NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
अंतरराष्ट्रीय
अमेरिका
भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थलों पर हमले को लेकर अमेरिकी रिपोर्ट में फिर उठे सवाल
दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता पर जारी अमेरिकी विदेश मंत्रालय की रिपोर्ट भारत के संदर्भ में चिंताजनक है। इसमें देश में हाल के दिनों में त्रिपुरा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों के साथ हुई लिंचिंग की घटनाओं के साथ ही भड़काऊ भाषणों को भी शामिल किया गया है।
सोनिया यादव
03 Jun 2022
Antony Blinken
Image courtesy : AP

"भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है, जहां अलग-अलग धर्मों को मानने वाले लोग रहते हैं। वहां हाल के दिनों में लोगों पर और उपासना स्थलों पर हमले के मामले बढ़े हैं।"

ये टिप्पणी अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने दुनिया भर में धार्मिक स्वतंत्रता पर अमेरिकी विदेश मंत्रालय की 2021 की रिपोर्ट जारी करते हुए भारत के संबंध में की। ब्लिंकेन ने एक बार फिर भारत में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि हाल के दिनों में भारत में धार्मिक असहिष्णुता और पूजा-स्थल को लेकर लोगों पर हुए हमले बढ़े हैं। पुलिस ने ऐसे ग़ैर-हिंदुओं को गिरफ़्तार किया जिन्होंने मीडिया या फिर सोशल मीडिया पर कुछ ऐसा लिखा जिसे हिंदुओं और हिंदुत्व के लिए 'अपमानजनक' बताया गया। इस रिपोर्ट में त्रिपुरा, राजस्थान और जम्मू-कश्मीर में मुस्लिमों के साथ हुई लिंचिंग की घटनाओं का भी ज़िक्र किया गया है।

बता दें कि यह रिपोर्ट अमेरिकी अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता आयोग (यूएससीआईआरएफ़) की जारी रिपोर्ट से अलग है। अपनी रिपोर्ट में आयोग ने सिफारिश की थी कि भारत को उन देशों की सूची में डाला जाए, जहां धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति चिंताजनक है। आयोग की ओर से बीते तीन सालों से यह सिफ़ारिश की जा रही है लेकिन भारत को अभी तक इस सूची में नहीं डाला गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार हालिया जारी इस रिपोर्ट में अमेरिका ने भारत में ऐसे कानूनों की ओर संकेत किया है जो धर्म परिवर्तन पर पाबंदियां लगाते हैं। रिपोर्ट में मुसलमानों और ईसाइयों के साथ धर्म के नाम पर भेदभाव के उदाहरण दिए गए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक भारत के नेताओं ने धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ भड़काऊ टिप्पणियां की हैं या सोशल मीडिया पर लिखा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हिंदू-राष्ट्रवादी सरकार ने ऐसे कई कानून बनाए हैं जिन्हें मानवाधिकार कार्यकर्ता और आलोचक भेदभावकारी बताते हैं।

क्या है इस रिपोर्ट में?

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इस रिपोर्ट में साल 2021 में दुनिया के अलग-अलग देशों में धार्मिक स्वतंत्रता की स्थिति का आकलन किया गया है। इस रिपोर्ट को अमेरिकी विदेश मंत्रालय के इंटरनेशनल रिलीजियस फ़्रीडम विभाग के राजदूत रशद हुसैन के नेतृत्व में तैयार किया गया है। इस अवसर पर गुरुवार, 2 जून को रशद हुसैन ने कहा कि भारत में कुछ नेता लोगों और धर्म स्थलों पर बढ़ते हमलों को नजरअंदाज ही नहीं बल्कि समर्थन भी कर रहे हैं।

इस रिपोर्ट में आरएसएस के प्रमुख मोहन भागवत के उस बयान को भी शामिल किया गया है जिसमें भागवत ने कहा था कि भारत में हिंदुओं और मुसलमानों का डीएनए एक है और इन्हें धर्म के आधार पर अलग-अलग नहीं किया जाना चाहिए। रिपोर्ट में कहा गया है कि संघ प्रमुख ने कहा था कि मुस्लिमों को इस बात से नहीं डरना चाहिए कि भारत में इस्लाम खतरे में है और गाय की हत्या के लिए किसी गैर हिंदू की हत्या कर देना हिंदू धर्म के खिलाफ है।

रिपोर्ट को जारी करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने जिन देशों का विशेष तौर पर नाम लिया उनमें सऊदी अरब, चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान शामिल हैं। ब्लिंकेन ने कहा कि चीन मुख्यतौर पर उइगुर मुसलमानों व अन्य अल्पसंख्यकों का संहार और दमन जारी रखे हुए है। अप्रैल 2017 से 10 लाख से ज्यादा उइगुर, कजाख मूलवासी और अन्यों को शिनजियांग के शिविरों में हिरासत में रखा गया है।

