NewsClick

NewsClick
  • English
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • हमारे लेख
  • हमारे वीडियो
search
menu

सदस्यता लें, समर्थन करें

image/svg+xml
  • सारे लेख
  • न्यूज़क्लिक लेख
  • सारे वीडियो
  • न्यूज़क्लिक वीडियो
  • राजनीति
  • अर्थव्यवस्था
  • विज्ञान
  • संस्कृति
  • भारत
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अफ्रीका
  • लैटिन अमेरिका
  • फिलिस्तीन
  • नेपाल
  • पाकिस्तान
  • श्री लंका
  • अमेरिका
  • एशिया के बाकी
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें
सब्सक्राइब करें
हमारा अनुसरण करो Facebook - Newsclick Twitter - Newsclick RSS - Newsclick
close menu
भारत
राजनीति
'आरएसएस ने भारत में विभाजन की राजनीति शुरू कर दी है'
आरएसएस ने भारत में विभाजन की राजनीति शुरू कर दी है, जिससे कार्पोरेट फासीवाद लोगों को लूटता रहे और दूसरी तरफ लोग सांप्रदायिक मुद्दों पर बंटे रहें। जिससे मंहगाई बेरोज़गारी और कार्पोरेट की लूट के खिलाफ कोई जन-आंदोलन न चल सके।
रिज़वाना तबस्सुम
01 Feb 2020
save constitution

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के शहादत दिवस पर मलदहिया से अंबेडकर पार्क, कचहरी तक जुलूस निकाला गया। इस जुलूस में वाराणसी के पूर्व सांसद राजेश मिश्रा ने नागरिकता संशोधन अधिनियम, एनपीआर व एनसीआर का विरोध करते हुए बताया कि गांधी के हत्यारों के खिलाफ मेरी लड़ाई जिंदगी के आखिरी समय तक चलती रहेगी। उन्होंने गांधी को उद्धृत करते हुए कहा कि, राष्ट्रपिता ने कहा था कि "मैं हिंसा की शिक्षा नहीं दे सकता क्योंकि मुझे इस पर विश्वास नहीं है, मैं केवल तुम्हें यह सिखा सकता हूं कि अपना सिर अपने जीवन की शर्त पर भी किसी के सामने झुकने मत देना।"

गुरुवार को वाराणसी में सीएए और एनआरसी के खिलाफ निकाले गए मार्च में लोग हाथों में तिरंगा झंडा और गले में संविधान की प्रस्तावना की तख्तियां लटकाए हुए थे। इन तख्तियों में नो एनआरसी, नो सीएए लिखा हुआ था। जुलूस में विभिन्न संगठनों के लोग शामिल थे। मार्च की शुरुआत आरएसएस पर प्रतिबंध लगाने वाले भारत के प्रथम गृहमंत्री लौह-पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा पर माल्यापर्ण कर हुई। आखिर में संविधान की प्रस्तावना पढ़ी गई और संविधान बचाने की शपथ दिलाई गई।

इस मौके पर लोगों को संबोधित करते हुए इतिहासकार डॉ. मोहम्मद आरिफ बताते हैं कि जिस तरह से 1939 में हिंदू महासभा व मुस्लिम लीग ने मिलकर सिंध में सरकार बनाई और उसी समय मुस्लिम लीग द्वारा पाकिस्तान बनाने के प्रस्ताव को सिंध असेंबली में पारित किया गया, जिसके बाद से भारत में हिंदू फासीवाद व पाकिस्तान में मुस्लिम फासीवाद व आतंकवाद सिरदर्द बना हुआ है। पुनः आरएसएस ने भारत में विभाजन की राजनीति शुरू कर दी है, जिससे कार्पोरेट फासीवाद लोगों को लूटता रहे और दूसरी तरफ लोग सांप्रदायिक मुद्दों पर बंटे रहें। जिससे मंहगाई बेरोज़गारी और कार्पोरेट की लूट के खिलाफ कोई जन-आंदोलन न चल सके। अंग्रेजी उपनिवेशवाद से माफी मांगने वाले व गठजोड़ करने वाले लोग अब नव-उदारवादी व साम्राज्यवादी ताकतों से गठजोड़ कर रहे हैं।

