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भारत
राजनीति
एक्सक्लूसिव: 534 पूर्व सांसदों ने नहीं चुकाया सरकारी बंगले का 433 लाख रु. किराया
आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 114 पूर्व सांसदों के पास एक लाख रुपये से ज्यादा का किराया बकाया है। वहीं, आधा दर्जन पूर्व सांसदों पर 10 लाख से ज्यादा का किराया बाकी है।
उमेश कुमार राय
19 Oct 2019
RTI

वर्ष 2000 से लेकर अब तक कुल 534 पूर्व सांसदों (लोकसभा व राज्यसभा) पर 433 लाख रुपये सरकारी बंगलों का किराया बकाया है। इनमें लोकसभा की पूर्व स्पीकर, पूर्व मुख्यमंत्री समेत कई नामचीन नेता शामिल हैं।

ये जानकारी भागलपुर के एक आरटीआई कार्यकर्ता अजीत सिंह के आवेदन पर मिली है। हालांकि, उनके आवेदन पर सूचना देने में करीब दो साल लग गए। अजीत सिंह ने बताया, “पहले आवेदन पर कोई जवाब ही नहीं आया। फिर मुझे केंद्रीय सूचना आयुक्त के पास जाना पड़ा। केंद्रीय सूचना आयुक्त ने केंद्रीय आवासन मंत्रालय को आदेश दिया, तब जाकर सूचना उपलब्ध कराई गई।”

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आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक, करीब 114 पूर्व सांसदों के पास एक लाख रुपये से ज्यादा का किराया बकाया है। वहीं, आधा दर्जन पूर्व सांसदों पर 10 लाख से ज्यादा का किराया बाकी है। इनमें सबसे ज्यादा किराया हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री व उप-प्रधानमंत्री दिवंगत देवीलाल पर बाकी है। उनका निधन अप्रैल 2001 में हो गया था, लेकिन उनका परिवार जुलाई 2003 तक सरकारी बंगले में था।

करीब दो साल से ज्यादा वक्त तक सरकारी बंगले में रहने का किराया 21 लाख 34 हज़ार 957 रुपये ठहरा था। दूसरे नंबर पर भाजपा के पूर्व सांसद व केंद्रीय मंत्री तथा मौजूदा भाजपा सांसद अजय निशाद के पिता दिवंगत जय नारायण प्रसाद निशाद हैं। वे मई 2014 से दिसंबर 2014 तक सरकारी बंगले में थे। उन पर 18 लाख 16 हजार 375 रुपये किराया बाकी है।

इसी तरह, कांग्रेस नेता व असम से मौजूदा राज्यसभा सांसद द्विजेंद्र नाथ शर्मा पर 10 लाख 89 हजार 399 रुपये बकाया है। वे मार्च 2009 से फरवरी 2011 तक सरकारी बंगले में थे, जबकि इस दौरान वह सांसद नहीं थे। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री व भाजपा के वरिष्ठ नेता गिरधर गमांग पर 10 लाख 55 हजार 81 रुपये का बकाया है। गिरिधर गमांग पहले कांग्रेस में थे। कुछ साल पहले ही वे भाजपा में शामिल हुए। कांग्रेस की पूर्व सांसद झांसी लक्ष्मी बोटचा पर लगभग 13 लाख रुपये बकाया है। वह 1 मई से 29 अगस्त 2014 तक सरकारी बंगले में थीं।

जिन पूर्व सांसदों पर एक लाख रुपये से ज्यादा रकम बकाया है, उनमें ए वेंकटेश नायक, एबीए गनी खान चौधरी, ए सुदर्शन, अबरार अहमद, आलोक मेहता, अनंत प्रसाद सेठी, अशोक प्रसाद, अशोक सिंह चंदेल, बालेश्वर यादव, छत्रपाल सिंह, जी वेंकटस्वामी आदि शामिल हैं। भाजपा के वरिष्ठ नेता व पूर्व सांसद शाहनवाज हुसैन मई 2014 से अगस्त 2014 तक सरकारी बंगले में थे। उन पर 1 लाख 88 हजार 583 रुपये बकाया है।

