां ‘कव्वाली’ नहीं चलेगी।' अधिकारियों के इस रवैये से बेहद आहत मंजरी ने सोशल मीडिया पर अपना दर्द बयां किया है।

इस कार्यक्रम में मौजूद भातखण्डे संगीत संस्थान विश्वविद्यालय की कथक नृत्यांगना मृणालिनी ने न्यूज़क्लिक से बातचीत में कहा, 'जब कव्वाली को बंद करने को कहा गया तब मंजरी ने स्टेज से ही माइक पर पूछा कि 'कव्वाली पर ‘आपत्ति क्यों’ है। ‘ये गंगा-जमुना तहजीब की पहचान है।’ इसके बावजूद अधिकारियों ने म्यूजिक कंसोल बंद करवा दिया और निराश होकर मंजरी वहां से चली गईं। ये सिर्फ कला का ही अपमान नहीं, कलाकार और संस्कृति का भी अपमान है।'

मृणालिनी आगे कहती हैं कि मंजरी चतुर्वेदी सूफी-कथक शैली की जानी मानी हस्ती हैं। वो दो दशक से इस क्षेत्र में सक्रिय हैं, उन्होंने दुनिया के 22 मुल्कों में 300 से परफॉर्मेंस दी हैं। उन्हें प्रस्तुति के लिए खुद यूपी सरकार की ओर से आमंत्रित किया गया था, फिर उनकी कव्वाली की जगह ब्रज का कार्यक्रम करवाना अपने आप में कई सवाल खड़े करता है।

हालांकि आयोजकों ने मंजरी के आरोपों को नकार दिया है। उनका कहना है कि कार्यक्रम को बीच में संस्था की मजबूरियों के चलते रोका गया। उन्होंने धार्मिक या भाषाई संकीर्णता की वजह से कार्यक्रम में बाधा के आरोपों को खारिज कर दिया है। फिलहाल इस मुद्दे पर सीएम ऑफिस की ओर से कोई प्रतिक्रया नहीं आई है।

गौरतलब है कि हाल ही में फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ की नज़्म 'हम देखेंगे, लाज़िम है कि हम भी देखेंगे' को कुछ लोगों ने हिंदू विरोधी करार दे दिया था, आईआईटी कानपुर में जांच समिति बन गई। इससे पहले पीलीभीत में अल्लामा इक़बाल की कविता ‘लब पे आती है दुआ’ स्कूल में गाये जाने पर प्रिंसिपल को निलंबित कर दिया गया था।

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Faiz Ahmed Faiz
Commonwealth Parliamentary Association India Region Conference
IIT kanpur
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Religion Politics

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