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मोहम्मद आरिफ़ बताते हैं कि आज भी राजे-रजवाड़े व नवाबों के परस्त लोग पाकिस्तान व भारत में हिंदू व मुस्लिम सांप्रदायिकता का ज़हर घोल रहे हैं, जो एक बेहतर दुनिया के लिए खतरा है। जो लोग संविधान को नहीं मानते थे, 52 सालों तक अपने मुख्यालय पर राष्ट्रीय ध्वज नहीं फहराया आज वे राष्ट्रवादी होने का प्रमाणपत्र बांट रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ अपने मित्रतापूर्ण अंतरविरोधों को दरकिनार कर अंबेडकरवादी व गांधीवादी साथ आ रहे हैं और एक नया नारा गढ़ रहे हैं। संविधान के वास्ते गांधी व अंबेडकर के रास्ते।

इस मार्च में अपनी बात रखते हुए पीवीसीएचआर के संयोजक लेनिन रघुवंशी कहते हैं कि हिन्दू-मुस्लिम बाइनरी हो या संघी हिन्दू राष्ट्र का कांसेप्ट हो इन दोनों को केंद्रबिंदु बनाकर डिबेट चलाना मूर्खता है। हिन्दू धर्म कोई संगठित धर्म है भी नहीं कि हिटलर की तरह मराठी ब्राह्मण अपने उत्तर भारतीय ब्राह्मणों के साथ उत्पात मचा सकते हैं। न तो विज्ञान पीछे की तरफ मुड़ा है और न ही समाज, हालांकि लोगों ने कोशिश बहुत की है। कुछ मार काट हो जाएगी लेकिन समाज पीछे की तरफ जाने से रहा।

उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा चितपावन ब्राह्मणों को ज्यादा समझदार समझना भी एक कामयाबी है ब्राह्मण-सवर्ण साम्राज्य की। सत्ता आ जाती है तो दुनिया भर के सिद्धांत घूमने लगते हैं। संघ की कामयाबी कुछ दशकों की नहीं है, न ही 1925 से है जैसा कि क्लेम करते हैं कुछ लोग। संघी वर्गों/वर्णों की संख्या इतनी नहीं है कि ये अपने बलबूते कुछ कर सकते थे।

रैली में आए हुए लोगों को देखकर यह बात आइने की तरह साफ थी कि समाज का हर तबका बेचैन, उद्वेलित होने के साथ-साथ खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। सामाजिक कार्यकर्ता श्रुति नागवंशी ने बताया कि ऐसी विषम व चिंताजनक परिस्थितियों में महात्मा गांधी का बताया रास्ता यानी सत्याग्रह और सविनय अवज्ञा आंदोलन ही एकमात्र विकल्प है। जुलूस में शामिल सुप्रसिद्ध समाजवादी व पूर्व विधान परिषद सदस्य अरविंद सिंह कहते हैं कि आज की रैली का असर पूरी समाज पर पड़ेगा और खासकर हिंदुओं के उस ऊंचे तबके तक भी पहुंचेगा, जो एनआरसी और सीएए से बेफिक्र हैं। वहीं, दूसरी तरफ गांव की दलित और पिछड़ी जातियों की महिलाओं ने शिरकत कर यह दर्शा दिया है कि वे भी चिंतित हैं।

राजनीतिक कार्यकर्ता हरीश मिश्रा ने कहा कि असम में एनआरसी की प्रक्रिया ने 19 लाख लोगों को राज्य-विहीन कर दिया। आश्चर्य की बात यह है कि हिंदू और मुसलमान की राजनीति करने वाले हिंदू फासीवादी लोग 19 लाख राज्य-विहीन लोगों में 13 लाख हिंदुओं को पाकर बेचैन हैं और इसी हताशा में नागरिकता संशोधन कानून बिना बहस के पारित कर दिया गया, जिसे संयुक्त राष्ट्र संघ ने भेदभावपूर्ण कहा है और यूरोपीय संघ में इसके खिलाफ प्रस्ताव आया है।

वर्तमान सरकार द्वारा चलाई जा रही पूरी प्रक्रिया सावरकर व जिन्ना के द्वि-राष्ट्रवाद के सपने को पूरा करने का एक प्रयास है और साथ ही पिछड़ी जातियों व दलितों से मुसलमान बने लोगों, असंतुष्ट प्रगतिशील नागरिकों, दलितों, आदिवासियों व पिछड़ों को पुनः शूद्र बनाने की और नए संदर्भों में मनुस्मृति को लागू करने की परिकल्पना है। ऐसे में विभिन्न जातियों, धर्मों, लिंगों के लोगों को एकजुट होकर सांप्रदायिक फासीवाद को व नव-उदारवादी लूट को पूर्ण रूप से समाप्त कर भारत के संविधान की प्रस्तावना को जमीन पर लागू करने वाली सरकार बनाना होगा और उसके लिए मित्रतापूर्ण राजनीतिक अंतरविरोधों को खत्म करना होगा और यही नव-जनवादी-पूंजीवादी बदलाव होगा।