इन 534 पूर्व सांसदों में करीब 150 ऐसे हैं, जो 2014 के मई में सांसदी खत्म होने के बावजूद सरकार की तरफ से मिले बंगले में कुछ समय के लिए रहे थे, लेकिन उन्होंने उसका किराया नहीं चुकाया। इनमें बीके हादिक, एजे गंगाराम, अश्वमेध देवी, अभिनेत्री से नेता बनीं जयाप्रदा, क्रिकेटर से नेता बने मो. अजहरुद्दीन, अमरनाथ प्रधान आदि शामिल हैं। जयाप्रदा मई 2014 से अगस्त 2014 तक सरकारी बंगले में थीं। उन पर 1,68,289 रुपये बकाया है। वहीं, मो. अजहरुद्दीन मई 2014 से जुलाई 2014 तक सरकारी बंगले में रहे। सरकार का उन पर दो लाख 51 हजार रुपये बकाया है।

दिलचस्प बात ये है कि जिन नेताओ पर बंगले का किराया बकाया है, उनमें कुछ ऐसे भी हैं, जो कई अहम पदों पर रह चुके हैं। मसलन लोकसभा की पूर्व स्पीकर मीरा कुमार पर 76905 रुपये बकाया है। वह वर्ष 2014 में दो महीने तक सरकारी बंगले में थीं। मौजूदा राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पर 10,480 रुपये बकाया है। वह इससे पहले बिहार के राज्यपाल और कई बार राज्यसभा के सांसद रहे हैं। आरटीआई के तहत मिले दस्तावेज बताते हैं कि उनके ऊपर सरकारी बंगले का यह किराया एक मार्च, 2006 ले 28 अप्रैल 2006 तक का है।

president.jpgपूर्व केंद्रीय मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता यशवंत सिन्हा पर 3,84,083 रुपये बाकी हैं। वह मई 2014 से अगस्त 2014 तक सरकारी बंगले में थे। मौजूदा केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन 32179 रुपये बकाया है। वह पहली मई 2014 से 21 जून 2014 तक सरकारी बंगले में थे।
वहीं, पूर्व गवर्नर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे कल्याण सिंह पर 4,34,585 रुपये बकाया है। बिहार के मुख्यमंत्री और केंद्र में मंत्री रह चुके राजद के मुखिया लालू प्रसाद यादव पर 7,83,616 रुपये बकाया है। वह फरवरी 2014 से अगस्त 2015 तक सरकारी बंगले में थे।

नियमानुसार लोकसभा भंग होने के एक महीने के भीतर पूर्व सांसदों को सरकारी बंगला खाली कर देना होता है। अगर पूर्व सांसद बंगला खाली नहीं करते हैं, तो हाउसिंग कमेटी उन्हें नोटिस जारी करती है। इस मामले में साफ जाहिर हो रहा है कि इन पूर्व सांसदों को बंगला खाली करने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठाया गया और न ही बकाया किराये की वसूली के लिए ही कोई प्रभावी कार्रवाई की गई।
19 अगस्त की एक रिपोर्ट बताती है कि 16वीं लोकसभा भंग होने के दो महीने बीच चुकने के बावजूद करीब 200 पूर्व सांसदों ने सरकार की तरफ से मुहैया कराया गया बंगला खाली नहीं किया था। वहीं, 7 अक्टूबर की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 50 पूर्व सांसद अब भी सरकारी बंगलों में बने हुए हैं।

आरटीआई कार्यकर्ता अजीत सिंह ने कहा, “हमने आरटीआई एक्ट के अंतर्गत आवेदन कर ये भी पूछा था कि इन पूर्व सांसदों को किराया वसूली के लिए नोटिस दी गई या नहीं। साथ ही ये भी पूछा था कि कितने पूर्व सांसदों का किराया माफ किया गया, इसकी भी सूची भी दी जाए। लेकिन ये सूचनाएं नहीं दी गईं। बस, उन पूर्व सांसदों की सूची दे दी गई, जिन पर किराया बकाया है।”