ब्लिंकेन ने धार्मिक स्वतंत्रता ना सिर्फ एक मूलभूत अधिकार और अमेरिकी विदेश नीति की महत्वपूर्ण प्राथमिकता बताते हुए पाकिस्तान की स्थिति पर भी बात की। उन्होंने कहा कि 2021 में पाकिस्तान में कम से कम 16 लोगों को या तो ईशनिंदा के आरोप में या तो अदालत ने मौत की सजा सुनाई या फिर उन पर ऐसे आरोप लगाए गए। इस दौरान वियतनाम और नाइजीरिया का उदाहरण भी दिया गया।

ब्लिंकेन का मानवाधिकारों को लेकर वार और विदेश मंत्री जयशंकर का पलटवार

गौरतलब है कि बीते अप्रैल में भारत और अमेरिका के वरिष्ठ मंत्रियों के बीच 2+2 वार्ता के दौरान एक प्रेस सम्मेलन में भी ब्लिंकेन ने भारत में मानवाधिकारों की स्थिति पर टिप्पणी की थी। ब्लिंकेन ने 11 अप्रैल को वॉशिंगटन में भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर की मौजूदगी में कहा था कि अमेरिका भारत में मानवाधिकारों के मोर्चे पर कुछ "चिंताजनक घटनाओं" पर नजर बनाए हुए है। हालांकि इसके कुछ ही दिन बाद 14 अप्रैल को भारतीय विदेश मंत्री ने पलटवार करते हुए एक बयान दिया था। जयशंकर ने पत्रकारों से कहा था कि लोगों को हमारे बारे में राय रखने का अधिकार है। हमें भी उतना ही अधिकार है कि उनकी राय, उसके पीछे के हित और उसे बनाने वाली लॉबियों और वोट बैंक पर अपनी राय रखें, तो इस पर जब भी कभी चर्चा होगी, मैं आपको बता सकता हूं कि हम अपनी पूरी बात रखेंगे।

इससे पहले 12 अप्रैल को न्यूयॉर्क में दो सिखों पर हुए एक कथित नस्लीय हमले के संदर्भ में जयशंकर ने कहा था, "हम भी दूसरे देशों में मानवाधिकारों की स्थिति पर राय रखते हैं और इनमें अमेरिका भी शामिल है। जब भी इस देश में मानवाधिकार का कोई मुद्दा सामने आता है, हम उसे उठाते हैं, विशेष रूप से जब वो हमारे समुदाय का हो। बल्कि, हाल ही ऐसा एक मामला सामने आया था...हमारा इस विषय पर यही रुख है।"

मालूम हो कि भारत में लगातार हो रहे धार्मिक हमलों को लेकर अमेरिका और अन्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने कई बार चिंता जाहिर की है। हरिद्वार धर्म संसद में मुसलमानों के नरसंहार की अपील और उसके बाद ऐप द्वारा मुस्लिम महिलाओं की नीलामी की कोशिश जैसी घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियां बनी। जेनोसाइड वॉच नामक संस्था के संस्थापक ग्रेगरी स्टैंटन ने जनवरी में भारत के बारे में अमेरिकी संसद को बताया था, "हम मानते हैं कि हरिद्वार में हुई बैठक का असली मकसद नरसंहार को भड़काना ही था। जेनोसाइड कन्वेंशन के तहत नरसंहार को भड़काना एक अपराध है, और भारत में भी यह गैरकानूनी है।

उन्होंने कहा था कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हिंसा के खिलाफ कभी कुछ नहीं बोला है। स्टैंटन ने कहा था, "हरिद्वार की बैठक में मुसलमानों के खिलाफ जो भाषा प्रयोग की गई, वह अल्पसंख्यक समुदाय का अमानवीयकरण करती है और ध्रुवीकरण पैदा करती है, जो नरसंहार के लिए हालात पैदा करते हैं।”

मौजूदा सरकार हिंदू-राष्ट्रवाद के दर्शन को आगे बढ़ाने का कर रही है काम

अमेरिकी विदेश मंत्रालय की इससे पहले और इस रिपोर्ट में भी यही दोहराया गया है कि साल भर में भारत सरकार ने अपनी हिंदू-राष्ट्रवादी नीतियों को और मजबूत करने के लिए कई नीतियां अपनाई हैं जो मुसलमान, ईसाई, सिख, दलित और अन्य अल्पसंख्यकों के खिलाफ काम कर रही हैं। रिपोर्टें कहती हैं कि भारत सरकार व्यवस्थागत तरीके से मौजूदा और नए कानूनों के जरिए अपने हिंदू-राष्ट्रवाद के दर्शन को आगे बढ़ाने पर काम कर रही है।