RSS
Religion Politics
Religion Discrimination
Corporate fascism
Secularism
Communalism
Communal issues
Rising inflation
unemployment
corporate
Mahatma Gandhi
Martyrdom Day
Constitution of India
save constitution

Related Stories

डरावना आर्थिक संकट: न तो ख़रीदने की ताक़त, न कोई नौकरी, और उस पर बढ़ती कीमतें

सम्राट पृथ्वीराज: संघ द्वारा इतिहास के साथ खिलवाड़ की एक और कोशिश

धारा 370 को हटाना : केंद्र की रणनीति हर बार उल्टी पड़ती रहती है

उत्तर प्रदेश: "सरकार हमें नियुक्ति दे या मुक्ति दे"  इच्छामृत्यु की माँग करते हजारों बेरोजगार युवा

मोदी@8: भाजपा की 'कल्याण' और 'सेवा' की बात

कटाक्ष:  …गोडसे जी का नंबर कब आएगा!

तिरछी नज़र: ये कहां आ गए हम! यूं ही सिर फिराते फिराते

विचार: सांप्रदायिकता से संघर्ष को स्थगित रखना घातक

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक आदेश : सेक्स वर्कर्स भी सम्मान की हकदार, सेक्स वर्क भी एक पेशा

ज्ञानवापी कांड एडीएम जबलपुर की याद क्यों दिलाता है


बाकी खबरें

  • govt employee
    अनिल जैन
    निजीकरण की आंच में झुलस रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए भी सबक़ है यह किसान आंदोलन
    28 Nov 2021
    किसानों की यह जीत रेलवे, दूरसंचार, बैंक, बीमा आदि तमाम सार्वजनिक और संगठित क्षेत्र के उन कामगार संगठनों के लिए एक शानदार नज़ीर और सबक़ है, जो प्रतिरोध की भाषा तो खूब बोलते हैं लेकिन कॉरपोरेट से लड़ने…
  • poverty
    अजय कुमार
    ग़रीबी के आंकड़ों में उत्तर भारतीय राज्यों का हाल बेहाल, केरल बना मॉडल प्रदेश
    28 Nov 2021
    मल्टीडाइमेंशनल पॉवर्टी इंडेक्स के मुताबिक केरल के अलावा भारत का और कोई दूसरा राज्य नहीं है, जहां की बहुआयामी गरीबी 1% से कम हो। 
  • kisan andolan
    शंभूनाथ शुक्ल
    हड़ताल-आंदोलन की धार कुंद नहीं पड़ी
    28 Nov 2021
    एक ज़माने में मज़दूर-किसान यदि धरने पर बैठ जाते थे तो सत्ता झुकती थी। पर पिछले चार दशकों से लोग यह सब भूल चुके थे।
  • Hafte Ki Baat
    न्यूज़क्लिक टीम
    संवैधानिक मानववाद या कारपोरेट-हिन्दुत्ववाद और यूपी में 'अपराध-राज'!
    27 Nov 2021
    संविधान दिवस के मौके पर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच आरोपों-प्रत्यारोपो की खूब बौछार हुई. क्या सच है-संविधानवाद और परिवारवाद का? क्या भारत की सरकारें सचमुच संविधान के विचार और संदेश के हिसाब से…
  • crypto
    न्यूज़क्लिक टीम
    क्या Crypto पर अंकुश ज़रूरी है?
    27 Nov 2021
    मोदी सरकार क्रिप्टोकरेंसी पर अंकुश लगा रही हैI लेकिन आखिर यह क्रिप्टोकरेंसी है क्या? क्या यह देश में मुद्रा की जगह ले सकती है?
  • Load More
सब्सक्राइब करें
हमसे जुडे
हमारे बारे में
हमसे संपर्क करें

CC BY-NC-ND This work is licensed under a Creative Commons Attribution-NonCommercial-NoDerivatives 4.0 International License