इस संबंध में ज्यादा जानकारी के लिए केंद्रीय आवासन व शहरी मंत्रालय के डिप्टी डायरेक्टर (एस्टेट रेंट) को फोन किया गया, तो सवाल सुनने से पहले ही उन्होंने ये कहकर फोन काट दिया कि वे मीडिया से कोई बात नहीं कर सकते। मंत्रालय को सवालों की फेहरिस्त मेल की गई है। जवाब आने पर स्टोरी अपडेट कर दी जाएगी।

अजीत सिंह पूर्व सांसदों की इस लापरवाही को गंभीर मसला मानते हैं। उन्होंने कहा, “इनमें से कई नेता ऐसे हैं, जो कई चुनाव लड़ चुके हैं। चुनाव लड़ते वक्त इन्हें हलफनामे में लिखना होता है कि सरकार का एक पैसा भी इन पर बकाया नहीं है, लेकिन इन नेताओं ने हलफनामे में ये जिक्र नहीं किया होगा कि बंगले का किराया उन्होंने नहीं चुकाया है।”

उन्होंने आगे कहा, “आमलोग अगर सरकार को टैक्स नहीं चुकाते हैं, तो सरकार तुरंत कार्रवाई करती है, लेकिन पूर्व सांसद लाखों रुपये दबाए हुए हैं और सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सरकार को चाहिए कि सख्त कार्रवाई कर बकाया राशि वसूल करे।”

बकाया किराये को लेकर हमने कुछ पूर्व व वर्तमान सांसदों से संपर्क किया। इनमें से कुछ ने व्यस्तता जाहिर की, तो कुछ का नंबर नहीं लगा। वहीं, कुछ ने इस को लेकर अनभिज्ञता जाहिर की।

लोकसभा की पूर्व स्पीकर व कांग्रेस नेता मीरा कुमार से संपर्क किया गया, तो कॉल किसी और ने उठाया। जब हमने किराये को लेकर मीरा कुमार से बात करवाने को कहा, तो उन्होंने पूछा कि क्या बात करनी है। किराये की बात बताने पर उस शख्स ने कहा, “3 जून, 2014 को नए स्पीकर का चयन हुआ था और वो (मीरा कुमार) जुलाई तक ही (आरटीआई से मिली सूचना में बताया गया है कि जुलाई से सितंबर 2014 तक) सरकारी बंगले में थीं।” 76,905 रुपये बकाया होने के सवाल पर उस शख्स ने कहा कि इतना बकाया हो ही नहीं सकता है। जब हमने उससे नाम पूछा, तो उसने फोन काट दिया।

ओडिशा के मुख्यमंत्री रह चुके गिरधर गमांग पर 10,55,081 रुपये बकाया है। उन्होंने कहा, “वर्ष 2009 में सात महीने तक सरकारी बंगले में थे, लेकिन जब बंगला खाली किया, तो मुझे नहीं बताया गया कि किराया भी चुकाना है, वरना मैं जरूर चुका देता। अभी आपने फोन किया, तो पता चला कि मुझ पर बकाया है।”

IMG_20191018_230731.jpgजब उन्हें बताया गया कि उन पर साढ़े दस लाख रुपये बकाया है, तो वह हक्का बक्का रह गए। उन्होने पूछा, “सिर्फ 7 महीने का इतना किराया कैसे हो सकता है? हिसाब में जरूर कोई गड़बड़ी हुई होगी।” सरकार की तरफ से किराया चुकाने को लेकर कोई नोटिस मिलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि उन्हें अब तक न कोई नोटिस मिली है और न ही सरकार की तरफ से किसी ने संपर्क कर इस बारे में पूछा है।

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