बहरहाल, इसमें कोई शक नहीं कि भारत में बीते कुछ सालों में सांप्रदायिक तनाव की कई घटनाएं सामने आई हैं, जिसमें सरकार का रवैया निराशाजनक रहा है। लेकिन इस संदर्भ में अमेरिका को भी दूध का धुला नहीं कहा जा सकता। अमेरिका में नस्लीय हिंसा और भेदभाव को लेकर 'ब्लैक लाइफ मैटर्स' आंदोलन का उदाहरण हम सबके सामने है। ऐसे में एक-दूसरे पर छींटाकशी करने से अच्छा है कि सभी देश ऐसी समस्याओं का एक साथ मिलकर हल ढूंढ़ने का प्रयास करें।

Antony Blinken
USA
India
religion
Religion and Politics
Political-socio-religious
Religious riots
US State Department report
Muslims
Indian Muslims
mob lynching
Jammu and Kashmir
Rajasthan
Tripura

Related Stories

बदायूं : मुस्लिम युवक के टॉर्चर को लेकर यूपी पुलिस पर फिर उठे सवाल

कश्मीर में हिंसा का दौर: कुछ ज़रूरी सवाल

कश्मीर में हिंसा का नया दौर, शासकीय नीति की विफलता

कटाक्ष: मोदी जी का राज और कश्मीरी पंडित

मोहन भागवत का बयान, कश्मीर में जारी हमले और आर्यन खान को क्लीनचिट

भारत में तंबाकू से जुड़ी बीमारियों से हर साल 1.3 मिलियन लोगों की मौत

भाजपा के लिए सिर्फ़ वोट बैंक है मुसलमान?... संसद भेजने से करती है परहेज़

त्रिपुरा: सीपीआई(एम) उपचुनाव की तैयारियों में लगी, भाजपा को विश्वास सीएम बदलने से नहीं होगा नुकसान

कश्मीरी पंडितों के लिए पीएम जॉब पैकेज में कोई सुरक्षित आवास, पदोन्नति नहीं 

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक


बाकी खबरें

  • up elections
    असद रिज़वी
    लखनऊ में रोज़गार, महंगाई, सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन रहे मतदाताओं के लिए बड़े मुद्दे
    24 Feb 2022
    लखनऊ में मतदाओं ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर वोट डाले। सरकारी कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन की बहाली बड़ा मुद्दा था। वहीं कोविड-19 प्रबंधन, कोविड-19 मुफ्त टीका,  मुफ्त अनाज वितरण पर लोगों की अलग-अलग…
  • M.G. Devasahayam
    सतीश भारतीय
    लोकतांत्रिक व्यवस्था में व्याप्त खामियों को उजाकर करती एम.जी देवसहायम की किताब ‘‘चुनावी लोकतंत्र‘‘
    24 Feb 2022
    ‘‘चुनावी लोकतंत्र?‘‘ किताब बताती है कि कैसे चुनावी प्रक्रियाओं की सत्यता को नष्ट करने के व्यवस्थित प्रयासों में तेजी आयी है और कैसे इस पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • Salempur
    विजय विनीत
    यूपी इलेक्शनः सलेमपुर में इस बार नहीं है मोदी लहर, मुकाबला मंडल-कमंडल के बीच होगा 
    24 Feb 2022
    देवरिया जिले की सलेमपुर सीट पर शहर और गावों के वोटर बंटे हुए नजर आ रहे हैं। कोविड के दौर में योगी सरकार के दावे अपनी जगह है, लेकिन लोगों को याद है कि ऑक्सीजन की कमी और इलाज के अभाव में न जाने कितनों…
  • Inequality
    प्रभात पटनायक
    आर्थिक असमानता: पूंजीवाद बनाम समाजवाद
    24 Feb 2022
    पूंजीवादी उत्पादन पद्धति के चलते पैदा हुई असमानता मानव इतिहास में अब तक पैदा हुई किसी भी असमानता के मुकाबले सबसे अधिक गहरी असमानता है।
  • putin
    अब्दुल रहमान
    मिन्स्क समझौते और रूस-यूक्रेन संकट में उनकी भूमिका 
    24 Feb 2022
    अति-राष्ट्रवादियों और रूसोफोब्स के दबाव में, यूक्रेन में एक के बाद एक आने वाली सरकारें डोनबास क्षेत्र में रूसी बोलने वाली बड़ी आबादी की शिकायतों को दूर करने में विफल रही हैं। इसके साथ ही, वह इस…
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License